खबरीलाल डेस्क
लखनऊ (उत्तर प्रदेश): सरकारी नौकरी या सरकारी विभागों में रोजगार की तलाश कर रहे उत्तर प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने बसों के संचालन को और अधिक मजबूत तथा पारदर्शी बनाने के लिए कंडक्टरों (परिचालकों) की भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​लंबे समय से आउटसोर्सिंग (Outsourcing) के माध्यम से हो रही भर्तियों को लेकर उठ रहे सवालों और कर्मचारियों की कमी को देखते हुए, यूपी सरकार ने अब सीधे तौर पर संविदा (Direct Contract) के आधार पर परिचालकों की भर्ती करने को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले से न केवल निगम के राजस्व में पारदर्शिता आएगी, बल्कि प्रदेश के युवाओं को सीधा रोजगार भी मिलेगा।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​शासन ने जारी किया आदेश: सीधे अनुबंध-पत्र पर होगी नियुक्ति

\r\n\r\n
​भर्ती प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में शासन ने त्वरित कदम उठाए हैं।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
इस महत्वपूर्ण निर्णय के संबंध में संयुक्त सचिव राजेंद्र कुमार ने 21 अगस्त को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक (MD) को एक आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    महिला परिचालकों की तर्ज पर भर्ती: इस पत्र में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि जिस प्रकार पूर्व में महिला परिचालकों (Female Conductors) को सीधे निगम के साथ संविदा पर रखा गया था, ठीक उसी तर्ज पर अब पुरुष परिचालकों की भी सीधे अनुबंध-पत्र के आधार पर भर्ती की जाएगी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अधिकारियों को भेजी गई कॉपी: यह शासनादेश परिवहन विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों और परिवहन मंत्री के कार्यालय को भी सूचनार्थ भेज दिया गया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो कागजी कार्यवाही पूरी हो चुकी है और जल्द ही भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन (Notification) जारी किया जा सकता है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n
\r\n\r\n

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? आउटसोर्सिंग से क्या थी समस्या?

\r\n\r\n
​यूपी रोडवेज की बसें प्रदेश की लाइफलाइन मानी जाती हैं, लेकिन पिछले काफी समय से परिवहन निगम भयंकर स्टाफ की कमी से जूझ रहा था।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    बसों के संचालन में बाधा: परिचालकों (कंडक्टरों) की भारी कमी के कारण डिपो में बसें खड़ी रह जाती थीं और कई महत्वपूर्ण रूटों पर बसों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। इससे यात्रियों को परेशानी होती थी और निगम को आर्थिक नुकसान।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    जवाबदेही की कमी: रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय महामंत्री गिरीश चंद्र मिश्रा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए बताया कि परिवहन निगम में एक परिचालक (Conductor) का कार्य अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। परिचालक सीधे जनता से नकद (Cash) इकट्ठा करके उसे निगम के खजाने में जमा करता है। आउटसोर्सिंग के जरिए आए कर्मचारियों की सीधी जवाबदेही निगम के प्रति कम होती थी। इसलिए, इस पद पर निगम के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी कर्मचारी की नियुक्ति होना बेहद जरूरी था।
    \r\n
  4. \r\n
\r\n\r\n
\r\n\r\n
परिषद की लंबे समय से यह मांग थी कि पुरुष परिचालकों को भी महिला परिचालकों की तरह ही आउटसोर्सिंग (थर्ड-पार्टी एजेंसी) के बजाय सीधे निगम के पे-रोल या संविदा पर रखा जाए। सरकार के इस कदम से अब यह मांग पूरी हो गई है।
\r\n\r\n
\r\n\r\n

युवाओं के लिए रोजगार का सुनहरा अवसर

\r\n\r\n
​उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा रहा है। परिवहन निगम द्वारा आउटसोर्सिंग को हटाकर सीधे संविदा पर भर्ती करने के इस फैसले से राज्य के युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा:
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    एजेंसियों का कमीशन खत्म: आउटसोर्सिंग में थर्ड-पार्टी कंपनियां युवाओं के वेतन का एक हिस्सा कमीशन के रूप में काट लेती थीं। सीधे संविदा होने से कर्मचारियों को पूरा मानदेय मिलेगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    नौकरी की सुरक्षा: निगम के साथ सीधा अनुबंध होने से कर्मचारियों में नौकरी की सुरक्षा (Job Security) का भाव रहेगा और वे पूरी ईमानदारी व लगन के साथ अपनी सेवाएं दे सकेंगे।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n
\r\n\r\n

परिवहन विभाग का एक और बड़ा कदम: एग्रीगेटर सेवाओं के लिए 'upmyfleet.com' पोर्टल लॉन्च

\r\n\r\n
​भर्ती प्रक्रिया को दुरुस्त करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग तकनीकी मोर्चे पर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। शुक्रवार को परिवहन आयुक्त कार्यालय में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए एग्रीगेटर कंपनियों (जैसे ओला, उबर आदि) के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया गया।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​बैठक और लाइव डेमो के मुख्य बिंदु:

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    अध्यक्षता: यह बैठक परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    उपस्थिति: बैठक में उत्तर प्रदेश में एग्रीगेटर के रूप में कार्यरत विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि और एनसीआर (NCR) व लखनऊ के वरिष्ठ विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    पोर्टल का लाइव डेमो: बैठक के दौरान डेवलपर टीम ने ऑनलाइन एप्लीकेशन के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए पोर्टल upmyfleet.com का लाइव डेमो (Live Demo) दिया।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सफल परीक्षण: परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने जानकारी दी कि इस नए पोर्टल पर ऑनलाइन माध्यम से एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए एक आवेदन सफलतापूर्वक पंजीकृत (Registered) भी हो चुका है, और पोर्टल बिना किसी तकनीकी बाधा के सुचारू रूप से काम कर रहा है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​4 दिन का अल्टीमेटम

\r\n\r\n
​परिवहन आयुक्त ने बैठक में उपस्थित सभी एग्रीगेटर कंपनियों के प्रतिनिधियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बिना किसी देरी के अगले चार दिन के अंदर इस पोर्टल के माध्यम से अपनी आवेदन प्रक्रिया (Application Process) को पूरा कर लें। यह कदम प्रदेश में चल रही कैब और एग्रीगेटर सेवाओं को पूरी तरह से कानूनी और पारदर्शी ढांचे के तहत लाने के लिए उठाया गया है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​परिवहन व्यवस्था में सुधार की दोहरी पहल

\r\n\r\n
​उत्तर प्रदेश सरकार और परिवहन निगम (UPSRTC) द्वारा लिए गए ये दोनों फैसले—कंडक्टरों की सीधे संविदा पर भर्ती और एग्रीगेटर्स के लिए ऑनलाइन पोर्टल—प्रदेश की परिवहन व्यवस्था की तस्वीर बदलने वाले हैं। एक ओर जहां हजारों युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार मिलेगा और बसों का संचालन सुधरेगा, वहीं दूसरी ओर डिजिटल पोर्टल से टैक्सी और कैब सेवाओं की मॉनिटरिंग आसान होगी। यह प्रदेश के विकास और सुशासन की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है।