मेरठ (अपराध संवाददाता): मेरठ पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' नीति ने एक बार फिर अपराधियों की कमर तोड़ दी है। देहली गेट थाना पुलिस ने एक ऐसी वारदात का खुलासा किया है, जिसने सुरक्षा और सतर्कता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के ऑटो और ई-रिक्शा में सवार होकर आम आदमी का भरोसा जीतने वाले और फिर चंद सेकंड के भीतर उनकी मेहनत की कमाई पर हाथ साफ करने वाले 'फौजी गैंग' के दो मुख्य सदस्यों को पुलिस ने दबोच लिया है। इनके पास से पुलिस ने सोने के हार और अंगूठियों समेत करीब 15 लाख रुपये की शत-प्रतिशत ज्वेलरी बरामद करने में सफलता हासिल की है।READ ALSO:-26 साल की फरारी, यूट्यूबर का चोला और एक कत्ल का राज: दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आया मोस्ट वांटेड 'सलीम वास्तिक', बच्चे की बोली मां बोली-फांसी हो
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घटना का बैकग्राउंड: जब पुलिस की चुनौती बन गई एक 'जेब'

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बीते कुछ समय से मेरठ के व्यस्ततम इलाकों, विशेषकर देहली गेट थाना क्षेत्र के आसपास, ऑटो और ई-रिक्शा में यात्रा करने वाले यात्रियों के साथ चोरी की शिकायतें मिल रही थीं। ताजा मामला तब गरमाया जब एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई कि टेंपो में सफर के दौरान उसकी जेब काटकर लाखों के जेवर चोरी कर लिए गए।
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मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने देहली गेट पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। शहर में सक्रिय पॉकेटमारों के इस नए पैटर्न को समझना पुलिस के लिए पहली प्राथमिकता थी।
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ऑपरेशन '500 कैमरे': कैसे पकड़े गए शातिर?

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एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि यह कोई साधारण जेबकतरी का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही शातिर और पेशेवर गिरोह काम कर रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के भागने के रूट को ट्रैक करने के लिए मेरठ शहर के अलग-अलग चौराहों, सड़कों और दुकानों पर लगे लगभग 500 से ज्यादा सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाली।
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दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद पुलिस टीम को कुछ संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार और ऑटो में चढ़ने-उतरने वाले कुछ चेहरे बार-बार दिखाई दिए। इसके बाद सर्विलांस और मुखबिर खास की मदद से पुलिस ने अपना जाल बिछाया। अंततः घेराबंदी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जो शहर छोड़ने की फिराक में थे।
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गिरोह की मोडस ऑपेरंडी: 'फौजी' लुक और 'ब्लेड' का खेल

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पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपनी चोरी करने के जो तरीके (Modus Operandi) बताए, उसे सुनकर खुद पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। आरोपियों ने बताया कि वे किसी को शक न होने देने के लिए 'मनोवैज्ञानिक खेल' खेलते थे।
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    भरोसे का चेहरा (The Look): गिरोह का मुख्य सदस्य साजन उर्फ फौजी (27 वर्ष) हमेशा एक सैनिक जैसा गेटअप रखता था। छोटे बाल, क्लीन शेव और अनुशासित व्यवहार। वह ई-रिक्शा या ऑटो में इस तरह बैठता था जैसे कोई छुट्टी पर आया जवान सफर कर रहा हो। इससे सह-यात्री उन पर शक नहीं करते थे और अपनी चौकसी कम कर देते थे।
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    टारगेट की पहचान: गिरोह का एक सदस्य स्टैंड पर खड़ा होकर ऐसे लोगों को चिन्हित करता था जो ज्वेलरी या मोटा कैश लेकर चल रहे हों। विशेष रूप से बुजुर्ग व्यापारी या संपन्न दिखने वाले लोग इनके रडार पर रहते थे।
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    भीड़भाड़ का फायदा: जैसे ही टारगेट वाहन में बैठता, साजन उसके बगल में बैठ जाता। बातों में उलझाकर या वाहन के धचकों (Jerks) का बहाना बनाकर वह अपनी जेब में छिपे धारदार ब्लेड से पीड़ित की जेब या बैग काट देता था।
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    एग्जिट प्लान: वारदात के तुरंत बाद गिरोह का दूसरा सदस्य अपनी मोटरसाइकिल लेकर पीछे-पीछे चलता था। जैसे ही काम पूरा होता, आरोपी अगले ही मोड़ पर उतरता और मोटरसाइकिल पर बैठकर संकरी गलियों से गायब हो जाता।
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गिरफ्तार अभियुक्तों की कुंडली: 5 जिलों में 20 से ज्यादा मुकदमे

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गिरफ्त में आए आरोपी पेशेवर अपराधी हैं, जिनका यूपी के बड़े हिस्से में आपराधिक नेटवर्क फैला हुआ है।
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    कुलदीप उर्फ रोहित उर्फ भेला (27): पुत्र राकेश, निवासी फतेहगढ़। यह गिरोह का मास्टरमाइंड माना जाता है और चोरी के माल को ठिकाने लगाने में माहिर है।
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    साजन उर्फ फौजी (27): पुत्र राजपाल, निवासी फतेहगढ़। यह गिरोह का वह चेहरा था जो 'फौजी' बनकर शिकार के करीब पहुँचता था।
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पुलिस के अनुसार, इन दोनों पर मेरठ के अलावा लखनऊ, आगरा, कन्नौज और शाहजहांपुर जैसे जिलों में लूट, चोरी और धोखाधड़ी के 20 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। गिरोह का तीसरा सदस्य 'आकाश उर्फ मानी' फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
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रिकवरी: पुलिस ने बरामद किया 100% माल

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आमतौर पर चोरी के मामलों में माल की बरामदगी बहुत कम हो पाती है, लेकिन देहली गेट पुलिस ने इस मामले में शत-प्रतिशत सफलता हासिल की है। बरामद सामान की सूची इस प्रकार है:
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    01 भारी सोने का हार
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    04 सोने की अंगूठियां
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    06 जोड़ी कान की बालियां
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    मार्केट वैल्यू: करीब 10 से 15 लाख रुपये
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प्रशासन का इनाम और जनता को चेतावनी

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एसपी सिटी ने इस शानदार सफलता के लिए प्रभारी निरीक्षक अतुल कुमार के नेतृत्व वाली टीम (उप-निरीक्षक अखिलेश कुमार, मेघपाल सिंह, कुलदीप गुप्ता व अन्य) की सराहना की है। उन्होंने घोषणा की कि इस सराहनीय कार्य के लिए पूरी टीम को विभाग की ओर से पुरस्कृत किया जाएगा।
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साथ ही, मेरठ पुलिस ने जनता के लिए एक एडवाइजरी भी जारी की है:

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    ऑटो या ई-रिक्शा में सफर करते समय अपने बगल में बैठने वाले व्यक्ति से दूरी बनाए रखें।
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    कीमती सामान या ज्वेलरी बैग में न रखकर शरीर के अंदरूनी हिस्सों या सुरक्षित तरीके से रखें।
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    यदि कोई व्यक्ति बेवजह आपसे सटकर बैठने की कोशिश करे, तो तुरंत सतर्क हों और शोर मचाएं।
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    संदिग्ध लगने पर तुरंत 112 नंबर या नजदीकी पुलिस को सूचित करें।
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मेरठ पुलिस की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि अपराधी चाहे किसी भी रूप में हो, कानून की लंबी पहुंच से बच नहीं सकता। 'फौजी' बनकर अपराध करने वाले इन लुटेरों का अब असली ठिकाना जेल की कालकोठरी है।
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