मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली और कानून व्यवस्था को चुनौती देती वारदात सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। शहर के थाना लिसाड़ी गेट क्षेत्र के समर गार्डन में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के पूरे 31 दिन बाद, जिला मजिस्ट्रेट (DM) के विशेष आदेश पर उसकी लाश को कब्र से बाहर निकाला गया है। मायके पक्ष का आरोप है कि उनकी बेटी की ससुराल वालों ने अतिरिक्त दहेज की मांग पूरी न होने पर गला दबाकर और फंदे पर लटकाकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस जघन्य अपराध को छिपाने के लिए पुलिस और मायके वालों को बिना भनक लगे, आनन-फानन में शव को सुपुर्द-ए-खाक (दफना) कर दिया गया और इसे 'हार्ट अटैक' से हुई स्वाभाविक मौत का रंग देने की कोशिश की गई।READ ALSO:-मेरठ में ममता शर्मसार: प्रेम प्रसंग के चक्कर में मां ने 7 महीने के कलेजे के टुकड़े को सुलाया मौत की नींद, पति को दी थी 'नीले ड्रम' कांड दोहराने की धमकी
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अब मौत के एक महीने बाद न्याय की उम्मीद में फॉरेंसिक और प्रशासनिक टीमों की मौजूदगी में शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है, जिससे इस रहस्यमयी मौत के पीछे छिपा असली सच सामने आ सके।
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शादी के 6 साल और दहेज का वो अंतहीन लालच

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यह पूरी दर्दनाक दास्तान परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के अमरसिंहपुर गांव की रहने वाली हिना की है। हिना का निकाह करीब 6 साल पहले लिसाड़ी गेट के समर गार्डन निवासी शोएब (पुत्र शकील) के साथ हुआ था। निकाह के शुरुआती दिनों के बाद से ही हिना की जिंदगी में दहेज के दानव ने दस्तक दे दी थी। मृतका के परिजनों का आरोप है कि हिना को उसके पति शोएब और ससुराल के अन्य सदस्य लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।
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ससुराल पक्ष की मांगें लगातार बढ़ती जा रही थीं। हिना के भाई मोहम्मद असलम के अनुसार, हाल के दिनों में ससुराल वाले एक सोने की चेन, एक नई मोटरसाइकिल और डबल बेड जैसी अतिरिक्त चीजों की मांग कर रहे थे। गरीब मायके पक्ष के लिए इन मांगों को तुरंत पूरा करना मुमकिन नहीं था, और यही लाचारी हिना के लिए काल बन गई।
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"अम्मी, ये मुझे मार डालेंगे..." — मौत से ठीक एक दिन पहले की वो आखिरी चीख

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इस घटना का सबसे भावुक और डरावना पहलू वह फोन कॉल है, जो हिना ने अपनी मौत से ठीक एक दिन पहले, यानी 8 मई को अपनी मां रुखसाना को किया था। हिना ने फोन पर रोते और बिलखते हुए अपनी मां से कहा था कि ससुराल वालों के हौसले बेहद बढ़ चुके हैं। अगर जल्द ही उनकी मांगी गई चीजें नहीं दी गईं, तो वे उसे जान से मार डालेंगे।
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एक बेबस मां अपनी बेटी को ढांढस बंधा ही रही थी कि अगले ही दिन, 9 मई को समर गार्डन से मायके वालों के पास एक फोन आया। फोन पर ससुराल वालों ने बेहद ठंडे लहजे में सूचना दी कि हिना को अचानक दिल का दौरा (HART ATTACK) पड़ा है और उसकी मौत हो गई है।
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कमरे का मंजर और मुड़े हुए पंखे की पंखुड़ियां: हत्या की गवाही

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हिना की मौत की खबर सुनते ही जब भाई मोहम्मद असलम और मां रुखसाना बदहवास हालत में समर गार्डन पहुंचे, तो ससुराल वालों का व्यवहार पूरी तरह बदला हुआ था। मायके पक्ष का आरोप है कि शुरुआत में उन्हें हिना का चेहरा देखने से भी रोका गया और शव के पास जाने नहीं दिया जा रहा था। जब मायके वालों ने हंगामा किया और भारी दबाव बनाया, तब जाकर उन्हें शव देखने की अनुमति मिली।
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जब परिजनों ने हिना के पार्थिव शरीर को देखा, तो उनके होश उड़ गए:

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    हिना के गले पर गहरे नीले रंग के निशान थे, जो साफ तौर पर गला घोंटने या फंदा कसने की ओर इशारा कर रहे थे।
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    उसके सीने और शरीर के अन्य हिस्सों पर खरोंचों और गहरी चोटों के निशान मौजूद थे।
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    सबसे बड़ा सबूत उस कमरे में मौजूद था, जहाँ हिना की लाश मिली थी। कमरे में लगे सीलिंग फैन (छत के पंखे) की पंखुड़ियां नीचे की तरफ बुरी तरह मुड़ी हुई थीं।
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मुड़े हुए पंखे को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता था कि हिना के साथ पहले कमरे में भयंकर मारपीट की गई और फिर उसे फंदे पर लटकाने की कोशिश की गई, जिसके वजन से पंखे की पंखुड़ियां मुड़ गईं।
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सबूत मिटाने के लिए आनन-फानन में दफनाया शव; 17 दिनों तक सोती रही पुलिस

