मेरठ (Meerut): बसंत पंचमी (Basant Panchami) का त्योहार नजदीक आते ही मेरठ के आसमान में पतंगों का रोमांच दिखने लगा है, लेकिन इसके साथ ही सड़कों पर 'मौत का धागा' यानी प्रतिबंधित चाइनीज मांझा (Banned Chinese Manjha) भी अपना कहर बरपाने लगा है। प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद, इस जानलेवा मांझे की बिक्री और इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी है।READ ALSO:-मेरठ: 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियों के बीच जवाहर इंटर कॉलेज पर 'गंदगी' का ग्रहण; दबंगों ने गेट पर खोदा 3 फीट गहरा अवैध नाला, सीएम दरबार पहुंची शिकायत
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ताजा मामला मेरठ के लोहिया नगर थाना क्षेत्र का है, जहां शनिवार को चाइनीज मांझे की चपेट में आने से एक दरोगा (Sub-Inspector) गंभीर रूप से घायल हो गए। मांझे की धार इतनी तेज थी कि दरोगा के चेहरे और गर्दन पर गहरे जख्म हो गए, जिसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों को उनके घावों को भरने के लिए 17 टांके लगाने पड़े हैं।
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ड्यूटी जाते समय हुआ हादसा (The Incident)

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जानकारी के मुताबिक, घायल दरोगा की पहचान ऋषभ गुप्ता (SI Rishabh Gupta) के रूप में हुई है, जो लोहिया नगर थाना क्षेत्र की जाकिर कॉलोनी चौकी के इंचार्ज हैं। शनिवार को वह अपनी बाइक से ड्यूटी पर जा रहे थे। जैसे ही वह लोहिया नगर क्षेत्र से गुजर रहे थे, अचानक कहीं से कटी हुई पतंग का चाइनीज मांझा उनके सामने आ गया।
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जब तक वह कुछ समझ पाते या अपनी बाइक रोक पाते, मांझा उनके हेलमेट और गर्दन के बीच उलझ गया। मांझे की पकड़ इतनी मजबूत और धारदार थी कि उसने हेलमेट के नीचे के हिस्से को पार करते हुए दरोगा की ठोड़ी (Chin) और गाल को बुरी तरह काट दिया।
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सड़क पर गिरे, 17 टांके आए (Severe Injuries)

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मांझे के उलझते ही ऋषभ गुप्ता संतुलन खो बैठे और बाइक समेत सड़क पर गिर पड़े। खून से लथपथ हालत में उन्हें देखकर राहगीर मदद के लिए दौड़े। स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में उन्हें पास के एक निजी अस्पताल (Private Hospital) में भर्ती कराया।
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डॉक्टरों के मुताबिक, मांझे की वजह से दरोगा ऋषभ गुप्ता की ठोड़ी और गाल पर गहरा घाव हो गया है। खून को रोकने और घाव को भरने के लिए डॉक्टरों को 17 टांके (17 Stitches) लगाने पड़े। गनीमत रही कि मांझा उनकी मुख्य नस (Jugular Vein) तक नहीं पहुंचा, वरना यह हादसा जानलेवा भी हो सकता था। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन वह अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
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प्रशासनिक दावों की खुली पोल

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इस घटना ने एक बार फिर मेरठ पुलिस और प्रशासन के उन दावों की पोल खोल दी है, जिनमें चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही जाती है। युवा समाजसेवी प्रशांत वर्मा (Prashant Verma) ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया है।
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प्रशांत वर्मा का आरोप है कि, "अधिकारी सिर्फ बसंत पंचमी के नाम पर रस्म अदायगी कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर चाइनीज मांझे की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। अगर पुलिस ने समय रहते सख्त कार्रवाई की होती, तो आज एक पुलिस अधिकारी को ही इसका शिकार नहीं होना पड़ता।"
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यह विडंबना ही है कि जो पुलिस आम जनता को चाइनीज मांझे से बचाने का जिम्मा संभालती है, आज उसी विभाग का एक जिम्मेदार अधिकारी इस अवैध कारोबार का शिकार बन गया।
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पुलिस का बयान: कार्रवाई जारी है (Police Statement)

