प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील ने देश भर के सर्राफा बाजारों (Sarafa Bazar) और आम जनता के बीच एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। पीएम मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को मजबूत करने के उद्देश्य से लोगों से अपील की है कि वे कम से कम एक साल तक नया सोना (New Gold) खरीदने से बचें। भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा आयातक देशों में से एक है और हर साल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ सोना खरीदने में खर्च हो जाता है। इसी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने यह साहसिक अपील की है।
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इस अहम मुद्दे पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े स्वर्ण केंद्रों में से एक, मेरठ के सर्राफा बाजार से मिली-जुली और बेहद सकारात्मक व रचनात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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भगत ज्वेलर्स के संचालक आधार मांगलिक की राय: "देशहित में है फैसला, अपनाएं रीसाइकलिंग का विकल्प"
\r\n\r\nमेरठ के प्रतिष्ठित भगत ज्वेलर्स (Bhagat Jewellers) के संचालक आधार मांगलिक ने प्रधानमंत्री की इस अपील का स्वागत करते हुए इसे पूरी तरह से 'देशहित' में उठाया गया कदम बताया है। उनका मानना है कि इस अपील को नकारात्मक रूप से देखने के बजाय, इसे एक नए अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
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आधार मांगलिक ने एक बेहद व्यावहारिक समाधान पेश करते हुए कहा, "भारतीय घरों की तिजोरियों और लॉकर में बड़ी मात्रा में ऐसा 'डेड गोल्ड' (Dead Gold) या पुरानी ज्वेलरी रखी होती है, जिसका सालों तक इस्तेमाल नहीं होता। या तो उनके डिजाइन पुराने हो चुके हैं या वे सिर्फ निवेश के तौर पर रखे गए हैं। अगर लोग नया सोना खरीदने के बजाय उसी पुराने सोने को एक्सचेंज करें और उसे रीसाइकल कर नए और आधुनिक डिजाइन के आभूषण बनवाएं, तो इससे एक साथ कई फायदे होंगे।"
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पुराने सोने को रीसाइकल करने के 4 बड़े फायदे:
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- \r\n गोल्ड इंपोर्ट में भारी कमी: जब देश के अंदर मौजूद सोने को ही गलाकर नए आभूषण बनाए जाएंगे, तो विदेशों से नया सोना आयात करने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n विदेशी मुद्रा की बचत: सोने का आयात कम होने से देश का बहुमूल्य डॉलर और विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा, जिसका इस्तेमाल देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और विकास कार्यों में किया जा सकेगा।\r\n \r\n
- \r\n कारीगरों को निरंतर रोजगार: रीसाइकलिंग की प्रक्रिया से स्वर्ण कारीगरों (Gold Artisans) का काम बंद नहीं होगा। पुरानी ज्वेलरी को गलाने, नए डिजाइन बनाने और पॉलिश करने से इंडस्ट्री से जुड़े लाखों लोगों का रोजगार सुरक्षित रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n ग्राहकों का फायदा: ग्राहकों को बिना ज्यादा अतिरिक्त पैसा (मेकिंग चार्ज के अलावा) खर्च किए अपनी मनपसंद नई ज्वेलरी मिल जाएगी।\r\n \r\n
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सोना: सिर्फ एक आभूषण नहीं, भविष्य की सबसे मजबूत आर्थिक सुरक्षा
\r\n\r\nआधार मांगलिक ने भारतीय संस्कृति में सोने के गहरे महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में सोना केवल एक आभूषण या दिखावे की वस्तु नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से चली आ रही एक 'आर्थिक सुरक्षा प्रणाली' है। इतिहास गवाह है कि सोने की कीमत समय के साथ लगातार एक अपवर्ड ट्रेंड (Upward Trend) में रही है।
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उन्होंने निवेश के नजरिए से कहा, "आज जो सोना डेढ़ लाख रुपये के आसपास है, आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक स्थितियों के कारण उसकी कीमत और अधिक होने की प्रबल संभावना है। ऐसे में सोना सिर्फ श्रृंगार का साधन नहीं बल्कि भविष्य की गारंटी भी है।" उन्होंने आम लोगों को सलाह दी कि वे अपनी अतिरिक्त और छोटी-छोटी बचत का कुछ हिस्सा सोने (डिजिटल गोल्ड, गोल्ड बॉन्ड या रीसाइकल्ड आभूषण) में धीरे-धीरे निवेश करते रहें। यह महंगाई (Inflation) की दर को मात देने और भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने का सबसे बेहतरीन हथियार है। बाजार पर पीएम की अपील के असर को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। आगामी दिनों में फुटफॉल (Footfall), ग्राहकों के वॉक-इन और बिक्री के ठोस आंकड़ों के बाद ही बाजार की असली तस्वीर साफ हो पाएगी।
\r\n\r\nइंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की चिंताएं: मंदी, GST और युद्ध का साया
