उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर स्थित शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में पिछले कई महीनों से चल रहे भारी तनाव और असमंजस के बीच आखिरकार एक बेहद सकारात्मक और राहत भरी खबर सामने आई है। मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण की जिस खौफनाक तलवार ने व्यापारियों की रातों की नींद उड़ा रखी थी, उस पर अब विराम लगने के आसार नजर आ रहे हैं। आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) की तरफ से शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के 80 भूखंड स्वामियों को लैंड यूज (भू-उपयोग) बदलने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।READ ALSO:-मेरठ के मोदीपुरम स्टेशन पर भारी हंगामा: NCRTC स्टाफ पर डॉक्टर से अभद्रता का आरोप, टिकट न मिलने से छूटी 'इमरजेंसी कॉल'
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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद से ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल था। लेकिन नई शमन नीति (Compounding Policy) के तहत दिए गए इस विकल्प ने व्यापारियों को एक संजीवनी प्रदान की है। इस नए आदेश के बाद व्यापारियों में खुशी की लहर है और उन्होंने राहत की सांस ली है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर यह मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण का पूरा मामला क्या है, नई शमन नीति के नियम क्या हैं, और आने वाले समय में बाकी बचे व्यापारियों का भविष्य क्या होगा। (Internal link to related article: उत्तर प्रदेश में शहरी नियोजन और अवैध निर्माण से जुड़ी चुनौतियां)
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क्या है पूरा मामला और क्यों मंडरा रहा था ध्वस्तीकरण का खतरा?

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मेरठ का शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट शहर के सबसे प्रमुख और व्यस्त व्यावसायिक केंद्रों में से एक है। लेकिन इस बाजार का एक बड़ा हिस्सा तकनीकी रूप से विवादों के घेरे में रहा है। आवास विकास परिषद द्वारा यह क्षेत्र मूल रूप से आवासीय (Residential) उपयोग के लिए आवंटित किया गया था। लेकिन समय के साथ, इन आवासीय भूखंडों पर धड़ल्ले से व्यावसायिक (Commercial) कॉम्प्लेक्स, दुकानें और शोरूम तनते चले गए।
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मामला तब गंभीर हो गया जब आवासीय भूखंडों पर अवैध व्यावसायिक निर्माण की शिकायतें न्यायालय तक पहुंचीं। एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने कड़ा रुख अपनाया और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए। अदालत का स्पष्ट आदेश था कि जो निर्माण नियमों के विरुद्ध किए गए हैं, उन्हें ध्वस्त किया जाए। इसी आदेश के अनुपालन में आवास विकास परिषद ने पूरे सेंट्रल मार्केट में नोटिस चस्पा कर दिए थे, जिसके बाद से ही मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण का संकट गहरा गया था।
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व्यापारी अपने व्यापार और जीवन भर की पूंजी को बचाने के लिए लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। बाजार बंद करके अधिकारियों की चौखट पर गुहार लगाई जा रही थी। कई दिनों तक प्रशासन और व्यापारियों के बीच गतिरोध बना रहा, लेकिन अब इस नई नीति ने एक मध्य मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
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आवास विकास परिषद की नई शमन नीति और भू-उपयोग परिवर्तन

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व्यापारियों के लगातार विरोध और कानूनी पेचीदगियों को देखते हुए, आवास विकास परिषद लखनऊ से भू-उपयोग बदलने की मंजूरी का पत्र जारी किया गया है। नई भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के अंतर्गत वास्तुविद नियोजक ने प्रारंभिक चरण में 80 व्यापारियों को शमन शुल्क (Compounding Fee) के जरिए राहत देने का निर्णय लिया है।
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यह प्रक्रिया 'सशुल्क भू-उपयोग परिवर्तन' (Paid Land Use Change) कहलाती है। इसके तहत आवासीय भूखंडों को आधिकारिक तौर पर व्यावसायिक श्रेणी में बदल दिया जाएगा। जो व्यापारी इस प्रक्रिया को पूरा करेंगे, उनके निर्माण को वैध (Legal) मान लिया जाएगा और उन पर से ध्वस्तीकरण का खतरा पूरी तरह से टल जाएगा।
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36 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर: क्या हैं वित्तीय नियम?

