मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद हैरान करने वाला, अजीबोगरीब और फिल्मी कहानी जैसा सनसनीखेज मामला सामने आया है। न्याय के मंदिर कहे जाने वाले न्यायालय (Court) परिसर का माहौल शुक्रवार की शाम उस वक्त अचानक एक कुश्ती के अखाड़े में तब्दील हो गया, जब एक ही व्यक्ति की दो पत्नियां अपने-अपने परिजनों के साथ आमने-सामने आ गईं। मामला किसी संपत्ति या बड़े अपराध का नहीं था, बल्कि यह पूरी लड़ाई एक 'पति' को हवालात से बाहर निकालने (जमानत दिलाने) की होड़ से शुरू हुई थी।Read also:-मेरठ क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर रेप केस: अंधविश्वास, दुष्कर्म और अधिकारियों से संबंध बनाने का दबाव, रक्षक ही बना भक्षक
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मेरठ के पॉश इलाके में गिने जाने वाले सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित जिला न्यायालय परिसर में घंटों तक यह हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। दोनों पत्नियों (सौतनों) के बीच पहले तीखी नोकझोंक हुई, जिसने देखते ही देखते एक हिंसक रूप ले लिया। सरेआम कोर्ट परिसर में महिलाओं ने एक-दूसरे के बाल खींचे, लात-घूंसे बरसाए और गालियों की बौछार कर दी। अधिवक्ताओं (Lawyers), मुवक्किलों और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के सामने यह खूनी संघर्ष होता रहा। आखिर में पुलिस को भारी बल प्रयोग करते हुए बीच-बचाव करना पड़ा। इस पूरी घटना ने न केवल पुलिस महकमे को हैरत में डाल दिया, बल्कि कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और समाज के पारिवारिक ताने-बाने पर भी एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
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आइए, मेरठ कचहरी में हुए इस अभूतपूर्व ड्रामे, इसके पीछे की पूरी पारिवारिक पृष्ठभूमि और पुलिस की कार्रवाई का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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कहानी का मुख्य किरदार— फुरकान और उसकी दो शादियों का सच
\r\n\r\nइस पूरे ड्रामे और विवाद की जड़ में जो शख्स है, उसका नाम फुरकान है। फुरकान मेरठ शहर के देहली गेट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पूर्वा महावीर इलाके का निवासी है। इस पूरी घटना को समझने के लिए फुरकान के पारिवारिक इतिहास और उसकी दो शादियों की पृष्ठभूमि को गहराई से समझना बेहद जरूरी है।
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पहली शादी: 20 साल पुराना रिश्ता और दूरियां
\r\n\r\nजानकारी के अनुसार, फुरकान की पहली शादी (निकाह) आज से लगभग दो दशक (20 साल) पहले मेरठ के ही गंगानगर इलाके की रहने वाली शबाना (काल्पनिक नाम नहीं, वास्तविक पात्र) के साथ पूरे रीति-रिवाजों के साथ हुई थी। शुरुआती सालों में दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य तरीके से चला। इस दौरान उनके बच्चे भी हुए। लेकिन, जैसे-जैसे समय बीता, शबाना और फुरकान के रिश्तों में दरार आनी शुरू हो गई। पारिवारिक कलह, विचारों का न मिलना और रोजमर्रा के झगड़ों ने इस 20 साल पुराने रिश्ते में इतनी खटास पैदा कर दी कि दोनों का एक छत के नीचे रहना मुश्किल हो गया। हालांकि, कानूनी या धार्मिक रूप से उनका तलाक नहीं हुआ था, लेकिन दोनों के बीच दूरियां बहुत बढ़ चुकी थीं। वर्तमान में पहली पत्नी शबाना गंगानगर इलाके में अलग रह रही थी।
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दूसरी शादी: 8 साल पहले शाहीन की एंट्री
\r\n\r\nपहली पत्नी से अनबन और बढ़ती दूरियों के बीच फुरकान की जिंदगी में एक नया मोड़ आया। करीब 8 साल पहले फुरकान ने पूर्वा महावीर इलाके की ही रहने वाली एक अन्य महिला शाहीन से नजदीकियां बढ़ाईं और अंततः उससे दूसरा निकाह कर लिया। मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत फुरकान को दूसरी शादी करने की इजाजत तो मिल गई, लेकिन यहीं से उसके जीवन में एक ऐसे 'तूफान' के बीज बो दिए गए, जिसका विस्फोट शुक्रवार को मेरठ कोर्ट परिसर में हुआ।