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मायके वालों के विरोध और चोट के निशानों के बावजूद, ससुराल पक्ष ने स्थानीय रसूख और दबाव का इस्तेमाल कर पुलिस को सूचना दिए बिना ही शव को आनन-फानन में स्थानीय कब्रिस्तान में दफना दिया। इसके बाद पीड़ित परिवार अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए लिसाड़ी गेट थाने के चक्कर काटता रहा। आरोप है कि घटना के 17 दिनों बाद तक स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
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अपनी बेटी को खो चुकी मां रुखसाना ने हार नहीं मानी। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मेरठ के दफ्तर में जाकर न्याय की गुहार लगाई और रो-रोकर अपनी बेटी के साथ हुई बर्बरता की दास्तान सुनाई। एसएसपी ने मामले की गंभीरता और परिजनों के पास मौजूद डिजिटल व अन्य साक्ष्यों को देखते हुए तुरंत लिसाड़ी गेट पुलिस को मुकदमा दर्ज करने और विधिक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए।
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इन 6 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा; भाई ने कहा 'सिर्फ इंसाफ चाहिए'

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पीड़ित परिवार की तहरीर और एसएसपी के आदेश पर लिसाड़ी गेट पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत दहेज हत्या और साक्ष्य मिटाने का संगीन मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में मृतका के भाई मोहम्मद असलम ने हिना के ससुराल के 6 लोगों को नामजद किया है:
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    शोएब (पति)
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    शकील (ससुर)
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  4. \r\n
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    जावेद (जेठ)
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  6. \r\n
  7. \r\n
    फिरोज (जेठ)
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  8. \r\n
  9. \r\n
    आयशा (ननद)
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  10. \r\n
  11. \r\n
    कौसर (ननद)
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  12. \r\n
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मोहम्मद असलम ने मीडिया के सामने रोते हुए कहा, "मेरी बहन को इन सबने मिलकर साजिशन मारा है। पहले उसे प्रताड़ित किया, फिर फांसी पर लटकाया और जब हम पहुंचे तो झूठ बोला कि हार्ट अटैक आया है। हमें उत्तर प्रदेश सरकार और कानून पर पूरा भरोसा है, हमें सिर्फ और सिर्फ इंसाफ चाहिए और मेरी बहन के कातिलों को फांसी होनी चाहिए।"
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31 दिन बाद प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में खोदी गई कब्र

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दहेज हत्या के मामले में मौत का वास्तविक कारण जानने के लिए शव का पोस्टमॉर्टम होना अनिवार्य था, लेकिन शव पहले ही दफनाया जा चुका था। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने जिला मजिस्ट्रेट मेरठ से शव को कब्र से निकालने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के बाद, क्षेत्र के सीओ (कर्कटनगर/कोतवाली) अभिषेक पटेल और प्रशासनिक मजिस्ट्रेट की देखरेख में भारी पुलिस बल समर गार्डन के कब्रिस्तान पहुंचा।
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कब्रिस्तान की घेराबंदी कर पूरे सम्मान और विधिक प्रक्रिया के साथ हिना के शव को मौत के ठीक 31 दिन बाद कब्र से बाहर निकाला गया। एक महीने का समय बीत जाने के कारण शव की स्थिति संवेदनशील थी, इसलिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की देखरेख में पंचनामा भरकर शव को तुरंत पोस्टमॉर्टम हाउस भेजा गया है।
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सीओ अभिषेक पटेल का आधिकारिक बयान

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मामले की जानकारी देते हुए सीओ कोतवाली अभिषेक पटेल ने बताया, "जिला मजिस्ट्रेट मेरठ के वैधानिक आदेशों के अनुपालन में लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक महिला के शव को कब्र से निकलवाकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। मृतका की मां रुखसाना की तहरीर पर पहले ही संबंधित थाने में दहेज हत्या का मुकदमा पंजीकृत किया जा चुका है। परिजनों का आरोप है कि महिला की हत्या की गई थी और बिना किसी कानूनी सूचना के शव को दफनाया गया था। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट और डॉक्टरों के पैनल के निष्कर्षों के आधार पर अग्रिम वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सभी नामजद आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।"
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समाज और कानून के लिए एक बड़ा सवाल

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मेरठ की यह घटना दिल को दहला देने वाली तो है ही, साथ ही यह हमारे समाज के उस कुरूप चेहरे को भी उजागर करती है जहाँ शादी के 6 साल बीत जाने और बच्चे हो जाने के बाद भी चंद रुपयों और सामान के लिए एक हंसती-खेलती बेटी को मौत के घाट उतार दिया जाता है। इस मामले में पुलिस की शुरुआती शिथिलता भी जांच का विषय है कि आखिर बिना पुलिस पंचनामे के एक संदिग्ध शव को शहर के बीचों-बीच कैसे दफना दिया गया?
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फिलहाल, हिना का शव डॉक्टरों के पैनल के सामने है। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आते ही यह साफ हो जाएगा कि हिना की मौत दम घुटने से हुई थी या जहर देने से, जिसके बाद पुलिस फरार चल रहे आरोपियों की धरपकड़ शुरू करेगी। मेरठ की जनता और पीड़ित परिवार अब कानून की ओर देख रहा है कि हिना की रूह को न्याय कब मिलेगा।
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