मेरठ: दीपावली के त्योहार से पहले ही एनसीआर (NCR) के शहरों की हवा 'जहरीली' होने लगी है। शनिवार को मेरठ के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ने खतरनाक स्तर की ओर कदम बढ़ाते हुए 273 का आंकड़ा छू लिया। इस बढ़े हुए प्रदूषण स्तर के साथ, मेरठ देश का छठा सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। हवा की गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में पहुंचने से लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन महसूस होने लगी है।READ ALSO:-अपराध पर लगाम, शांति का पैगाम: नूरपुर पुलिस ने सराफा बाजार में किया पैदल गश्त, व्यापारियों को दिया सुरक्षा का भरोसा
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NCR में गाजियाबाद टॉप पर
\r\n\r\nप्रदूषण का कहर सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं है। एनसीआर के लगभग सभी शहर लाल निशान के करीब हैं। शनिवार को गाजियाबाद 324 AQI के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। वहीं, बागपत (286), मुजफ्फरनगर (283), हापुड़ और नोएडा का AQI भी 300 के करीब दर्ज किया गया, जो चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
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मेरठ में जयभीम नगर 'गैस चैंबर'
\r\n\r\nशहर के आंतरिक इलाकों की बात करें तो जयभीम नगर सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा, जहां AQI 'बहुत खराब' श्रेणी में 312 पर पहुंच गया। शहर के अन्य प्रमुख स्थानों का हाल भी बेहाल रहा:
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- \r\n दिल्ली रोड: 281\r\n \r\n
- \r\n बेगमपुल: 275\r\n \r\n
- \r\n पल्लवपुरम: 267\r\n \r\n
- \r\n गंगानगर: 240\r\n \r\n
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'ग्रेप' बेअसर, धूल और धुआं जारी
\r\n\r\nप्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू होने के बावजूद, जमीन पर इसका असर नहीं दिख रहा है। प्रदूषण घटने की बजाय लगातार बढ़ रहा है। सड़कों पर खुले में निर्माण कार्य बिना कवर किए जारी हैं, जिससे धूल उड़ रही है। टूटी सड़कों पर उड़ती धूल और धुआं छोड़ते बेलगाम वाहन हवा को और जहरीला बना रहे हैं।
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मौसम भी नहीं दे रहा राहत
\r\n\r\nमौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही ने बताया कि शनिवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 18.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि फिलहाल मौसम ऐसा ही बना रहेगा, हवा की गति कम होने से प्रदूषक तत्व वायुमंडल में नीचे ही जमे रहेंगे, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है।
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डॉक्टर की सलाह: मास्क पहनें
\r\n\r\nबढ़ते प्रदूषण को देखते हुए प्रदूषण विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है। लोगों को सलाह दी गई है कि बहुत आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलें और मास्क का उपयोग करें। खास तौर पर बच्चे, बुजुर्ग और सांस संबंधी रोगों (अस्थमा आदि) के मरीजों को प्रदूषण वाले इलाकों में जाने से पूरी तरह बचना चाहिए।
Sabse pehle comment karne wale banein.