मेरठ: मेरठ का प्रसिद्ध इस्माइल नेशनल महिला डिग्री कॉलेज एक बार फिर 'बुर्का' को लेकर विवादों में है। शुक्रवार को कॉलेज में आयोजित 'सद्भावना मेला' में स्टॉल लगाने पहुंचीं दो बुर्काधारी युवतियों को गेट पर ही रोक दिया गया, जिसके बाद जमकर हंगामा हुआ। युवतियों और कॉलेज स्टाफ के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद युवतियां बिना स्टॉल लगाए अपना सारा सामान लेकर वापस लौट गईं।READ ALSO:-मेरठ में दीपक गिरी की पूनम पंडित से सगाई होते ही 'प्रेमिका' का हंगामा। 4 साल लिव-इन, शोषण का आरोप; सपा ने पद से हटाया, अब शादी का एग्रीमेंट वायरल।
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क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nबुढ़ाना गेट स्थित इस्माइल कॉलेज में पिछले 30 सालों से दिवाली के मौके पर 'सद्भावना मेला' (प्रदर्शनी) का आयोजन होता है। शुक्रवार को शाहपीर गेट निवासी मुनीरा और आयशा इस मेले में ज्वेलरी का स्टॉल लगाने के लिए पहुंची थीं। लेकिन जैसे ही वे गेट पर पहुंचीं, वहां तैनात महिला कर्मचारी सुशीला ने उन्हें बुर्का पहने होने के कारण रोक दिया।
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युवतियों का आरोप: 'यह धार्मिक भेदभाव है'
\r\n\r\nकॉलेज प्रशासन के इस रवैये से नाराज आयशा और मुनीरा ने इसका कड़ा विरोध किया।
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- \r\n आयशा ने कहा, "हम दोनों तो प्रदर्शनी में हिस्सा लेने आए थे। इतने दिनों से सारी तैयारी की, जो अब बेकार हो गई। हम इस कॉलेज के स्टूडेंट भी नहीं हैं, फिर भी हमें एंट्री करने से रोका गया।"\r\n \r\n
- \r\n 'भेदभाव' का आरोप: दोनों युवतियों ने इसे 'धार्मिक भेदभाव' करार दिया। उन्होंने कहा, "हमने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें कॉलेज प्रशासन को हिजाब या बुर्का पहनने से रोकने से मना किया गया है। लेकिन किसी ने हमारी एक नहीं सुनी।"\r\n \r\n
- \r\n पेरेंट्स को भी नो-एंट्री: विवाद बढ़ने पर युवतियों के पेरेंट्स भी कॉलेज गेट पर पहुंच गए, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने उन्हें भी अंदर नहीं जाने दिया।\r\n \r\n
- \r\n मुनीरा ने बताया, "बुर्का पहने होने की वजह से हमें गेट पर रोका गया और बुर्का बदलने के लिए कहा गया। लेकिन मैंने मना कर दिया, जिसके बाद हम लोग वापस लौट आए।"\r\n \r\n
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कॉलेज की सफाई: 'सुरक्षा और आंतरिक नियम'
\r\n\r\nमामले पर कॉलेज की चीफ प्रॉक्टर दीप्ति कौशिक ने सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि यह कदम किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा कारणों से उठाया गया है।
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- \r\n 'आंतरिक नियम': उन्होंने कहा, "यह कॉलेज का आंतरिक नियम है और हर किसी को इसका पालन करना होता है। कॉलेज में कौन आ रहा है, कौन जा रहा है, सिक्योरिटी के हिसाब से यह देखना जरूरी है।"\r\n \r\n
- \r\n चेंजिंग रूम की सुविधा: प्रॉक्टर ने बताया, "हमने कॉलेज में चेंजिंग रूम बनाया हुआ है। जब भी कोई बुर्का पहनकर आता है, तो वो सैपरेटली कपड़े चेंज करके अंदर जा सकता है। यह नियम कॉलेज की छात्राओं के लिए भी है।"\r\n \r\n
- \r\n 'बाहरी' होने का हवाला: उन्होंने यह भी कहा, "ऊपर से वो लोग बाहर की थीं, कॉलेज की स्टूडेंट नहीं थीं। वैसे भी ये रूल कॉलेज की छात्राओं के लिए भी है।"\r\n \r\n
- \r\n भेदभाव से इनकार: दीप्ति कौशिक ने भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "यहां जो सद्भावना मेला है, उसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई, हर धर्म की लड़कियों ने स्टॉल लगाए हैं। किसी से कोई भेदभाव नहीं है।"\r\n \r\n
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यह मामला एक बार फिर उस बहस को ताज़ा कर गया है, जिसमें शिक्षण संस्थानों के नियमों और व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.