खबरीलाल विशेष रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में पुलिस और स्वाट (SWAT) टीम ने एक ऐसे हाई-टेक और अंतरराष्ट्रीय चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसकी कार्यप्रणाली सुनकर बड़े-बड़े साइबर और सुरक्षा विशेषज्ञ भी हैरान हैं। यह गैंग कोई आम चोरी नहीं करता था, बल्कि सीधे मोबाइल नेटवर्क कंपनियों (Airtel और Jio) की रीढ़ पर वार करता था। इस शातिर गिरोह ने पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश तक के मोबाइल टावरों को अपना निशाना बनाया और वहां से करोड़ों रुपये के बेस बैंड यूनिट (BBU) चुरा लिए।READ ALSO:-पेट्रोल पंपों पर अब मिलेगा केरोसिन: मिडिल ईस्ट की जंग के बीच मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, जानें आम आदमी पर क्या होगा असर?
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मेरठ पुलिस ने लोहियानगर थाना क्षेत्र की जाकिर कॉलोनी में छापेमारी कर इस अंतरराष्ट्रीय गैंग के एक अहम गुर्गे को गिरफ्तार किया है। बरामद किए गए उपकरणों की कीमत 15 करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि चोरी किए गए इन बेहद संवेदनशील उपकरणों की सप्लाई चीन (China) सहित कई अन्य देशों में की जा रही थी। इस खुलासे के बाद खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं और इस पूरे नेटवर्क के 'देशद्रोही' कनेक्शन की जांच की जा रही है।
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आइए, इस पूरी सनसनीखेज वारदात, पुलिस के ऑपरेशन और चोरों के इस हाई-टेक 'मोडस ऑपरेंडी' (Modus Operandi) को विस्तार से समझते हैं।
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ऑपरेशन 'लोहियानगर': 15 करोड़ के उपकरणों के साथ रंगे हाथ गिरफ्तारी
\r\n\r\nमेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पाण्डेय ने इस पूरी कार्रवाई का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस को पिछले काफी समय से एक ऐसे संगठित गिरोह के सक्रिय होने की खुफिया जानकारी मिल रही थी, जो टेलीकॉम कंपनियों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।
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- \r\n मुखबिर तंत्र और स्वाट टीम का एक्शन: जैसे ही पुलिस को पुख्ता इनपुट मिला कि गिरोह का एक मुख्य सदस्य मेरठ के लोहियानगर थाना क्षेत्र स्थित जाकिर कॉलोनी में छिपा हुआ है और भारी मात्रा में चोरी के उपकरणों की खेप ठिकाने लगाने की फिराक में है, वैसे ही स्वाट (SWAT) टीम और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन (Joint Operation) चलाया।\r\n \r\n
- \r\n 237 BBU की ऐतिहासिक बरामदगी: पुलिस की रेड में जाकिर कॉलोनी से आरोपी शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया गया। जब पुलिस ने उसके ठिकाने की तलाशी ली, तो अधिकारियों की आंखें फटी रह गईं। वहां से जियो (Jio) और एयरटेल (Airtel) कंपनियों के 237 'बेस बैंड यूनिट' (BBU) बरामद हुए।\r\n \r\n
- \r\n करोड़ों का माल: तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, एक BBU की कीमत लाखों में होती है। बरामद किए गए इन 237 उपकरणों की कुल बाजार कीमत लगभग 15 करोड़ 40 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस के इतिहास में टावर उपकरणों की यह अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी मानी जा रही है।\r\n \r\n
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क्या होता है BBU और क्यों है यह इतना कीमती?
