मेरठ (Meerut): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के पॉश इलाके शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट (Central Market) में इन दिनों कोहराम मचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा दिए गए ध्वस्तीकरण (Demolition) के आदेश के बाद से व्यापारियों की नींद उड़ी हुई है। अब यह मामला सिर्फ कानूनी लड़ाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है।READ ALSO:-मेरठ सेंट्रल मार्केट: 700 दुकानों पर लटकी 'सुप्रीम' तलवार; महापंचायत में व्यापारियों का अल्टीमेटम - "हमारी दुकानों से पहले भ्रष्ट अफसरों पर हो कार्रवाई"
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शनिवार को 'व्यापार बचाओ संघर्ष समिति' के बैनर तले आयोजित एक विशाल आमसभा में व्यापारियों ने 21 और 22 फरवरी को संपूर्ण मेरठ बंद (Meerut Bandh) का आह्वान किया है। सबसे अहम बात यह है कि 22 फरवरी को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का मेरठ दौरा भी प्रस्तावित है। ऐसे में भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले शास्त्रीनगर में ही विरोध के स्वर पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।
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क्या है पूरा मामला? (The Core Issue)

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यह पूरा विवाद आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना (Lokesh Khurana) की एक याचिका से जुड़ा है। खुराना ने सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सख्त आदेश दिए थे। कोर्ट ने छह सप्ताह के भीतर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने और कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था।
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मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को होनी है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती को देखते हुए आवास एवं विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) की टीम ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने के लिए तैयार है, जिससे व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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21-22 फरवरी को 'मेरठ बंद': पीएम के दौरे पर संकट?

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शनिवार को हुई आमसभा में व्यापारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। व्यापारियों ने निर्णय लिया है कि सेंट्रल मार्केट को अनिश्चितकाल के लिए बंद रखा जाएगा। इसके अलावा, पूरे शहर का ध्यान आकर्षित करने के लिए 21 और 22 फरवरी को मेरठ बंद का ऐलान किया गया है।
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व्यापारी नेता शैंकी वर्मा ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, "यह लड़ाई सिर्फ कुछ दुकानों की नहीं, बल्कि यहां बैठीं तमाम मां-बहनों और परिवारों की रोजी-रोटी की है। 22 फरवरी को प्रधानमंत्री का मेरठ आगमन प्रस्तावित है। यह विडंबना होगी कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री शहर में होंगे और दूसरी तरफ उनका अपना कोर वोटर (व्यापारी वर्ग) अपनी दुकानें बंद करके सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहा होगा।"
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भाजपा के गढ़ में बगावत के सुर

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शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट का इलाका पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अभेद्य किला माना जाता है। यहां का व्यापारी वर्ग भाजपा का कोर वोटर रहा है। लेकिन शनिवार की सभा में जो नजारा दिखा, उसने स्थानीय भाजपा नेताओं को असहज कर दिया।
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सभा में मौजूद व्यापारियों ने खुले मंच से कहा, "हम पीढ़ियों से भाजपा को वोट देते आ रहे हैं, लेकिन आज हमें लग रहा है कि हमारे ही व्यापार को खत्म करने की साजिश रची जा रही है।"
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इस दौरान जब महिला व्यापारी अलका मखीजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की नीतियों पर तीखी टिप्पणी की, तो वहां मौजूद भाजपा के पुराने नेता असहज हो गए, लेकिन जनआक्रोश को देखते हुए वे कुछ बोल नहीं सके। यह स्थिति संकेत दे रही है कि यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो पार्टी को अपने ही गढ़ में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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आत्महत्या की चेतावनी: भावुक हुए व्यापारी

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माहौल उस वक्त और भी गमगीन और तनावपूर्ण हो गया जब एक व्यापारी की पत्नी, रजनी शर्मा ने माइक संभाला। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "हमने जीवन भर की कमाई इस काम में लगा दी है। यदि अब एक भी निर्माण पर हथौड़ा चला, तो मैं आत्महत्या कर लूंगी, जिसकी जिम्मेदार सरकार और प्रशासन होगा।"
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व्यापारियों का कहना है कि वे डिप्रेशन में हैं और उन्हें अपने बच्चों का भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है।
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प्रशासन और आवास विकास पर मनमानी का आरोप

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पूर्व पार्षद और व्यापारी नेता सतीश गर्ग ने आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को गुमराह किया जा रहा है। गर्ग ने तर्क दिया:
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    उप-विधि (Bye-laws): सेंट्रल मार्केट के लिए नई भवन निर्माण एवं विकास उप-विधि तैयार की गई थी, जिसमें 18 मीटर चौड़ी सड़क पर बाजार बसाने का प्रावधान था। लेकिन अब इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
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    पुराने आश्वासन: तत्कालीन कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद और अन्य जनप्रतिनिधियों ने लिखित में भरोसा दिलाया था कि बाजार को नहीं तोड़ा जाएगा।
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    हापुड़ अड्डा उदाहरण: व्यापारियों ने मांग की है कि जिस तरह हाईकोर्ट के आदेश के बाद हापुड़ अड्डे पर सरकारी जमीन पर बने बाजार को राहत दी गई थी, उसी तर्ज पर सेंट्रल मार्केट को भी राहत मिलनी चाहिए।
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आगे क्या? (What Next?)

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सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 13 मार्च को है, लेकिन उससे पहले आवास विकास परिषद को कार्रवाई करके रिपोर्ट (Action Taken Report) दाखिल करनी है। यही कारण है कि विभाग जल्द से जल्द बुलडोजर चलाने की फिराक में है, जबकि व्यापारी "आर-पार की लड़ाई" के मूड में हैं।
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अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। क्या पीएम मोदी के दौरे से पहले इस विवाद को सुलझाया जा सकेगा, या फिर मेरठ की सड़कों पर सरकार और व्यापारियों के बीच टकराव देखने को मिलेगा?
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मेरठ सेंट्रल मार्केट (Meerut Central Market) का मुद्दा अब एक कानूनी लड़ाई से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। 21 और 22 फरवरी का बंद न केवल प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि यह भाजपा के लिए भी एक चेतावनी है कि उसका आधार वोट बैंक खिसक रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन और लाखों लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश के विरोध में व्यापारियों ने 21 और 22 फरवरी को 'मेरठ बंद' का ऐलान किया है। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की याचिका पर कोर्ट ने 6 सप्ताह में कार्रवाई के आदेश दिए हैं। व्यापारियों ने भाजपा सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है और आत्मदाह तक की चेतावनी दी है। खास बात यह है कि 22 फरवरी को ही पीएम मोदी का मेरठ दौरा प्रस्तावित है, जिससे टकराव की स्थिति बन गई है।
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