उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक बेहद चौंकाने वाला और समाज को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसे शातिर गैंग का भंडाफोड़ किया है जो चलती कार को ही अस्पताल बनाकर अवैध धंधा चला रहा था। पुलिस ने शनिवार देर रात कार्रवाई करते हुए इस गाजियाबाद भ्रूण लिंग जांच रैकेट का पर्दाफाश किया और एक झोलाछाप डॉक्टर समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अर्टिगा कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन रखकर महिलाओं के भ्रूण का लिंग परीक्षण करता था और फिर एक निजी अस्पताल में ले जाकर उनका अवैध रूप से गर्भपात (अबॉर्शन) कराता था। READ ALSO:-मेरठ में कंपा देने वाला 'हिट एंड रन': ड्यूटी से लौट रहे साइकिल सवार को वैगनआर ने 100 फीट तक घसीटा, दर्दनाक मौत
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पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि इस गैंग ने पिछले एक साल के भीतर दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) क्षेत्र में करीब 500 महिलाओं का भ्रूण लिंग परीक्षण किया है और 100 से अधिक महिलाओं का गर्भपात कराया है। सबसे हैरानी की बात यह है कि राजधानी दिल्ली और एनसीआर जैसे हाई-टेक इलाके में यह गोरखधंधा पिछले एक साल से चल रहा था, लेकिन पुलिस और स्वास्थ्य विभाग (Health Department) को इसकी भनक तक नहीं लगी। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह गैंग कैसे ऑपरेट करता था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
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कैसे ऑपरेट करता था गाजियाबाद भ्रूण लिंग जांच रैकेट?
\r\n\r\nइस शातिर गिरोह ने पुलिस और प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक बेहद फुलप्रूफ और गोपनीय व्यवस्था बना रखी थी। उनका काम करने का तरीका इतना शातिर था कि आम इंसान तो क्या, पुलिस को भी आसानी से शक नहीं हो सकता था।
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सबसे पहले, गिरोह के एजेंट उस महिला की तलाश करते थे जिसे भ्रूण लिंग जांच करानी होती थी। महिला से संपर्क होने के बाद फोन पर 10 हजार रुपए में पूरी डील तय की जाती थी। महिला को स्पष्ट रूप से बताया जाता था कि उसे किसी अस्पताल या क्लिनिक में आने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, उसे एक तय स्थान पर बुलाया जाता था और वहां खड़ी एक अर्टिगा कार में बैठाया जाता था।
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सुरक्षा और गोपनीयता के कड़े नियम: गिरोह गोपनीयता को लेकर इतना सतर्क था कि कार के अंदर ही पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन (Portable Ultrasound Machine) की मदद से भ्रूण का लिंग परीक्षण किया जाता था। अगर जांच के बाद महिला गर्भपात कराना चाहती थी, तो उसे रात के अंधेरे में लोनी इलाके के एक अस्पताल में ले जाया जाता था। महिला को पहले से इस अस्पताल की कोई जानकारी नहीं दी जाती थी। इसके अलावा, गैंग के सख्त नियम थे:
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- \r\n महिलाओं को अपने साथ किसी भी पुरुष सदस्य को लाने की सख्त मनाही थी।\r\n \r\n
- \r\n कार में बैठने से पहले ही महिला का मोबाइल फोन बंद करवाकर गैंग के सदस्य अपने पास रख लेते थे, ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके या कोई लोकेशन शेयर न कर सके।\r\n \r\n
- \r\n गिरोह पहले 4 से 5 दिन तक महिला के बैकग्राउंड के बारे में पूरी जानकारी जुटाता था। वे यह सुनिश्चित करते थे कि महिला का पुलिस, स्वास्थ्य विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी से कोई संबंध तो नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n एक बार जो महिला इस गैंग से जांच करा लेती थी, वही बाद में माउथ पब्लिसिटी के जरिए दूसरी जरूरतमंद महिलाओं को इस गिरोह तक पहुंचाती थी। इसी 'चेन सिस्टम' से इस गैंग ने अपना पूरा नेटवर्क खड़ा किया था।\r\n \r\n
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गैंग के सदस्यों की भूमिका और जिम्मेदारी
\r\n\r\nइस संगठित अपराध को अंजाम देने के लिए गैंग ने हर सदस्य की जिम्मेदारी पहले से तय कर रखी थी। पुलिस पूछताछ में चारों आरोपियों ने अपने-अपने काम का खुलासा किया है:
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1. संदीप (38): सरगना और साईं हॉस्पिटल का मालिक
\r\n\r\nबागपत जिले का रहने वाला संदीप इस पूरे गाजियाबाद भ्रूण लिंग जांच रैकेट का मुख्य सरगना था। वह लोनी के बंथला क्षेत्र में साईं हॉस्पिटल नाम से एक अस्पताल चलाता था। हैरानी की बात यह है कि वह मात्र 12वीं पास है और एक झोलाछाप डॉक्टर के रूप में काम कर रहा था। संदीप ने पुलिस को बताया कि दिल्ली में एक डॉक्टर के साथ कंपाउंडर के रूप में काम करते हुए उसने यह अवैध काम सीखा था। संदीप का आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है और वह जनवरी 2025 में भी भ्रूण लिंग परीक्षण के एक मामले में जेल जा चुका है। जिम्मेदारी: पूरे नेटवर्क का संचालन करना, महिलाओं से सीधे फीस तय करना, जांच और गर्भपात की व्यवस्था करना, और अपने अस्पताल व कार के जरिए अबॉर्शन की प्रक्रिया को अंजाम देना।