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पिछले 8 सालों से फुरकान अपनी दूसरी पत्नी शाहीन के साथ पूर्वा महावीर इलाके में ही रह रहा था। एक तरफ पहली पत्नी शबाना गंगानगर में अपने अधिकार और पहचान की लड़ाई लड़ रही थी, तो दूसरी तरफ शाहीन फुरकान के साथ अपना घर बसा चुकी थी। दोनों महिलाओं के बीच एक-दूसरे को लेकर भारी ईर्ष्या, नफरत और सौतिया डाह (सौतन का बैर) पनप चुका था। दोनों परिवारों के बीच कई बार छिटपुट विवाद भी हुए थे, लेकिन मामला कभी इतने बड़े सार्वजनिक स्तर पर नहीं पहुंचा था।
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विवाद की जड़— पड़ोस के झगड़े ने फुरकान को पहुंचाया सलाखों के पीछे
\r\n\r\nशुक्रवार का दिन फुरकान के लिए किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ, लेकिन उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसकी गिरफ्तारी आगे चलकर एक महासंग्राम का रूप ले लेगी।
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मोहल्ले का विवाद और पुलिस की एंट्री
\r\n\r\nस्थानीय पुलिस सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह पूर्वा महावीर इलाके में फुरकान का अपने ही पड़ोस में रहने वाले एक युवक के साथ किसी छोटी सी बात को लेकर विवाद हो गया था। यह विवाद नाली, कूड़े या रास्ते जैसे किसी मामूली मुद्दे से शुरू हुआ था, लेकिन देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच गालियों और हाथापाई तक नौबत आ गई। इलाके में शांति व्यवस्था भंग होने की स्थिति पैदा हो गई।
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मोहल्ले वालों की सूचना पर देहली गेट थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने मामले को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन जब फुरकान और पड़ोसी शांत नहीं हुए, तो पुलिस ने एहतियातन कड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में ले लिया।
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शांतिभंग (धारा 151/107/116) की कार्रवाई
\r\n\r\nदेहली गेट पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए फुरकान और उसके पड़ोसी युवक के खिलाफ शांतिभंग (CrPC की धारा 151/107/116 और नई BNS की संबंधित धाराओं) के तहत कार्रवाई की। इस धारा के तहत पुलिस को यह अधिकार होता है कि यदि उसे अंदेशा हो कि कोई व्यक्ति समाज में शांति भंग कर सकता है या कोई अपराध कर सकता है, तो उसे बिना वारंट गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा सकता है। पुलिस ने आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की और शुक्रवार की शाम को ही फुरकान को जमानत और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए मेरठ के सिविल लाइन स्थित जिला कचहरी (Court) ले जाने की तैयारी कर ली।
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कचहरी बना कुरुक्षेत्र— जब आमने-सामने आईं शबाना और शाहीन
\r\n\r\nजैसे ही फुरकान के गिरफ्तार होने और उसे कोर्ट में पेश किए जाने की खबर उसके परिवार तक पहुंची, दोनों पत्नियों के खेमों में हलचल मच गई। फुरकान भले ही दो महिलाओं के बीच बंटा हुआ था, लेकिन संकट की इस घड़ी में दोनों ही पत्नियां उसे अपना 'अधिकार' जताते हुए बचाने के लिए बेचैन हो उठीं। यहीं से इस पूरी कहानी का सबसे नाटकीय और हिंसक अध्याय शुरू हुआ।
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एक ही समय पर दोनों पत्नियों की एंट्री
\r\n\r\nजानकारी मिलते ही फुरकान की पहली पत्नी शबाना गंगानगर से अपने परिजनों (भाई और रिश्तेदारों) के साथ मेरठ कचहरी पहुंच गई। उसका मकसद अपने पति की जमानत कराकर उसे अपने साथ ले जाना था, ताकि वह समाज को दिखा सके कि कानूनी रूप से पहला अधिकार उसी का है।
