उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में यातायात नियमों के पालन और सड़क सुरक्षा (Road Safety) को लेकर पुलिस ने एक बेहद सकारात्मक और अनूठी पहल की है। अक्सर चेकिंग के दौरान पुलिस को देखते ही बिना हेलमेट वाले चालक भागने या चालान से बचने के बहाने ढूंढने लगते हैं, लेकिन बिजनौर की यातायात पुलिस (Bijnor Traffic Police) ने दंड देने के बजाय लोगों को जागरूक करने का एक नया और असरदार रास्ता अपनाया है।

​चालान की जगह समझाया जीवन का मोल

पुलिस अधीक्षक (SP Bijnor) के कुशल निर्देशन में जिले भर में सड़क सुरक्षा को लेकर एक विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। 30 सितंबर को चलाए गए इस अभियान के तहत पुलिस सड़कों पर सघन चेकिंग कर रही है, लेकिन बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों का तुरंत ई-चालान नहीं काटा जा रहा है। इसके बजाय, पुलिस अधिकारी वाहन चालकों को रोककर उन्हें समझा-बुझा रहे हैं और मौके पर ही नया हेलमेट खरीदकर पहनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पुलिस टीम वाहन चालकों को सड़क दुर्घटनाओं में हेलमेट की उपयोगिता और उनके जीवन के महत्व के बारे में विस्तार से बता रही है।

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​चालकों ने स्वेच्छा से खरीदे हेलमेट

पुलिस की इस सकारात्मक और आत्मीय कार्यशैली का सीधा असर मौके पर देखने को मिला। यातायात पुलिस द्वारा जब प्यार से सुरक्षा का पाठ पढ़ाया गया, तो कई वाहन चालकों ने अपनी लापरवाही की गलती मानी। पुलिस की इस विनम्र अपील से प्रेरित होकर वाहन चालकों ने स्वेच्छा से उसी समय मौके पर अपने लिए हेलमेट खरीदा और उसे पहनकर ही अपने गंतव्य की ओर आगे बढ़े।

​हेलमेट चालान से बचने के लिए नहीं, सुरक्षा के लिए है

इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य यातायात पुलिस की छवि को केवल 'चालान काटने वाले विभाग' तक सीमित न रखकर, लोगों के मन में यातायात नियमों के प्रति स्थायी जागरूकता विकसित करना है। प्रशासन इस अभियान के माध्यम से यह संदेश दे रहा है कि हेलमेट केवल चालान के जुर्माने से बचने का साधन नहीं है, बल्कि यह अनमोल जीवन का सुरक्षा कवच है।

​बिजनौर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि सड़क पर सुरक्षित यात्रा के लिए हमेशा यातायात नियमों का पालन करें। दोपहिया वाहन चलाते समय स्वयं भी आईएसआई (ISI) मार्क वाला हेलमेट पहनें और पीछे बैठने वाले व्यक्ति (पिलियन राइडर) को भी अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनाएं।

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