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इस राहत की एक कीमत भी तय की गई है। परिषद ने हर सेक्टर और ब्लॉक के लिए वहां की सड़कों की चौड़ाई और व्यावसायिक उपयोग की तीव्रता के आधार पर अलग-अलग दरें निर्धारित की हैं।
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प्राप्त जानकारी और जारी किए गए नोटिस के अनुसार:

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    सेंट्रल मार्केट के लिए दर: सबसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र होने के कारण, सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को 36 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से शमन शुल्क का भुगतान करना होगा।
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    मिश्रित भू-उपयोग: जहां आंशिक रूप से आवासीय और व्यावसायिक उपयोग है (मिश्रित भू-उपयोग), वहां के लिए दरें थोड़ी कम (लगभग 27 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर) निर्धारित की गई हैं।
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यह धनराशि व्यापारियों के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ तो है, लेकिन अपनी करोड़ों की संपत्ति और पीढ़ियों से जमे-जमाए व्यापार को मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बचाने के लिए व्यापारी इस शुल्क को चुकाने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं।
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सेटबैक (Setback) और पार्किंग की अनिवार्य शर्तें

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शमन शुल्क जमा करना ही इस पूरी प्रक्रिया का अंत नहीं है। आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता अश्वनी कुमार ने स्पष्ट किया है कि व्यापारियों को कुछ सख्त तकनीकी नियमों का भी पालन करना होगा।
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    सेटबैक छोड़ना अनिवार्य: भवन निर्माण उपविधि (Building Bye-laws) के अनुसार, हर व्यावसायिक प्रतिष्ठान के आगे एक निश्चित खाली जगह (Setback) छोड़ना अनिवार्य होता है। यह जगह आपातकालीन स्थितियों, पैदल चलने वालों और सड़क के चौड़ीकरण के लिए होती है। जिन 80 व्यापारियों को नोटिस मिला है, उन्हें नियम अनुसार अपने भवन के आगे सेटबैक छोड़ना ही होगा। यदि किसी ने सेटबैक कवर कर लिया है, तो उसे वह हिस्सा खुद तोड़कर पीछे हटना होगा।
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    पार्किंग का स्वयं इंतजाम: बाजार में यातायात जाम की भारी समस्या को देखते हुए यह शर्त रखी गई है कि शमन शुल्क जमा करने वाले व्यापारियों को अपने ग्राहकों के लिए पार्किंग का इंतजाम भी स्वयं करना होगा। यह कदम भविष्य में बाजार की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए उठाया गया है।
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इन नियमों का पालन किए बिना भू-उपयोग परिवर्तन का प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा।
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डेडलाइन: 15 मार्च तक पूरी करनी होगी प्रक्रिया

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समय सीमा इस पूरी राहत प्रक्रिया का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। आवास विकास परिषद द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, व्यापारियों को यह पूरी प्रक्रिया एक तय समय सीमा के भीतर पूरी करनी होगी।
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व्यापारियों को निर्देश दिया गया है कि वे नोटिस मिलने के एक महीने के भीतर निर्धारित धनराशि जमा करें। विशेष रूप से, 15 मार्च तक की समय सीमा के भीतर इन सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। यदि कोई व्यापारी इस समय सीमा के भीतर शमन शुल्क जमा करने में विफल रहता है या सेटबैक के नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण की कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है। प्रशासन इस मामले में अब और ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी है।
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व्यापारियों में खुशी की लहर: गुलाल उड़ाकर खेली होली

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पिछले कई महीनों से जिस बाजार में सन्नाटा, डर और पुलिस के सायरन गूंज रहे थे, वहां भू-उपयोग बदलने के नोटिस के आते ही माहौल पूरी तरह बदल गया। अपनी दुकानों के बचने की खबर मिलते ही सेंट्रल मार्केट के व्यापारी खुशी से झूम उठे। खुशी का आलम यह था कि व्यापारियों ने समय से पहले ही एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली खेली और मिठाइयां बांटीं।
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यह जश्न उस गहरे मानसिक तनाव से मुक्ति का प्रतीक था, जो व्यापारी हर रात इस डर के साथ झेल रहे थे कि कहीं अगली सुबह उनका व्यापार मलबे के ढेर में न तब्दील हो जाए।
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व्यापारी नेताओं की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति

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इस पूरे संकट के दौरान व्यापारियों का नेतृत्व कर रहे व्यापारी नेताओं ने परिषद के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है।
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    व्यापारी नेता अंजनी कुमार और जितेंद्र अग्रवाल अट्टू ने इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह प्रशासन और व्यापारियों के बीच संवाद की जीत है। उन्होंने व्यापारियों के साथ तत्काल बैठक कर आगे की प्रक्रिया पर विमर्श शुरू कर दिया है।
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    वरिष्ठ व्यापारी नेता विनीत अग्रवाल शारदा ने भी इस निर्णय को सकारात्मक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई शमन नीति के तहत जिन 80 व्यापारियों को नोटिस मिले हैं, वे सभी जल्द से जल्द आवेदन की प्रक्रिया पूरी करेंगे और निर्धारित शुल्क जमा करेंगे।
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व्यापारी संगठनों का अब अगला लक्ष्य यह है कि जिन बाकी व्यापारियों को अभी तक शमन का नोटिस नहीं मिला है, उनके लिए भी इसी तर्ज पर कोई रास्ता निकाला जाए ताकि पूरे बाजार को बचाया जा सके।
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अक्टूबर 2025 का खौफनाक मंजर: पूर्व में हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई

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मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण का खौफ व्यापारियों के मन में इतना गहरा क्यों था, इसे समझने के लिए हमें कुछ महीने पीछे जाना होगा। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद आवास विकास परिषद ने पिछले साल ध्वस्तीकरण की एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था।
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    भवन संख्या 661/6 का ध्वस्तीकरण: 25 और 26 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सेंट्रल मार्केट स्थित भवन संख्या 661/6 (एक बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स) को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जमींदोज कर दिया गया था। इस कॉम्प्लेक्स में दर्जनों दुकानें थीं, और देखते ही देखते कई व्यापारियों की जिंदगी भर की कमाई मलबे में तब्दील हो गई थी।
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    85 लाख का ठेका: गौरतलब है कि पिछले साल परिषद ने एक इमारत को पूरी तरह ध्वस्त करने और मलबा हटाने के लिए बाकायदा 85 लाख रुपये का टेंडर (ठेका) जारी किया था। इस भारी-भरकम ठेके को लेकर व्यापारियों में काफी रोष था, क्योंकि इससे प्रशासन की कार्रवाई की गंभीरता और आक्रामकता का पता चलता था।
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अक्टूबर की उस कार्रवाई के बाद जो 20 फुट ऊंचा मलबा वहां पड़ा रहा, वह हर दिन बाकी व्यापारियों को उनके डरावने भविष्य की याद दिलाता था। यही कारण है कि जब 80 लोगों को शुल्क जमा करके अपनी दुकानें बचाने का विकल्प मिला, तो उन्होंने इसे ईश्वर के वरदान की तरह स्वीकार किया।
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मेरठ सेंट्रल मार्केट का आर्थिक और सामाजिक महत्व

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मेरठ का सेंट्रल मार्केट केवल ईंट-पत्थर से बनी दुकानों का समूह नहीं है, बल्कि यह शहर की अर्थव्यवस्था की धड़कन है। हजारों परिवारों की रोजी-रोटी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस बाजार से जुड़ी हुई है।
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दुकान के मालिकों के अलावा, यहां काम करने वाले कर्मचारी, लोडर, रिक्शा चालक और आसपास के छोटे वेंडर्स सभी इसी बाजार पर निर्भर हैं। जब मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही थी, तो व्यापारी नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि यहां बुलडोजर चला, तो हजारों लोग रातों-रात बेरोजगार हो जाएंगे।
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यही वजह है कि प्रशासन के लिए भी इस मामले को सुलझाना एक टेढ़ी खीर बन गया था। एक तरफ देश की सर्वोच्च अदालत का सख्त आदेश था, तो दूसरी तरफ अपने ही नागरिकों के रोजगार और जीवन यापन का सवाल। शमन शुल्क का यह विकल्प अर्थव्यवस्था को बचाते हुए कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने का एक बेहतरीन उदाहरण है।
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बाकी बचे 1400 से अधिक व्यापारियों का क्या होगा?

