लखनऊ/मेरठ/फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश के आसमान में मंडरा रहे काले घने बादलों ने प्रदेश के किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं। अप्रैल महीने की शुरुआत आमतौर पर तेज धूप और गर्मी के साथ होती है, लेकिन इस बार 1 अप्रैल 2026 की सुबह प्रदेश वासियों के लिए एक प्राकृतिक आपदा का पैगाम लेकर आई। प्रदेश के 40 जिलों में मौसम विभाग ने आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का हाई अलर्ट जारी किया है। बुधवार तड़के से ही राजधानी लखनऊ, अमेठी, फर्रुखाबाद, कानपुर और पश्चिमी यूपी के गाजियाबाद, मेरठ जैसे शहरों में बेमौसम बारिश का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।Read also:-मध्य पूर्व में मंडराया 'डिजिटल ब्लैकआउट' का खतरा: अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इंटरनेट केबल्स पर संकट, भारत की बढ़ी धड़कनें
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खबरीलाल की टीम ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से ग्राउंड रिपोर्ट जुटाई है, जो यह बयां करती है कि कैसे रातों-रात मौसम के मिजाज ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। एक तरफ जहां बांदा में मंगलवार को तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया और वह प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, वहीं चंद घंटों बाद ही कई जिलों में ओले गिरने लगे। मौसम का यह दोहरा चरित्र प्रदेश के कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा संकट बनकर उभरा है।
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मौसम बिगड़ने का मुख्य कारण: पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance)

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मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मौसम में आए इस अचानक और भयानक बदलाव का मुख्य कारण एक मजबूत 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) का सक्रिय होना है। लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल सिंह ने खबरीलाल को बताया कि, "प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ का असर पूरी तरह से दिखने लगा है। हवा के कम दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure Area) और चक्रवाती हवाओं के कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है, जो तेज आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश के रूप में तब्दील हो रही है।"
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आज यानी 1 अप्रैल को पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना है। तापमान में अचानक 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां एक दिन पहले लोग भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से परेशान थे, वहीं रातों-रात लोगों को ठंडी हवाओं के कारण सिहरन महसूस होने लगी है। आजमगढ़ मंगलवार को प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा, जबकि बांदा सबसे गर्म। यह तापमान का भारी उतार-चढ़ाव ही इस बेमौसम बारिश की तीव्रता को बढ़ा रहा है।
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खबरीलाल की ग्राउंड रिपोर्ट: जिला-वार तबाही का खौफनाक मंजर

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उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का अलग-अलग लेकिन विनाशकारी रूप देखने को मिला है। आइए एक नजर डालते हैं प्रदेश के प्रमुख शहरों और जिलों के ताजा हालात पर:
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1. लखनऊ और आसपास के जिले (अवध क्षेत्र)

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राजधानी लखनऊ में बुधवार तड़के 3 बजे से ही मौसम ने रौद्र रूप धारण कर लिया। तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई और आसमान में तेज बिजली कड़कने लगी। रिपोर्टर वैभव के मुताबिक, शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। मौसम विभाग ने लखनऊ के साथ-साथ अमेठी, बाराबंकी, रायबरेली, सीतापुर और उन्नाव के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। अगले 3 घंटों में इन स्थानों पर गरज के साथ तेज बारिश, ओलावृष्टि और तूफानी हवाएं चलने की प्रबल संभावना है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बहुत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें।
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2. फर्रुखाबाद: जहां ओलों ने बिछा दी सफेद चादर

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तबाही का सबसे भयानक मंजर फर्रुखाबाद जिले में देखने को मिला। यहां मंगलवार रात करीब 12:30 बजे पहले तो तेज तूफानी हवाएं चलीं और उसके कुछ ही देर बाद आसमान से आफत के ओले बरसने लगे। करीब 10 मिनट तक लगातार हुई ओलावृष्टि ने कई इलाकों में बर्फ की सफेद चादर सी बिछा दी। सुबह से ही यहां आसमान में घने काले बादल छाए हुए हैं और ठंडी हवाएं चल रही हैं। इस अचानक हुई ओलावृष्टि ने सबसे ज्यादा कहर यहां के किसानों पर बरपाया है, जिनकी खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं।
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3. पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा)

