वाराणसी: जिस खिलाड़ी की ड्रिब्लिंग के जादू ने 1980 के मॉस्को ओलंपिक में भारत को हॉकी का स्वर्ण पदक दिलाया था, आज उसी पद्मश्री ओलंपियन मोहम्मद शाहिद की यादों को वाराणसी में विकास के नाम पर बुल
Published at : 29 Sep 2025, 01:27 PM
Updated at : 11 Sep 2026, 09:25 PM
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Bulldozer Over ‘Padma Shri’: Last Memory of Hockey Wizard Mohd. Shahid Razed in Varanasi
यह सिर्फ एक इमारत का टूटना नहीं था, बल्कि एक शहर द्वारा अपने नायक की विरासत पर चलाया गया बुलडोजर था। 5 बुलडोजर और 200 जवानों के साए में हुई इस कार्रवाई ने न केवल शाहिद के परिवार को बेघर कर दिया, बल्कि हर खेल प्रेमी के दिल में एक गहरी चोट भी दी है।
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'अब हम कहां जाएं?' - आंसुओं में डूबा परिवार
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घर टूटने के साथ ही परिवार की उम्मीदें भी टूट गईं। घर में रह रहीं शाहिद की भाभी नाजनीन ने रोते हुए बस इतना कहा, "परिवार में हम ही यहां रहते हैं। मुआवजा भी बहुत कम मिला। अब बताइए, इस उम्र में हम कहां जाएं?" उनके आंसू उस विकास पर सवाल खड़े कर रहे थे, जो अपने ही नायकों की स्मृतियों को रौंदकर आगे बढ़ रहा है।
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योगी आदित्यनाथ जी का कार्य प्रशंसनीय और प्रेरणादायी है। उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया, जहां हर व्यक्ति को समान दृष्टि से देखा जाता है। कोई भी अवैध कार्य करने वाले को कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, बिना किसी भेदभाव के। #Varanasi#Kashi#Indiahttps://t.co/03PUm3PCDH
प्रशासन ने इसे सड़क चौड़ीकरण के लिए एक जरूरी कार्रवाई बताया है। एडीएम सिटी आलोक वर्मा के अनुसार, शाहिद के मकान के 9 हिस्सेदार थे। इनमें से 6 ने मुआवजा ले लिया था, जबकि 3 ने कोर्ट से स्टे लिया हुआ है, इसलिए उनका हिस्सा छोड़ दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि नोटिस देने और मुआवजा बांटने के बाद ही यह कदम उठाया गया है।
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विरासत पर भारी पड़ा विकास
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मोहम्मद शाहिद सिर्फ एक ओलंपियन नहीं, बल्कि वाराणसी की पहचान थे। 'ड्रिब्लिंग के मास्टर' के नाम से मशहूर इस खिलाड़ी ने शहर की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय फलक पर भारत का तिरंगा लहराया था। उनका यह घर सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा और शहर के लिए एक गौरव का प्रतीक था। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन चाहता तो इस विरासत को बचाते हुए विकास का कोई और रास्ता निकाल सकता था।
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यह घटना एक कड़वा सवाल छोड़ गई है कि क्या स्मार्ट सिटी और चौड़ी सड़कों की चकाचौंध में हम अपने उन नायकों की निशानियों को मिटा देंगे, जिन्होंने देश को असल गौरव दिलाया था?
Sabse pehle comment karne wale banein.