मेरठ: शहर के पुराना शहर स्थित 'इस्लामाबाद' मुहल्ले का नाम बदलने की मांग ने अब एक बड़ा राजनीतिक और धार्मिक मुद्दा बन गई है। भाजपा नेता और विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज द्वारा विधान परिषद में उठाई गई इस मांग को अब प्रसिद्ध संत स्वामी रामभद्राचार्य का भी समर्थन मिल गया है। इस मुद्दे ने एक बार फिर शहरों और मोहल्लों के नाम बदलने को लेकर बहस छेड़ दी है।READ ALSO:-मेरठ में इंसानियत शर्मसार: युवक को टक्कर मारी, फिर मदद के बहाने कार में डाला और फ्लाईओवर के पास फेंककर भागा
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नाम बदलने की मांग पर क्या बोले नेता और संत?
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स्वामी रामभद्राचार्य ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भारत में ऐसे नाम नहीं होने चाहिए जो पाकिस्तान से संबंधित हों, क्योंकि यह उस देश के प्रति प्रेम को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से इस मामले पर ध्यान देने की अपील की। वहीं, भाजपा नेता धर्मेंद्र भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति किसी अन्य नाम से नहीं है, बल्कि सिर्फ उन नामों से है जो पाकिस्तान से जुड़े हैं, क्योंकि इस्लामाबाद पाकिस्तान की राजधानी है।
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रामकथा में रामभद्राचार्य का आतंकवाद पर संदेश
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मेरठ में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन, स्वामी रामभद्राचार्य ने इस मंच से कई अन्य महत्वपूर्ण बातें भी कहीं। उन्होंने लक्ष्मण द्वारा सूर्पनखा के नाक-कान काटने के प्रसंग को सुनाते हुए आतंकवाद पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई जाति या लिंग नहीं होता, और ऐसे तत्वों को दंडित करना ही चाहिए। उन्होंने सूर्पनखा को एक "आतंकी महिला" की संज्ञा दी और कहा कि भारत ने हमेशा से ही आतंकवाद का विरोध किया है।
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युवाओं को माता-पिता का सम्मान करने की सीख
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इसके अलावा, रामभद्राचार्य महाराज ने आज के युवाओं को एक अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भले ही आप किसी देवी-देवता की पूजा न करें, लेकिन अपने माता-पिता को अवश्य प्रसन्न रखें। उनका अनादर न करें और न ही उन्हें दुखी करें। उन्होंने कहा कि जब माता-पिता प्रसन्न होते हैं, तो 33 करोड़ देवी-देवता भी आप पर कृपा बरसाते हैं।
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