\r\n\r\nएक ओर जहां बाजार इस अपील में सकारात्मकता तलाश रहा है, वहीं इंडस्ट्री के सामने कुछ गंभीर चुनौतियां भी मुंह बाए खड़ी हैं। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) प्राइवेट लिमिटेड के मेरठ जोन के डायरेक्टर दिनेश भारद्वाज ने व्यापारिक दृष्टिकोण से अपनी गहरी चिंताएं व्यक्त की हैं।
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दिनेश भारद्वाज ने बताया कि ज्वेलरी इंडस्ट्री (Jewellery Industry) का सफर पिछले तीन-चार सालों से बेहद उतार-चढ़ाव और संघर्ष भरा रहा है। उन्होंने कहा, "सर्राफा बाजार पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रहा है। अगर हम पिछले कुछ वर्षों का आकलन करें, तो पहले नोटबंदी (Demonetization), फिर जीएसटी (GST) के नियमों में लगातार हो रहे बदलावों और जटिलताओं ने व्यापार की कमर तोड़ी है। इसके ऊपर से वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध (रूस-यूक्रेन, इजरायल-हमास आदि) और भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical Tensions) ने सोने की कीमतों को अस्थिर कर दिया है।"
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ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में, दिनेश भारद्वाज का मानना है कि यदि आम ग्राहक प्रधानमंत्री की अपील के बाद नया सोना खरीदना पूरी तरह से बंद कर देते हैं, तो छोटे और मंझोले व्यापारियों के लिए अपना अस्तित्व बचाना मुश्किल हो जाएगा।
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क्या है समाधान? "जरूरत के मुताबिक ही करें खरीदारी"
\r\n\r\nIBJA के डायरेक्टर ने बाजार को पूरी तरह से ठप होने से बचाने के लिए एक मध्यम मार्ग सुझाया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में आकर खरीदारी पूरी तरह से बंद न करें, बल्कि 'जरूरत के मुताबिक' ही खरीदारी करें। शादियों, शगुन या बेहद जरूरी आयोजनों के लिए जितनी आवश्यकता हो, उतना ही बाजार में आएं।
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साथ ही, उन्होंने भी आधार मांगलिक की बात का समर्थन करते हुए सुझाव दिया कि, "ग्राहक नई खरीदारी (Fresh Buying) की बजाय अपनी पुरानी ज्वेलरी को रिसाइकल (Recycle), रिपेयर (Repair) या एक्सचेंज (Exchange) कराने के विकल्प को प्रमुखता दें। इससे ग्राहकों की जेब पर अचानक बोझ नहीं पड़ेगा और सर्राफा व्यापारियों का भी व्यापारिक चक्र (Business Cycle) चलता रहेगा, जिससे दोनों पक्षों को भारी राहत मिलेगी।"
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आसमान छूती कीमतें और बाजार से दूर होता 'मिडिल क्लास'
\r\n\r\nदिनेश भारद्वाज ने एक बेहद कड़वी और जमीनी सच्चाई की ओर भी ध्यान आकर्षित किया—वह है मध्यम वर्ग (Middle Class) का बाजार से धीरे-धीरे बाहर होना। भारतीय ज्वेलरी बाजार का सबसे बड़ा उपभोक्ता हमेशा से मध्यम वर्ग रहा है। लेकिन सोने की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने इस वर्ग की कमर तोड़ दी है।
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उन्होंने आंकड़े देते हुए बताया, "जो सोना कुछ समय पहले तक करीब 90 हजार रुपये (प्रति 10 ग्राम/तोला के हिसाब से या अन्य संबंधित माप में) में आसानी से उपलब्ध हो जाता था, उसकी कीमत आज वैश्विक दबावों के चलते डेढ़ लाख रुपये के स्तर को छू रही है या उसके पार जाने को बेताब है। इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि ने मध्यम वर्ग और उससे नीचे के आय वर्ग वाले कई ग्राहकों को बाजार से लगभग बाहर (Priced Out) कर दिया है।"
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जब मुख्य उपभोक्ता ही महंगाई के कारण बाजार से दूर हो जाएगा, तो उसका सीधा और सबसे गहरा असर ज्वेलरी कारोबार के टर्नओवर पर पड़ना स्वाभाविक है। यही कारण है कि आज ज्वेलर्स की दुकानों पर भीड़ पहले की तुलना में कम नजर आ रही है।
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आगे का रास्ता क्या हो?
\r\n\r\nप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नया सोना न खरीदने की अपील का मूल उद्देश्य भारत के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम करना और रुपए (INR) को मजबूती प्रदान करना है। दूसरी ओर, सर्राफा बाजार देश की अर्थव्यवस्था का एक अहम पहिया है जो लाखों कारीगरों के परिवारों का पेट पालता है।
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ऐसे में 'गोल्ड रीसाइकलिंग' (Gold Recycling) और 'गोल्ड एक्सचेंज' (Gold Exchange) ही वह सुनहरा पुल (Golden Bridge) है जो सरकार की नीति और व्यापारियों की आजीविका, दोनों के बीच संतुलन बना सकता है। अगर देश की जनता अपनी बंद तिजोरियों से पुराना सोना निकालकर बाजार में लाती है, तो न केवल देश का पैसा देश में रहेगा, बल्कि भारत का आभूषण उद्योग बिना आयात के भी नई ऊंचाइयों को छू सकेगा। यह समय एक जिम्मेदार उपभोक्ता बनने का है, जो अपने निवेश को भी सुरक्षित रखे और देश की अर्थव्यवस्था में भी अपना सकारात्मक योगदान दे।
Sabse pehle comment karne wale banein.