खबरीलाल डेस्क
नोएडा/खबरीलाल डेस्क: भारतीय विमानन क्षेत्र (Indian Aviation Sector) और उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आधिकारिक तौर पर बहुप्रतीक्षित और एशिया के सबसे बड़े 'नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट' (Noida International Airport - Jewar) का उद्घाटन कर इसे देश की जनता को समर्पित कर दिया है।READ ALSO:-सर्राफा बाजार में ऐतिहासिक 'सुनामी': 24 कैरेट सोना ₹1.48 लाख के पार; निवेशकों की चांदी, आम आदमी के छूटे पसीने!
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अब तक, दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR), पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) और आसपास के राज्यों के करोड़ों यात्रियों के पास घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पकड़ने के लिए केवल दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट का ही एकमात्र विकल्प था। IGI तक पहुंचना, विशेषकर गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, हापुड़ और बिजनौर जैसे शहरों से, किसी बुरे सपने से कम नहीं था। घंटों का भयंकर ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और ईंधन की बर्बादी यात्रियों की नियति बन चुकी थी। लेकिन जेवर एयरपोर्ट के संचालन में आने के बाद, अब यात्रियों के पास एक बेहद विश्वस्तरीय, वैकल्पिक और सुगम विकल्प उपलब्ध हो गया है। यह एयरपोर्ट सिर्फ उड़ानों का केंद्र नहीं है, बल्कि यह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की धुरी बदलने वाला एक 'गेम चेंजर' (Game Changer) प्रोजेक्ट है।
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 यह तस्वीर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की है। इससे दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा। ये IGI एयरपोर्ट से करीब 72 किमी दूर है।

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आइए, खबरीलाल की इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में समझते हैं कि जेवर एयरपोर्ट आम जनता के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, यहां तक पहुंचने के साधन क्या हैं, और IGI की तुलना में यह आपकी जेब और समय पर क्या असर डालेगा।
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 नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट 52 स्क्वायर किमी में बनना प्रस्तावित है। पूरा बनने की डेडलाइन 2040 है।

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समय और ईंधन की भारी बचत— IGI के ट्रैफिक जाम से आजादी

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) की सबसे बड़ी खासियत इसकी रणनीतिक लोकेशन (Strategic Location) है। दिल्ली में बढ़ता ट्रैफिक दबाव हमेशा से यात्रियों के लिए सिरदर्द रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दिल्ली के आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट पहुंचने के लिए यात्रियों को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, गाजीपुर बॉर्डर, रिंग रोड और महिपालपुर के रुला देने वाले जाम से होकर गुजरना पड़ता था।
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 एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एंट्री के बाद 20 मिनट से कम समय में बोर्डिंग संभव है। तस्वीर एयरपोर्ट के चेक-इन एरिया की है।

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खासकर दिल्ली एनसीआर (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के यात्रियों के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब काफी सहूलियत भरा साबित होने वाला है। जेवर एयरपोर्ट खुले और चौड़े यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) के ठीक किनारे स्थित है। यहां तक पहुंचने में यात्रियों को न केवल कम समय लगेगा, बल्कि गाड़ियों के ईंधन (Petrol/Diesel) की भी भारी बचत होगी।
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 मंच पर पीएम मोदी ने सीएम योगी के साथ लंबी बातचीत की।

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नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट (Noida Extension) और गाजियाबाद के निवासी अब जेवर एयरपोर्ट से यात्रा करने के लिए बेहद उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। अब उन्हें फ्लाइट पकड़ने के लिए 4-5 घंटे पहले घर से निकलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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जेवर एयरपोर्ट कैसे पहुंचे? (मेट्रो कनेक्टिविटी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सच)

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जब भी कोई नया एयरपोर्ट खुलता है, तो सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि वहां तक पहुंचा कैसे जाए? आम आदमी के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मजबूत होना बेहद जरूरी है।
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वर्तमान मेट्रो कनेक्टिविटी (Metro Connectivity)