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घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह (SP City Ayush Vikram Singh) ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि एसआई ऋषभ गुप्ता का इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर है।
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एसपी सिटी ने कहा, "हम लगातार चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। लोहिया नगर और आसपास के इलाकों में छापेमारी की जा रही है। ऐसे दुकानदारों को चिह्नित किया जा रहा है जो चोरी-छिपे यह प्रतिबंधित मांझा बेच रहे हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
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क्यों जानलेवा है चाइनीज मांझा? (Why is Chinese Manjha Dangerous?)

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चाइनीज मांझा पारंपरिक सूती मांझे से बिल्कुल अलग होता है। इसे बनाने में नायलॉन (Nylon) या प्लास्टिक के तारों का इस्तेमाल होता है, जिस पर कांच का बुरादा और धातुओं का लेप चढ़ाया जाता है।
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    ना टूटने वाला: यह मांझा इतना मजबूत होता है कि आसानी से हाथ से नहीं टूटता।
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    धारदार: कांच और धातु के लेप के कारण यह किसी ब्लेड की तरह काम करता है।
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    कंडक्टर: कई बार इसमें धातु का प्रयोग होने के कारण यह बिजली का सुचालक (Conductor) बन जाता है, जिससे करंट लगने का खतरा भी रहता है।
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    पर्यावरण को नुकसान: यह मांझा नष्ट नहीं होता (Non-biodegradable), जिससे यह सालों तक पेड़ों और खंभों पर लटका रहता है और पक्षियों की जान लेता रहता है।
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बसंत पंचमी और सुरक्षा उपाय (Safety Precaution)

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मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसंत पंचमी पर पतंगबाजी का विशेष महत्व है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चाइनीज मांझे ने इस त्योहार के उत्साह को खौफ में बदल दिया है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है।
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बचाव के तरीके:

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    मफलर या स्कार्फ: दोपहिया वाहन चलाते समय अपनी गर्दन को मफलर या मोटे कपड़े से पूरी तरह ढक कर रखें।
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    सेफ्टी रॉड (Safety Rod): अपनी बाइक पर यू-शेप (U-Shape) की लोहे की तार या सेफ्टी रॉड लगवाएं, जिससे मांझा आपके शरीर तक न पहुंचे।
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    धीरे चलें: फ्लाईओवर और पतंगबाजी वाले इलाकों में गाड़ी की गति धीमी रखें।
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    हेलमेट: फुल फेस हेलमेट का प्रयोग करें और वाइजर (Visor) हमेशा बंद रखें।
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कानून क्या कहता है? (Legal Aspect)

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 2017 में ही पूरे देश में चाइनीज मांझे (नायलॉन या सिंथेटिक मांझा) की बिक्री, निर्माण और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (Environment Protection Act) के तहत:
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    चाइनीज मांझा बेचना या इस्तेमाल करना दंडनीय अपराध है।
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    दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
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मेरठ में SI Rishabh Gupta के साथ हुई यह घटना प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है। केवल रस्म अदायगी या त्योहारों के समय छापेमारी करने से यह समस्या खत्म नहीं होगी। पुलिस को जहां इसके स्रोतों (Sources) पर प्रहार करना होगा, वहीं आम जनता और अभिभावकों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके बच्चे खूनी चाइनीज मांझे का इस्तेमाल न करें। अगर एक दरोगा सुरक्षित नहीं है, तो आम राहगीर की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।
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मेरठ के लोहिया नगर में ड्यूटी जाते समय दरोगा ऋषभ गुप्ता प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी ठोड़ी और गाल पर 17 टांके लगाए गए हैं। समाजसेवियों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं, जबकि एसपी सिटी ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। बसंत पंचमी से पहले हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
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