खबरीलाल न्यूज़ डेस्क / मेरठ (शासन डेस्क): श्रावण मास (सावन) की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में आस्था का सबसे बड़ा और विशाल सैलाब— 'कांवड़ यात्रा' शुरू होने जा रही है। लाखों शिवभक्त (कांवड़िये) हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री से पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्यों की ओर प्रस्थान करेंगे। इस विशाल जनसमूह को सुरक्षित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता।READ ALSO:-न फटने का डर, न भीगने की टेंशन! दुनिया के 60 देशों में चलते हैं प्लास्टिक के नोट, जानिए भारत में RBI का क्या है मास्टरप्लान?
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इसी चुनौती से निपटने और एक फूलप्रूफ (Foolproof) सुरक्षा चक्र तैयार करने के लिए, सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल (SP Goyal) और पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण मेरठ पहुंचे। यहाँ कमिश्नरी सभागार में उन्होंने पांच राज्यों (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान) के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समन्वय (Coordination) बैठक की। करीब तीन घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में कांवड़ यात्रा की हर छोटी-बड़ी तैयारी का खाका खींचा गया।
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आइए, सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं कि इस हाई-लेवल मीटिंग में कांवड़ यात्रियों और आम जनता के लिए क्या-क्या बड़े फैसले लिए गए हैं।
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 मंडलायुक्त सभागार में मुख्य सचिव व डीजीपी ने बैठक ली।

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1. शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है कांवड़ यात्रा: मुख्य सचिव

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बैठक की शुरुआत करते हुए मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने सभी जनपदों से आए अधिकारियों का प्रजेंटेशन (Presentation) देखा और साफ शब्दों में कहा कि कांवड़ यात्रा योगी सरकार की 'सर्वोच्च प्राथमिकताओं' में से एक है।
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उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि:
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    कांवड़ मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
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    सभी मार्गों पर साफ-सफाई, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था (Street Lights) और जल निकासी (Drainage) का विशेष ध्यान रखा जाए।
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    कांवड़ शिविरों (Camps) का संचालन पूरी तरह से निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिविर संचालकों को सभी आवश्यक अनुमतियां समय रहते बिना किसी परेशानी के दे दी जाएं।
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2. इमरजेंसी के लिए हाई-टेक मेडिकल व्यवस्था

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लाखों लोग मीलों पैदल चलते हैं, ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति (Medical Emergency) आना स्वाभाविक है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि:
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    जल उठाने के स्थलों (हरिद्वार/गोमुख), स्नान घाटों, प्रमुख मंदिरों और जलाभिषेक स्थलों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के साथ-साथ मजबूत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।
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    सभी प्रमुख यात्रा मार्गों पर आवश्यकता के अनुसार जगह-जगह चिकित्सा शिविर (Medical Camps) लगाए जाएं।
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    कांवड़ मार्ग पर बाइक एंबुलेंस (Bike Ambulance) और बड़ी एंबुलेंस की तैनाती 24x7 रहे।
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    रास्ते में पड़ने वाले सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में कांवड़ियों के लिए पर्याप्त संख्या में बेड रिजर्व (आरक्षित) रखे जाएं ताकि किसी भी घायल या बीमार श्रद्धालु को तत्काल इलाज मिल सके।
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3. 'जीरो इंसीडेंट-जीरो एक्सीडेंट' का महा-लक्ष्य

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बैठक का मुख्य फोकस (Focus) यात्रा के दौरान होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और आपसी टकराव को रोकना था। प्रशासन ने इस बार "जीरो इंसीडेंट-जीरो एक्सीडेंट" (Zero Incident - Zero Accident) का बड़ा लक्ष्य रखा है।
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इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुख्य सचिव ने रणनीति समझाते हुए कहा कि:
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    विभिन्न राज्यों और जनपदों की पुलिस के बीच ट्रैफिक डायवर्जन (Traffic Diversion) को लेकर रियल-टाइम संवाद होना चाहिए।
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    सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान और ज्वाइंट रूट प्लानिंग (Joint Route Planning) हो।
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    अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारी वाहनों का रूट डायवर्जन इस तरह किया जाए कि कांवड़ियों को कोई खतरा न हो और आम जनता (Daily Commuters) को भी जाम की समस्या से न जूझना पड़े।
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4. सीसीटीवी, ड्रोन और शराब-मीट पर पूर्ण प्रतिबंध

