चर्चित Saurabh Rajput Case में बुधवार को फैसले का दिन है। मेरठ जिला अदालत में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में आरोपी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के खिलाफ लंबे ट्रायल के बाद फैसला सुनाया जाना है। फैसला आने से पहले सौरभ राजपूत के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने मामले में अभियोजन पक्ष की दलीलों और साक्ष्यों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मामले में 126 सुनवाई हुईं और 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 

वकील ने हत्या की योजना को लेकर क्या कहा?

सौरभ राजपूत के वकील के अनुसार, अभियोजन पक्ष का मामला यह है कि हत्या अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे योजना थी। वकील ने कहा कि साहिल और मुस्कान ने मिलकर हत्या की योजना बनाई थी।

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वकील के मुताबिक सौरभ को पहले नशीली दवा देकर बेहोश किया गया और इसके बाद उसकी हत्या की गई। यह अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में रखी गई कहानी का हिस्सा है। मामले में बचाव पक्ष ने आरोपों और पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाए हैं तथा प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने की दलील भी दी है। 

22 से ज्यादा गवाहों की हुई गवाही

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 से ज्यादा गवाह पेश किए। इनमें सौरभ के परिवार के सदस्यों के अलावा अन्य गवाह और घटनाक्रम से जुड़े लोगों की गवाही शामिल रही। अदालत में पुलिस और फोरेंसिक साक्ष्यों को भी रखा गया। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि हत्या के बाद शव को नीले ड्रम में छिपाया गया था। 

वहीं बचाव पक्ष ने पूरे मामले में प्रत्यक्ष गवाह नहीं होने और पुलिस की जांच से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं। जुलाई 2026 में बचाव पक्ष की ओर से FIR और कथित घटना के समय में अंतर होने सहित अन्य दलीलें अदालत के सामने रखी गई थीं। 

वकील ने सजा को लेकर क्या कहा?

सौरभ के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विजय बहादुर ने पहले कहा था कि ऐसे मामलों में न्यूनतम सजा आजीवन कारावास और अधिकतम सजा मृत्युदंड हो सकती है और उनकी ओर से अधिकतम सजा की मांग की गई है। 

हालांकि, अदालत का फैसला आने तक यह कहना सही नहीं होगा कि किसी आरोपी को फांसी या उम्रकैद मिल ही गई है। अदालत पहले आरोपों पर दोषसिद्धि तय करती है और उसके बाद सजा के संबंध में आदेश देती है।

फैसले का इंतजार

मेरठ जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। करीब 13 महीने तक चली कार्यवाही में 126 तारीखें पड़ीं और 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज हुए। अब अदालत के आदेश से यह स्पष्ट होगा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को किस स्तर तक साबित कर पाया और दोनों आरोपियों के संबंध में अदालत का क्या निष्कर्ष है।

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