खबरीलाल डेस्क
बदायूं (क्राइम एवं सोशल इंसिडेंट डेस्क): जीवन और मृत्यु का रहस्य कोई नहीं जान सकता। इंसान अपने आने वाले कल के लिए हजारों सपने बुनता है, लेकिन पलक झपकते ही तकदीर सब कुछ खत्म कर देती है। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बदायूं जिले के उघैती थाना क्षेत्र से एक ऐसी ही रुला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक घर जहां नई बहू के कदम पड़ने से खुशियों का सैलाब आया हुआ था, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और मातम का अंधेरा है।READ ALSO:-छात्र शक्ति के आगे झुकी सरकार! केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा; कहा— 'राष्ट्र विरोधी ताकतें स्थिति का फायदा न उठाएं'
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सुहागरात (First Wedding Night), जो किसी भी नवदंपति के जीवन का सबसे हसीन पल होता है, वह बबलू मौर्य और उसकी नई नवेली दुल्हन रश्मि के लिए मौत की एक खौफनाक रात बन गया। आइए विस्तार से जानते हैं कि उस मनहूस रात आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने दो परिवारों की खुशियों को हमेशा के लिए मातम में बदल दिया।
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धूमधाम से गई थी बारात, हर चेहरे पर थी खुशी

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जानकारी के अनुसार, उघैती थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रियोनाई गांव के निवासी बबलू मौर्य की शादी संभल जिले के गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के लौहरपुरा गांव की रहने वाली रश्मि के साथ तय हुई थी। बुधवार के दिन बबलू पूरे गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और दोस्तों-रिश्तेदारों के साथ अपनी बारात लेकर लौहरपुरा गांव गया था। शादी के हर मंडप में उल्लास था, दोनों परिवारों ने बड़े ही अरमानों के साथ वर-वधू को आशीर्वाद दिया। सात फेरों की रस्में खुशी-खुशी पूरी हुईं और बबलू अपनी दुल्हन रश्मि को लेकर सपनों के नए सफर पर निकल पड़ा।
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गुरुवार दोपहर जब बबलू अपनी दुल्हन रश्मि की विदाई कराकर अपने गांव रियोनाई लौटा, तो परिजनों और रिश्तेदारों ने नई बहू का जोरदार स्वागत किया। दिनभर घर में मंगल गीत गाए गए, महिलाओं ने द्वार-रुकाई से लेकर मुंह-दिखाई तक की सभी रस्में पूरे उत्साह के साथ निभाईं। घर में मिठाइयां बंट रही थीं और हर तरफ सिर्फ हंसी-ठिठोली का माहौल था।
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मौत बनकर रेंगता हुआ आया 'काल'

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भारतीय ग्रामीण परंपराओं के अनुसार, शादी के बाद पहली रात यानी सुहागरात को नवदंपति के लिए कमरे में जमीन पर बिस्तर लगाकर सोने की रस्म निभाई जाती है। बबलू और रश्मि के लिए भी परिवार वालों ने जमीन पर ही बिस्तर लगाया था।
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रात के समय जब घर के सभी लोग दिनभर की थकान के बाद गहरी नींद में सो रहे थे, तभी किस्मत ने अपना क्रूर खेल खेला। अंधेरे का फायदा उठाते हुए एक बेहद जहरीला सांप (Venomous Snake) कमरे में घुस आया। सोते समय उस जहरीले सांप ने बबलू की गर्दन पर डस लिया।
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जैसे ही सांप ने डसा, बबलू की नींद टूट गई और उसे भयंकर दर्द का अहसास हुआ। उसने तुरंत अपने परिजनों को जगाया। जब तक परिवार वाले कुछ समझ पाते, जहर बबलू के शरीर में तेजी से फैलने लगा था। उसकी हालत बिगड़ने लगी और मुंह से झाग आने लगा। जिस दुल्हन ने कुछ घंटे पहले ही अपने पति के साथ जिंदगी भर साथ निभाने की कसमें खाई थीं, वह खौफ से कांपने लगी।
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अस्पताल में मृत घोषित, खुशियां मातम में तब्दील