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फिलहाल, दिल्ली एनसीआर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के टर्मिनल तक पहुंचने के लिए किसी प्रकार की 'सीधी' मेट्रो सेवा (Direct Metro Line) अभी चालू नहीं हुई है। हालांकि, सरकार और प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक बेहतरीन मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार किया है:
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    रूट: यात्री दिल्ली या नोएडा के किसी भी हिस्से से दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन (Blue Line) या मैजेंटा लाइन (Magenta Line) के जरिए बोटैनिकल गार्डन (Botanical Garden) या नोएडा सेक्टर 35 / नोएडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
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    इलेक्ट्रिक बस सेवा: इन प्रमुख मेट्रो स्टेशनों से उतरने के बाद, जेवर एयरपोर्ट के लिए वातानुकूलित (AC) 'इलेक्ट्रिक बस सेवा' शुरू की गई है। ये आधुनिक बसें यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए सीधे यात्रियों को एयरपोर्ट के प्रस्थान (Departure) टर्मिनल पर उतारेंगी। यह सफर बेहद आरामदायक, प्रदूषण मुक्त और किफायती होगा।
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भविष्य का मास्टरप्लान

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आने वाले समय में ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क से जेवर एयरपोर्ट तक सीधी मेट्रो लाइन और दुनिया की सबसे आधुनिक 'पॉड टैक्सी' (Pod Taxi) सेवा शुरू करने का काम भी तेजी से चल रहा है, जो इस एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को विश्व में सर्वश्रेष्ठ बना देगा।
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टैक्सी से जेवर पहुंचने का पूरा गणित (किराया और समय का तुलनात्मक विश्लेषण)

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अगर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बजाय अपनी निजी कैब या ओला-उबर (Ola/Uber) जैसी टैक्सी सेवाओं का उपयोग करना चाहते हैं, तो हमने दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख इलाकों से IGI और जेवर एयरपोर्ट का एक विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Analysis) तैयार किया है:
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1. नई दिल्ली (कनॉट प्लेस) से जेवर का सफर

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    दूरी: दिल्ली के हृदयस्थल कनॉट प्लेस (Connaught Place) से जेवर एयरपोर्ट की दूरी तकरीबन 80 किलोमीटर है।
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    समय: यहां से यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में तकरीबन 2 घंटे का वक्त लगता है।
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    टैक्सी का किराया: ऐप आधारित टैक्सी (ओला-उबर) से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने में तकरीबन ₹1200 का किराया लगेगा।
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    IGI से तुलना: इसके विपरीत, कनॉट प्लेस से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पहुंचना बहुत आसान है। इसमें मात्र 40-45 मिनट का वक्त लगता है और किराया भी सिर्फ ₹300 से ₹400 के बीच आता है।
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    निष्कर्ष: स्पष्ट रूप से, सेंट्रल और साउथ दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए अभी भी इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) से सफर करना ही समय और पैसे दोनों के लिहाज से ज्यादा आसान और सस्ता विकल्प होगा। जेवर मुख्य रूप से एनसीआर और यूपी के लिए वरदान है।
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2. गाजियाबाद (राजनगर) से जेवर का सफर: एक बड़ी राहत

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    दूरी: गाजियाबाद के पॉश इलाके राजनगर (Rajnagar) से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दूरी तकरीबन 75 किलोमीटर है।
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    समय: इस दूरी को तय करने में तकरीबन 1 घंटे 40 मिनट का वक्त लगेगा।
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    टैक्सी का किराया: टैक्सी के जरिए राजनगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचने में करीब ₹1000 से ₹1300 के बीच किराया लगेगा।
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    IGI से तुलना: राजनगर से IGI एयरपोर्ट की दूरी हालांकि सिर्फ 51 किलोमीटर है, लेकिन दिल्ली के भयंकर जाम (विशेषकर आईटीओ, आश्रम या धौला कुआं) के कारण वहां पहुंचने में अक्सर ढाई से तीन घंटे का वक्त लग जाता है। दिल्ली में कई बार अप्रत्याशित जाम लगने के चलते फ्लाइट छूटने का डर भी बना रहता है।
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    निष्कर्ष: ऐसे में गाजियाबाद, साहिबाबाद, इंदिरापुरम और वैशाली के लोगों के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सफर करना बेहद सहूलियत भरा और तनावमुक्त होगा।
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3. नोएडा एक्सटेंशन (ग्रेटर नोएडा वेस्ट) से जेवर का सफर: सबसे बड़ा फायदा

