[मेरठ सिटी ग्राउंड रिपोर्ट]
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मेरठ (12 फरवरी 2026): उत्तर प्रदेश के मेरठ में जहां एक तरफ प्रशासन कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2026) को सकुशल संपन्न कराने के लिए दिन-रात एक किए हुए है, वहीं दूसरी तरफ शहर का दिल कहे जाने वाले बेगमपुल (Begum Pul) पर स्थानीय ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही प्रशासन की मंशा पर पानी फेर रही है।READ ALSO:-कानपुर का 'हाई-प्रोफाइल' ड्रामा: 14 करोड़ की लेम्बोर्गिनी, 6 घायल और रईसजादे का 'रुतबा'— 7 घंटे में मिली जमानत, पुलिस कोर्ट में नहीं दे पाई जवाब
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आज दोपहर की स्थिति ने प्रशासन के उन दावों की पोल खोलकर रख दी है, जिनमें कांवड़ मार्ग को अतिक्रमण मुक्त रखने की बात कही गई थी। बेगमपुल व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष पुनीत शर्मा ने आज जिला अधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को एक पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
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शिकायत में साफ कहा गया है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद, मुख्य चौराहे से महज चंद कदमों की दूरी पर ई-रिक्शों और टेम्पो का ऐसा जमावड़ा है कि कांवड़ियों और आम राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है।
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मुख्य शिकायत: पुलिस चौकी के सामने नियमों की धज्जियां

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पुनीत शर्मा द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, आज (12 फरवरी 2026) दोपहर करीब 01:40 बजे बेगमपुल मुख्य बाजार में सेठ ऊन चौराहे (Seth Oon Chauraha) पर अराजकता का माहौल था।
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    लोकेशन: मुख्य चौराहे से मात्र 50-60 कदम की दूरी।
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    समस्या: ट्रैफिक पुलिस की तैनाती के बावजूद टेम्पो और ई-रिक्शा चालक बीच सड़क पर खड़े होकर सवारियां भर रहे हैं।
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    आरोप: ट्रैफिक पुलिस अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। ऐसा लगता है कि ई-रिक्शा चालकों में पुलिस का कोई खौफ नहीं बचा है।
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कांवड़ यात्रा और हादसे का बढ़ता खतरा

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सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि वर्तमान में कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है। मेरठ का बेगमपुल एक प्रमुख कांवड़ मार्ग है, जहां से हजारों शिवभक्त पवित्र गंगाजल लेकर गुजरते हैं।
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पुनीत शर्मा ने अपने पत्र में एक भयावह तस्वीर पेश की है:

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"आजकल कांवड़ मार्ग होने के कारण दुर्घटना होने की अत्यधिक संभावना है। ई-रिक्शा दो-दो लाइन (Double Lane Parking) बनाकर खड़े हैं और कांवड़ ठीक उनके बराबर से निकल रही है। इस स्थिति में सड़क पर पैदल चलना मुश्किल हो गया है।"
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यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। अगर किसी ई-रिक्शा की टक्कर से किसी कांवड़िए की कांवड़ खंडित होती है या कोई घायल होता है, तो शहर की कानून-व्यवस्था बिगड़ने में देर नहीं लगेगी।
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जाम के झाम में फंसा शहर: तिलक रोड और न्यू मार्केट का बुरा हाल

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सिर्फ बेगमपुल ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े संपर्क मार्ग भी इस अव्यवस्था की चपेट में हैं। शिकायत में बताया गया है कि ई-रिक्शों की अवैध पार्किंग के कारण:
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    तिलक रोड (Tilak Road)
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    न्यू मार्केट (New Market)
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    मुख्य मार्ग (Main Road)
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इन सभी इलाकों में भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है। दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान हैं। एक तरफ जहां कांवड़ यात्रा के चलते रूट डायवर्जन लागू हैं, वहीं बचे-खुचे रास्तों पर ई-रिक्शों का कब्जा आम जनता के सब्र का इम्तिहान ले रहा है।
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5 पॉइंट्स में समझिए पूरा मामला (Case in 5 Points)

