मेरठ (Meerut) शहर अपने खेल और खिलाड़ियों के लिए पूरे देश में जाना जाता है। गर्मियों का मौसम आते ही शहर के स्विमिंग पूल्स पर तैराकी के शौकीनों की भारी भीड़ उमड़ने लगती है। शहर के सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित माने जाने वाले विक्टोरिया पार्क स्विमिंग पूल (Victoria Park Swimming Pool) में भी इन दिनों शहर भर से महिलाएं, बच्चे और युवा तैराकी के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन, खेल और अनुशासन के इस माहौल को उस वक्त गहरा धक्का लगा जब 'शिक्षा के मंदिर' कहे जाने वाले मेरठ कॉलेज के कुछ छात्रों ने अपनी दबंगई और गुंडागर्दी का नंगा नाच किया। मंगलवार दोपहर हुई इस घटना ने न केवल खेल परिसर की सुरक्षा पर बल्कि छात्रों की मानसिकता पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।READ ALSO:-सीएम योगी का 'मिशन शिक्षामित्र': मानदेय 18 हजार, 5 लाख का कैशलेस इलाज और ट्रांसफर की सौगात, गोरखपुर से हुए बड़े ऐलान
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क्या है पूरा मामला? (The Incident in Detail)

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मंगलवार की दोपहर, जब विक्टोरिया पार्क का स्विमिंग पूल आम नागरिकों और तैराकों के लिए खुला हुआ था, तभी अचानक मेरठ कॉलेज (Meerut College) के कुछ छात्रों का एक गुट वहां आ धमका। स्विमिंग पूल के अपने कुछ सख्त नियम होते हैं, जैसे— जूते बाहर उतारना, प्रवेश से पहले फॉर्म भरना और उचित स्विमिंग कॉस्ट्यूम (Swimming Costume) पहनना।
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लेकिन सत्ता और गुटबाजी के नशे में चूर इन छात्रों ने किसी भी नियम को मानने से साफ इनकार कर दिया।
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    जूते पहनकर जबरन प्रवेश: छात्र बिना किसी अनुमति के और जूते पहनकर सीधे पूल क्षेत्र के अंदर घुसने लगे।
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    महिला इंचार्ज का विरोध: वहां ड्यूटी पर तैनात लेडी इंचार्ज ने जब अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उन्हें रोका और शालीनता से जूते उतारकर अंदर जाने को कहा, तो छात्र भड़क गए। अपनी गलती मानने के बजाय उन्होंने महिला कर्मचारी के साथ ऊंची आवाज में बदतमीजी शुरू कर दी।
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"हम तो नहाएंगे, जो करना है कर लो" – छात्रों की दबंगई

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स्विमिंग पूल में सुरक्षा और रिकॉर्ड के लिए एक एंट्री फॉर्म भरना अनिवार्य होता है। जब महिला इंचार्ज ने छात्रों से प्रवेश फॉर्म भरने को कहा और ऐसा न करने पर मेरठ कॉलेज के प्रिंसिपल (Principal) से उनकी शिकायत करने की चेतावनी दी, तो छात्रों का रवैया और अधिक आक्रामक हो गया।
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विक्टोरिया पार्क स्विमिंग पूल खुलते ही Meerut College के छात्रों की गुंडागर्दी शुरू हो गई है

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छात्रों ने महिला की बातों को पूरी तरह अनसुना कर दिया और अभद्रता की सारी हदें पार करते हुए कहा, "हम तो नहाएंगे, जो करना है कर लो।" फीस का दिया अजीबोगरीब तर्क: नियम तोड़ने के बचाव में छात्रों ने एक बेहद बेतुका तर्क पेश किया। उनका कहना था कि यह स्विमिंग पूल मेरठ कॉलेज का ही हिस्सा है। वे कॉलेज में अपनी पढ़ाई की जो फीस जमा करते हैं, उसमें इस पूल की फीस भी शामिल होती है। इसलिए वे बार-बार यह एंट्री फॉर्म क्यों भरें? यह तर्क न केवल प्रशासनिक नियमों की अज्ञानता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि वे जानबूझकर व्यवस्था को ठेंगा दिखाना चाहते थे।
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बिना स्विमिंग कॉस्ट्यूम के पूल में छलांग और अभद्र भाषा का प्रयोग

