मेरठ: दिल्ली, हरिद्वार और देहरादून को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मेरठ रुड़की हाईवे सिक्स लेन (पुराना NH-58) परियोजना में अब लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस चार लेन हाईवे को छह लेन बनाने की घोषणा एक साल पहले की थी, लेकिन फिलहाल यह परियोजना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के चरण में है, जिसमें ही लगभग छह महीने का समय लगने का अनुमान है।READ ALSO:-दिल्ली-मेरठ RRTS: बोर्ड लगे, स्टेशन तैयार... फिर भी 'नमो भारत' को हरी झंडी का इंतज़ार; क्या 25 दिसंबर को मिलेगी सौगात?
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परतापुर से लेकर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा तक किए जाने वाले इस 80 किलोमीटर के चौड़ीकरण कार्य के लिए अभी लोगों को कम से कम ढाई से तीन साल तक जाम से जूझना पड़ सकता है।
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डीपीआर: परियोजना की नींव में लग रहा है समय

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परियोजना निदेशक, राजकुमार नाहरवाल के अनुसार, मेरठ रुड़की हाईवे सिक्स लेन चौड़ीकरण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। यह डीपीआर मैसर्स एफपी इंडिया प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सर्वे के आधार पर तैयार की जा रही है।
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    डीपीआर समय-सीमा: डीपीआर को मार्च 2026 तक तैयार करके मंत्रालय को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।
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    आगे की प्रक्रिया: डीपीआर की स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया और कार्य आवंटन में करीब एक साल का समय और लग सकता है।
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    निर्माण समय: कार्य आवंटन के बाद इसे पूरा करने के लिए कम से कम डेढ़ साल की समय सीमा निर्धारित की जाएगी।
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इस पूरी प्रक्रिया को क्रम से देखें तो मेरठ रुड़की हाईवे सिक्स लेन परियोजना को पूर्ण होने में अभी ढाई से तीन साल का समय लग सकता है। 
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जाम से राहत के लिए संरचनात्मक बदलाव

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NHAI द्वारा तैयार की जा रही डीपीआर में मौजूदा जाम की समस्या को देखते हुए कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं:
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    एलिवेटेड रोड: परतापुर से सिवाया टोल प्लाजा तक एलिवेटेड रोड (संभावित) का निर्माण किया जा सकता है, जिससे इस अत्यधिक भीड़भाड़ वाले हिस्से में वाहनों की गति बनी रहे।
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  3. \r\n
    मंसूरपुर में विशेष व्यवस्था: मंसूरपुर (Muzaffarnagar) में, जहां चीनी मिल, मार्केट और मेडिकल कॉलेज के कारण अक्सर जाम लगता है, वहां लगभग 1.5 किलोमीटर तक एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। पुराने फ्लाईओवर को भी चौड़ा करके डबल किया जाएगा।
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  5. \r\n
    नए अंडरपास: पूरे मार्ग पर लगभग सभी कट (जंक्शन) को बंद करके 20 नए अंडरपास बनाए जाने की संभावना है, जिससे निर्बाध यातायात सुनिश्चित किया जा सके।
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  7. \r\n
    जमीन अधिग्रहण: चौड़ीकरण के लिए कुछ हिस्सों में जमीन खरीद भी की जानी है, जिससे इस प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लगने की उम्मीद है। 
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डीपीआर में चौड़ीकरण की सटीक लागत और विस्तृत योजना स्पष्ट होगी।
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दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे जल्द खोलने की मांग

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वर्तमान में, दिल्ली से देहरादून/हरिद्वार जाने वाले अधिकांश वाहन मेरठ-रुड़की हाईवे का उपयोग करते हैं, जिससे वीकेंड पर यातायात रेंगने लगता है। इस दबाव को कम करने का एक त्वरित समाधान दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे को जल्द से जल्द खोलना है।
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राजकुमार नाहरवाल (परियोजना निदेशक, NHAI मेरठ क्षेत्र) ने भी स्वीकार किया कि मेरठ रुड़की हाईवे सिक्स लेन पर जाम कम करने के लिए लोगों को दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे (Delhi-Dehradun Greenfield Highway) को जल्द शुरू करने की मांग करनी चाहिए। यह हाईवे शुरू होने से इस मार्ग पर से लगभग 20 हजार से अधिक वाहनों का दबाव कम हो जाएगा। 
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मेरठ रुड़की हाईवे सिक्स लेन चौड़ीकरण परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी पूर्णता में अभी काफी वक्त लगेगा। डीपीआर तैयार करने, मंत्रालय की स्वीकृति, टेंडर और फिर निर्माण कार्य में ढाई से तीन साल का समय लगने की संभावना है। इस दौरान यात्रियों को जाम से राहत दिलाने के लिए दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे को जल्द से जल्द शुरू करना एक आवश्यक और तात्कालिक कदम है।
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