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सुरक्षा और धार्मिक आस्था के सम्मान को ध्यान में रखते हुए बैठक में कई अहम फैसले लिए गए:
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    मीट और शराब पर बैन: कांवड़ यात्रा के सभी निर्धारित मार्गों पर पड़ने वाली मीट (मांस) और शराब (Liquor) की दुकानों का संचालन यात्रा समाप्त होने तक पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
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    आसमान से निगहबानी: यात्रा मार्ग के हर चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे (CCTV Cameras) लगाए जाएंगे। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों और भीड़-भाड़ वाले चौराहों पर ड्रोन (Drones) के माध्यम से आसमान से भी निगरानी की जाएगी।
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    पर्यावरण का भी ध्यान: प्रशासन ने 'प्लास्टिक मुक्त कांवड़ यात्रा' (Plastic-Free Kanwar Yatra) का आह्वान किया है। शिविरों में सिंगल यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं होगा।
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    कंट्रोल रूम: बैठक के तुरंत बाद DGP ने पुलिस लाइन में बने अत्याधुनिक 'एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर' (Integrated Command and Control Centre) का विधिवत उद्घाटन किया, जहां से पूरे जोन की मॉनिटरिंग होगी।
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5. डीजीपी राजीव कृष्ण की सख्त चेतावनी: नियम तोड़े तो खैर नहीं

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पत्रकारों से वार्ता करते हुए डीजीपी राजीव कृष्ण ने स्पष्ट किया कि हर साल की तरह इस बार भी नई चुनौतियां हैं, लेकिन पुलिस पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और कांवड़ियों से नियमों का पालन करने की अपील की।
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डीजे और स्टंटबाजी पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस:

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    डीजीपी ने साफ कर दिया है कि डीजे (DJ) का संचालन पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ध्वनि मानकों (Decibel Limits) के अनुरूप ही होगा। डीजे की ऊंचाई एक निर्धारित मानक से अधिक नहीं होगी ताकि बिजली के तारों या पुलों से कोई हादसा न हो।
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    यात्रा के दौरान डीजे प्रतियोगिताओं (DJ Competitions) पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
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    बिना साइलेंसर वाले बुलेट/वाहनों (Modified Silencers) और बाइकों पर स्टंटबाजी (Stunts) करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और वाहन सीज कर दिए जाएंगे।
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डीजीपी ने कहा, "ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है कि कांवड़ यात्रा से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां, रूट डायवर्जन और वेदर अपडेट्स मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए समय-समय पर श्रद्धालुओं तक पहुंचती रहेंगी। लेकिन जो लोग सोशल मीडिया पर अफवाह (Fake News) या भ्रामक सूचना फैलाएंगे, उनसे पुलिस बहुत सख्ती से निपटेगी।"
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6. बाबा औघड़नाथ मंदिर में मुख्य सचिव और डीजीपी का जलाभिषेक

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समीक्षा बैठक और तमाम प्रशासनिक तैयारियों के बाद, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल और डीजीपी राजीव कृष्ण ने अपनी आस्था प्रकट करते हुए मेरठ छावनी स्थित ऐतिहासिक और प्रसिद्ध 'बाबा औघड़नाथ मंदिर' (Augharnath Temple) का दौरा किया। दोनों शीर्ष अधिकारियों ने परंपरागत तरीके से बाबा भोलेनाथ का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक कर प्रदेश की शांति और यात्रा की सफलता की कामना की।
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इस महत्वपूर्ण मौके पर एडीजी (ADG) मेरठ जोन भानु भास्कर, मंडलायुक्त भानु चंद गोस्वामी, डीआईजी रेंज कलानिधि नैथानी और मेरठ के जिलाधिकारी (DM) डॉ. वीके सिंह समेत पांचों राज्यों के कई आला अधिकारी मौजूद रहे।
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कांवड़ यात्रा एक नज़र में: कहाँ से कहाँ जाते हैं शिवभक्त?

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कांवड़ यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा पर्व है।
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    श्रद्धालु मुख्य रूप से हरिद्वार, गोमुख (उत्तराखंड), ऋषिकेश, सुल्तानगंज (बिहार) और ब्रजघाट (गढ़मुक्तेश्वर) जैसे पवित्र स्थानों से गंगाजल भरते हैं।
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    वहां से मीलों पैदल चलकर (या डाक कांवड़ के जरिए) सावन की शिवरात्रि के दिन अपने-अपने गांवों, कस्बों या शहरों के प्राचीन शिव मंदिरों में लौटते हैं और उसी गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।
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    मेरठ का औघड़नाथ मंदिर, गाजियाबाद का दूधेश्वर नाथ मंदिर, और बागपत का पुरा महादेव मंदिर पश्चिमी यूपी के सबसे बड़े कांवड़ जलाभिषेक केंद्रों में से एक हैं।
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खबरीलाल न्यूज़ डेस्क प्रशासन की इन तैयारियों की सराहना करता है और सभी कांवड़ियों से अपील करता है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए अपनी यात्रा को सुरक्षित और भक्तिमय बनाएं। बोल बम... हर हर महादेव!
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