उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (UP ATS) ने देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाले एक बड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यूपी एटीएस ने खुफिया इनपुट के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed - JeM) के एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है।READ ALSO:-मिशन 2027 का सियासी शंखनाद: BJP की नई राष्ट्रीय टीम में UP-उत्तराखंड का महा-दबदबा, स्मृति ईरानी की शानदार वापसी, जानें 'सोशल इंजीनियरिंग' का पूरा मास्टरस्ट्रोक
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पकड़े गए आतंकी का नाम मोहम्मद जफर (Mohammad Zafar) है। वह महज 24 साल का है और अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए मेरठ की एक मस्जिद और मदरसे की आड़ में छिपा हुआ था। एटीएस द्वारा सोमवार को जारी किए गए प्रेस नोट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनमें सबसे बड़ा खुलासा मदरसे के नाम पर जुटाए गए चंदे को क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के जरिए पाकिस्तान भेजने का है।
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आइए, यूपी एटीएस के इस पूरे ऑपरेशन, आतंकी जफर की बैकग्राउंड और इसके काम करने के हाई-टेक तरीकों को विस्तार से समझते हैं।
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कौन है संदिग्ध आतंकी मोहम्मद जफर?
\r\n\r\nयूपी एटीएस के मुताबिक, 24 वर्षीय मोहम्मद जफर मूल रूप से बिहार के पूर्णिया (Purnia) जिले का रहने वाला है। वह काफी समय से उत्तर प्रदेश में सक्रिय था। जफर की शैक्षिक और धार्मिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उसने साल 2022 में मेरठ के ही एक मदरसे से 'मौलवी' की डिग्री हासिल की थी।
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मौलवी की तालीम पूरी करने के बाद वह कुछ समय के लिए वहां से चला गया था, लेकिन अभी करीब दो महीने पहले ही वह वापस मेरठ लौटा था। इस बार उसके लौटने का मकसद सिर्फ मजहबी तालीम देना नहीं था, बल्कि सीमा पार बैठे पाकिस्तान के आतंकी आकाओं के इशारों पर भारत में जिहाद और खिलाफत का खतरनाक बीज बोना था। एटीएस ने उसे रविवार को मेरठ की एक मस्जिद के पास से घेराबंदी करके दबोच लिया।
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आतंक की हाई-टेक फंडिंग: मदरसे के चंदे से 'क्रिप्टो' तक का सफर
\r\n\r\nजफर की गिरफ्तारी से आतंकवादियों की फंडिंग के बदलते हुए खतरनाक स्वरूप (Modus Operandi) का खुलासा हुआ है। पहले आतंकी हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करते थे, लेकिन जफर जैसे नए उम्र के आतंकियों ने जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
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- \r\n चंदा उगाहने का खेल: एटीएस की जांच में सामने आया है कि जफर बेहद शातिर दिमाग था। वह आम लोगों की धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाता था। वह मदरसों के विकास और गरीब बच्चों की तालीम के नाम पर लोगों से भारी मात्रा में चंदा (Donations) इकट्ठा करता था।\r\n \r\n
- \r\n बाइनेंस (Binance) और USDT का इस्तेमाल: चंदे में मिली भारतीय मुद्रा को पाकिस्तान भेजने के लिए जफर ने इंटरनेशनल क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म 'बाइनेंस' (Binance) का इस्तेमाल किया। पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर उसने अपना बाइनेंस अकाउंट बनाया। इसके बाद वह भारतीय रुपये को USDT (जो कि एक स्टेबल क्रिप्टोकरेंसी है और अमेरिकी डॉलर के मूल्य के बराबर होती है) में बदलता था।\r\n \r\n
- \r\n बॉर्डर पार ट्रांजैक्शन: इन क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स के जरिए उसने कई बार बिना किसी बैंकिंग रिकॉर्ड में आए, पाकिस्तान में बैठे जैश-ए-मोहम्मद के गुर्गों को भारी भरकम रकम ट्रांसफर की। एटीएस अब इसके पूरे फाइनेंशियल लेजर को डिकोड कर रही है।\r\n \r\n
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ब्रेनवाश और कट्टरपंथ: मसूद अजहर का अंधभक्त था जफर
\r\n\r\nजफर अचानक आतंकी नहीं बना; यह ऑनलाइन ब्रेनवाश और कट्टरपंथ (Radicalization) का एक क्लासिक उदाहरण है। एटीएस की पूछताछ में जफर ने खुद कबूल किया है कि वह इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा के संपर्क में आया था।
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- \r\n जेहादी साहित्य और शहादत का नशा: पढ़ाई के दौरान ही उसने इंटरनेट पर जैश-ए-मोहम्मद के बारे में पढ़ना शुरू कर दिया था। जिहाद और मुजाहिदों (आतंकियों) की शहादत से जुड़ी झूठी और भड़काऊ कहानियों ने उसके दिमाग पर गहरा असर डाला।\r\n \r\n
