खबरीलाल डेस्क रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) जिले से एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के पॉश इलाके इंदिरापुरम (Indirapuram) के कनावनी गांव में गुरुवार दोपहर अचानक भीषण आग लग गई। आग ने देखते ही देखते इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि वहां मौजूद करीब 200 झुग्गी-झोपड़ियां पूरी तरह से जलकर खाक हो गईं। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया, जिसे 10 किलोमीटर दूर से भी साफ तौर पर देखा जा सकता था।READ ALSO:-बिजनौर में खौफनाक स्टंट पर पुलिस का चाबुक: बिना अनुमति सजाया अखाड़ा, गर्दन पर फोड़ा नारियल; 12 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज
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इस अग्निकांड ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। झुग्गियों में रखे घरेलू गैस सिलेंडरों (LPG Cylinders) के एक के बाद एक फटने से धमाकों की गूंज से आसपास की ऊंची इमारतें भी दहल उठीं। मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल है। बेबस लोग अपनी आंखों के सामने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी और आशियाने को राख में तब्दील होते हुए देखने को मजबूर हैं।
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कैसे भड़की यह विनाशकारी आग? चश्मदीदों की जुबानी

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दोपहर का वक्त था और झुग्गियों में रहने वाले ज्यादातर लोग या तो अपने काम पर गए हुए थे या फिर महिलाएं दोपहर का खाना बनाने की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान अचानक यह हादसा हो गया।
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घटना के प्रत्यक्षदर्शी (Eyewitness) आशीष गुप्ता ने खबरीलाल को बताया कि यह आग एक छोटी सी चिंगारी से शुरू हुई थी। आशीष के मुताबिक, "दोपहर के समय कुछ झुग्गियों में लोग खाना बना रहे थे। तेज हवाओं के कारण चूल्हे की एक चिंगारी उड़कर पास ही बंधी एक तिरपाल (प्लास्टिक की छत) पर जा गिरी। तिरपाल ने तुरंत आग पकड़ ली। इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते या पानी डालकर आग बुझा पाते, लपटों ने भयंकर रूप ले लिया और पास ही स्थित एक पन्नी (प्लास्टिक) और कबाड़ के विशाल गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया।"
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कबाड़ के गोदाम में अत्यधिक ज्वलनशील प्लास्टिक, गत्ता और पन्नियां भरी हुई थीं, जिसने आग के लिए बारूद का काम किया और कुछ ही मिनटों में आग ने 200 से अधिक झुग्गियों को अपने आगोश में ले लिया।
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आग की लपटें और धुएं का गुबार देखकर इलाके में दहशत का माहौल है। आसपास की बिल्डिंग को खाली कराया जा रहा है।

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सिलेंडरों के धमाकों ने बढ़ाई दहशत, जान बचाकर भागे लोग

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आग का मंजर तब और भी ज्यादा खौफनाक हो गया जब झोपड़ियों के अंदर रखे छोटे और बड़े रसोई गैस सिलेंडरों ने आग पकड़ ली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लगातार कई सिलेंडरों में तेज धमाके हुए। इन धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की सोसाइटी और बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोग भी दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए।
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झुग्गियों में रहने वाले आग बुझते ही अपना बचा हुआ सामान ढूंढने पहुंचे।

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हादसे के वक्त जो लोग झुग्गियों में मौजूद थे, उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए भागना शुरू कर दिया। कई लोग अपनी जान हथेली पर रखकर आग के बीच से अपने घर का बचा-खुचा सामान और भरे हुए गैस सिलेंडर लेकर भागते नजर आए, ताकि और ज्यादा धमाके न हों। आसमान में 10 किलोमीटर दूर तक फैले काले धुएं ने नोएडा और दिल्ली तक के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
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आसपास की बहुमंजिला इमारतों को कराया गया खाली

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कनावनी गांव का यह इलाका इंदिरापुरम की कई बड़ी और पॉश रेजिडेंशियल सोसाइटीज के बिल्कुल करीब सटा हुआ है। आग की लपटें इतनी ऊंची उठ रही थीं और सिलेंडरों के फटने से उड़ने वाले मलबे का दायरा इतना बड़ा था कि आसपास की पक्की और ऊंची इमारतों को भी खतरा पैदा हो गया।
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स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए एहतियातन पास की इमारतों को खाली कराना शुरू कर दिया। लोगों से अपील की गई कि वे खिड़कियों और बालकनी से दूर रहें और धुएं से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल करें। पूरे इलाके की बिजली सप्लाई को भी एहतियात के तौर पर तुरंत काट दिया गया।
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22 दमकल गाड़ियां मौके पर, नोएडा से भी बुलाई गई मदद

