आज के डिजिटल युग में जहां स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी ठगी के तरीकों को पूरी तरह से हाई-टेक कर लिया है। अब तक अपराधी लॉटरी जीतने, बिजली का बिल कटने, बैंक की केवाईसी (KYC) अपडेट कराने या पार्सल फंसने का झांसा देकर लोगों को ठगते थे। लेकिन अब इन जालसाजों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपना सबसे बड़ा और सुरक्षित हथियार बना लिया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन काम करने वाली देश की प्रमुख साइबर सुरक्षा विंग, नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) ने एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर अलर्ट जारी किया है। इस एडवाइजरी में साफ तौर पर बताया गया है कि कैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स पर 'पोर्न या एडल्ट ऐप्स' के विज्ञापनों के जरिए मासूम यूजर्स के बैंक खातों को मिनटों में खाली किया जा रहा है।READ ALSO:-बिजनौर में अतिक्रमण पर गरजा बुलडोजर: बुल्ला चौराहे पर 'एकतरफा कार्रवाई' का आरोप लगा भारी बवाल, पुलिस ने 3 युवकों को दबोचा
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मनोविज्ञान का खेल: क्यों इस जाल में आसानी से फंस रहे हैं लोग? इस नए साइबर फ्रॉड का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इसमें तकनीक के साथ-साथ मानव मनोविज्ञान (Human Psychology) का भी गहराई से इस्तेमाल किया जा रहा है। साइबर अपराधी जानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति अश्लील या एडल्ट कंटेंट के चक्कर में ठगा जाता है, तो वह शर्मिंदगी और सामाजिक बदनामी के डर से कभी पुलिस या साइबर सेल में शिकायत दर्ज नहीं कराएगा। इसी खामोशी का फायदा उठाकर हैकर्स फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर टारगेटेड स्पॉन्सर्ड विज्ञापन (Sponsored Ads) चलाते हैं। इन विज्ञापनों में लुभावने थंबनेल और एडल्ट कंटेंट का प्रलोभन दिया जाता है। जब कोई यूजर जिज्ञासा या आकर्षण में आकर इन विज्ञापनों पर क्लिक करता है, तो ठगी का यह हाई-टेक चक्रव्यूह शुरू हो जाता है।
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APK फाइल और थर्ड-पार्टी वेबसाइट का डार्क सीक्रेट NCTAU की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही आप फेसबुक या इंस्टाग्राम पर दिखने वाले इन विज्ञापनों पर क्लिक करते हैं, आप सोशल मीडिया ऐप से बाहर निकलकर हैकर्स द्वारा बनाई गई एक फर्जी और खतरनाक बाहरी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं। इस वेबसाइट पर पहुंचते ही आपकी स्क्रीन पर एक आकर्षक पॉप-अप (Pop-up) उभरता है। यह पॉप-अप आपको एडल्ट वीडियो या एक्सक्लूसिव कंटेंट देखने के लिए एक ऐप डाउनलोड करने के लिए उकसाता है। यह ऐप आधिकारिक गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) या एप्पल ऐप स्टोर पर नहीं होता, बल्कि यह एक APK (Android Package Kit) फाइल होती है, जिसे सीधे उसी असुरक्षित वेबसाइट से डाउनलोड कराया जाता है। गूगल हमेशा अनजान सोर्स से ऐप डाउनलोड करने से रोकता है, लेकिन हैकर्स स्क्रीन पर ऐसे निर्देश देते हैं कि यूजर खुद अपने फोन की सुरक्षा सेटिंग्स (Install from Unknown Sources) को बंद करके इस मैलवेयर (Malware) को इंस्टॉल कर लेता है।
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'एक्सेसिबिलिटी परमिशन': वह एक गलती जो आपको कंगाल कर देती है असली हैकिंग ऐप इंस्टॉल होने के बाद शुरू होती है। किसी भी नए ऐप को शुरू करने की जल्दबाजी में यूजर्स अक्सर बिना पढ़े सभी परमिशन्स (Permissions) को 'Allow' (मंजूरी) कर देते हैं। ये खतरनाक ऐप्स आपके कैमरे या माइक से ज्यादा आपकी 'एक्सेसिबिलिटी परमिशन' (Accessibility Permission) पर नज़र गड़ाए बैठे होते हैं।
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एक्सेसिबिलिटी सर्विस मूल रूप से स्मार्टफोन में उन लोगों की सुविधा के लिए दी जाती है जिन्हें देखने या सुनने में शारीरिक अक्षमता होती है। यह सर्विस फोन को स्क्रीन पढ़ने, स्वाइप करने और खुद से टाइप करने की जादुई शक्ति देती है। जैसे ही आप हैकर्स के इस ऐप को एक्सेसिबिलिटी की मंजूरी देते हैं, आपने अनजाने में अपने फोन का पूरा 'रिमोट कंट्रोल' (Remote Control) एक अदृश्य अपराधी के हाथों में सौंप दिया है। यह ऐप अब फोन के बैकग्राउंड में एक प्रेत (Ghost) की तरह काम करता है। यह आपकी बिना मर्जी के बैकग्राउंड में कई अन्य खतरनाक ट्रोजन और वायरस वाले ऐप्स डाउनलोड कर लेता है और आपके पूरे स्मार्टफोन को हैकर्स के सर्वर से जोड़ देता है।