\r\n\r\nइस खबर को गहराई से समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर चोर सिर्फ BBU को ही क्यों निशाना बना रहे थे।
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बेस बैंड यूनिट (Base Band Unit - BBU) किसी भी मोबाइल टावर (Cell Tower) का 'दिमाग' या 'मदरबोर्ड' (Motherboard) होता है। जिस तरह कंप्यूटर बिना मदरबोर्ड के कबाड़ है, उसी तरह बिना BBU के एक विशाल मोबाइल टावर सिर्फ लोहे का ढांचा भर रह जाता है।
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- \r\n नेटवर्क का आधार: आप अपने मोबाइल से जो भी कॉल करते हैं, इंटरनेट चलाते हैं या डेटा ट्रांसफर करते हैं, वह सब सिग्नल इसी BBU के जरिए प्रोसेस होकर मुख्य नेटवर्क तक पहुंचता है।\r\n \r\n
- \r\n महंगे पुर्जे: इस छोटे से बॉक्स के अंदर बेहद उन्नत माइक्रोचिप्स, प्रोसेसर और महंगे सर्किट लगे होते हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है।\r\n \r\n
- \r\n ब्लैक आउट: अगर किसी टावर से BBU को निकाल लिया जाए या वह काम करना बंद कर दे, तो उस टावर से जुड़े हजारों मोबाइल फोन का नेटवर्क एक सेकंड में शून्य (Zero) हो जाता है। चोर इसी उपकरण को निकालकर रातों-रात गायब हो जाते थे, जिससे कंपनियों को करोड़ों का नुकसान होता था और आम जनता को नेटवर्क की परेशानी झेलनी पड़ती थी।\r\n \r\n
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कैसे बिछा चोरों को पकड़ने का जाल? 'GPS' ने खोला राज
\r\n\r\nइस गिरोह का काम करने का तरीका इतना शातिर था कि वे टावर के सुरक्षा गार्डों को चकमा देकर या सुनसान इलाकों में लगे टावरों को निशाना बनाकर रातों-रात BBU खोल लेते थे।
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शिकायत और अधिकारियों का एक्शन: एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया कि रॉयल कमांड प्रोटेक्शन ग्रुप के सिक्योरिटी सुपरवाइजर पर्मेन्द्र तोमर ने इस मामले में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी कंपनी इंडस टावर (Indus Tower) के माध्यम से एयरटेल (Airtel) का मोबाइल नेटवर्क और सुरक्षा का कार्य देखती है। पर्मेन्द्र तोमर ने बताया कि पंजाब के विभिन्न शहरों और यूपी के मुरादाबाद में लंबे समय से टावरों से BBU उपकरण चोरी होने की लगातार शिकायतें आ रही थीं।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी के नेशनल हेड (नोडल सिक्योरिटी) के वाइस प्रेसिडेंट ने उत्तर प्रदेश के आला अधिकारियों, जिनमें एडीजी भानु भास्कर और मेरठ के डीआईजी कलानिधि नैथानी शामिल हैं, से सीध संपर्क किया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मेरठ पुलिस की स्वाट टीम को इस हाई-प्रोफाइल मामले के खुलासे की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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तकनीक ने ही किया चोरों का शिकार: जब चोरी की वारदातें बेतहाशा बढ़ने लगीं और पुलिस के हाथ खाली थे, तब एयरटेल कंपनी की टेक्निकल टीम ने एक मास्टरस्ट्रोक खेला।
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- \r\n BBU में गुप्त GPS: तकनीकी टीम ने कुछ नए बेस बैंड यूनिट्स (BBU) के अंदर बेहद सूक्ष्म और गुप्त जीपीएस डिवाइस (GPS Trackers) फिट कर दिए। चोरों को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि वे जो डिब्बे चुरा रहे हैं, वे असल में पुलिस के 'जासूस' हैं।\r\n \r\n
- \r\n सिग्नल ने पहुंचाया जाकिर कॉलोनी: जैसे ही मुरादाबाद और पंजाब के टावरों से इन GPS लगे BBU की चोरी हुई, कंपनी के कंट्रोल रूम में लगे रडार पर 'ब्लिप' बजने लगा। तकनीकी टीम ने इन सिग्नल्स का पीछा करना शुरू किया। यह डिजिटल लोकेशन ट्रैकिंग पंजाब, हरियाणा और यूपी के रास्तों से होती हुई सीधे मेरठ के लोहियानगर थाना क्षेत्र की जाकिर कॉलोनी में आकर रुक गई।\r\n \r\n
- \r\n शाहरुख का पर्दाफाश: लोकेशन कन्फर्म होते ही मेरठ पुलिस एक्शन में आई और शाहरुख के ठिकाने पर छापा मारकर उसे दबोच लिया। जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो शाहरुख टूट गया और उसने जो खुलासे किए, उसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया।\r\n \r\n
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72 से अधिक मुकदमे, अंतरराज्यीय गैंग और मुजफ्फरनगर-बागपत कनेक्शन
\r\n\r\nगिरफ्तार आरोपी शाहरुख ने पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में बताया कि वह अकेला नहीं है। वह एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा है। शाहरुख के साथ इस गैंग में चार अन्य मुख्य साथी भी शामिल हैं, जो मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) और बागपत (Baghpat) जिले के रहने वाले हैं।