- \r\n मसूद अजहर के भड़काऊ भाषण: वह जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी मौलाना मसूद अजहर (Maulana Masood Azhar) के भाषणों का अंधभक्त बन गया था। वह अजहर के जेहादी वीडियो अपने मोबाइल में रखता था।\r\n \r\n
- \r\n चेहरा छिपाकर फेसबुक पर प्रोपेगेंडा: वह सिर्फ वीडियो देखता ही नहीं था, बल्कि उन्हें दूसरों तक फैलाकर अन्य युवाओं को भी हिंसक जेहाद के लिए उकसाता था। जफर अपने फेसबुक अकाउंट पर अपना चेहरा रुमाल से ढंककर जेहाद और खिलाफत के समर्थन में भड़काऊ वीडियो पोस्ट करता था।\r\n \r\n
- \r\n पाकिस्तानी व्हाट्सएप ग्रुप्स का मेंबर: जफर के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाले कई 'जेहादी वॉट्सऐप ग्रुप' (Jihadi WhatsApp Groups) मिले हैं। इन्हीं ग्रुप्स के जरिए वह पाकिस्तानी हैंडलर के सीधे संपर्क में आया और उसने भारत में जिहाद फैलाने के लिए खुद को मुजाहिद के रूप में पेश किया।\r\n \r\n
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आगे की कार्रवाई: रडार पर पूरा नेटवर्क
\r\n\r\nयूपी एटीएस ने मोहम्मद जफर के खिलाफ संबंधित धाराओं (UAPA और देशद्रोह सहित) में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। जांच अब एक नए और बड़े स्तर पर पहुंच गई है:
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- \r\n संपर्कों की पड़ताल: एटीएस की टीमें यह पता लगा रही हैं कि मेरठ, बिहार या देश के अन्य हिस्सों में जफर के साथ और कौन-कौन लोग इस स्लीपर सेल का हिस्सा हैं।\r\n \r\n
- \r\n क्रिप्टो ट्रेल (Crypto Trail): साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से बाइनेंस अकाउंट की हिस्ट्री खंगाली जा रही है ताकि यह पता चल सके कि कुल कितनी रकम पाकिस्तान भेजी गई और पैसा किस-किस पाकिस्तानी अकाउंट/वॉलेट में गया।\r\n \r\n
- \r\n हैंडलर की पहचान: जफर को निर्देश देने वाले उस पाकिस्तानी हैंडलर की डिजिटल पहचान स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, जिसके कहने पर यह पूरी टेरर फंडिंग की जा रही थी।\r\n \r\n
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क्या है जैश-ए-मोहम्मद (JeM)? एक संक्षिप्त इतिहास
\r\n\r\nइस पूरे मामले को समझने के लिए जैश-ए-मोहम्मद के बैकग्राउंड को जानना जरूरी है।
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- \r\n स्थापना: 'जैश-ए-मोहम्मद' का अर्थ है 'पैगंबर मोहम्मद की सेना'। यह पाकिस्तान स्थित एक खूंखार इस्लामी आतंकवादी संगठन है। इसे कुख्यात आतंकी मसूद अजहर ने वर्ष 2000 में बनाया था।\r\n \r\n
- \r\n मुख्यालय: इसका हेडक्वार्टर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित बहावलपुर में है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के संरक्षण में यह संगठन खुलेआम ट्रेनिंग कैंप चलाता है।\r\n \r\n
- \r\n कंधार विमान अपहरण (IC-814) का कनेक्शन: मसूद अजहर वही आतंकी है जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने 1994 में जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार किया था। लेकिन दिसंबर 1999 में आतंकवादियों ने इंडियन एयरलाइंस के यात्री विमान 'IC-814' का अपहरण कर उसे अफगानिस्तान के कंधार ले गए। 150 से ज्यादा निर्दोष भारतीय बंधकों की जान बचाने के बदले में भारत सरकार को मसूद अजहर को जेल से रिहा करना पड़ा था।\r\n \r\n
- \r\n भारत पर हमले: रिहाई के तुरंत बाद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद बनाया। इसी संगठन ने 2001 में भारतीय संसद पर हमला, 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला और 2019 में पुलवामा में सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले पर आत्मघाती हमला (जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे) करवाया था।\r\n \r\n
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यूपी एटीएस द्वारा मोहम्मद जफर की यह गिरफ्तारी एक बहुत बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। अगर इसे समय रहते नहीं पकड़ा जाता, तो मदरसे और मस्जिद की आड़ में यह शख्स न सिर्फ बड़े पैमाने पर युवाओं का ब्रेनवाश कर सकता था, बल्कि भारत के खिलाफ किसी बड़ी आतंकी वारदात की वित्तीय रूपरेखा (Financial Planning) भी तैयार कर सकता था। यूपी पुलिस और एटीएस की यह मुस्तैदी दर्शाती है कि प्रदेश में आतंकवाद और देश विरोधी ताकतों के खिलाफ सरकार की 'जीरो टॉलरेंस नीति' किस तरह धरातल पर काम कर रही है।