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मेरठ (खबरीलाल डेस्क)। उत्तर प्रदेश के मेरठ नगर निगम में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सरकारी धन की खुली लूट का एक बेहद संगीन मामला प्रकाश में आया है। पारदर्शी शासन व्यवस्था के दावों के बीच इस घोटाले ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मेरठ के वार्ड-50 से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पार्षद और कार्यकारिणी सदस्य संजय सिंह सैनी ने नगर निगम के निर्माण स्टोर में तैनात लिपिक अनीस अहमद के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।READ ALSO:-चांदपुर पुलिस ने पेश की शानदार नजीर: धार्मिक स्थल से मानकों के तहत हटवाया लाउडस्पीकर, थाने के मालखाने के बजाय नौनिहालों के स्कूल को किया भेंट
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\r\nपार्षद संजय सिंह सैनी, जो युवा सैनी सभा (पंजीकृत) मेरठ के जिलाध्यक्ष भी हैं, ने भ्रष्टाचार के इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए 24 अगस्त 2026 और 26 अगस्त 2026 को क्रमशः मेरठ के जिलाधिकारी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखित और विस्तृत शिकायत भेजी है। इन शिकायती पत्रों में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि एक चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी पिछले दो दशकों से नियमों की धज्जियां उड़ाकर न सिर्फ लिपिक का कार्यभार संभाल रहा है, बल्कि कर्मचारी यूनियन की आड़ में उच्च अधिकारियों पर दबाव बनाकर करोड़ों रुपये का घोटाला कर चुका है।
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चतुर्थ श्रेणी से लिपिक तक का अवैध सफर और यूनियन की धौंस मेरठ नगर निगम अधिनियम के स्थापित नियमों के तहत यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है कि कोई भी चतुर्थ श्रेणी (Class IV) का कर्मचारी लिपिक (Clerk) के पद पर आसीन हो या उसका कार्यभार संभाले। जिलाधिकारी को 24 अगस्त 2026 को भेजे गए अपने पत्र में पार्षद संजय सिंह सैनी ने इस नियम का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि निर्माण स्टोर में तैनात अनीस अहमद मूल रूप से एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। इसके बावजूद वह पिछले 20 वर्षों से निर्माण स्टोर में लिपिक की कुर्सी पर अवैध रूप से जमा हुआ है।
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सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी एक पटल पर एक कर्मचारी को तीन साल से ज्यादा नहीं रखा जा सकता, लेकिन अनीस अहमद पिछले 20 सालों से एक ही जगह काबिज है। पार्षद का आरोप है कि इस लंबे कार्यकाल में उसने अकूत संपत्ति अर्जित कर ली है और वह करोड़ों का मालिक बन चुका है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि वह नगर निगम में कर्मचारी यूनियन का अध्यक्ष होने का नाजायज फायदा उठाता है। जब भी कोई ईमानदार अधिकारी उसके कार्यों की जांच करने या उसे पद से हटाने की कोशिश करता है, तो वह यूनियन के नाम पर दबाव बनाता है। इसी धौंस के चलते वह फर्जी फाइलें तैयार कराता है और अधिकारियों को भुगतान करने के लिए मजबूर करता है, जिससे नगर निगम को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति हो रही है।
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मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उठाए गए 5 सबसे बड़े और गंभीर मुद्दे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 26 अगस्त 2026 को भेजे गए पत्र में पार्षद ने निर्माण स्टोर में चल रही धांधली के कई पहलुओं को सिलसिलेवार तरीके से उजागर किया है, जो सीधे तौर पर सरकारी खजाने की लूट की ओर इशारा करते हैं:
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- \r\n आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का निजी और अज्ञात उपयोग: नगर निगम के निर्माण स्टोर में लगभग 25 आउटसोर्सिंग कर्मचारी (बेलदार और राजमिस्त्री) तैनात किए गए हैं। पार्षद का आरोप है कि अनीस अहमद इन कर्मचारियों से निगम के आधिकारिक कार्यों के बजाय अलग-अलग निजी या अज्ञात स्थानों पर काम करवाता है। पार्षद ने नगर आयुक्त से इन सभी 25 कर्मचारियों के नाम, पिता के नाम और पते सहित पूरी रिपोर्ट तुरंत तलब करने की मांग की है।\r\n \r\n
- \r\n सोसायटी पर 17 वर्षों से अवैध कब्जा और धांधली: नगर निगम की एक महत्वपूर्ण कर्मचारी सोसायटी पर अनीस अहमद पिछले 17 वर्षों से बिना किसी चुनाव के अध्यक्ष पद पर काबिज है। सहकारी नियमों के अनुसार सोसायटी में हर तीन साल में चुनाव होना अनिवार्य है। इस सोसायटी में कुल 7 सदस्य थे, जिनमें से 4 सदस्यों (सुरेंद्र, राजकुमार, कुसुम शर्मा, श्रीवास्तव बाबू) की मौत हो चुकी है। अब केवल 3 सदस्य बचे हैं। आरोप है कि अनीस अहमद अपनी मर्जी से सोसायटी की मोटी रकम का दुरुपयोग कर रहा है और नगर निगम को लगातार क्षति पहुंचा रहा है।\r\n \r\n