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- \r\n वारदातों का ग्राफ: पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गैंग ने सबसे ज्यादा तबाही पंजाब में मचाई है। पंजाब के अलग-अलग जिलों में इन उपकरणों की चोरी के 72 मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा यूपी के मुरादाबाद में भी 2 मुकदमे दर्ज हैं।\r\n \r\n
- \r\n मेरठ पुलिस की रडार पर 60 केस: मेरठ पुलिस को अब तक कुल 60 ऐसे मुकदमों की विस्तृत जानकारी मिल चुकी है, जहां इस गैंग ने BBU समेत टावर के अन्य कीमती सामानों पर हाथ साफ किया है। पुलिस ने इस मामले में गैंग के चार अन्य सदस्यों को पहले ही गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली थी। अब शाहरुख की गिरफ्तारी से नेटवर्क की अहम कड़ियां जुड़ गई हैं।\r\n \r\n
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खौफनाक एंगल: चीन और अन्य देशों में सप्लाई, 'देशद्रोह' की जांच शुरू
\r\n\r\nइस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक और राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) से जुड़ा पहलू यह है कि चोरी किए गए ये 15 करोड़ के उपकरण भारत के कबाड़ी बाजार में नहीं बिक रहे थे। पुलिस पूछताछ में शाहरुख ने कबूल किया है कि उन्होंने इन चुराए गए BBU और अन्य उपकरणों को चीन (China) समेत कई अन्य विदेशी मुल्कों में बेचा है।
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चीन ही क्यों? उठ रहे हैं गंभीर सवाल:
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- \r\n रिवर्स इंजीनियरिंग (Reverse Engineering): सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की टेक कंपनियां भारतीय टेलीकॉम नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की 'रिवर्स इंजीनियरिंग' करने के लिए ब्लैक मार्केट से ऐसे पार्ट्स खरीदती हैं।\r\n \r\n
- \r\n डेटा चोरी का खतरा: BBU वह यूनिट है जिससे होकर सारा डेटा गुजरता है। इसे डिकोड करके भारतीय टेलीकॉम व्यवस्था की खामियां खोजी जा सकती हैं।\r\n \r\n
- \r\n ई-वेस्ट और महंगे मेटल: इन यूनिट्स में इस्तेमाल होने वाले दुर्लभ खनिज (Rare Earth Metals) और सोने-चांदी के तारों को निकालने के लिए भी इनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा काला बाजार है।\r\n \r\n
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देशविरोधी गतिविधियों (Anti-National Activities) का शक: एसएसपी अविनाश पाण्डेय ने स्पष्ट किया है कि चूँकि इस मामले के तार सीधे तौर पर चीन और अन्य देशों से जुड़ रहे हैं, इसलिए पुलिस अब इसे सिर्फ 'चोरी' के नजरिए से नहीं देख रही है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां (Intelligence Agencies) अब इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि कहीं इन चोरों के तार किसी देशविरोधी संगठन से तो नहीं जुड़े हैं? क्या भारत के संचार नेटवर्क (Communication Network) को पंगु बनाने के लिए जानबूझकर किसी विदेशी एजेंसी के इशारे पर इन चोरियों को अंजाम दिया जा रहा था? हवाला के जरिए पैसे के लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
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आगे क्या? पुलिस की आगामी कार्रवाई
\r\n\r\nमेरठ पुलिस अब इस गिरोह की पूरी 'चेन' को तोड़ने की तैयारी कर रही है:
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- \r\n कूरियर और ट्रांसपोर्टर्स की जांच: यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी भारी मात्रा में उपकरण मेरठ से चीन या विदेशी सीमाओं तक किस ट्रांसपोर्ट या कूरियर कंपनी के जरिए भेजे जा रहे थे।\r\n \r\n
- \r\n कस्टम और पोर्ट अधिकारियों से संपर्क: पुलिस यह जांच कर रही है कि पोर्ट्स (Ports) या एयरपोर्ट्स पर बैठे किन भ्रष्ट अधिकारियों की मदद से यह सामान कस्टम क्लियरेंस पास कर रहा था।\r\n \r\n
- \r\n टेलीकॉम कंपनियों के साथ बैठक: पुलिस प्रशासन जल्द ही सभी टेलीकॉम कंपनियों (Jio, Airtel, Vi) के सुरक्षा प्रमुखों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करने जा रहा है, ताकि टावरों की सुरक्षा को और चाक-चौबंद किया जा सके।\r\n \r\n
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मेरठ पुलिस की स्वाट टीम और लोहियानगर थाना पुलिस का यह ऑपरेशन न केवल एक बड़ी आपराधिक सफलता है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ी जीत है। 15 करोड़ रुपये के BBU की बरामदगी ने भारत के टेलीकॉम नेटवर्क पर मंडरा रहे एक बड़े खतरे को टाल दिया है। अब देखना यह है कि पुलिस की जांच में चीन से जुड़े तारों में और क्या-क्या चौंकाने वाले खुलासे होते हैं। खबरीलाल इस पूरे मामले की हर अपडेट और पुलिस इन्वेस्टिगेशन की हर परत पर बारीकी से नजर बनाए रखेगा।
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