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अगर आप इस समस्या की गंभीरता को समझना चाहते हैं, तो इन 5 बिंदुओं पर गौर करें:
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    समय और स्थान: 12 फरवरी 2026, दोपहर 1:40 बजे। स्थान- बेगमपुल, सेठ ऊन चौराहा।
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    पुलिस की भूमिका पर सवाल: ट्रैफिक पुलिस मौके पर मौजूद होती है, लेकिन ई-रिक्शा और टेम्पो वाले उनके सामने ही नियम तोड़ते हैं। इसे पुलिस की मौन सहमति माना जा रहा है।
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    डबल लेन पार्किंग: ई-रिक्शा सड़क के किनारे नहीं, बल्कि सड़क के बीच में दो लाइनें लगाकर खड़े हो रहे हैं, जिससे सड़क की चौड़ाई आधी रह गई है।
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    कांवड़ सुरक्षा से खिलवाड़: कांवड़ियों के निकलने के लिए बेहद संकरा रास्ता बच रहा है। जरा सी चूक से बड़ा हादसा हो सकता है।
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    मांग: बेगमपुल व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष ने 'सार्थक कदम' उठाने की मांग की है ताकि शहर का माहौल खराब न हो।
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5. प्रशासन से सीधी मांग: "कागजी आदेश नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए"

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पुनीत शर्मा ने अपने पत्र के अंत में वरिष्ठ अधिकारियों से विनम्र निवेदन किया है कि इन अनियंत्रित वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए सार्थक कदम (Concrete Steps) उठाए जाएं।
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व्यापारियों का कहना है कि:

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    सिर्फ चालान काटने से काम नहीं चलेगा।
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    बेगमपुल को ई-रिक्शा के लिए 'नो हॉल्ट जोन' (No Halt Zone) सख्ती से लागू करना होगा।
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    कांवड़ यात्रा तक इस क्षेत्र में ई-रिक्शों का प्रवेश नियंत्रित या प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
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क्या जागेगा प्रशासन?

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मेरठ का बेगमपुल शहर का चेहरा है। अगर कांवड़ यात्रा के दौरान यहां कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी स्थानीय ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन की होगी। पूर्व अध्यक्ष पुनीत शर्मा का यह पत्र एक 'अलार्म बेल' है।
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अब देखना यह होगा कि जिला अधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) इस शिकायत पर कितनी जल्दी संज्ञान लेते हैं। क्या पुलिस बेगमपुल को ई-रिक्शा के इस 'चक्रव्यूह' से मुक्त करा पाएगी या फिर कांवड़िए इसी जोखिम के बीच से गुजरने को मजबूर होंगे?
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टेबल: शिकायत का सारांश (Complaint Summary)

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विवरण
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जानकारी
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दिनांक
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12 फरवरी 2026
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शिकायतकर्ता
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पुनीत शर्मा (पूर्व अध्यक्ष, बेगमपुल व्यापार संघ)
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किसे भेजा
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DM और SSP, मेरठ
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स्थान
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बेगमपुल, सेठ ऊन चौराहा
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मुख्य समस्या
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ई-रिक्शा और टेम्पो की अवैध पार्किंग
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खतरा
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कांवड़ यात्रा मार्ग बाधित, दुर्घटना की आशंका
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पुलिस की भूमिका
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आदेश पालन कराने में विफल
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मेरठ में ट्रैफिक व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। महाशिवरात्रि सिर पर है और शहर की सड़कें जाम से कराह रही हैं। ऐसे में बेगम पुल व्यापार संघ द्वारा उठाया गया यह मुद्दा बेहद गंभीर है। अगर समय रहते जिला अधिकारी और एसएसपी ने इस मेरठ बेगम पुल ट्रैफिक जाम का संज्ञान नहीं लिया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर कितनी फुर्ती दिखाता है।
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बेगम पुल व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष पुनीत शर्मा ने मेरठ डीएम और एसएसपी को पत्र लिखकर ट्रैफिक अव्यवस्था की शिकायत की है। आरोप है कि सेठ ऊन चौराहे पर ई-रिक्शा के जमावड़े से कांवड़ यात्रा मार्ग बाधित हो रहा है, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है।
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