गाजियाबाद (क्राइम डेस्क): सोशल मीडिया की दुनिया और असल जिंदगी के बीच की खूनी लकीर का एक बेहद खौफनाक मंजर गाजियाबाद में देखने को मिला है। एक्स-मुस्लिम (Ex-Muslim) यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले का जो सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सामने आया है, वह किसी की भी रूह कंपा देने के लिए काफी है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे दो सगे भाइयों— जीशान और गुलफाम— ने सलीम को उनके ही गाजियाबाद स्थित ऑफिस में 7 मिनट तक तड़पा-तड़पाकर चाकू मारे।READ ALSO:-मेरठ में सनसनी: सरधना गंगनहर में उतराते मिले दो शव, लापता अज़ीम अंसारी के साथ 12 वर्षीय अज्ञात बच्ची की लाश बरामद
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इस पूरी वारदात में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि हमलावरों की जेब में इटली मेड (Made in Italy) विदेशी पिस्टल रखी थी, लेकिन उन्होंने गोली मारने के बजाय गला रेतने और सर्जिकल ब्लेड से चीरने का वहशियाना तरीका चुना। सलीम के शरीर पर 14 गहरे घाव लगे हैं और वे फिलहाल दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। उनके दो बड़े ऑपरेशन हो चुके हैं।
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इस दुस्साहसिक वारदात के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) ने अपना एक्शन प्लान तैयार किया और महज़ चंद दिनों के भीतर ही दोनों आरोपी भाइयों, जीशान और गुलफाम को गाजियाबाद के अलग-अलग इलाकों में हुए पुलिस एनकाउंटर (Police Encounter) में ढेर कर दिया। आइए, इस पूरी खौफनाक वारदात, पुलिस की जांच, मौलाना कनेक्शन और एनकाउंटर की पूरी इनसाइड स्टोरी को विस्तार से समझते हैं।
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CCTV फुटेज का सच: 7 मिनट 30 सेकेंड तक चला खौफनाक 'मौत का खेल'
\r\n\r\n27 फरवरी की सुबह, गाजियाबाद के लोनी इलाके में स्थित सलीम वास्तिक के ऑफिस में जो कुछ हुआ, वह सीसीटीवी में सेकेंड-दर-सेकेंड कैद हो गया है। वीडियो फुटेज इंसानियत को शर्मसार करने वाला है:
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- \r\n सुबह का वक्त और खामोशी: वीडियो की शुरुआत में दिखता है कि सलीम वास्तिक अपने ऑफिस में अकेले हैं और सोफे पर आराम से लेटे हुए हैं। बाहर सड़क पर सामान्य हलचल है।\r\n \r\n
- \r\n हमलावरों की एंट्री: तभी एक मोटरसाइकिल उनके ऑफिस के बाहर आकर रुकती है। बाइक से जीशान और गुलफाम उतरते हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए दोनों ने सिर से हेलमेट नहीं उतारा है। वे दबे पांव ऑफिस के अंदर दाखिल होते हैं। जीशान सीधे सलीम के बगल में आकर खड़ा हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n सर्जिकल ब्लेड और पहली जद्दोजहद: सलीम दोनों अजनबी चेहरों को देखकर खतरे को भांप जाते हैं। इससे पहले कि सलीम पूरी तरह उठ पाते, जीशान अपनी जेब से एक धारदार सर्जिकल ब्लेड निकाल लेता है और सलीम की गर्दन की तरफ लपकता है। अपनी जान बचाने के लिए सलीम फुर्ती से उसका हाथ पकड़ लेते हैं और दोनों के बीच गुत्थम-गुत्था शुरू हो जाती है।\r\n \r\n
- \r\n गुलफाम का घातक वार: जैसे ही जीशान और सलीम उलझते हैं, गुलफाम मौका देखकर सलीम के सीने और पेट पर बड़े चाकू से ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर देता है। इस अचानक हुए दोहरे हमले से सलीम फर्श पर गिर पड़ते हैं।\r\n \r\n
- \r\n गला रेतने की खौफनाक कोशिश: फर्श पर गिरने के बाद भी हमलावर नहीं रुकते। जीशान चाकू से सलीम का गला रेतने की कोशिश करता है, जबकि गुलफाम पेट और सीने को छलनी कर देता है। सलीम खून से लथपथ होकर खुद को बचाने की जी-तोड़ कोशिश करते रहते हैं।\r\n \r\n
- \r\n खून से सने 14 वार और जीशान की कटी उंगली: यह पूरी वारदात 7 मिनट 30 सेकेंड तक चलती है। इस दौरान दोनों ने सलीम पर गले से लेकर पेट तक 14 बार वार किए। इस हाथापाई में जीशान की खुद की उंगली भी कट जाती है और दोनों के कपड़े खून से लाल हो जाते हैं। अंततः सलीम बेसुध होकर गिर पड़ते हैं और दोनों हमलावर उन्हें मरा हुआ समझकर वहां से फरार हो जाते हैं।\r\n \r\n

क्राइम डायरी: पास में विदेशी पिस्टल थी, फिर चाकू से हमला क्यों?
