गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में प्रेम विवाह (Love Marriage) का एक ऐसा खौफनाक अंजाम सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। समाज और मजहब की बंदिशों को दरकिनार कर जिस युवक ने अपनी प्रेमिका का हाथ थामा था, उसी प्रेमिका के परिजनों ने उसे मौत की नींद सुला दिया। टीला मोड़ थाना क्षेत्र के फरुखनगर गांव में हुई इस वारदात ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि झूठी शान (Honor Killing) के नाम पर आज भी इंसानियत का कत्ल किया जा रहा है।READ ALSO:-यूपी में कुदरत का कहर: 40 जिलों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से मची तबाही, 15 हजार किसानों की खून-पसीने की कमाई खाक!
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मृतक की पहचान लोनी के गीतांजलि विहार निवासी 32 वर्षीय नितिन राठी के रूप में हुई है, जो पेशे से एक प्राइवेट कॉलेज में टीचर थे। नितिन का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने एक मुस्लिम लड़की से प्यार किया और उसे अपना जीवनसाथी बनाया।
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प्यार, इकरार और बगावत: कॉलेज की मुस्कान से शुरू हुई थी कहानी

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इस खौफनाक वारदात की जड़ें आज से कुछ साल पीछे जाती हैं। नितिन राठी एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ाते थे। उनके पढ़ाने के अंदाज और सौम्य स्वभाव के कारण वे छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे। इसी कॉलेज में उनकी मुलाकात मुस्कान नाम की एक छात्रा से हुई, जो उस समय बी.एड (B.Ed) की पढ़ाई कर रही थी।
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शुरुआत में दोनों के बीच एक सामान्य बातचीत और दोस्ती हुई। पढ़ाई-लिखाई के बीच होने वाली यह बातचीत धीरे-धीरे मुलाकातों में बदल गई और दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया। लेकिन इस प्रेम कहानी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनका अलग-अलग धर्म का होना था।
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परिवार की नामंजूरी और आर्य समाज मंदिर में फेरे जब नितिन और मुस्कान ने अपने-अपने परिवारों के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, तो वही हुआ जिसका डर था। अलग-अलग मजहब के होने के कारण दोनों के परिवार वालों ने इस रिश्ते को सिरे से खारिज कर दिया। लेकिन दोनों ने एक साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं। करीब एक साल पहले, अपने परिवारों की मर्जी के खिलाफ जाकर, नितिन ने मुस्कान के साथ आर्य समाज मंदिर में पूरे विधि-विधान से प्रेम विवाह कर लिया। यह शादी बेहद सादगी से हुई थी, जिसमें दोनों तरफ से कोई भी पारिवारिक सदस्य शामिल नहीं हुआ था। शादी के बाद दोनों लोनी के गीतांजलि विहार में अपनी नई दुनिया बसाकर खुशी-खुशी रहने लगे थे।
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विवाद की चिंगारी: एक छोटी सी बहस और मायके की राह

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शादी के एक साल तक सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन 28 मार्च की सुबह पति-पत्नी के बीच एक ऐसी छोटी सी बात पर बहस हुई, जिसने इस खूनी खेल की पटकथा लिख दी।
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परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, 28 मार्च की सुबह मुस्कान सोकर थोड़ी देर से उठी। इस बात को लेकर नितिन ने उसे हल्की डांट लगा दी। पति-पत्नी के बीच होने वाली यह एक सामान्य नोकझोंक थी, लेकिन मुस्कान इस बात से काफी नाराज हो गई। गुस्से में आकर उसने अपना सामान बांधा और फरुखनगर स्थित अपने मायके (ससुराल वालों के घर) चली गई। नितिन ने सोचा कि कुछ दिनों में गुस्सा शांत होने पर वह वापस लौट आएगी।
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साजिश का जाल: 'सुलह' के बहाने मौत का बुलावा

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मुस्कान के मायके जाने के बाद, उसके मायके वालों को नितिन से बदला लेने का एक मौका मिल गया। उसी दिन देर शाम, मुस्कान के चाचा आसिफ ने नितिन को फोन किया। उसने नितिन से कहा कि वह घर आ जाए, बैठकर बात कर लेते हैं और समझौता कराकर मुस्कान को वापस भेज देंगे। हालांकि, नितिन को शायद किसी अनहोनी का अंदेशा था, इसलिए वह उस दिन फरुखनगर नहीं गया।
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30 मार्च की खौफनाक रात

