उत्तर प्रदेश—देश का वह राज्य जो दिल्ली की सत्ता का रास्ता तय करता है, आज एक अभूतपूर्व और चौंकाने वाले आंकड़े के मुहाने पर खड़ा है। वोट की चोट से सरकारें बनाने और गिराने वाली यूपी की जनता के लिए एक बड़ी खबर है। हो सकता है कि अगली बार जब आप वोट डालने जाएं, तो आपका नाम लिस्ट में मिले ही नहीं।
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ऐसा हम नहीं, बल्कि भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के ताजा आंकड़े कह रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने 6 जनवरी को बहुप्रतीक्षित ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) जारी कर दी है। और इस सूची ने सियासी गलियारों से लेकर आम जनता तक हड़कंप मचा दिया है।
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एक झटके में प्रदेश की मतदाता सूची से 2 करोड़ 88 लाख 74 हजार 067 (2.89 करोड़) नाम हटा दिए गए हैं। यह संख्या ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों की कुल आबादी से भी ज्यादा है। यह कटौती इतनी बड़ी है कि इसे यूपी के चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा 'वोटर करेक्शन' कहा जा रहा है।
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आखिर 15 करोड़ मतदाताओं वाले राज्य में रातों-रात करीब 19 फीसदी मतदाता कैसे 'गायब' हो गए? राजधानी लखनऊ में 30 फीसदी लोगों के नाम क्यों कटे? और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दर्जनों बीएलओ (BLO) को अपनी जान क्यों गंवानी पड़ी? 'ख़बरीलाल' की इस मेगा रिपोर्ट में हम इन सभी सवालों की गहराई में जाएंगे।
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आंकड़ों का महा-विस्फोट: 15 करोड़ से 12.5 करोड़ का सफर

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राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो तस्वीर बेहद स्पष्ट लेकिन डराने वाली है। 22 साल बाद हुई इस 'विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया ने वोटर लिस्ट का पूरा गणित बदल दिया है।
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क्या कहते हैं आंकड़े?

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    27 अक्टूबर 2025 की स्थिति: पुनरीक्षण से पहले उत्तर प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार 092 थी।
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  • \r\n
    6 जनवरी 2026 की स्थिति: SIR पूरा होने के बाद जारी ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 025 रह गई है।
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  • \r\n
  • \r\n
    कुल कटौती: सीधे तौर पर 2,88,74,067 (2.89 करोड़) नाम काटे गए हैं।
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  • \r\n
    प्रतिशत में गिरावट: कुल मतदाता आधार में 18.70% की कमी आई है।
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आखिर क्यों कटे इतने नाम? (आयोग का तर्क)

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चुनाव आयोग ने अपनी सफाई में कहा है कि यह कटौती मनमानी नहीं, बल्कि नियमों के तहत हुई है। घर-घर जाकर किए गए सत्यापन (Door-to-Door Verification) में 5 प्रमुख कारण सामने आए:
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  1. \r\n
    शिफ्टेड वोटर (Shifted Voters - 8.40%): सबसे बड़ी संख्या उन लोगों की है जो अपना घर छोड़कर कहीं और बस गए हैं। करीब 1 करोड़ 29 लाख 77 हजार 427 लोग ऐसे मिले जो अपने पुराने पते पर नहीं रहते थे, लेकिन वोट वहीं डाल रहे थे।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    अनुपस्थित वोटर (Absentee - 5.15%): करीब 79 लाख 52 हजार 190 मतदाता सत्यापन के दौरान अपने पते पर मौजूद ही नहीं मिले। ये वो लोग हो सकते हैं जो रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में चले गए हैं।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    मृतक मतदाता (Deceased - 2.99%): एक बड़ी विसंगति यह थी कि लाखों लोग दुनिया छोड़ चुके थे, लेकिन सरकारी कागजों में वे 'जिंदा' थे और वोट डाल रहे थे। ऐसे 46 लाख 23 हजार 796 मृतकों के नाम हटाए गए हैं।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    डुप्लिकेट वोटर (Duplicate - 1.65%): सॉफ्टवेयर की मदद से 25 लाख 47 हजार 207 ऐसे लोग पकड़े गए जिनका नाम एक से ज्यादा जगहों पर या दो बार दर्ज था।
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  8. \r\n
  9. \r\n
    अन्य कारण (.50%): करीब 7 लाख 73 हजार 402 नाम अन्य तकनीकी वजहों से हटाए गए।
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  10. \r\n
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 वीआईपी जिलों पर सबसे बड़ी मार: लखनऊ और वाराणसी का हाल

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आमतौर पर माना जाता है कि ग्रामीण इलाकों में डेटा अपडेट नहीं होता, लेकिन इस बार की रिपोर्ट ने शहरों की पोल खोल दी है। सबसे ज्यादा फर्जी या अनुपस्थित वोटर हाई-प्रोफाइल शहरों में मिले हैं।
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लखनऊ: राजधानी में हर तीसरा वोटर लिस्ट से बाहर