\r\n\r\nपुलिस महकमे और आम जनता के जेहन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि जब जीशान और गुलफाम के पास .32 बोर की 'मेड इन इटली' पिस्टल और पर्याप्त कारतूस मौजूद थे, तो उन्होंने एक गोली में काम तमाम करने के बजाय इतना जोखिम क्यों उठाया?
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क्राइम ब्रांच की तफ्तीश में इसके दो बड़े कारण निकलकर सामने आए हैं:
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- \r\n 'तड़पाकर मारना' और खौफनाक संदेश देना: पुलिस के मुताबिक, हमलावरों का मकसद सिर्फ सलीम की हत्या करना नहीं था, बल्कि वे उसे तड़पा-तड़पाकर मारना चाहते थे। उनका उद्देश्य था कि सलीम जैसे अन्य यूट्यूबर्स, जो इस्लाम के खिलाफ या धर्म से हटकर बोलते हैं, उन्हें एक सख्त और खौफनाक 'मैसेज' दिया जा सके। यह एक तरह की 'टार्गेटेड हेट क्राइम' की श्रेणी में आता है, जहां मारने का तरीका भी एक बयान होता है।\r\n \r\n
- \r\n फरारी का सुरक्षित रास्ता: दूसरी वजह पूरी तरह से टैक्टिकल (Tactical) थी। अगर वे ऑफिस के अंदर पिस्टल से फायर करते, तो गोली की तेज आवाज सुनकर आसपास की घनी आबादी तुरंत वहां जमा हो जाती। पब्लिक के विरोध और घेराबंदी के कारण उनका वहां से सुरक्षित भाग निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता। चाकू से हमला करने पर कोई आवाज नहीं हुई और वे आसानी से वारदात को अंजाम देकर निकल गए।\r\n \r\n
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जांच के 3 अहम एंगल: गाजियाबाद पुलिस की तफ्तीश कहां तक पहुंची?
\r\n\r\nइस हाई-प्रोफाइल मामले में गाजियाबाद पुलिस, स्वाट (SWAT) टीम और क्राइम ब्रांच की टीमें दिन-रात एक कर रही हैं। पुलिस की जांच मुख्य रूप से तीन एंगल्स पर केंद्रित है:
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एंगल 1: असली मास्टरमाइंड और 'दिल्ली मौलाना' का कनेक्शन
\r\n\r\nपुलिस को यकीन है कि जीशान और गुलफाम सिर्फ मोहरे थे, असली मास्टरमाइंड कोई और है। जांच में सबसे अहम सुराग दोनों भाइयों के मोबाइल फोन की गूगल सर्च हिस्ट्री से मिला है।
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- \r\n यूट्यूब वीडियो की सर्च हिस्ट्री: उनके फोन में सलीम वास्तिक के उन वीडियो की लंबी लिस्ट मिली है, जो उन्होंने हाल ही में देखे थे।\r\n \r\n
- \r\n इंस्टाग्राम पर मौलाना लुक: जीशान का इंस्टाग्राम अकाउंट खंगालने पर पुलिस को चौंकाने वाले वीडियो मिले, जिनमें वह खुद किसी 'कट्टर मौलाना' की तरह इस्लामिक स्पीच देता दिख रहा है।\r\n \r\n
- \r\n दिल्ली के मौलाना से मुलाकात: तफ्तीश में यह बात पुख्ता हुई है कि दोनों भाई दिल्ली के एक विशेष मौलाना के लगातार संपर्क में थे। वारदात को अंजाम देने से ठीक पहले दोनों दिल्ली गए थे और उस मौलाना से मुलाकात की थी। पुलिस को शक है कि इन्हें 'ब्रेनवाश' (Brainwash) करने और फंडिंग देने का काम इसी नेटवर्क ने किया है। जल्द ही इस मौलाना की गिरफ्तारी हो सकती है।\r\n \r\n
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एंगल 2: क्या निशाने पर और भी लोग हैं?
