मेरठ (Khabreelal): श्राद्ध पक्ष के पावन अवसर पर पितरों की शांति और कल्याण के लिए आयोजित Shrimad Bhagwat Katha का गुरुवार (1 अक्टूबर) को विश्राम हो गया। वेदांत सत्संग समिति की ओर से यह सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित सुमित्रा सत्संग भवन के प्रांगण में आयोजित किया जा रहा था। कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और सभी ने भक्तिभाव से व्यास पीठ का आशीर्वाद लिया।

श्रीकृष्ण की लीलाओं के चार प्रमुख केंद्र समापन के अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के गूढ़ अर्थ समझाए। उन्होंने बताया कि भगवान की लीलाओं के मुख्य रूप से चार स्थान हैं। इनमें मथुरा में उनका जन्म हुआ, गोकुल में उन्होंने माखन चोरी की लीला की, वृंदावन में माधुर्य प्रेम का संदेश दिया और द्वारका में जगत को ज्ञान व तत्वोपदेश दिया। कथा श्रवण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि भगवान की लीलाएं हमेशा हमारे अंतर्मन में बसी रहें।

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मन मथुरा है और हृदय वृंदावन स्वामी अनंतानंद सरस्वती ने इन चारों स्थानों की तुलना मनुष्य के शरीर और अंतःकरण से की। उन्होंने प्रवचन में कहा कि मनुष्य का मन ही 'मथुरा' है और हमारी इंद्रियां 'गोकुल' के समान हैं। इसी तरह इंसान के हृदय को 'वृंदावन' और उसकी बुद्धि को 'द्वारका' समझना चाहिए।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मनुष्य को अपने मन में अहंकार रूपी कंस को पनपने नहीं देना चाहिए। अहंकार को मिटाने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति अपनी सभी इंद्रियों को भगवान की सेवा में समर्पित कर दे और अपने हृदय में ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम जगाए। जब ऐसा होता है, तो भगवान स्वयं ज्ञान के रूप में मनुष्य की बुद्धि (द्वारका) में विराजमान हो जाते हैं।

अंतःकरण की शुद्धि से होता है पितरों का कल्याण कथावाचक ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति अपने भीतर निरंतर ईश्वर की लीलाओं का स्मरण करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं। यही आध्यात्मिक मार्ग आत्मा के साथ-साथ पूर्वजों (पितरों) के परम कल्याण का भी साधन बनता है।

व्यास पूजन के साथ हुआ समापन कथा विश्राम के अवसर पर मुख्य रूप से श्रीमती अनुराधा माहेश्वरी ने पूरे विधि-विधान के साथ व्यास पूजन संपन्न किया। इस धार्मिक आयोजन में ऋचा अग्रवाल, राजीव संगारी, वीरेंद्र सिंह, एस.वी. सिंह और हिमांशु त्यागी सहित कई अन्य गणमान्य लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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