उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को दागदार करने वाला एक और मामला सामने आया है। 'ना खाता ना बही, जो पुलिस कहे वही'—इस कहावत को चरितार्थ करते हुए हापुड़ क्राइम ब्रांच (Hapur Crime Branch) में तैनात एक इंस्पेक्टर को एंटी करप्शन टीम ने 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। वर्दी का रौब और भ्रष्टाचार का नशा ऐसा था कि गिरफ्तारी के बाद भी इंस्पेक्टर की हेकड़ी कम नहीं हुई।READ ALSO:-बिजनौर में 'लव जिहाद' जैसा मामला: इंस्टाग्राम पर वसीम से 'समीर' बना युवक, हिन्दू युवती को जाल में फंसाया; बजरंग दल ने दबोचकर पुलिस को सौंपा
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गुरुवार को जब आरोपी इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह (Inspector Mahendra Singh) को मेरठ की स्पेशल सीजेएम कोर्ट (Special CJM Court) में पेश किया गया, तो नजारा देखने लायक था। कल तक जो इंस्पेक्टर सरकारी जीप में सायरन बजाकर चलता था, वह मफलर से अपना चेहरा छिपाते हुए एक प्राइवेट कार से कोर्ट पहुंचा। रिमांड मजिस्ट्रेट ने सुनवाई के बाद इंस्पेक्टर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेजने का आदेश सुना दिया है।
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क्या है पूरा मामला? कैसे बिछाया गया जाल?

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भ्रष्टाचार की यह कहानी बागपत जिले से शुरू होती है। बागपत के थाना खेकड़ा क्षेत्र के ग्राम गोठरा निवासी लोकेश ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन (Anti-Corruption Organization) की मेरठ यूनिट से संपर्क किया। लोकेश ने अपनी लिखित शिकायत में बताया कि उनके परिवार के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज है, जिसकी विवेचना (Investigation) हापुड़ क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह कर रहे थे।
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आरोप है कि केस को रफा-दफा करने और आरोपियों को राहत देने के नाम पर इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने 4 लाख रुपये की डिमांड की थी। पीड़ित लोकेश के मुताबिक, वह पहले ही 2.5 लाख रुपये इंस्पेक्टर को दे चुके थे, लेकिन इंस्पेक्टर का पेट नहीं भरा और वह 4 लाख रुपये और देने का अनैतिक दबाव बना रहे थे।
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केमिकल वाले नोट और रंगे हाथ गिरफ्तारी

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शिकायत सही पाए जाने पर एंटी करप्शन टीम ने एक 'ट्रैप' (Trap) प्लान किया।
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    बुधवार की सुबह: टीम ने लोकेश को फिनोलफथेलिन पाउडर (Phenolphthalein Powder) लगे हुए 4 लाख रुपये के नोट दिए।
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    लोकेशन: लोकेश को इंस्पेक्टर के पास भेजा गया।
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    गिरफ्तारी: जैसे ही इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने नोटों की गड्डी हाथ में ली, सादे कपड़ों में मौजूद एंटी करप्शन टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। हाथ धुलवाने पर नोटों का रंग और केमिकल इंस्पेक्टर के हाथों पर मिल गया, जो उनके गुनाह का पक्का सबूत था।
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थाने में हाईवोल्टेज ड्रामा: धमकी से लेकर 'सेटिंग' तक

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गिरफ्तारी के वक्त का मंजर बेहद नाटकीय था। एंटी करप्शन टीम के हत्थे चढ़ते ही इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने पहले तो अपना पुलिसिया रौब दिखाया। चश्मदीदों के मुताबिक, उन्होंने टीम को धमकाने की कोशिश की। जब देखा कि दाल नहीं गल रही है, तो वह 'सेटिंग-गेटिंग' और ले-देकर मामला रफा-दफा करने की बात करने लगे।
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लेकिन, एंटी करप्शन टीम ने उनकी एक न सुनी और उन्हें सीधे रोहटा रोड से कंकरखेड़ा थाने (Kankarkhera Police Station) ले आई।
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    थाने में जमावड़ा: इंस्पेक्टर के पकड़े जाने की खबर आग की तरह फैली। थाने पर उनके परिचितों और परिवार वालों का जमावड़ा लग गया।
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    FIR दर्ज: बुधवार शाम को ही कंकरखेड़ा थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और पहली जीडी एंट्री (Parcha) काटी गई।
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कचहरी में 'VIP' ट्रीटमेंट और प्राइवेट आर्मी का घेरा