\r\n\r\nपुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या सलीम वास्तिक की तरह इस्लाम या किसी विशेष विचारधारा के खिलाफ बेबाकी से बोलने वाले अन्य यूट्यूबर्स या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी इस हिट-लिस्ट में शामिल थे?
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एंगल 3: किस अंडरग्राउंड संगठन के लिए काम कर रहे थे?
\r\n\r\nयह हमला किसी पल भर के गुस्से का नतीजा नहीं था। इसमें रेकी (Reece), हथियार (विदेशी पिस्टल) और प्रॉपर प्लानिंग शामिल थी। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या दोनों भाई किसी स्लीपर सेल या किसी चरमपंथी संगठन से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे।
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विवाद का केंद्र: कौन हैं सलीम वास्तिक और किस वीडियो ने भड़काई आग?
\r\n\r\n50 वर्षीय सलीम अहमद, जिन्हें सोशल मीडिया पर 'सलीम वास्तिक' के नाम से जाना जाता है, मूल रूप से दिल्ली की अशोक विहार कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहते हैं। गाजियाबाद के लोनी इलाके में उनका एक दूसरा घर है, जिसे वे अपने यूट्यूब चैनल के स्टूडियो और ऑफिस के रूप में इस्तेमाल करते थे।
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सलीम का यूट्यूब प्रोफाइल:
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- \r\n सब्सक्राइबर्स: करीब 30 हजार\r\n \r\n
- \r\n टोटल व्यूज: 2.2 मिलियन से ज्यादा\r\n \r\n
- \r\n कंटेंट: अब तक 180 से ज्यादा वीडियो पब्लिश कर चुके हैं।\r\n \r\n
- \r\n विचारधारा: चैनल के बायो में सलीम ने खुद को एक "पूर्व-मुस्लिम" (Ex-Muslim) घोषित किया है। उन्होंने लिखा है- "मैंने वर्षों तक इस्लामी विचारधारा को समझने और परखने के बाद तर्क और प्रमाण के रास्ते पर चलने का निर्णय लिया। यह मंच उन सभी के लिए है, जो सवाल पूछने से नहीं डरते—चाहे वह भगवान के अस्तित्व से जुड़ा हो या इस्लामी ग्रंथों की प्रामाणिकता से।"\r\n \r\n
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कौन सा वीडियो बना ट्रिगर पॉइंट? हमलावरों के मोबाइल से मिले डेटा के अनुसार, एक खास वीडियो ने एक विशेष तबके को बेहद भड़का दिया था। इस वीडियो में सलीम वास्तिक कह रहे थे— "कुरान में लिखा है कि अगर मुस्लिम ऐसे मुल्क में हैं, जहां उसको नहीं होना चाहिए, तो मुस्लिम को वो मुल्क छोड़ देना चाहिए।" इसके आगे सलीम ने कथित तौर पर कहा कि "मुस्लिमों को भारत छोड़ देना चाहिए।" इसी विवादित बयान वाले वीडियो को बार-बार देखकर जीशान और गुलफाम ने सलीम को खत्म करने की कसम खाई थी। हमले से ठीक एक दिन पहले (26 फरवरी) सलीम ने अपना आखिरी वीडियो अपलोड किया था, जिसका विषय था- "नास्तिक होना क्या है?"
