संसद में वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। जहां सत्ता पक्ष इसे विकसित भारत की नींव बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। इसी कड़ी में पश्चिम उत्तर प्रदेश में सक्रिय शोषित क्रांति दल (SKD) ने बजट के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है।READ ALSO:-बिजनौर: 'शिक्षा के मंदिर' में मासूमों के कंधों पर सफाई का बोझ, गुरुजी धूप सेकने में व्यस्त – व्यवस्था पर तमाचा जड़ता वायरल वीडियो
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शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत (Ravikant) ने बजट 2026 को "जन विरोधी" (Anti-People) और "पूंजीपरस्त" करार देते हुए इसे आम जनमानस की उम्मीदों पर एक बड़ा कुठाराघात बताया है। पार्टी का कहना है कि सरकार ने एक बार फिर आंकड़ों की बाजीगरी से देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है, जबकि धरातल पर आम आदमी के हाथ खाली रह गए हैं।
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'जन विरोधी' बजट: आम आदमी के सपनों पर पानी
\r\n\r\nबजट पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए एसकेडी प्रमुख रविकांत ने कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाली सरकार ने बजट में मध्यम वर्ग और गरीब जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। उन्होंने कहा कि एक आम भारतीय का जीवन मुख्य रूप से 5 बुनियादी स्तंभों पर टिका होता है:
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- \r\n रोटी (Food Security)\r\n \r\n
- \r\n कपड़ा (Clothing/Basic Needs)\r\n \r\n
- \r\n मकान (Housing)\r\n \r\n
- \r\n दवाई (Healthcare)\r\n \r\n
- \r\n पढ़ाई (Education)\r\n \r\n
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रविकांत ने आरोप लगाया कि इस बजट में इन पांचों क्षेत्रों के लिए कोई भी ठोस और क्रांतिकारी प्रावधान नहीं किया गया है। महंगाई (Inflation) से त्रस्त जनता को उम्मीद थी कि टैक्स स्लैब में बड़ी राहत मिलेगी या खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस नीति आएगी, लेकिन बजट भाषण में केवल हवा-हवाई बातें की गईं।
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पश्चिम उत्तर प्रदेश: फिर मिली 'तारीख पे तारीख' और निराशा
\r\n\r\nशोषित क्रांति दल ने विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश (West Uttar Pradesh) की घोर उपेक्षा पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। रविकांत ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पश्चिम यूपी देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। यह क्षेत्र कृषि, उद्योग और राजस्व (Revenue) में सरकार के खजाने में बड़ा योगदान देता है। लेकिन जब सुविधाएं देने की बात आती है, तो केंद्र सरकार इस क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार करती है।
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रविकांत ने कहा, "पश्चिम यूपी से राजस्व लेने में सरकार सबसे आगे रहती है, लेकिन जब यहां के लोगों के स्वास्थ्य और शिक्षा की बात आती है, तो बजट का झोला खाली निकलता है।"
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स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर बड़ा धोखा
\r\n\r\nशोषित क्रांति दल ने स्वास्थ्य क्षेत्र में पश्चिम उत्तर प्रदेश की अनदेखी को लेकर सरकार पर तीखे सवाल दागे हैं। रविकांत ने बजट में निम्नलिखित सुविधाओं के नदारद होने पर नाराजगी जताई:
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1. एम्स (AIIMS) की मांग फिर अधूरी
\r\n\r\nपश्चिम उत्तर प्रदेश की जनता पिछले एक दशक से मेरठ, बिजनौर या मुरादाबाद मंडल में एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की मांग कर रही है। वर्तमान में, गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए यहां के मरीजों को दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है, जहां पहले से ही भारी भीड़ है। रविकांत ने कहा, "हमें उम्मीद थी कि 2026 के बजट में पश्चिम यूपी को एम्स की सौगात मिलेगी, लेकिन सरकार ने इस मांग को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है।"
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2. कैंसर अस्पताल का अभाव
\r\n\r\nइस क्षेत्र में, विशेषकर गंगा खादर और औद्योगिक इलाकों में कैंसर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। शोषित क्रांति दल का कहना है कि क्षेत्र को एक समर्पित 'कैंसर संस्थान' (Cancer Institute) की सख्त जरूरत थी, लेकिन बजट में इसका कोई जिक्र न होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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3. पीजीआई और आयुर्वेद संस्थान की अनदेखी
\r\n\r\nरविकांत ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए भी क्षेत्र को कोई बड़ा संस्थान (जैसे PGI या राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान) नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या पश्चिम यूपी के लोगों का जीवन सरकार के लिए मायने नहीं रखता? यह क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।"
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किसान और मजदूर: बजट के 'हाशिए' पर
\r\n\r\nभारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है, लेकिन शोषित क्रांति दल के अनुसार, यह बजट पूरी तरह से कॉर्पोरेट जगत को समर्पित है और इसमें किसानों व मजदूरों के लिए कोई जगह नहीं है।
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किसानों के साथ छलावा: रविकांत ने कहा कि सरकार भाषणों में तो 'किसान-किसानी' और 'अन्नदाता' की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन बजट के दस्तावेजों में हकीकत कुछ और है।
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- \r\n MSP की गारंटी नहीं: किसान लंबे समय से एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं, जिस पर बजट ने चुप्पी साध ली है।\r\n \r\n
- \r\n खाद और बीज: खाद और बीज की सब्सिडी और उपलब्धता को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है, जिससे खेती की लागत और बढ़ेगी।\r\n \r\n
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मजदूर वर्ग की उपेक्षा: देश का निर्माण अपने पसीने से करने वाले मजदूर वर्ग को भी इस बजट से निराशा हाथ लगी है। रविकांत ने कहा, "मजदूरों के लिए न तो न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) में कोई सम्मानजनक वृद्धि की गई है और न ही उनकी सामाजिक सुरक्षा (Social Security) और पेंशन के लिए कोई नया फंड बनाया गया है। यह सरकार अमीरों की है, गरीबों की नहीं।"
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शिक्षा: गरीबों को दूर रखने की साजिश?
\r\n\r\nशोषित क्रांति दल ने शिक्षा बजट (Education Budget) पर भी सवाल उठाए हैं। रविकांत का मानना है कि सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए बजट आवंटन "ऊंट के मुंह में जीरे" के समान है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा सरकारी शिक्षा तंत्र को कमजोर करके निजीकरण (Privatization) को बढ़ावा देना है, ताकि गरीब का बच्चा अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाए और केवल अमीरों के बच्चे ही आगे बढ़ सकें।
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सड़कों पर उतरेगा शोषित क्रांति दल
\r\n\r\nअपने बयान के अंत में, शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने केंद्र सरकार को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश की इस उपेक्षा और जन विरोधी नीतियों को पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी।
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रविकांत ने ऐलान किया, "यह बजट केवल निराशा का दस्तावेज नहीं, बल्कि संघर्ष का निमंत्रण है। सरकार की इस वादाखिलाफी के खिलाफ शोषित क्रांति दल जल्द ही सड़कों पर उतरेगा और एक व्यापक आंदोलन छेड़ेगा। जब तक शोषितों, वंचितों, किसानों और मजदूरों को उनका वाजिब हक नहीं मिलता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।"
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केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया देते हुए शोषित क्रांति दल (SKD) ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने आरोप लगाया कि बजट में महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है। विशेष रूप से पश्चिम उत्तर प्रदेश को एम्स, कैंसर अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं न दिए जाने पर उन्होंने भारी नाराजगी जताई है। पार्टी ने इसे किसान और मजदूर विरोधी बताते हुए जल्द ही इसके खिलाफ आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.