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दूसरी तरफ, पूर्वा महावीर से दूसरी पत्नी शाहीन भी अपने मायके वालों और समर्थकों के साथ फुरकान की पैरवी और जमानत कराने के लिए उसी समय कचहरी पहुंच गई। शाहीन का मानना था कि फुरकान अब उसके साथ रहता है, इसलिए उसे बाहर निकालने की जिम्मेदारी और हक सिर्फ उसका है।
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आमना-सामना और चिंगारी का भड़कना
\r\n\r\nकचहरी परिसर के उस हिस्से में जहां कैदियों को पेशी के लिए लाया जाता है, वहां अचानक शबाना और शाहीन का आमना-सामना हो गया। सालों से एक-दूसरे के प्रति मन में दबा कर रखा गया जहर अब आंखों के सामने था।
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प्रत्यक्षदर्शियों (वकीलों और वहां मौजूद लोगों) के अनुसार, शुरुआत में दोनों महिलाओं के बीच दबी जुबान में तानेबाजी हुई। "तुम यहां क्यों आई हो? वह मेरा पति है," एक ने कहा। "पति मेरा है, तुम तो उसे छोड़कर जा चुकी हो," दूसरी ने पलटकर जवाब दिया।
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यह जुबानी जंग धीरे-धीरे तेज होने लगी। दोनों तरफ से आए परिजनों ने भी आग में घी डालने का काम किया। शबाना के परिवार वालों ने शाहीन को फुरकान की जिंदगी बर्बाद करने वाला बताया, तो शाहीन के पक्ष ने शबाना पर घर तोड़ने का आरोप लगाया। गाली-गलौज और अभद्र भाषा का जमकर इस्तेमाल होने लगा।
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खूनी संघर्ष और हाई-वोल्टेज ड्रामा: कोर्ट परिसर में चले लात-घूंसे
\r\n\r\nकहासुनी कब हाथापाई में बदल गई, वहां खड़े लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। अचानक एक पक्ष की महिला ने दूसरी के बाल पकड़ लिए। इसके बाद तो जैसे कोर्ट परिसर में एक भीषण युद्ध छिड़ गया।
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सार्वजनिक रूप से मर्यादाएं तार-तार
\r\n\r\nवह स्थान, जहां बड़े-बड़े मुजरिम कानून के डर से सिर झुकाकर चलते हैं, वहां ये महिलाएं एक-दूसरे की जान लेने पर उतारू थीं। महिलाओं ने एक-दूसरे को जमीन पर गिरा लिया, कपड़े फाड़ने की कोशिश की, नाखूनों से खरोंचा और लात-घूंसों की बरसात कर दी।
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इस लड़ाई में शबाना और शाहीन के साथ-साथ उनके साथ आई अन्य महिला रिश्तेदार भी कूद पड़ीं। पूरा कोर्ट परिसर चीख-पुकार और गालियों से गूंज उठा। वकील अपना काम छोड़कर इस ड्रामे को देखने के लिए इकट्ठा हो गए। कई लोगों ने इस घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया, जो अब शहर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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पति फुरकान की बेबसी
\r\n\r\nसबसे हैरान करने वाला दृश्य यह था कि जिस पति (फुरकान) के लिए यह पूरी महाभारत रची जा रही थी, वह खुद पुलिस की हिरासत में हथकड़ी पहने चुपचाप यह सब देखने को मजबूर था। वह चाहकर भी अपनी दोनों पत्नियों को नहीं रोक सकता था। उसकी आंखों के सामने उसका पारिवारिक विवाद सरेआम तमाशा बन चुका था।
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अधिवक्ताओं का बीच-बचाव का प्रयास विफल
\r\n\r\nवहां मौजूद कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं और मुवक्किलों ने मानवीय दृष्टिकोण से दोनों पक्षों को अलग करने और समझाने की कोशिश की, लेकिन महिलाएं इतनी उग्र हो चुकी थीं कि उन्होंने बीच-बचाव करने वालों को भी खरी-खोटी सुना दी। स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी और यह साफ था कि बिना पुलिस के डंडे के यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है।
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पुलिस की एंट्री और खाकी का एक्शन: सौतनें पहुंचीं हवालात
\r\n\r\nचूंकि यह घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अति संवेदनशील कोर्ट परिसर में हो रही थी, इसलिए कचहरी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत वायरलेस सेट पर सिविल लाइन थाने को सूचना दी।