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भागने की होशियारी: दिल्ली, गाजियाबाद और अमरोहा का चक्रव्यूह
\r\n\r\nहमले के बाद जीशान और गुलफाम ने पुलिस को चकमा देने के लिए एक शातिर रूट अपनाया।
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- \r\n बॉर्डर पार: वे वारदात के तुरंत बाद लोनी बॉर्डर क्रॉस कर गए।\r\n \r\n
- \r\n वजीराबाद से खोड़ा: पुलिस की नजरों से बचने के लिए वे वजीराबाद के रास्ते दिल्ली से होते हुए सीधे गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में पहुंचे, जहां उनका एक किराए का कमरा था। खोड़ा इलाका यूपी और दिल्ली के ठीक बॉर्डर पर स्थित है।\r\n \r\n
- \r\n महज 6 मिनट का ठहराव: सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, दोनों भाई अपने खोड़ा वाले कमरे पर सिर्फ 6 मिनट रुके। इस दौरान उन्होंने खून से सने कपड़े बदले, अपना बैग लिया और वहां से निकल गए।\r\n \r\n
- \r\n अमरोहा की तरफ फरारी: वहां से वे सीधे बाइक से अपने पैतृक जिले अमरोहा पहुंचे और 28 फरवरी को वहां से भी किसी अज्ञात स्थान के लिए निकल गए। लेकिन, यूपी पुलिस की सर्विलांस टीमें लगातार उनके हर इलेक्ट्रॉनिक फुटप्रिंट और मूवमेंट को फॉलो कर रही थीं।\r\n \r\n
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द डबल एनकाउंटर: यूपी पुलिस का पलटवार और दोनों भाइयों का अंत
\r\n\r\nमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त 'जीरो टॉलरेंस' निर्देशों के तहत काम कर रही यूपी पुलिस ने इस दुस्साहसिक वारदात का जवाब उसी भाषा में दिया।
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एनकाउंटर 1: जीशान का अंत (1 मार्च की रात)
\r\n\r\n1 मार्च की रात को पुलिस की सर्विलांस टीम को पुख्ता सूचना मिली। डीसीपी पीयूष सिंह के अनुसार:
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- \r\n रविवार रात लोनी थाना प्रभारी नितिन चौधरी और देहात स्वाट (SWAT) टीम चेकिंग कर रही थी।\r\n \r\n
- \r\n तभी बाइक पर दो संदिग्ध आते दिखे। पुलिस ने रुकने का इशारा किया, तो उन्होंने अपनी इटली मेड पिस्टल से पुलिस टीम पर सीधा फायर झोंक दिया।\r\n \r\n
- \r\n करीब 15 मिनट तक दोनों तरफ से 25 से 30 राउंड गोलियां चलीं। एक गोली एसओ लोनी की बुलेट प्रूफ जैकेट पर लगी, जिससे उनकी जान बाल-बाल बची।\r\n \r\n
- \r\n जवाबी फायरिंग में एक बदमाश को गोली लगी और वह वहीं गिर पड़ा। जबकि दूसरा (गुलफाम) अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा।\r\n \r\n
- \r\n घायल बदमाश को 50 सैय्या अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मरने से पहले उसने पुलिस को बताया कि वह जीशान है और उसी ने अपने भाई गुलफाम के साथ सलीम पर हमला किया था।\r\n \r\n
- \r\n मौके से .32 बोर की इटली मेड पिस्टल, 6 जिंदा कारतूस, 8 खोखे और एक स्प्लेंडर बाइक बरामद हुई।\r\n \r\n
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एनकाउंटर 2: गुलफाम का खात्मा (3 मार्च की रात)
\r\n\r\nअपने छोटे भाई के मारे जाने के बाद गुलफाम बौखला गया और लगातार अपनी लोकेशन बदलने लगा।
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- \r\n रिश्तेदारों ने पनाह देने से किया इनकार: वह दिल्ली में अपने एक रिश्तेदार के घर छिपने पहुंचा, लेकिन टीवी पर न्यूज़ देखकर और पुलिस के खौफ से रिश्तेदारों ने उसे अपने घर में घुसने ही नहीं दिया।\r\n \r\n
- \r\n इंदिरापुरम में घेराबंदी: 48 घंटे बाद पुलिस को गुलफाम के गाजियाबाद के पॉश इलाके इंदिरापुरम में होने की भनक लगी। अधिकारियों के निर्देश पर वसुंधरा बिजलीघर के सामने स्वाट टीम ने चक्रव्यूह रचा।\r\n \r\n