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आग की भयावहता की सूचना मिलते ही गाजियाबाद फायर ब्रिगेड (Ghaziabad Fire Brigade) महकमे में हड़कंप मच गया। शुरुआत में स्थानीय फायर स्टेशनों से गाड़ियां भेजी गईं, लेकिन आग का दायरा बहुत बड़ा होने के कारण वे नाकाफी साबित हुईं।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) के निर्देश पर पूरे जिले से दमकल की गाड़ियां मौके पर रवाना कर दी गईं। आग बुझाने के इस विशाल अभियान में फिलहाल फायर ब्रिगेड की 22 से अधिक गाड़ियां जुटी हुई हैं। प्लास्टिक और कबाड़ की आग होने के कारण दमकल कर्मियों को इसे बुझाने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पानी डालने के बावजूद पन्नियों के ढेर के नीचे से आग बार-बार सुलग रही है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने गाजियाबाद की सीमाओं से सटे नोएडा (Noida Fire Station) से भी दमकल की अतिरिक्त गाड़ियां और फायर टेंडर मौके पर बुला लिए हैं।
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डीएम रविंद्र कुमार का बयान और प्रशासनिक मुस्तैदी

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इस भीषण अग्निकांड पर गाजियाबाद जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। गाजियाबाद के जिलाधिकारी (DM) रविंद्र कुमार भी घटनाक्रम पर सीधे नजर बनाए हुए हैं।
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डीएम रविंद्र कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, "जिस इलाके में आग लगी है, वहां मुख्य रूप से कबाड़ (Scrap) का काम होता था। यहां कबाड़ बीनने वाले, उसे छांटने वाले और प्लास्टिक रीसाइक्लिंग का काम करने वाले सैकड़ों गरीब मजदूर और उनके परिवार झुग्गियां बनाकर रहते थे। ज्वलनशील पदार्थ भारी मात्रा में होने के कारण आग तेजी से फैली है।"
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जिलाधिकारी ने आगे बताया कि, "प्रशासन की पहली प्राथमिकता आग पर पूरी तरह से काबू पाना और लोगों की जान बचाना है। फिलहाल घटना में किसी के हताहत (मौत) होने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। किसी भी तरह की मेडिकल इमरजेंसी या अनहोनी से निपटने के लिए घटनास्थल पर भारी संख्या में एंबुलेंस तैनात कर दी गई हैं। इसके अलावा आसपास के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट मोड (Alert Mode) पर रखा गया है ताकि किसी भी घायल को तुरंत इलाज मुहैया कराया जा सके।"
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एक दिन पहले ही लखनऊ में भी हुआ था ऐसा दर्दनाक हादसा

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गर्मियों की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश में झुग्गी-झोपड़ियों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। यह हादसा ऐसे वक्त में हुआ है, जब ठीक एक दिन पहले (बुधवार को) राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके विकासनगर में भी ऐसा ही एक बेहद दर्दनाक अग्निकांड हुआ था।
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लखनऊ के विकासनगर में भी झुग्गी-झोपड़ियों में लगी भीषण आग में 250 झोपड़ियां पूरी तरह से जलकर राख हो गई थीं और उस दर्दनाक हादसे में दो सगी मासूम बहनों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। लखनऊ की घटना में भी 30 से ज्यादा गैस सिलेंडर फटे थे। लगातार दो दिन में प्रदेश के दो बड़े शहरों (लखनऊ और गाजियाबाद) में हुए इन भीषण अग्निकांडों ने मलिन बस्तियों की सुरक्षा, वहां अवैध रूप से चलने वाले कबाड़ के गोदामों और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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अब आगे क्या? बेघर हुए परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

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गाजियाबाद के कनावनी गांव में लगी इस आग ने 200 से अधिक गरीब परिवारों को खुले आसमान के नीचे ला खड़ा किया है। उनका घर, कपड़े, बर्तन, राशन और बच्चों की किताबें सब कुछ इस आग की भेंट चढ़ चुका है।
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अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन बेघर हुए सैकड़ों लोगों के लिए फौरी तौर पर राहत शिविर (Relief Camp), भोजन और पीने के पानी की व्यवस्था करने की है। पुलिस इस मामले की भी जांच करेगी कि क्या कबाड़ का यह गोदाम अवैध रूप से चलाया जा रहा था और क्या यहां सुरक्षा के कोई मानक अपनाए गए थे या नहीं। फिलहाल मौके पर आग को पूरी तरह से बुझाने (Cooling Operation) का काम तेजी से जारी है। खबरीलाल की टीम इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए है, किसी भी बड़े अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
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