मेरठ (Khabreelal): राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में शासन और स्थानीय प्रशासन ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। मेरठ जिले सहित पूरे एनसीआर में 1 अक्टूबर से 'नो पीयूसीसी-नो फ्यूल' (No PUCC-No Fuel) का कड़ा नियम लागू कर दिया गया है। प्रशासन द्वारा जारी किए गए स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी ऐसे वाहन को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जाएगी, जिसके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) मौजूद नहीं होगा। इस नई और सख्त व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए जिले के सभी प्रमुख पेट्रोल पंपों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है।
पेट्रोल पंपों पर लग रहे ANPR कैमरे, 22 पंप अब भी कतार में वाहनों के दस्तावेजों की मैनुअल जांच में होने वाली चूक से बचने के लिए पेट्रोल पंपों पर 'ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' (ANPR) कैमरे लगाए जा रहे हैं। जिला प्रशासन और पूर्ति विभाग ने 30 सितंबर तक की समयसीमा तय करते हुए जिले के सभी पंपों को ये कैमरे स्थापित करने के कड़े निर्देश दिए थे।
आंकड़ों के अनुसार, मेरठ जिले में कुल 225 पेट्रोल पंप संचालित हो रहे हैं। इनमें से 203 पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर (ANPR) कैमरे सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं और उन्होंने काम करना भी शुरू कर दिया है। हालांकि, 22 पेट्रोल पंप अभी भी ऐसे हैं जहां कैमरे लगने का काम पूरा नहीं हो सका है और वे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
तकनीक से कैसे होगी PUCC की सख्त चेकिंग? प्रशासन द्वारा लागू की गई यह पूरी प्रक्रिया स्वचालित (Automatic) होगी।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›कैमरा स्कैनिंग: जैसे ही कोई दुपहिया या चार पहिया वाहन पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाने के लिए पहुंचेगा, वहां लगा एएनपीआर कैमरा तुरंत उसकी नंबर प्लेट को स्कैन कर लेगा।
डेटाबेस से मिलान: नंबर प्लेट स्कैन होते ही सिस्टम उसे सरकारी 'वाहन (Vahan) पोर्टल' के राष्ट्रीय डेटाबेस से जोड़ेगा और वाहन के पीयूसीसी (PUCC) की वर्तमान वैधता की जांच करेगा।
मशीन कर देगी इनकार: यदि वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र वैध पाया जाता है, तो मशीन से ईंधन की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। लेकिन, यदि प्रमाण पत्र की अवधि समाप्त (Invalid) हो चुकी है, तो मशीन पूरी तरह लॉक हो जाएगी और ईंधन देने से साफ मना कर देगी।
मोबाइल ऐप से मैनुअल चेकिंग: जिन 22 पंपों पर अभी कैमरे स्थापित नहीं हुए हैं, वहां पेट्रोल पंप कर्मचारियों के स्मार्टफोन में एक विशेष 'पीयूसीसी ऐप' (PUCC App) इंस्टॉल कराया जा रहा है। कर्मचारी इस ऐप में वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर फीड करके मैनुअली पीयूसीसी की वैधता की जांच करेंगे।
जिला पूर्ति अधिकारी की चेतावनी: निरस्त होगा लाइसेंस इस अभियान को लेकर आपूर्ति विभाग पूरी तरह सख्त रुख अपनाए हुए है। जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि सभी पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे लगाना अनिवार्य शर्त है। उन्होंने सभी संबंधित ऑयल कंपनियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि जो भी पंप संचालक कैमरे लगाने में लापरवाही बरत रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से ईंधन की सप्लाई (पेट्रोल/डीजल आपूर्ति) पूरी तरह रोक दी जाए।
इसके अतिरिक्त, नियमों में यह भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि यदि कोई पेट्रोल पंप बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहन में चोरी-छिपे पेट्रोल या डीजल भरता पकड़ा जाता है, तो उस पंप का फ्यूल सेलिंग लाइसेंस (Fuel Selling License) सीधे तौर पर निरस्त कर दिया जाएगा। हालांकि, प्रशासन ने केवल सीएनजी (CNG) बेचने वाले एक्सक्लूसिव पंपों को इस कड़े नियम से बाहर रखा है।
पंप संचालकों का कड़ा एतराज: "व्यावहारिक नहीं है नियम" प्रशासन की इस भारी सख्ती के बीच पेट्रोल पंप संचालकों ने गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है। सिविल लाइंस स्थित राजलोक पेट्रोल पंप के संचालक संजीव प्रताप सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रदूषण को नियंत्रित करने की सरकार की मंशा का वे सम्मान करते हैं, लेकिन इसे पेट्रोल पंपों के माध्यम से लागू करने का यह तरीका बिल्कुल अव्यावहारिक (Impractical) है।
स्टाफ की कमी और विवादों का डर संजीव प्रताप सिंह ने बताया कि पेट्रोल पंपों पर पहले से ही कर्मचारियों की भारी कमी रहती है। सुबह और शाम के व्यस्त समय (पीक आवर्स) में एक साथ 20 से 25 दोपहिया वाहन पेट्रोल भराने के लिए कतार में खड़े होते हैं। ऐसे में अगर कर्मचारी हर एक वाहन की नंबर प्लेट को ऐप पर डालकर स्कैन करने लगेगा, तो भयंकर जाम लग जाएगा और पीयूसीसी की स्थिति जांचना असंभव हो जाएगा।
'कागजात चेक करना पुलिस का काम है, हमारा नहीं' पंप संचालकों का तर्क है कि सड़क पर चलने वाले किसी भी वाहन के कागजात (RC, Insurance, PUCC) पूरे हैं या नहीं, इसकी जांच करना पूरी तरह से पुलिस, ट्रैफिक विभाग और संबंधित परिवहन प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने पुरानी व्यवस्था की याद दिलाते हुए कहा कि प्रशासन ने पहले भी 'नो हेलमेट, नो पेट्रोल' का नियम थोपने की कोशिश की थी। उस दौरान ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच रोजाना तीखी नोकझोंक और मारपीट की नौबत आती थी। ग्राहकों को ईंधन देने के दौरान वैसे भी छुट्टे पैसों या मात्रा को लेकर विवाद होते रहते हैं। अब यदि पीयूसीसी जांचने की जिम्मेदारी भी पंप के निहत्थे कर्मचारियों पर डाल दी गई, तो पंपों पर कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो जाएगी। पंप संचालकों ने प्रशासन से अपील की है कि जमीनी हकीकत और व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था में जरूरी संशोधन किया जाए।
Sabse pehle comment karne wale banein.