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महिला पुलिस बल की तैनाती
\r\n\r\nसूचना मिलते ही सिविल लाइन थाने की पुलिस और भारी संख्या में महिला पुलिस बल (Women Police Force) दौड़ते हुए घटनास्थल पर पहुंचा। महिला कांस्टेबलों ने काफी मशक्कत और बल प्रयोग के बाद दोनों लड़ रही पत्नियों और उनके परिजनों को एक-दूसरे से अलग किया।
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तीनों महिलाएं हिरासत में
\r\n\r\nपुलिस का रवैया अब सख्त हो चुका था। न्यायालय परिसर में इस तरह का हंगामा और मारपीट कानून व्यवस्था का सीधा मखौल उड़ाना है। पुलिस ने बिना कोई समय गंवाए पहली पत्नी शबाना, दूसरी पत्नी शाहीन और उनके साथ मारपीट में शामिल एक अन्य महिला रिश्तेदार को तुरंत हिरासत में ले लिया।
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जिन महिलाओं को कुछ देर पहले तक अपने पति फुरकान को जमानत दिलवाने की चिंता थी, अब वे खुद पुलिस की गिरफ्त में थीं। सभी को पुलिस जीप में बैठाकर सिविल लाइन थाने ले जाया गया।
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मेडिकल परीक्षण और शांतिभंग की कार्रवाई
\r\n\r\nथाने पहुंचने के बाद, सबसे पहले मारपीट में घायल हुई तीनों महिलाओं (शबाना, शाहीन और उनकी रिश्तेदार) का जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण (Medical Examination) कराया गया। महिलाओं के चेहरे, हाथों और शरीर पर खरोंच व चोट के निशान थे।
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चिकित्सकीय उपचार के बाद, सिविल लाइन पुलिस ने इन महिलाओं के खिलाफ भी सख्त कानूनी कदम उठाया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थान और विशेषकर न्यायालय परिसर में गुंडागर्दी और मारपीट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस ने शबाना, शाहीन और तीसरी महिला का भी सीआरपीसी की धारा 151/107/116 (शांति भंग करने की आशंका और उपद्रव) के तहत चालान कर दिया।
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यानी, जिस फुरकान को पुलिस सुबह शांतिभंग में पकड़ कर लाई थी, शाम होते-होते उसकी दोनों पत्नियां भी उसी अपराध (शांतिभंग) में पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज हो गईं। अगले दिन इन महिलाओं को भी उसी कोर्ट में पेश किया गया, जहां वे अपने पति को छुड़ाने आई थीं।
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न्यायालय परिसर की सुरक्षा और मर्यादा पर उठते गंभीर सवाल
\r\n\r\nमेरठ की यह घटना केवल एक पारिवारिक तमाशा नहीं है; यह हमारे सिस्टम और विशेष रूप से न्यायालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है।
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- \r\n सुरक्षा में चूक (Security Lapse): न्यायालय परिसर एक अति-संवेदनशील क्षेत्र होता है। वहां जजों, वकीलों और वादियों की सुरक्षा सर्वोपरि होती है। यदि दो गुट (भले ही वे महिलाएं हों) इस तरह से कचहरी के अंदर आधा घंटे तक खूनी संघर्ष कर सकते हैं, तो यह पुलिस की सतर्कता पर सवाल उठाता है। क्या वहां पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं था?\r\n \r\n
- \r\n न्यायालय की गरिमा को ठेस: अदालतें न्याय का मंदिर हैं। वहां इस तरह का सड़क छाप झगड़ा और गालियों का प्रयोग न्यायालय की गरिमा और मर्यादा को सीधे तौर पर ठेस पहुंचाता है। वकीलों के संगठनों ने भी इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है और मांग की है कि भविष्य में कोर्ट परिसर में हंगामा करने वालों पर अवमानना और गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n भीड़ का प्रबंधन: अक्सर देखा जाता है कि पेशी के दौरान अपराधियों या आरोपियों के साथ उनके दर्जनों समर्थक और परिजन कोर्ट पहुंच जाते हैं। इससे न केवल भीड़ बढ़ती है, बल्कि इस तरह के विवादों की आशंका भी बनी रहती है। पुलिस प्रशासन को कोर्ट परिसर में प्रवेश के लिए कड़े नियम बनाने की आवश्यकता है।\r\n \r\n