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सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का है।
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    कटौती: यहाँ 30.04% मतदाताओं के नाम लिस्ट से उड़ा दिए गए हैं।
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  • \r\n
    संख्या: करीब 12,00,138 (12 लाख) नाम कटे हैं।
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  • \r\n
    वर्तमान स्थिति: अब लखनऊ में केवल 27,94,397 वोटर बचे हैं।
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    वजह: अधिकारियों का कहना है कि लखनऊ में बड़ी संख्या में छात्र और सरकारी कर्मचारी आते-जाते रहते हैं, जो किराये के मकान बदलते हैं लेकिन वोटर लिस्ट अपडेट नहीं कराते।
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गाजियाबाद और नोएडा: एनसीआर का हाल

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दिल्ली से सटे इन जिलों में 'फ्लोटिंग पॉपुलेशन' (Floating Population) सबसे ज्यादा है।
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    गाजियाबाद: यहाँ 28.8% यानी करीब 8.18 लाख नाम कटे हैं।
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    गौतमबुद्ध नगर (नोएडा): हाई-टेक सिटी में 15.14% (4 लाख से अधिक) वोटरों की छंटनी हुई है।
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वाराणसी और अन्य महानगर

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    वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में 18.18% (5.73 लाख) नाम हटाए गए हैं।
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  • \r\n
    कानपुर: औद्योगिक शहर में 25.50% (9 लाख) की बड़ी कटौती हुई है।
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  • \r\n
    मेरठ: पश्चिमी यूपी के इस केंद्र में 24.65% (6.65 लाख) मतदाता कम हुए हैं।
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    आगरा: यहाँ 23.25% (8.36 लाख) नाम कटे हैं।
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सबसे सुरक्षित जिला: महोबा

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बुंदेलखंड के महोबा जिले में सबसे कम छेड़छाड़ हुई है। यहाँ केवल 9.95% (95 हजार) मतदाताओं के नाम कटे हैं, जो प्रदेश में सबसे कम है।
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'खूनी' साबित हुई वोटर लिस्ट? बीएलओ की मौत और सियासी संग्राम

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इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने वाले जमीनी कार्यकर्ता यानी बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) के लिए यह समय किसी बुरे सपने से कम नहीं था। 4 नवंबर 2025 से शुरू हुए इस अभियान के दौरान कई दुखद खबरें सामने आईं।
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BLO पर जानलेवा दबाव

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प्राथमिक शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और रोजगार सेवकों को बीएलओ की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्हें बहुत कम समय में घर-घर जाकर डेटा वेरिफाई करना था।
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    आत्महत्या और हार्ट अटैक: काम के अत्यधिक दबाव, अधिकारियों की फटकार और ठंड के मौसम में भागदौड़ के चलते प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कई बीएलओ की हार्ट अटैक से मौत की खबरें आईं। कुछ रिपोर्ट्स में आत्महत्या के दावे भी किए गए।
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  • \r\n
    आरोप: शिक्षक संघों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने अमानवीय तरीके से काम कराया। छुट्टी के दिनों में भी काम लिया गया और टारगेट पूरा न होने पर वेतन रोकने की धमकी दी गई।
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विपक्ष का आक्रामक रुख

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इस मुद्दे ने तूल पकड़ा और सियासी रंग ले लिया।
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    सपा का हमला: पूर्व मुख्यमंत्री अखilesh यादव ने बीएलओ की मौतों पर योगी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वोटर लिस्ट से विशेष समुदाय और वर्ग के लोगों का नाम हटवाना चाहती है।
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  • \r\n
    बसपा की मांग: मायावती ने भी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
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  • \r\n
    आयोग का यू-टर्न: विपक्ष और कर्मचारी संगठनों के भारी दबाव के बाद चुनाव आयोग को अपनी समयसीमा बदलनी पड़ी। पहले डेडलाइन 4 दिसंबर थी, जिसे बढ़ाकर 11 दिसंबर और अंत में 26 दिसंबर 2025 किया गया। यही कारण है कि फाइनल ड्राफ्ट 6 जनवरी 2026 को आ सका।
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22 साल बाद क्यों जागी नींद? (SIR की इनसाइड स्टोरी)

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आखिर 2003 के बाद अचानक 2026 में इतना बड़ा अभियान (SIR) क्यों चलाना पड़ा? इसके पीछे एक बड़ी सियासी कहानी है।
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राहुल गांधी का 'वोट चोरी' मुद्दा

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बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर 'वोट चोरी' और वोटर लिस्ट में धांधली का मुद्दा उठाया था। उन्होंने दावा किया था कि सॉफ्टवेयर और प्रशासन की मिलीभगत से वंचित वर्गों के वोट काटे जा रहे हैं।
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आयोग की सफाई

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भारत निर्वाचन आयोग ने विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों में 'विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण' (SIR) का आदेश दिया।
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  • \r\n
    अंतर: सामान्य सालों में 'संक्षिप्त पुनरीक्षण' (Summary Revision) होता है, जिसमें लोग खुद फॉर्म भरकर देते हैं। लेकिन SIR में बीएलओ खुद हर घर जाते हैं और पुराने रिकॉर्ड का मिलान करते हैं। यूपी में यह प्रक्रिया 22 साल बाद अपनाई गई, इसलिए अशुद्धियों का अंबार (Backlog) बहुत ज्यादा था।
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74 सालों का सफर - 3 करोड़ से 12 करोड़

