गाजियाबाद: रविवार देर रात गाजियाबाद के एक मंदिर में सियासत और धर्म का एक ऐसा अध्याय लिखा गया, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की मौजूदगी में महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने न केवल प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी पर भविष्य में कोई भी टिप्पणी न करने की शपथ ली, बल्कि एक ऐसा बयान भी दिया जिसने एक नई बहस छेड़ दी है।READ ALSO;-'पद्मश्री' पर चला बुलडोजर! वाराणसी में हॉकी के जादूगर मो. शाहिद की आखिरी निशानी भी जमींदोज, रोता रहा परिवार
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नरसिंहानंद ने कहा, "जो हिंदू मांस और हलाल उत्पादों का सेवन करते हैं, वे अपने पूरे वंश के विनाश का कारण बनेंगे।"
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आधी रात, मंदिर और 'सियासी शपथ'
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यह पूरा घटनाक्रम नवरात्रि के दौरान जगदम्बा महाकाली मंदिर में हुआ, जहां केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दर्शन करने पहुंचे थे। यहां उनकी मुलाकात यति नरसिंहानंद से हुई। लंबी बातचीत के बाद, नरसिंहानंद ने गिरिराज सिंह को साक्षी मानकर और मां देवी के सामने शपथ ली कि वह अब कभी भी पीएम मोदी, सीएम योगी या उनकी पार्टी के खिलाफ कुछ नहीं कहेंगे।
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'हलाल मांस खाना ब्रह्महत्या से भी बड़ा पाप'
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अपनी शपथ से पहले, यति नरसिंहानंद ने 'झटका मांस' मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि सामान्य रूप से मांसाहार ही गलत है, लेकिन जिस तरह से हलाल किया जाता है, उस मांस को खाना ब्रह्महत्या से भी बड़ा पाप है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा करने वाले हिंदू अपने कुल का नाश कर बैठेंगे।
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क्यों नरम पड़े नरसिंहानंद के तेवर?
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नरसिंहानंद के इस बदले हुए रुख के पीछे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की 'डांट' और नसीहत थी। नरसिंहानंद ने खुद स्वीकार किया कि गिरिराज सिंह ने उन्हें फोन पर डांटा था और कहा था कि "आपके (नरसिंहानंद के) कारण हम जैसे लोग मां के दर्शन करने भी नहीं पहुंच पाते हैं।"
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गिरिराज सिंह ने नरसिंहानंद को सलाह दी कि वे अपनी ऊर्जा मोदी-योगी की आलोचना करने के बजाय सनातन के दुश्मनों से लड़ने में लगाएं। यदि वे ऐसा करते हैं, तो सरकार और पार्टी हर मुद्दे पर उनके साथ खड़ी रहेगी। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि भाजपा अब अपने नेताओं के खिलाफ बोलने वाले हिंदुत्ववादी आवाजों को भी एक साथ लाने की कोशिश कर रही है।
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