- \r\n एलिवेटेड रोड के नीचे मुठभेड़: रात के वक्त बाइक पर आते गुलफाम को जब रोका गया, तो उसने बैरिकेड तोड़ते हुए बाइक दाईं ओर मोड़ दी और एलिवेटेड रोड के नीचे भागने लगा। मिट्टी के टीले पर बाइक फिसल गई।\r\n \r\n
- \r\n गिरते ही गुलफाम ने पुलिस पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। पुलिस की जवाबी और सटीक फायरिंग में गुलफाम को गोली लगी और वह ढेर हो गया। उसके पास से मिले आधार कार्ड से उसकी शिनाख्त अमरोहा निवासी गुलफाम के रूप में हुई।\r\n \r\n
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कौन थे जीशान और गुलफाम? (हमलावरों की इनसाइड प्रोफाइल)
\r\n\r\nहमलावर भाई मूल रूप से अमरोहा जिले के सैदनगली (सकतपुर रोड) के रहने वाले थे। उनके पिता बुनियाद अली पिछले 46 सालों से यहां रहकर लकड़ी का काम करते हैं। परिवार में पांच बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य है।
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- \r\n मदरसे की तालीम: पिता ने छोटे बेटे जीशान को शुरुआत में स्थानीय मदरसे में पढ़ने भेजा था। वहां उसने करीब ढाई साल तक दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) हासिल की। इसी तालीम के असर से वह हमेशा कुर्ता, पायजामा, टोपी पहनता था और लंबी दाढ़ी रखता था।\r\n \r\n
- \r\n नोएडा में शिफ्टिंग: आर्थिक तंगी के चलते जीशान ने मदरसा छोड़ दिया और 2020 में 12वीं पास करने के बाद अपने बड़े भाई गुलफाम के पास नोएडा चला गया। गुलफाम पिछले 10 साल से नोएडा में लकड़ी की कारीगरी का काम कर रहा था।\r\n \r\n
- \r\n कट्टरपंथ की राह: पुलिस की जांच दर्शाती है कि नोएडा-दिल्ली में रहते हुए ही जीशान कट्टरपंथी विचारधारा और भड़काऊ यूट्यूब वीडियो के संपर्क में आया और धीरे-धीरे एक 'सेल्फ-रेडिकलाइज्ड' (Self-Radicalized) युवा बन गया, जिसने आखिरकार इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।\r\n \r\n
बेटे उस्मान की FIR और आगे की कानूनी कार्यवाही
\r\n\r\nसलीम के बेटे उस्मान ने इस पूरी घटना के बाद पुलिस में नामजद शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी FIR में स्थानीय स्तर के कई नाम शामिल थे, जिनमें अशफाक, सोनू, शाहरुख नेता, भाटी बिल्डर और एक स्थानीय एआईएमआईएम (AIMIM) नेता अजगर का नाम मुख्य रूप से शामिल था। इसके अलावा 2 अज्ञात लोगों (जिन्होंने हमला किया) का भी जिक्र था। उस्मान का आरोप था कि इन सभी ने मिलकर उनके पिता की हत्या की गहरी साजिश रची है। पुलिस अब इन नामजद आरोपियों से भी इस एंगल पर पूछताछ कर रही है कि क्या उन्हें इस हमले की पूर्व जानकारी थी या उन्होंने किसी तरह का लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया था।
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गाजियाबाद का यह खौफनाक मामला इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे सोशल मीडिया पर चलने वाले वैचारिक मतभेद, धार्मिक बहस और भड़काऊ बयानबाजी रियल लाइफ में खूनी खेल का रूप ले सकती है। जहां एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और तार्किक बहस समाज के लिए जरूरी है, वहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं का 'रेडिकलाइजेशन' पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। फिलहाल, यूपी पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने सड़क पर न्याय कर दिया है, लेकिन असली मास्टरमाइंड और 'फंडिंग ट्रेल' का खुलासा होना अभी बाकी है।