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सार्वजनिक स्विमिंग पूल में स्वच्छता बनाए रखने के लिए नायलॉन (Nylon) या उचित फैब्रिक की स्विमिंग ड्रेस पहनना अनिवार्य होता है। लेकिन इन छात्रों ने इस नियम की भी खुलेआम धज्जियां उड़ाईं। वे पूल के पास जाकर अपने कपड़े उतारने लगे और बिना किसी उचित तैराकी पोशाक के ही नहाने की जिद करने लगे।
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    कॉस्ट्यूम देने की मांग: जब महिला इंचार्ज ने उन्हें बिना स्विमिंग ड्रेस के कपड़े उतारने और पूल में जाने से मना किया, तो छात्रों ने बेहद बेशर्मी से जवाब दिया कि यह उनकी (प्रबंधन की) जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के लिए स्विमिंग ड्रेस की व्यवस्था रखें, वरना वे ऐसे ही नहाएंगे।
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    सरेआम दी धमकी: विरोध करने पर छात्रों ने महिला कर्मचारी की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए धमकी भरे लहजे में कहा, "कम बोल, ज्यादा हल्ला मत कर, तेरे से बात नहीं कर रहे।" सार्वजनिक स्थान पर एक महिला कर्मचारी के साथ इस तरह की भाषा का प्रयोग सीधे तौर पर महिला सुरक्षा (Women Safety) और कार्यस्थल पर सम्मान के नियमों का उल्लंघन है।
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सार्वजनिक सुरक्षा और महिलाओं-बच्चों के लिए असहज माहौल

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विक्टोरिया पार्क का यह स्विमिंग पूल कोई निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यहां शहर के संभ्रांत परिवार, महिलाएं और छोटे बच्चे भी तैराकी सीखने और अभ्यास करने आते हैं। जब छात्रों का गुट इस तरह की बदसलूकी, गाली-गलौज और बिना कपड़ों के अभद्रता कर रहा था, तब वहां मौजूद अन्य लोग बेहद असहज (Uncomfortable) महसूस कर रहे थे।
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पीड़ित महिला इंचार्ज ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे उपद्रवी तत्वों के कारण पूरे पूल का शांत और अनुशासित माहौल खराब होता है। परिवार अपने बच्चों और महिलाओं को यहां सुरक्षित मानकर भेजते हैं, लेकिन ऐसे गुंडा तत्वों की वजह से लोगों में खौफ और असुरक्षा की भावना पैदा होती है।
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पहले भी आ चुकी हैं शिकायतें, प्रशासन क्यों है मौन?

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सबसे हैरानी और चिंता की बात यह है कि मेरठ कॉलेज के छात्रों द्वारा इस तरह की अनुशासनहीनता और गुंडागर्दी का यह कोई पहला मामला नहीं है। सूत्रों और स्थानीय स्टाफ के अनुसार:
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    इससे पहले भी कई बार छात्र इसी तरह गुटों में आकर हंगामा कर चुके हैं।
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    नियमों को ताक पर रखकर बिना फीस या फॉर्म के पूल में घुसने की घटनाएं पहले भी रिपोर्ट की गई हैं।
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    बावजूद इसके, न तो मेरठ कॉलेज प्रशासन ने अपने इन बिगड़ैल छात्रों पर कोई लगाम कसी है और न ही स्थानीय पुलिस प्रशासन ने यहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम किए हैं।
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कड़ी कार्रवाई की उठी मांग (Demand for Strict Action)

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इस ताजा घटना के बाद विक्टोरिया पार्क प्रबंधन और विशेष रूप से महिला इंचार्ज ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की गुहार लगाई है।
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    पुलिस की गश्त: मांग की गई है कि स्विमिंग पूल परिसर के आसपास पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए और ऐसे असामाजिक तत्वों पर तुरंत केस दर्ज किया जाए।
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    कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही: मेरठ कॉलेज के प्रिंसिपल और प्रबंधन को भी इस घटना का संज्ञान लेते हुए आरोपी छात्रों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें निलंबित (Suspend) करने जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।
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    महिला सुरक्षा: कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों के साथ इस तरह के दुर्व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
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मेरठ जैसे शहर में, जो अपनी खेल प्रतिभाओं के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है, वहां खेल परिसरों में ऐसी घटनाएं बेहद निंदनीय हैं। 'छात्र' होने का मतलब यह नहीं है कि आपको किसी भी सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा करने या नियमों को तोड़ने का लाइसेंस मिल गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस सरेआम हुई गुंडागर्दी और महिला से अभद्रता के मामले में मेरठ पुलिस (Meerut Police) और कॉलेज प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है, ताकि भविष्य में विक्टोरिया पार्क स्विमिंग पूल का माहौल सुरक्षित और गरिमामय बना रहे।
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