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दो दिन बाद, 30 मार्च को नितिन के पड़ोस में रहने वाली एक परिचित महिला ने बीच-बचाव कर समझौता कराने की पेशकश की। इसके बाद, रात करीब 8 बजे नितिन अपने छोटे भाई अमित और उस पड़ोसी महिला के साथ अपनी ससुराल फरुखनगर के लिए निकल पड़ा। रास्ते में किसी कारणवश नितिन ने उस महिला को वापस घर लौटा दिया और दोनों भाई अकेले ही ससुराल की तरफ आगे बढ़ गए।
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भनेड़ा पुलिया पर मौत का तांडव: लाठी-डंडों से बरपाया कहर

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रात का अंधेरा गहरा रहा था। नितिन और उसका भाई अमित जैसे ही टीला मोड़ इलाके की भनेड़ा पुलिया के पास पहुंचे, वहां पहले से घात लगाए बैठे मुस्कान के पिता (नितिन के ससुर) मेहरुद्दीन, चाचा आसिफ (शेख) और उनके 3-4 अन्य साथियों ने उन्हें घेर लिया।
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ससुर मेहरुद्दीन ने पहले तो नितिन के साथ गाली-गलौज की और फिर देखते ही देखते सभी आरोपियों ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से दोनों भाइयों पर जानलेवा हमला बोल दिया। अचानक हुए इस हमले से दोनों भाई सन्न रह गए।
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भाई अमित की आंखों के सामने बड़े भाई की बेरहमी से पिटाई

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मारपीट के दौरान मौका पाकर छोटा भाई अमित किसी तरह वहां से जान बचाकर भागने में सफल रहा। लेकिन नितिन आरोपियों के चंगुल में फंस गया। ससुर मेहरुद्दीन और उसके साथियों ने नितिन को तब तक पीटा जब तक वह लहूलुहान होकर सड़क पर गिर नहीं गया। हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए उन्होंने नितिन के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे वार किए। जब नितिन ने हिलना-डुलना बंद कर दिया, तो आरोपी उसे मरा हुआ समझकर सड़क किनारे फेंक कर रात के अंधेरे में फरार हो गए।
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रात भर भटकता रहा परिवार, पुलिस ने पहुंचाया अस्पताल

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इधर, जान बचाकर भागा छोटा भाई अमित बदहवास हालत में लोनी स्थित अपने घर पहुंचा और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। खबर सुनते ही नितिन के परिवार में कोहराम मच गया। परिजन तुरंत भनेड़ा पुलिया और आसपास के इलाकों में नितिन को तलाशने निकल पड़े, लेकिन रात भर खाक छानने के बाद भी नितिन का कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
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दूसरी तरफ, सड़क पर खून से लथपथ पड़े नितिन को देखकर कुछ राहगीरों ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बिना समय गंवाए गंभीर रूप से घायल नितिन को तुरंत दिल्ली के जीटीबी (GTB) अस्पताल में भर्ती कराया।
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सोमवार सुबह हुआ खुलासा, मंगलवार को तोड़ा दम

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सोमवार की सुबह जब नितिन के परिजन गुमशुदगी और मारपीट की शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे, तब उन्हें पुलिस से पता चला कि नितिन दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। परिजन बदहवास हालत में अस्पताल भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद, मंगलवार शाम को इलाज के दौरान नितिन राठी ने दम तोड़ दिया।
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पुलिस की कार्रवाई: ससुर और चाचा गिरफ्तार, सख्त सजा की मांग

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नितिन की मौत की खबर से इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक्शन लिया।
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शालीमार गार्डन के एसीपी (ACP) अतुल कुमार सिंह ने खबरीलाल को बताया कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी ससुर मेहरुद्दीन और उसके भाई (मुस्कान के चाचा) शेख उर्फ आसिफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब इस हत्याकांड में शामिल अन्य 3-4 अज्ञात आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

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नितिन के परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बेटे ने प्यार की खातिर अपने परिवार की नाराजगी झेली थी, उसी की लाश देखकर माता-पिता बेसुध हो गए हैं। परिजनों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस जघन्य हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त से सख्त सजा (फांसी) दी जाए, ताकि भविष्य में कोई झूठी शान के नाम पर किसी के घर का चिराग न बुझा सके।
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इस पूरी घटना ने एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या 21वीं सदी में भी मजहब और जाति के नाम पर इंसान के खून की कीमत इतनी सस्ती है? खबरीलाल इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए रखेगा और आपको पुलिस इन्वेस्टिगेशन से जुड़ी हर नई अपडेट से रूबरू कराता रहेगा।
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