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    दूरी: नोएडा एक्सटेंशन (जहां लाखों की संख्या में फ्लैट्स और हाउसिंग सोसाइटीज हैं) से जेवर एयरपोर्ट की दूरी तकरीबन 60 किलोमीटर है।
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    समय: यहां से चौड़े रास्तों के कारण जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में महज 1 घंटे 15 मिनट का वक्त लगेगा।
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    टैक्सी का किराया: किराए की बात करें तो नोएडा एक्सटेंशन से जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में टैक्सी में तकरीबन ₹800 का ही किराया लगेगा।
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    IGI से तुलना: नोएडा एक्सटेंशन से IGI एयरपोर्ट पहुंचने में कालिंदी कुंज और आउटर रिंग रोड के जाम के कारण तकरीबन 2 घंटे 20 मिनट का वक्त लगता है और किराया भी ₹1200 से ऊपर जाता है।
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    निष्कर्ष: नोएडा, ग्रेटर नोएडा, और नोएडा एक्सटेंशन के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल समय बचाएगा, बल्कि बेहद किफायती (Cost-effective) भी साबित होगा।
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गेम चेंजर इंफ्रास्ट्रक्चर— गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट अब सिर्फ 45 मिनट में

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इस पूरे एविएशन प्रोजेक्ट को सफल बनाने में सबसे बड़ी भूमिका सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के नए इंफ्रास्ट्रक्चर की है। गाजियाबाद और नोएडा समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से जेवर एयरपोर्ट पहुंचना आने वाले कुछ ही दिनों में 'सुपरफास्ट' हो जाएगा।
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ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) का कमाल: वर्तमान में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (Eastern Peripheral Expressway - KGP) को सीधे यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) से जोड़ने के लिए एक विशाल इंटरचेंज (Interchange) का निर्माण किया जा रहा है।
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    जैसे ही यह इंटरचेंज पूरी तरह से चालू हो जाएगा, गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट की यात्रा का समय सिमट कर सिर्फ 45 मिनट से 1 घंटा रह जाएगा।
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    पश्चिमी यूपी को बंपर फायदा: इसके अलावा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़ और बिजनौर से आने वाले लोग दिल्ली की सीमा में प्रवेश किए बिना ही, सीधे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर चढ़ेंगे और यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए बिना किसी रेड लाइट या जाम के आसानी से जेवर एयरपोर्ट पहुंच जाएंगे। यह पूरे पश्चिमी यूपी के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।
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ग्राउंड रिपोर्ट— स्थानीय निवासियों, उद्यमियों और ट्रैवेल्स संचालकों की राय

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जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन का जमीन पर क्या असर पड़ रहा है, यह जानने के लिए हमारी टीम ने गाजियाबाद और नोएडा के विभिन्न वर्गों से बात की। उनके बयान इस बात की तस्दीक करते हैं कि यह एयरपोर्ट कितनी बड़ी जरूरत था।
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टैक्सी ऑपरेटरों के लिए 'संजीवनी'

