मेरठ: परतापुर हवाई पट्टी से हवाई उड़ानें शुरू करने का दशकों पुराना सपना अब हकीकत में बदलने की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में मंडलायुक्त द्वारा की गई बैठक के बाद, हवाई पट्टी के विस्तार के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) और जिला प्रशासन की एक संयुक्त टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने उड़ान में आने वाली बाधाओं को चिन्हित किया और आगे की रणनीति पर चर्चा की।READ ALSO:-दिशा कॉलेज में छात्रों का गुस्सा फूटा, ABVP ने घेरा गेट: कॉलेज प्रशासन को दिया एक हफ्ते का अल्टीमेटम
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हवाई पट्टी के निरीक्षण में सामने आईं ये बाधाएं
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राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी के साथ एडीएम सिटी बृजेश सिंह और एएआइ के अधिकारियों समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने हवाई पट्टी का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं:
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    चौड़ाई और लंबाई: छोटे विमानों के लिए हवाई पट्टी को 40 मीटर से बढ़ाकर 75 मीटर चौड़ा करना होगा। वहीं, 72 सीटर विमानों के लिए इसकी लंबाई 1500 मीटर से बढ़ाकर 1800 मीटर करनी होगी। इसके लिए अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण करना पड़ेगा।
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    अवरोध: सर्वे में सामने आया कि छोटे विमानों की उड़ान में भी पराग दूध फैक्ट्री की चिमनी और एमडीए की एयरपोर्ट एन्क्लेव कॉलोनी के फ्लैट्स बाधा बनेंगे, जिन्हें हटाना होगा।
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अधिकारियों ने एक नई हवाई पट्टी बनाने के बजाय पुरानी का ही विस्तार करने का निर्णय लिया है, क्योंकि नई हवाई पट्टी के निर्माण में बहुत अधिक खर्च आएगा।
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तैयारियां हुईं तेज, ये है आगे की रणनीति
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निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने आगे की रणनीति भी तय कर ली है। अब तहसील की टीम अगले दो दिनों में हवाई पट्टी की चौड़ाई और लंबाई के विस्तार से जुड़े कोर्डिनेट एएआइ को उपलब्ध कराएगी। इन कोर्डिनेट की मदद से एएआइ मानचित्र तैयार करेगी, जिसके आधार पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने बताया कि शुरुआती दौर में 19 और 40 सीटर विमानों को उड़ाने का प्रयास किया जाएगा। अगर यह सफल रहा तो 72 सीटर विमानों के लिए तैयारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि फ्लाईविंग एजेंसी ने विमान उड़ाने के लिए लाइसेंस मिलते ही उड़ानें शुरू करने की सहमति दी है।
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उड़ान योजना से मिलेंगे सस्ते टिकट
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लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने यह भी बताया कि 'उड़ान योजना' के तहत लखनऊ का टिकट 2,500 रुपये का है, जबकि सामान्य उड़ान के लिए 6,000 रुपये देने होंगे। किराये के इस अंतर को प्रदेश सरकार वहन करेगी, जिसे वायबिलिटी गैप फंड (वीजीएफ) कहा जाता है।
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एडीएम सिटी बृजेश सिंह ने कहा है कि एएआई की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की रणनीति पर काम किया जाएगा।
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