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बबलू की बिगड़ती हालत देखकर परिजनों में हड़कंप मच गया। अफरा-तफरी के माहौल में वे उसे तुरंत सहसवान के एक निजी अस्पताल लेकर भागे। वहां के डॉक्टरों ने बबलू की गंभीर हालत को देखते हुए उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज (Government Medical College) ले जाने की सलाह दी।
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बदहवास परिजन उसे लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने गहन परीक्षण के बाद बबलू को 'मृत घोषित' (Brought Dead) कर दिया। डॉक्टरों की यह बात सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस बेटे के सिर पर कल सेहरा सजा था, आज उसकी लाश उनके सामने पड़ी थी।
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अंधविश्वास का खेल: मौत के बाद भी तांत्रिकों के चक्कर

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इस पूरी घटना का सबसे त्रासद और हैरान करने वाला पहलू इसके बाद शुरू हुआ। बबलू के माता-पिता और परिजन इस कड़वे सच को स्वीकार करने के लिए कतई तैयार नहीं थे कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।
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डॉक्टरों द्वारा स्पष्ट रूप से मृत घोषित किए जाने के बावजूद, परिजनों ने डॉक्टरों की बात मानने और शव का पोस्टमार्टम (Post-mortem) कराने से साफ इनकार कर दिया। विज्ञान हार मान चुका था, लेकिन अंधविश्वास (Superstition) अभी भी हावी था।
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सांसें लौट आने की एक झूठी और खोखली आस में, परिजन बबलू के शव को लेकर इलाके के कई तांत्रिकों और सपेरों (Snake Charmers) के पास दर-दर भटकने लगे। देर शाम तक बबलू के मृत शरीर पर झाड़-फूंक का खेल चलता रहा। सपेरे जड़ी-बूटियों और मंत्रों का दावा करते रहे, लेकिन जो जा चुका था, वह भला कैसे लौटता? अंततः हार मानकर परिजनों को नम आंखों से बबलू का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
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छिन गया रश्मि का सुहाग, टूट गईं हाथों की चूड़ियां

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इस घटना में सबसे ज्यादा किसी का दिल टूटा है, तो वह है नई नवेली दुल्हन रश्मि का। रश्मि, जो अपने मायके से हजारों सुनहरे सपने अपनी आंखों में सजाकर ससुराल आई थी, उसकी दुनिया 24 घंटे के भीतर ही उजड़ गई।
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हाथों की मेंहदी का रंग अभी गहरा भी नहीं हुआ था कि उसे अपनी कलाई की चूड़ियां तोड़नी पड़ गईं। जिस लाल जोड़े में वह सजी-धजी इस घर में आई थी, उसी जोड़े में उसे विधवा का संताप झेलना पड़ा। घर की जिन दीवारों पर कल मंगल गीत गूंज रहे थे, वहां अब सिर्फ रश्मि की चीखें और परिजनों की रुलाई सुनाई दे रही है। रियोनाई गांव का हर व्यक्ति इस घटना को सुनकर स्तब्ध है और हर आंख नम है।
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बदायूं की यह घटना इंसान को भीतर तक झकझोर देती है। यह हादसा न केवल जीवन की अनिश्चितता को दर्शाता है, बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास पर भी एक गहरा प्रहार करता है। सांप काटने के मामलों में अक्सर ग्रामीण इलाकों में लोग मेडिकल साइंस से ज्यादा झाड़-फूंक पर भरोसा करते हैं, जिससे कई बार बहुमूल्य समय बर्बाद हो जाता है और जान चली जाती है। यदि समय रहते सही एंटी-वेनम (Anti-venom) मिल जाए, तो जान बचाई जा सकती है। हम बबलू मौर्य को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह रश्मि और उनके परिवार को इस अकल्पनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
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