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पलक झपकते ही कैसे खाली होता है बैंक खाता? एक बार रिमोट कंट्रोल मिलने के बाद हैकर्स आपके फोन की हर गतिविधि को लाइव देख सकते हैं। जब भी आप अपने फोन में कोई बैंकिंग ऐप, यूपीआई ऐप (UPI Apps) खोलते हैं या अपना बैंकिंग पासवर्ड, पिन (PIN) दर्ज करते हैं, तो हैकर्स 'की-लॉगर' (Keylogger) और स्क्रीन रिकॉर्डिंग तकनीक के जरिए आपकी हर एक डिटेल चुरा लेते हैं।
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सबसे खौफनाक बात यह है कि हैकर्स खुद ही आपके फोन से आपके बैंक खाते में सेंध लगाते हैं और पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर देते हैं। वित्तीय लेन-देन को पूरा करने के लिए बैंक की तरफ से जो OTP (One Time Password) आता है, यह ऐप उसे खुद ही पढ़ लेता है (Read SMS) और तुरंत उस मैसेज को आपके फोन से हमेशा के लिए डिलीट कर देता है। सारा खेल इतनी सफाई से फोन के बैकग्राउंड में चलता है कि पीड़ित व्यक्ति को इस भारी ठगी की भनक तक नहीं लगती। उसे तब पता चलता है जब वह अचानक अपना बैंक बैलेंस चेक करता है।
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गृह मंत्रालय की ब्लैकलिस्ट: इन 7 ऐप्स को फोन से तुरंत करें डिलीट NCTAU ने गहन जांच के बाद 7 ऐसे मुख्य संदिग्ध ऐप्स की सूची जारी की है, जो इस समय भारतीय यूजर्स को सबसे ज्यादा शिकार बना रहे हैं। सरकार ने सख्त हिदायत दी है कि अगर आपके फोन में इनमें से कोई भी ऐप मौजूद है, तो उसे एक सेकंड की भी देरी किए बिना तुरंत डिलीट (Uninstall) कर दें:
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- \r\n Night Play (नाइट प्ले)\r\n \r\n
- \r\n Rivo (रिवो)\r\n \r\n
- \r\n Nexo (नेक्सो)\r\n \r\n
- \r\n Vixa (विक्सा)\r\n \r\n
- \r\n Vimo (विमो)\r\n \r\n
- \r\n Kyss (किस)\r\n \r\n
- \r\n Reloop (रीलूप)\r\n \r\n
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साइबर सुरक्षा के ब्रह्मास्त्र: कैसे रखें खुद को महफूज? बढ़ते साइबर हमलों के बीच आपकी थोड़ी सी जागरूकता ही आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। सरकार और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने स्मार्टफोन यूजर्स के लिए कुछ बेहद जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन हर किसी को करना चाहिए:
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- \r\n अज्ञात स्रोतों से ऐप्स को कहें 'ना': कभी भी व्हाट्सएप, टेलीग्राम, एसएमएस या किसी सोशल मीडिया विज्ञापन में दिए गए लिंक से कोई APK फाइल डाउनलोड न करें। हमेशा आधिकारिक Google Play Store का ही उपयोग करें।\r\n \r\n
- \r\n Unknown Sources सेटिंग बंद रखें: अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर "Install apps from Unknown Sources" के विकल्प को हमेशा बंद (Off) रखें।\r\n \r\n
- \r\n परमिशन सोच-समझकर दें: किसी भी ऐप को 'Allow' करने से पहले पढ़ें कि वह क्या मांग रहा है। एक वीडियो देखने वाले ऐप को आपके एसएमएस, कॉन्टैक्ट्स या एक्सेसिबिलिटी की कोई जरूरत नहीं होती है।\r\n \r\n
- \r\n विज्ञापनों से सतर्क रहें: सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर स्पॉन्सर्ड विज्ञापन (Sponsored Ads) पर भरोसा न करें, खासकर वे जो लुभावने या एडल्ट कंटेंट का दावा करते हैं।\r\n \r\n
- \r\n एंटी-वायरस और अपडेट: फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम को हमेशा अपडेट रखें और 'Google Play Protect' फीचर को हमेशा एक्टिव रखें।\r\n \r\n
- \r\n तुरंत शिकायत दर्ज करें: यदि आपके साथ किसी भी प्रकार का साइबर फ्रॉड हो जाता है, तो शर्मिंदगी छोड़कर तुरंत एक्शन लें। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। गोल्डन ऑवर (शुरुआती 1-2 घंटे) में शिकायत करने से पैसे वापस मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है।\r\n \r\n