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सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण: बहुविवाह (Polygamy) का दुष्परिणाम
\r\n\r\nफुरकान की इस कहानी का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। यह घटना बहुविवाह (एक से अधिक शादियां करने) के उन कड़वे सच और दुष्परिणामों को समाज के सामने उजागर करती है, जो अक्सर चारदीवारी के पीछे दबे रह जाते हैं।
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महिलाओं का मनोवैज्ञानिक संघर्ष
\r\n\r\nशबाना और शाहीन का यह झगड़ा केवल फुरकान की जमानत का नहीं था; यह 'पहचान', 'अधिकार' और 'सुरक्षा' की एक गहरी मनोवैज्ञानिक लड़ाई थी। शबाना 20 साल पुराने रिश्ते का हवाला देकर अपना हक जताना चाहती थी, जबकि शाहीन वर्तमान में साथ रहने के कारण खुद को असली दावेदार मानती थी। जब दो महिलाएं एक ही पुरुष पर अपना अधिकार जताती हैं, तो ईर्ष्या और असुरक्षा की भावना इस कदर हावी हो जाती है कि इंसान सही-गलत का फर्क भूल जाता है।
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बच्चों पर पड़ने वाला प्रभाव
\r\n\r\nइस पूरे ड्रामे में सबसे ज्यादा नुकसान उन बच्चों का होता है, जो इन परिवारों से जुड़े होते हैं। फुरकान के पहली और दूसरी पत्नी से हुए बच्चे जब इस घटना के बारे में जानेंगे या इसका वायरल वीडियो देखेंगे, तो उनके बाल-मन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? समाज में उनका क्या रुतबा रह जाएगा? माता-पिता की यह लड़ाई अक्सर बच्चों के भविष्य और उनके मानसिक स्वास्थ्य को अंधकार में धकेल देती है।
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समाज के लिए एक सबक
\r\n\r\nयह घटना उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो बिना सोचे-समझे रिश्तों को उलझाते हैं। एक रिश्ते को पूरी तरह से सुलझाए बिना (जैसे कि कानूनी तलाक) दूसरे रिश्ते में प्रवेश करना कानूनी और सामाजिक, दोनों ही मोर्चों पर एक 'टाइम बम' के समान होता है, जो फुरकान के मामले में सरेआम कोर्ट में फटा।
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एक अजीबोगरीब दास्तान का शर्मनाक अंत
\r\n\r\nमेरठ के सिविल लाइन स्थित कोर्ट परिसर में हुआ यह वाकया लंबे समय तक शहर के लोगों और वकीलों के बीच चर्चा का विषय बना रहेगा। एक पति की नासमझी और दो पत्नियों की जिद ने पूरे परिवार को कानून और समाज की नजरों में एक तमाशा बनाकर रख दिया।
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देहली गेट पुलिस ने फुरकान को तो शांतिभंग में चालान कर जेल भेजा ही था, अब सिविल लाइन पुलिस ने उसकी दोनों पत्नियों शबाना और शाहीन को भी उसी रास्ते पर भेज दिया है। यह अपने आप में एक अनोखा मामला बन गया है जहां पूरा परिवार ही पुलिस की फाइलों में एक साथ 'शांतिभंग' करने का आरोपी बन गया है।
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अब देखना यह दिलचस्प होगा कि जब ये तीनों (पति और उसकी दोनों पत्नियां) जमानत पर बाहर आएंगे, तो क्या वे इस शर्मनाक घटना से कोई सबक लेंगे या फिर पूर्वा महावीर और गंगानगर के बीच यह पारिवारिक महासंग्राम इसी तरह जारी रहेगा? पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भविष्य में इन्होंने दोबारा कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की कोशिश की, तो इनके खिलाफ गुंडा एक्ट जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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खबरीलाल की टीम समाज के हर उस पहलू और खबर पर पैनी नजर रखती है, जो आम जनता से सरोकार रखती हो। इस मामले से जुड़ा कोई भी नया अपडेट हम आप तक सबसे पहले पहुंचाएंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.