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टूर एंड ट्रेवल्स के संचालक दीपक कसाना इस नई शुरुआत से बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने खबरीलाल को बताया:
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"जेवर एयरपोर्ट शुरू होने से पहले ही बुकिंग और पूछताछ को लेकर हमारे पास लगातार कॉल्स आ रहे हैं। कई मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) से भी कॉर्पोरेट टैक्सी लगवाने के लिए कॉल आए हैं। हमारी अपनी टैक्सियां चलती हैं और हम पर्सनल बुकिंग भी लेते हैं। गाजियाबाद से दिल्ली के IGI एयरपोर्ट का किराया पर्सनल बुकिंग के माध्यम से हम ₹1500 लेते हैं। जेवर एयरपोर्ट का किराया भी ₹1500 से ₹2000 के बीच ही रहेगा। अगर कोई बड़ा परिवार सेवन-सीटर (7-Seater) वाहन लेता है, तो उसका किराया ₹2000 से ₹2500 के बीच होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट की तुलना में गाजियाबाद से जेवर जाने में समय की बहुत बचत होगी। IGI जाने में जहां ढाई घंटे लगते थे, जेवर पहुंचने में सिर्फ डेढ़ घंटे का वक्त लगेगा। इससे हमारी गाड़ियों के फेरे बढ़ेंगे और व्यापार में वृद्धि होगी।"
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उद्योग जगत (Industry) में निवेश की बहार

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गाजियाबाद के प्रमुख इंडस्ट्रियलिस्ट (उद्योगपति) अरुण शर्मा ने इस प्रोजेक्ट को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया है। उनके मुताबिक:
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"उत्तर प्रदेश में एशिया का सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होना हमारे लिए गर्व की बात है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ की इंडस्ट्री को सीधा फायदा होगा। हमारे उत्पादों का एक्सपोर्ट (Export) आसान हो जाएगा, क्योंकि यहां एक विशाल कार्गो हब (Cargo Hub) भी बन रहा है। जेवर एयरपोर्ट शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश (FDI) कई गुना बढ़ेगा। पहले विदेशी क्लाइंट्स को गाजियाबाद से दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पहुंचने में ढाई घंटे का वक्त लग जाता था। वर्तमान में ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे को यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ा जा रहा है। इसके बाद 45 मिनट से घंटे भर में गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट पहुंचा जा सकेगा। बिजनेस क्लास के लिए समय ही पैसा है, और यहां समय के साथ-साथ ईंधन की भी भारी बचत होगी।"
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आम नागरिक को मिली 'टेंशन-फ्री' उड़ान

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गाजियाबाद के निवासी और फ्रीक्वेंट फ्लायर (Frequent Flyer) कमलदीप ने एक यात्री के नजरिए से अपनी खुशी जाहिर की:
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"जेवर एयरपोर्ट जाने में जहां एक तरफ हमें कम समय लगेगा, तो वहीं दूसरी तरफ एयरपोर्ट के अंदर अत्याधुनिक तकनीक (DigiYatra आदि) होने के कारण चेक-इन (Check-in) और चेक-आउट (Check-out) का समय भी काफी कम हो जाएगा। दिल्ली एयरपोर्ट तक जाने के लिए दिल्ली के भयंकर जाम से होकर गुजरना पड़ता था। कई बार तो जाम में फंसने के चलते हमारी फ्लाइट छूटने की नौबत आ जाती थी और एयरपोर्ट पहुंचने में बेवजह की मानसिक प्रताड़ना सहनी पड़ती थी। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट से फ्लाइट लेना हम सभी एनसीआर वासियों के लिए काफी सहूलियत भरा और शांतिपूर्ण होगा।"
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यूपी के 'स्वर्णिम युग' का आगाज

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) केवल ईंट, कंक्रीट और कांच की एक इमारत या हवाई पट्टी नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और उत्तर प्रदेश के विकास की नई परिभाषा है। यह एयरपोर्ट दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर बढ़ते असीमित दबाव को कम करेगा और एक शानदार विकल्प प्रदान करेगा।
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जिस तरह से इसके आसपास यमुना अथॉरिटी (YEIDA) द्वारा फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क, और इलेक्ट्रॉनिक सिटी बसाई जा रही है, जेवर आने वाले समय में भारत का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र (Economic Hub) बनने जा रहा है। गाजियाबाद, नोएडा और समूचे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग अब दिल्ली के जाम में घुटने के बजाय, खुले आसमान में अपनी तरक्की की उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जेवर एयरपोर्ट का आज का यह ऐतिहासिक उद्घाटन, निस्संदेह भारत के एविएशन सेक्टर में एक 'नए युग' की शुरुआत है।