वाराणसी: रविवार का दिन काशी के लिए एक दुखद अध्याय लिख गया। यहां विकास के नाम पर उस महान खिलाड़ी की आखिरी निशानी पर बुलडोजर चला दिया गया, जिसकी हॉकी स्टिक के जादू ने पूरी दुनिया में भारत का सिर गर्व से ऊंचा किया था। पद्मश्री और 1980 मॉस्को ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता, मोहम्मद शाहिद के घर के एक हिस्से को भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में जमींदोज कर दिया गया।READ ALSO:-सदियों की परंपरा ध्वस्त! इस दशहरे रावण नहीं, 11 'कातिल हसीनाओं' वाली शूर्पणखा जलेगी, मेरठ की मुस्कान का चेहरा भी शामिल
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यह सिर्फ एक इमारत का टूटना नहीं था, बल्कि एक शहर द्वारा अपने नायक की विरासत पर चलाया गया बुलडोजर था। 5 बुलडोजर और 200 जवानों के साए में हुई इस कार्रवाई ने न केवल शाहिद के परिवार को बेघर कर दिया, बल्कि हर खेल प्रेमी के दिल में एक गहरी चोट भी दी है।
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'अब हम कहां जाएं?' - आंसुओं में डूबा परिवार
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घर टूटने के साथ ही परिवार की उम्मीदें भी टूट गईं। घर में रह रहीं शाहिद की भाभी नाजनीन ने रोते हुए बस इतना कहा, "परिवार में हम ही यहां रहते हैं। मुआवजा भी बहुत कम मिला। अब बताइए, इस उम्र में हम कहां जाएं?" उनके आंसू उस विकास पर सवाल खड़े कर रहे थे, जो अपने ही नायकों की स्मृतियों को रौंदकर आगे बढ़ रहा है।
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क्या कहता है प्रशासन?
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प्रशासन ने इसे सड़क चौड़ीकरण के लिए एक जरूरी कार्रवाई बताया है। एडीएम सिटी आलोक वर्मा के अनुसार, शाहिद के मकान के 9 हिस्सेदार थे। इनमें से 6 ने मुआवजा ले लिया था, जबकि 3 ने कोर्ट से स्टे लिया हुआ है, इसलिए उनका हिस्सा छोड़ दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि नोटिस देने और मुआवजा बांटने के बाद ही यह कदम उठाया गया है।
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काशी में पुलिस लाइन से कचहरी तक किए गए अतिक्रमण को प्रशासन की ओर से हटाया गया।

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विरासत पर भारी पड़ा विकास
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मोहम्मद शाहिद सिर्फ एक ओलंपियन नहीं, बल्कि वाराणसी की पहचान थे। 'ड्रिब्लिंग के मास्टर' के नाम से मशहूर इस खिलाड़ी ने शहर की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय फलक पर भारत का तिरंगा लहराया था। उनका यह घर सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा और शहर के लिए एक गौरव का प्रतीक था। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन चाहता तो इस विरासत को बचाते हुए विकास का कोई और रास्ता निकाल सकता था।
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यह घटना एक कड़वा सवाल छोड़ गई है कि क्या स्मार्ट सिटी और चौड़ी सड़कों की चकाचौंध में हम अपने उन नायकों की निशानियों को मिटा देंगे, जिन्होंने देश को असल गौरव दिलाया था?
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