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पश्चिमी यूपी के कई जिलों में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है।
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    गाजियाबाद: मंगलवार देर रात से ही यहां रुक-रुक कर हल्की बारिश का दौर जारी है। सुबह हल्की धूप जरूर खिली और मौसम साफ नजर आया, लेकिन तापमान 20°C के आसपास बना हुआ है। रात के समय तेज हवाओं ने शहर को अपनी चपेट में लिया था।
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    मेरठ: यहां देर रात हल्की बूंदाबांदी हुई, जिसके बाद बुधवार सुबह मौसम साफ रहा और हल्की हवाएं चलती रहीं। अधिकतम तापमान 32 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है। लेकिन मेरठ मौसम विज्ञान केंद्र के डॉ. यूपी शाही ने चेतावनी दी है कि आज शाम तक मेरठ और आसपास के इलाकों में तेज आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
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    नोएडा: नोएडा में फिलहाल मौसम साफ है और धूप खिली हुई है। यहां का अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। हालांकि, दोपहर बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा के मौसम में भी तेजी से बदलाव होने और आंधी-बारिश की पूरी उम्मीद है।
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4. पूर्वांचल और वाराणसी मंडल

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    वाराणसी: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। यहां हल्की बूंदाबांदी हो रही है और देर रात तेज आंधी ने शहर को झकझोर कर रख दिया। आसमान में घने काले बादल छाए हुए हैं। 6 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लो प्रेशर के कारण मौसम अचानक बदला है।
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    प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में रात करीब 2 बजे मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में तेज बिजली कड़कने की आवाज से लोग सहम गए। गरज के साथ आई तेज आंधी के कारण शहर के कई इलाकों में बड़े-बड़े पेड़ जड़ से उखड़ कर सड़कों पर गिर गए, जिससे यातायात बाधित हुआ। मौसम विभाग ने प्रयागराज के लिए अगले 3 घंटों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है।
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    चंदौली: मुगलसराय (पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर) इलाके में बुधवार सुबह तेज गरज और चमक के साथ झमाझम बारिश हुई। बारिश के कारण शहर की सड़कों पर पानी भर गया, हालांकि मौसम सुहावना जरूर हो गया है।
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    गोरखपुर: मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में बुधवार सुबह से बादल छाए हुए हैं। पारा 4 से 5 डिग्री तक लुढ़क गया है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. कैलाश पांडेय का कहना है कि पछुआ हवाएं चलने के कारण दिन भर मौसम ऐसा ही बना रहेगा, हालांकि फिलहाल यहां भारी बारिश के आसार नहीं हैं।
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5. बुंदेलखंड और मध्य यूपी (कानपुर, जालौन, बांदा, फतेहपुर)

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    कानपुर: कल कानपुर समेत आसपास के 10 शहरों में बारिश हुई। देर रात बारिश के बाद आज सुबह से घने बादल छाए हुए हैं। तापमान में 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। सीएसए यूनिवर्सिटी के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि आज पूरे दिन रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है।
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    जालौन: बुंदेलखंड का जालौन जिला ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। मंगलवार शाम को यहां तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी हुई और फिर ओले गिरे।
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    फतेहपुर: फतेहपुर के धाता क्षेत्र में रात 12 बजे तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। न्यूनतम तापमान 22 डिग्री और अधिकतम 33 डिग्री रहा। बारिश भले ही कम हुई हो, लेकिन आंधी ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
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    मथुरा, आगरा और बरेली: मथुरा में मंगलवार शाम ओले गिरने से मौसम ठंडा हो गया और आज सुबह का तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। आगरा में सुबह 8 बजे मौसम साफ हो गया और तापमान 38 डिग्री पहुंचने का अनुमान है। बरेली में भी आसमान साफ है और धूप निकली हुई है। भदोही में तड़के 30 की स्पीड से हवा चली और बारिश हुई। अयोध्या में तड़के बूंदाबांदी हुई और बादल छाए हुए हैं।
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ग्राउंड जीरो से किसानों का दर्द: "हमारी तो पूरी जिंदगी लुट गई"