- \r\n साइन बोर्ड भुगतान में भारी गोलमाल की आशंका: निर्माण स्टोर से नगर निगम क्षेत्र में लगने वाले साइन बोर्ड के प्रति नग (Per Piece) भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। पार्षद ने इसका स्पष्ट और पारदर्शी हिसाब मांगा है कि प्रति बोर्ड कितना पैसा ठेकेदारों या निर्माण स्टोर को दिया जा रहा है।\r\n \r\n
- \r\n वित्तीय वर्ष 2025-26 के करोड़ों के खर्चों का ब्योरा: पार्षद ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि विगत वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगर निगम के मुख्य अकाउंट से निर्माण स्टोर को कुल कितनी धनराशि का भुगतान किया गया है। इस ब्योरे से फर्जी फाइलों के माध्यम से निकाले गए गबन का सही आंकड़ा सामने आ सकेगा।\r\n \r\n
- \r\n सरकारी आवास पर गुंडई से कब्जा कर अपना घर बनाना: शिकायत पत्र का सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि नगर निगम में तैनात रहे अर्शी बाबू (जिनकी मृत्यु लगभग 15 वर्ष पूर्व हो चुकी है) को निगम की तरफ से एक सरकारी आवास आवंटित था। उनके निधन के बाद नियमों के तहत यह भवन किसी अन्य पात्र कर्मचारी को अलॉट किया जाना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि अनीस अहमद ने अपनी दबंगई और गुंडई दिखाते हुए उस सरकारी मकान को तुड़वा दिया और बेशर्मी से उस जमीन को अपने निजी मकान में मिला लिया है।\r\n \r\n

प्रशासनिक कार्रवाई और संपत्ति जांच की पुरजोर मांग इस खुलासे के बाद से मेरठ नगर निगम के भीतर सुगबुगाहट तेज हो गई है। भाजपा पार्षद संजय सिंह सैनी ने दोनों शिकायती पत्रों के माध्यम से प्रदेश की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए सरकार और जिला प्रशासन से सख्त से सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
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- \r\n आरोपी अनीस अहमद को तत्काल प्रभाव से लिपिक के पद से हटाया जाए और उसे उसके मूल चतुर्थ श्रेणी पद पर वापस भेजा जाए।\r\n \r\n
- \r\n उसके द्वारा पिछले 20 वर्षों में अर्जित की गई सभी चल-अचल संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच (Vigilance Probe) कराई जाए।\r\n \r\n
- \r\n फर्जी फाइलों के माध्यम से नगर निगम के खाते से निकाले गए करोड़ों रुपयों की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।\r\n \r\n
- \r\n नगर निगम की सोसायटी के चुनाव तुरंत प्रभाव से कराए जाएं और पिछले 17 वर्षों के वित्तीय लेन-देन का सघन ऑडिट किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n सरकारी आवास पर अवैध कब्जे के मामले में मुकदमा दर्ज कर सरकारी संपत्ति को तुरंत कब्जामुक्त कराया जाए।\r\n \r\n
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भ्रष्टाचार से शहर के विकास पर पड़ रहा है सीधा असर निर्माण स्टोर नगर निगम की एक ऐसी रीढ़ है, जहां से शहर के विकास और बुनियादी ढांचे (सड़कें, नाले, निर्माण कार्य) की सामग्री पास होती है। अगर यहीं से करोड़ों की फर्जी फाइलें बनेंगी, तो स्वाभाविक रूप से इसका सीधा असर शहर की जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ेगा। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का 20 साल से लिपिक बनकर यूनियन की आड़ में सत्ता चलाना, व्यवस्था की एक बड़ी नाकामी को भी दर्शाता है।
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अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और मेरठ के जिलाधिकारी स्तर से इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए कब और क्या कड़ी प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाती है। यदि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ती है, तो निगम के कई बड़े अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है।
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डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार पूर्ण रूप से मेरठ नगर निगम के वार्ड-50 के पार्षद श्री संजय सिंह सैनी द्वारा उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री और मेरठ के जिलाधिकारी को दिनांक 24.08.2026 और 26.08.2026 को भेजे गए आधिकारिक शिकायती पत्रों के आधार पर प्रकाशित किया गया है। समाचार में लगाए गए सभी आरोप पार्षद के पत्र में उल्लिखित तथ्यों और दावों पर आधारित हैं। 'खबरीलाल' स्वतंत्र रूप से इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रशासनिक जांच, विभागीय समिति या माननीय न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन ही इस मामले में पूर्ण सत्य सामने आएगा।
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