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2. तस्लीम उर्फ साहिल (48): मुख्य एजेंट
\r\n\r\nबुलंदशहर का रहने वाला तस्लीम इस गिरोह का मुख्य एजेंट था, जिसका काम महिलाओं को गैंग तक पहुंचाना था। जिम्मेदारी: भ्रूण लिंग जांच कराने की इच्छुक महिलाओं से संपर्क साधना। इसके लिए वह पुराने मरीजों के नेटवर्क का इस्तेमाल करता था। हर नई महिला को गैंग तक लाने पर उसे 2 हजार रुपए का कमीशन मिलता था।
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3. शाहिद अहमद (46): दूसरा एजेंट
\r\n\r\nगाजियाबाद का ही रहने वाला शाहिद भी तस्लीम की तरह एजेंट का काम करता था और नेटवर्क तैयार करने में माहिर था। जिम्मेदारी: महिलाओं को मानसिक रूप से इस अवैध काम के लिए तैयार करना और उन्हें जांच के लिए तय किए गए स्थान तक सुरक्षित पहुंचाना। इसे भी हर केस पर 2 हजार रुपए कमीशन के रूप में दिए जाते थे।
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4. सलमान (26): कार में अल्ट्रासाउंड करने वाला एक्सपर्ट
\r\n\r\nहापुड़ का रहने वाला सलमान इस गैंग का तकनीकी हाथ था। वह पहले एक अल्ट्रासाउंड सेंटर में काम कर चुका था, जहां उसने मशीन चलाना सीखा था। वहीं उसकी मुलाकात संदीप से हुई थी और पिछले दो साल से वह इस गैंग से जुड़ा था। जिम्मेदारी: अर्टिगा कार के अंदर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन सेट करना और उसे चलाना। चलती कार या सुनसान जगह पर कार खड़ी करके भ्रूण का लिंग परीक्षण करना और जांच की रिपोर्ट सीधे सरगना संदीप को देना।
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1 साल में 500 जांच और 100 से ज्यादा अबॉर्शन का काला सच
\r\n\r\nपुलिस की जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। आरोपियों ने अपना जुर्म कबूलते हुए पुलिस को बताया कि उन्होंने पिछले एक ही साल में दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बागपत और बुलंदशहर समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में अपना जाल फैला रखा था। इस दौरान उन्होंने करीब 500 महिलाओं का भ्रूण लिंग परीक्षण किया। इनमें से जिन मामलों में भ्रूण कन्या का निकला, उनमें से 100 से अधिक महिलाओं का साईं अस्पताल में ले जाकर अवैध तरीके से गर्भपात (Abortion) करा दिया गया।
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पीसीपीएनडीटी एक्ट (PCPNDT Act) के तहत भारत में भ्रूण के लिंग की जांच करना और कन्या भ्रूण हत्या एक गंभीर अपराध है। इसके बावजूद, स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे यह गोरखधंधा इतनी बड़ी संख्या में फलता-फूलता रहा, जो प्रशासनिक तंत्र की बड़ी नाकामी की ओर भी इशारा करता है। (External link: source URL)
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ऐसे पुलिस के हत्थे चढ़ा यह शातिर गैंग
\r\n\r\nइस गिरोह का पर्दाफाश तब हुआ जब शनिवार को मुखबिर तंत्र ने पुलिस को सटीक सूचना दी। पुलिस के मुताबिक, शनिवार के दिन गैंग ने 2 महिलाओं का भ्रूण लिंग परीक्षण सफलतापूर्वक कर लिया था। इसके बाद चारों आरोपी अपनी अर्टिगा कार में गाजियाबाद के महामाया स्टेडियम फ्लाईओवर के पास एक अन्य महिला (ग्राहक) का इंतजार कर रहे थे।
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इसी दौरान पुलिस ने घेराबंदी करके अचानक छापा मारा और कार में बैठे चारों आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान मौके से वह पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, अबॉर्शन में इस्तेमाल होने वाले अन्य मेडिकल उपकरण और वारदात में प्रयुक्त अर्टिगा कार बरामद कर ली गई।
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गाजियाबाद पुलिस की यह कार्रवाई कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह गाजियाबाद भ्रूण लिंग जांच रैकेट समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका था। चंद रुपयों के लालच में मासूम जिंदगियों को कोख में ही खत्म करने वाले इस झोलाछाप डॉक्टर और उसके गैंग की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि अपराध चाहे कितने भी शातिर तरीके से किया जाए, एक न एक दिन वह कानून की पकड़ में आ ही जाता है। अब पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस रैकेट में स्वास्थ्य विभाग का कोई कर्मचारी या अन्य बड़े अस्पताल तो शामिल नहीं हैं। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में सख्त से सख्त सजा का प्रावधान सुनिश्चित करे ताकि भविष्य में कोई ऐसा घिनौना कृत्य करने की हिम्मत न कर सके।