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आम तौर पर जब कोई अपराधी पकड़ा जाता है, तो उसे पुलिस जीप या वज्र वाहन में कोर्ट ले जाया जाता है। लेकिन इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह के मामले में पुलिस का रवैया 'अपनों' के लिए नरम दिखाई दिया।
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    प्राइवेट गाड़ी का इस्तेमाल: गुरुवार को कोर्ट ले जाते समय सरकारी जीप के बजाय एक प्राइवेट गाड़ी का इस्तेमाल किया गया।
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    सुविधाओं का अंबार: सूत्रों के मुताबिक, पूरी रात थाने में इंस्पेक्टर की खातिरदारी होती रही। खाने-पीने का सामान समय पर पहुंचता रहा।
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    चेहरा छिपाने की कोशिश: कोर्ट परिसर में उतरते समय इंस्पेक्टर ने गले में पड़े मफलर से अपना पूरा चेहरा ढक रखा था। शायद उन्हें इस बात का एहसास था कि वर्दी पर लगा दाग अब छिपने वाला नहीं है।
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मीडिया से बदसलूकी

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कोर्ट परिसर में जब मीडियाकर्मियों ने कवरेज करने की कोशिश की, तो इंस्पेक्टर के साथ आए सादी वर्दी वाले लोगों और प्राइवेट समर्थकों ने मीडिया को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने कैमरे के सामने हाथ लगाए और पत्रकारों को धमकाने वाले लहजे में बात की। हालांकि, कैमरे अपना काम कर चुके थे और इंस्पेक्टर की शर्मिंदगी कैद हो चुकी थी।
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दागदार अतीत: बुलिंदशहर गैंगरेप केस और झूठा खुलासा

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इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह का विवादों से पुराना नाता रहा है। उनकी कार्यशैली पर पहले भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं। सबसे बड़ा मामला साल 2016 के चर्चित बुलिंदशहर हाईवे गैंगरेप (Bulandshahr Highway Gangrape) का है।
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    2016 का वाकया: उस वक्त महेंद्र सिंह बुलिंदशहर के ककोड़ थाने में तैनात थे। हाईवे पर मां-बेटी के साथ हुए दरिंदगी के मामले ने पूरे देश को हिला दिया था।
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    झूठा गुडवर्क: अपनी पीठ थपथपाने और जल्दबाजी में गुडवर्क दिखाने के चक्कर में इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने दो बेगुनाह लड़कों को आरोपी बनाकर तत्कालीन डीजीपी (DGP) के सामने पेश कर दिया था।
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    फजीहत: डीजीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी, लेकिन बाद में पता चला कि वे लड़के बेगुनाह थे। इस वजह से तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार और यूपी पुलिस की पूरे देश में जमकर किरकिरी हुई थी। बाद में सीबीआई (CBI) जांच में असली सच्चाई सामने आई थी और बेगुनाह बरी हुए थे।
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हापुड़ में तैनाती और जांच का दायरा

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इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह साल 2021 से हापुड़ जिले में तैनात हैं। इस दौरान वे कई मलाईदार थानों के प्रभारी रहे:
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    हाफिजपुर
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    बहादुरगढ़
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    सिंभावली
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    कपूरपुर
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    कोतवाली देहात
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    कोतवाली गढ़ और बाबूगढ़
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वर्तमान में वह DCRB (District Crime Record Bureau) के प्रभारी थे और क्राइम ब्रांच का काम देख रहे थे। एंटी करप्शन की कार्रवाई के बाद अब हापुड़ पुलिस ने भी उनके पुराने मामलों की फाइलें खोलनी शुरू कर दी हैं। यह जांच की जा रही है कि कहीं अन्य विवेचनाओं में भी उन्होंने इसी तरह रिश्वत लेकर खेल तो नहीं किया है।
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वर्दी पर लगा बदनुमा दाग

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न्यायालय के आदेश पर अब इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह अगले 14 दिन सलाखों के पीछे गुजारेंगे। यह घटना उन तमाम पुलिसकर्मियों के लिए एक सबक है जो वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार का खेल खेलते हैं। हालांकि, जिस तरह से कोर्ट परिसर में आरोपी इंस्पेक्टर को 'VIP प्रोटोकॉल' और प्राइवेट सुरक्षा घेरा मिला, उसने सिस्टम की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई की जहाँ सराहना हो रही है, वहीं पुलिस विभाग के अंदर हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह होगा कि विभागीय जांच में इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह पर और क्या गाज गिरती है।
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