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यद्यपि 80 व्यापारियों को फौरी राहत मिल गई है, लेकिन असली चुनौती अभी भी खत्म नहीं हुई है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, शास्त्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों (जैसे जागृति विहार) में ऐसे 1468 व्यावसायिक निर्माण हैं जो आवासीय भूखंडों पर खड़े हैं और जिन पर अभी भी कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है।
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आवास विकास परिषद ने प्रारंभिक चरण में उन 80 निर्माणों के लिए आपत्तियां और शमन शुल्क के नोटिस जारी किए हैं जिनकी फाइलें पूरी हो चुकी हैं। अन्य दुकानदारों के लिए भी अब राहत की एक नई उम्मीद जरूर जागी है। उम्मीद की जा रही है कि परिषद चरणबद्ध तरीके से बाकी व्यापारियों के लिए भी इसी प्रकार की शमन योजना लेकर आएगी। हालांकि, जो व्यापारी 36 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का भारी शुल्क वहन नहीं कर पाएंगे या जो सेटबैक के नियमों का पालन करने में तकनीकी रूप से असमर्थ होंगे, उनके लिए आगे का रास्ता अभी भी बेहद कठिन है।
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व्यापारी संघों ने चेतावनी दी थी कि यदि सरकार ने उचित कदम नहीं उठाए तो वे दिल्ली कूच कर संसद का घेराव करेंगे। लेकिन वर्तमान सकारात्मक घटनाक्रम को देखते हुए फिलहाल इस तरह के उग्र विरोध की संभावना कम हो गई है।
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शहरी नियोजन (Urban Planning) के लिए एक बड़ा सबक

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मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण का यह पूरा प्रकरण भारत में शहरी नियोजन और प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण (Case Study) है। जब आवासीय कॉलोनियां बसती हैं, तो समय के साथ वहां व्यावसायिक जरूरतें भी पनपती हैं। यदि प्रशासन समय रहते मास्टर प्लान में बदलाव करके व्यावसायिक पट्टियां (Commercial Belts) विकसित नहीं करता है, तो लोग मजबूरन या लालचवश आवासीय भूखंडों पर दुकानें खोलने लगते हैं।
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शुरुआती दौर में निचले स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत या अनदेखी से ये अवैध निर्माण खड़े हो जाते हैं। और जब दशकों बाद न्यायालय का डंडा चलता है, तो आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। मेरठ के इस मामले से सभी विकास प्राधिकरणों को सबक लेना चाहिए कि वे अवैध निर्माण को शुरुआत में ही रोकें, ताकि भविष्य में इस तरह की ध्वस्तीकरण की नौबत ही न आए।
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अंततः, मेरठ के शास्त्रीनगर में मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण के काले बादलों के बीच 80 व्यापारियों के लिए सूरज की किरण निकल आई है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों और अक्टूबर 2025 में हुई ध्वस्तीकरण की डरावनी कार्रवाई के बाद, कोई नहीं सोच सकता था कि बाजार दोबारा अपने पुराने स्वरूप में लौट पाएगा।
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लेकिन आवास विकास परिषद की नई शमन नीति और 36,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर के शमन शुल्क (Land Use Change Fee) ने एक व्यवहारिक समाधान पेश किया है। व्यापारियों द्वारा 15 मार्च की समय सीमा के भीतर निर्धारित धनराशि जमा करने और सेटबैक के नियमों का पालन करने के बाद, यह विवाद कानूनी रूप से सुलझ जाएगा। व्यापारी नेताओं की सकारात्मक पहल और व्यापारियों द्वारा गुलाल खेलकर मनाई गई खुशी इस बात का प्रमाण है कि संवाद और नीतिगत बदलावों से बड़े से बड़े संकट का समाधान निकाला जा सकता है। अब शहर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन बाकी बचे सैकड़ों व्यापारियों के लिए क्या रणनीति अपनाता है, ताकि मेरठ का यह ऐतिहासिक बाजार पूरी तरह से सुरक्षित और वैध हो सके।
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मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर होने वाली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से 80 व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। आवास विकास परिषद ने इन 80 भूखंड स्वामियों को 36,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से शमन शुल्क जमा कर अपना भू-उपयोग (आवासीय से व्यावसायिक) बदलने की मंजूरी दे दी है। व्यापारियों को सेटबैक छोड़ने और पार्किंग की व्यवस्था करने की अनिवार्य शर्त के साथ 15 मार्च तक की समय सीमा दी गई है। ध्वस्तीकरण का खतरा टलने की खबर से व्यापारियों ने गुलाल उड़ाकर खुशी मनाई। व्यापारी नेताओं ने फैसले का स्वागत किया है और सभी 80 व्यापारियों की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने का आश्वासन दिया है। यह कदम बाजार के भविष्य और हजारों लोगों के रोजगार को सुरक्षित करने की दिशा में एक अहम पड़ाव है।
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