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इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का असली खामियाजा प्रदेश के अन्नदाताओं को भुगतना पड़ रहा है। खेतों में गेहूं, चना, मटर, सरसों और तंबाकू की फसलें कटने के लिए पूरी तरह तैयार थीं। किसानों ने फसल काटने की शुरुआत कर दी थी, लेकिन कुदरत के इस कहर ने उनकी उम्मीदों को मिट्टी में मिला दिया है। खबरीलाल ने प्रदेश के कई किसानों से बात की, जिनका दर्द सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं।
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संभल: 50 प्रतिशत गेहूं और मसूर पूरी तरह चौपट संभल जिले की चंदौसी तहसील के गांव रचैटा के रहने वाले किसान मेहमद हसन भारी मन से बताते हैं, "इस बार फसल बहुत अच्छी हुई थी। हमें उम्मीद थी कि कर्ज उतर जाएगा और घर में दो पैसे आएंगे। लेकिन इस बेमौसम बारिश ने हमारी कमर तोड़ दी। गेहूं की करीब 50 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई है। जो बालियां पक चुकी थीं, वो तेज हवा से टूटकर जमीन पर गिर गईं। जहां पहले 2 क्विंटल तक की उपज होती थी, वहां इस बार मुश्किल से एक या सवा क्विंटल गेहूं निकलेगा। मसूर की फसल का तो नामोनिशान मिट गया है, वह पूरी तरह से चौपट हो गई है।"
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फर्रुखाबाद: तंबाकू और गेहूं के खेतों में पसरा मातम फर्रुखाबाद के किसान दिनेश शाक्य की व्यथा और भी गहरी है। उन्होंने बताया, "मैंने 11 बीघा खेत में तंबाकू की फसल लगाई थी। कई महीनों की मेहनत के बाद फसल पक कर तैयार हुई थी। हमने तंबाकू के पत्तों को काटकर सुखाने के लिए खेत में फैला दिया था। लेकिन बीती रात अचानक आई तेज बारिश ने हमारी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। खेत में फैली तंबाकू पूरी तरह भीग गई है। अब इसके पत्तों के लाल पड़ने का खतरा बढ़ गया है। अगर तंबाकू लाल पड़ गया, तो उसकी गुणवत्ता खराब हो जाएगी और बाजार में हमें उसकी आधी कीमत भी नहीं मिलेगी। हम तो बर्बाद हो गए।"
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वहीं, फर्रुखाबाद के ही एक अन्य किसान राम सिंह ने बताया कि मंगलवार रात हुई बारिश और तेज हवाओं से उनकी तीन बीघा गेहूं की पकी फसल पूरी तरह से जमीन पर गिर गई है, जिससे दाने काले पड़ जाएंगे और पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा।
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जालौन: महिला किसानों के आंसू नहीं रुक रहे जालौन जिले के किसान मनीष और सुमित का कहना है कि बुंदेलखंड में वैसे ही खेती करना बहुत मुश्किल है। सुमित कहते हैं, "शुरुआत में बड़ी मुश्किल से, लाइनों में लगकर हमें खाद और बीज मिले थे। जैसे-तैसे पानी का इंतजाम करके गेहूं की फसल तैयार की थी। लेकिन कल शाम गिरे ओले और बारिश ने पकी हुई फसल को तबाह कर दिया। गेहूं की बालियां टूट गई हैं।"
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जालौन की ही एक महिला किसान रश्मि रोते हुए बताती हैं, "इस बार चने की फसल देखकर मन बहुत खुश था। उम्मीद थी कि सब ठीक हो जाएगा। लेकिन बारिश ने सब खत्म कर दिया। चने की फसल पूरी तरह से जमीन पर बिछ गई है और पानी भरने से वह सड़ जाएगी। सरकार को जल्द से जल्द सर्वे कराकर हमें मुआवजा देना चाहिए।"
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फतेहपुर: धाता क्षेत्र के किसान वीरेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश उतनी तेज नहीं थी, लेकिन जो आंधी आई उसने गेहूं की खड़ी फसल को गिरा दिया है। अब इसे मशीन से काटना नामुमकिन हो जाएगा और मजदूरों से कटवाने का खर्च बहुत ज्यादा आएगा।
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आंकड़े जो डराते हैं: 15 दिनों में 15 हजार किसानों का नुकसान

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उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व और कृषि विभाग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, मौसम की यह मार केवल आज की नहीं है। पिछले 15 दिनों में रुक-रुक कर आ रहे मौसम के बदलावों ने बड़े पैमाने पर कृषि क्षेत्र को प्रभावित किया है।
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    प्रभावित किसान: पिछले 15 दिनों में लगभग 15,000 किसानों की फसलें बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की भेंट चढ़ चुकी हैं।
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    प्रभावित क्षेत्रफल: प्रदेश भर में करीब 4,300 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं।
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    मुआवजा स्थिति: यूपी सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 10,278 किसानों को आर्थिक मुआवजा प्रदान किया है। हालांकि, आज (1 अप्रैल) को जो तबाही हुई है, उसका आकलन होना अभी बाकी है। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों, एसडीएम और लेखपालों को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत खेतों में जाकर नुकसान का सर्वे करें और 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट शासन को सौंपें ताकि किसानों को बिना किसी देरी के फसल बीमा और सरकारी मुआवजे का लाभ मिल सके।
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कृषि विशेषज्ञों की अहम सलाह: फसलों को कैसे बचाएं?