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उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट का इतिहास भी दिलचस्प रहा है।
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  • \r\n
    1951: आजादी के बाद पहली बार जब यूपी में विधानसभा चुनाव हुए, तब कुल मतदाता महज 3.17 करोड़ थे।
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  • \r\n
    2026: आज तमाम छंटनी के बाद भी यह संख्या 12.55 करोड़ है।
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  • \r\n
    निष्कर्ष: 74 सालों में मतदाताओं की संख्या 4 गुना बढ़ी है। यह लोकतंत्र के विस्तार और बढ़ती आबादी का संकेत है।
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अलर्ट! आपका नाम भी कट सकता है (चेक करने की गाइड)

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2.89 करोड़ एक बहुत बड़ी संख्या है। हो सकता है कि बीएलओ की गलती या आपके घर पर न मिलने के कारण आपका नाम भी इस लिस्ट में शामिल हो गया हो। इसे चेक करना अब आपकी जिम्मेदारी है।
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अपना नाम चेक करने के 3 आसान तरीके:

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    वेबसाइट के जरिए:
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    • \r\n
      भारत निर्वाचन आयोग की साइट: voters.eci.gov.in पर जाएं।
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    • \r\n
      यूपी सीईओ की साइट: ceouttarpradesh.nic.in पर जाएं।
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    • \r\n
      वहां 'Search in Electoral Roll' विकल्प चुनें और अपना नाम/EPIC नंबर डालकर चेक करें।
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    • \r\n
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  2. \r\n
  3. \r\n
    मोबाइल ऐप:
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    • \r\n
      प्ले स्टोर से 'Voter Helpline App' डाउनलोड करें।
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    • \r\n
    • \r\n
      उसमें अपना वोटर आईडी नंबर स्कैन करें या टाइप करें।
      \r\n
    • \r\n
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  4. \r\n
  5. \r\n
    ऑफलाइन तरीका:
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      \r\n
    • \r\n
      अपने क्षेत्र के बीएलओ (BLO) के पास जाएं। उनके पास 6 जनवरी को जारी हुई ड्राफ्ट लिस्ट की हार्ड कॉपी मौजूद है।
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    • \r\n
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  6. \r\n
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नाम नहीं मिला? तो घबराएं नहीं, अभी बाकी है मौका

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अगर लिस्ट में आपका नाम नहीं है, तो पैनिक होने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने गलतियों को सुधारने के लिए एक खिड़की (Window) खोली है।
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महत्वपूर्ण तारीखें (Important Dates)

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  • \r\n
    दावे और आपत्तियां शुरू: 6 जनवरी 2026
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  • \r\n
  • \r\n
    अंतिम तारीख: 6 फरवरी 2026
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  • \r\n
  • \r\n
    फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशन: इसके बाद आपत्तियों का निस्तारण कर अंतिम सूची जारी होगी।
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  • \r\n
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दोबारा नाम जुड़वाने का तरीका (Step-by-Step)

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    \r\n
  1. \r\n
    नाम जोड़ने के लिए (Form-6): अगर आपका नाम कट गया है या आप नए वोटर हैं, तो फॉर्म-6 भरें।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    नाम हटाने के लिए (Form-7): अगर आपके घर के किसी मृतक सदस्य का नाम अभी भी लिस्ट में है, तो फॉर्म-7 भरकर उसे हटवाएं।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    सुधार के लिए (Form-8): अगर नाम, पते या उम्र में कोई गलती है, तो फॉर्म-8 भरें।
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  6. \r\n
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आवेदन कहां करें?

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    \r\n
  • \r\n
    ऑनलाइन: https://sec.up.nic.in/OnlineVoters/ या वोटर हेल्पलाइन ऐप पर।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ऑफलाइन: अपने बीएलओ, तहसील स्थित मतदाता पंजीकरण केंद्र (VRC) पर।
    \r\n
  • \r\n
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सतर्क रहें, सशक्त बनें

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लोकतंत्र में 'एक वोट' की कीमत सरकारें बदल सकती है। वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ नामों का कटना प्रशासन की सख्ती दिखाता है, लेकिन इसमें कई वाजिब (Genuine) वोटर्स के नाम कटने की भी आशंका है।
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ख़बरीलाल की अपील: प्रशासन की गलती या तकनीकी खामी का शिकार न बनें। आज ही अपना नाम चेक करें। अगर आप किरायेदार हैं या हाल ही में शिफ्ट हुए हैं, तो विशेष सतर्कता बरतें। 6 फरवरी तक का समय आपके पास है। याद रखें, "जागरूक मतदाता ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान है।"
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(स्रोत: मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय उत्तर प्रदेश, भारत निर्वाचन आयोग प्रेस विज्ञप्ति, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स)
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