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इस विकट स्थिति में कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि रबी (गेहूं, चना, मटर, सरसों), जायद और बागवानी फसलों पर इस बेमौसम बारिश का सबसे घातक असर पड़ेगा।
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    जल निकासी: जिन खेतों में बारिश का पानी भर गया है, किसान तुरंत वहां से जल निकासी (Water Drainage) की व्यवस्था करें। खेतों में 24 घंटे से ज्यादा पानी जमा रहने पर चने और सरसों की जड़ें गलने लगेंगी।
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  3. \r\n
    कटाई में तेजी: जो फसलें (विशेषकर गेहूं और सरसों) 80 से 90 प्रतिशत तक पक चुकी हैं, उनकी तुरंत कटाई कर लें। कटी हुई फसल को खुले आसमान के नीचे खेतों में न छोड़ें, बल्कि उन्हें सुरक्षित और ढके हुए स्थानों पर रखें या तिरपाल से अच्छी तरह ढक दें।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    सब्जियों का बचाव: इस समय भिंडी, टमाटर, लौकी, खीरा, तरबूज, खरबूजा, बैंगन और मिर्च की फसल में फूल आ रहे हैं या छोटे फल बन रहे हैं। तेज हवा और ओलों से ये फूल झड़ सकते हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों के किनारे हवा रोकने वाले जालीदार कवर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    दालों की फसल: अरहर, चना, मटर, मूंग और मूंगफली में इस समय फलियां बन रही हैं और दाने भर रहे हैं। तेज हवा से फलियां फट सकती हैं। किसान मौसम साफ होने के बाद ही खेतों में किसी भी प्रकार के कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
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  8. \r\n
  9. \r\n
    तंबाकू किसान: फर्रुखाबाद और कासगंज बेल्ट के तंबाकू किसानों को सलाह दी गई है कि भीगी हुई तंबाकू की पत्तियों को तुरंत हवादार जगह पर ले जाएं और उन्हें सड़ने से बचाने के लिए उचित दूरी पर फैलाएं।
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अगले 72 घंटों का मौसम पूर्वानुमान (3 Days Weather Forecast)

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मौसम विभाग ने प्रदेशवासियों और किसानों को आगाह किया है कि मौसम का यह अस्थिर मिजाज अभी कुछ दिन और परेशान करेगा। लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी किए गए बुलेटिन के अनुसार:
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    2 अप्रैल 2026 (गुरुवार): प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम के साफ रहने की उम्मीद है। हालांकि, आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। बारिश रुकने के कारण दिन के तापमान में मामूली बढ़ोतरी रिकॉर्ड की जाएगी, जिससे उमस बढ़ सकती है।
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    3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार): पश्चिमी यूपी (मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, सहारनपुर मंडल) में एक बार फिर मौसम करवट लेगा। यहां गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है। तेज हवाएं भी चल सकती हैं। वहीं पूर्वी यूपी (वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज) में मौसम साफ और शुष्क बना रहेगा।
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  • \r\n
  • \r\n
    4 अप्रैल 2026 (शनिवार): पश्चिमी यूपी के कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश जारी रहने का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में आसमान पूरी तरह से साफ रहेगा और तेज धूप निकलने की संभावना है।
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तापमान का उतार-चढ़ाव: कौन सा शहर कितना गर्म, कितना ठंडा?

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मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में तापमान का भारी असंतुलन देखने को मिल रहा है।
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    आगरा मंडल: आगरा और आसपास के जिलों में दिन के तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
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    मेरठ मंडल: बारिश के बावजूद मेरठ मंडल में दिन का तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है, जो भविष्य में एक और चक्रवाती तूफान बनने का संकेत दे रहा है।
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  • \r\n
  • \r\n
    अन्य मंडल: वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, बरेली और झांसी मंडलों में दिन का तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक ही दर्ज किया गया है।
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    मंगलवार को बांदा 41.4°C के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला था, जबकि आजमगढ़ में न्यूनतम तापमान सबसे कम दर्ज किया गया।
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प्रशासन और आम जनता के लिए अपील

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अप्रैल के महीने में उत्तर प्रदेश में ऐसा मौसम जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का एक स्पष्ट संकेत है। जहां एक तरफ गर्मी अपने चरम पर पहुंचने की तैयारी में थी, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी विक्षोभ ने पूरे प्रदेश को मानसून जैसी स्थिति में धकेल दिया है।
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खबरीलाल की टीम राज्य सरकार और जिला प्रशासनों से यह अपील करती है कि वे इस आपदा की घड़ी में अन्नदाताओं के साथ खड़े हों। लेखपालों को तुरंत प्रभाव से खेतों में भेजा जाए और बिना किसी लालफीताशाही के किसानों को उनके नुकसान का 100% मुआवजा जल्द से जल्द बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाए।
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आम जनता से भी अपील है कि मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें। तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और होर्डिंग्स के नीचे बिल्कुल न खड़े हों। कच्चे मकानों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। जब तक मौसम पूरी तरह साफ न हो जाए, लंबे सफर पर निकलने से बचें।
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