खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और रिहायशी गढ़ गाजियाबाद में यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ी और सिरदर्द बनने वाली समस्या वहां की सड़कों पर लगने वाला भीषण जाम है। पीक ऑवर्स (सुबह और शाम के समय) में स्थिति इतनी बदतर हो जाती है कि महज कुछ किलोमीटर की छोटी दूरी तय करने में भी लोगों का घंटों का समय और भारी मात्रा में कीमती ईंधन बर्बाद हो जाता है। जाम की यह थकावट न सिर्फ कामकाजी लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि प्रदूषण के स्तर को भी बढ़ाती है।
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लेकिन अब, शहर के दिल और सबसे व्यस्त इलाकों में शुमार हापुड़ चुंगी पर यातायात व्यवस्था की सूरत पूरी तरह बदलने वाली है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने लाखों वाहन चालकों को राहत देने के उद्देश्य से एक महा-परियोजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। प्राधिकरण ने संजयनगर सेक्टर-23 के एएलटी (ALT) सेंटर से शुरू होकर हापुड़ चुंगी होते हुए कविनगर थाने के आगे शास्त्रीनगर चौराहे तक एक शानदार फ्लाईओवर बनाने की विस्तृत योजना को आगे बढ़ा दिया है। शासन स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने की तैयारियां युद्ध स्तर पर तेज कर दी गई हैं।
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125 करोड़ रुपये का बजट: बदल जाएगी गाजियाबाद की सड़क व्यवस्था की तस्वीर

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सड़क बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने वाली इस बड़ी परियोजना को लेकर जो वित्तीय और प्रशासनिक आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद उत्साहजनक हैं:
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फ्लाईओवर की कुल लंबाई: प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई लगभग 1.2 किलोमीटर (1200 मीटर) होगी, जो एएलटी सेंटर से शुरू होकर शास्त्रीनगर चौराहे तक सीधे यातायात को पास कराएगी।
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अनुमानित लागत: इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण पर करीब 125 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी।
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फंडिंग का स्रोत: इस विकास कार्य के लिए बजट की कोई कमी न हो, इसके लिए पूरी राशि क्षेत्रीय अवस्थापना निधि (Regional Infrastructure Fund) से उपलब्ध कराई जाएगी।
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टेंडर की समय-सीमा: जीडीए अधिकारियों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, जून 2026 के आखिर तक इस प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया (Tendering Process) शुरू होने की पूरी संभावना है। टेंडर फाइनल होते ही निर्माण एजेंसी को काम सौंपकर धरातल पर निर्माण कार्य का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
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नया रूट मैप: किन इलाकों को आपस में जोड़ेगा यह फ्लाईओवर?

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यह फ्लाईओवर गाजियाबाद के कुछ सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक, रिहायशी और कमर्शियल हब को आपस में कनेक्ट करेगा। इस प्रोजेक्ट के तैयार होने के बाद नीचे दिए गए प्रमुख बिंदुओं पर यातायात का दबाव शून्य के बराबर रह जाएगा:
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एएलटी सेंटर (संजयनगर सेक्टर-23): फ्लाईओवर की शुरुआत इसी सेंटर के पास से होगी, जिससे संजयनगर और इसके आसपास की कॉलोनियों से आने वाले वाहनों को सीधा एलिवेशन मिलेगा।
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हापुड़ चुंगी चौराहा: यह इस पूरे रूट का मुख्य 'बॉटलनेक' यानी सबसे ज्यादा जाम वाला चौराहा है। फ्लाईओवर इसके ऊपर से गुजरेगा, जिससे नीचे के चौराहे पर केवल लोकल ट्रैफिक रह जाएगा।
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कविनगर थाना: कविनगर की तरफ जाने और वहां से आने वाले वाहनों को इस कट पर लगने वाले जाम से निजात मिलेगी।
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शास्त्रीनगर चौराहा: फ्लाईओवर का दूसरा छोर शास्त्रीनगर चौराहे के आगे जाकर उतरेगा, जिससे शास्त्रीनगर, राजनगर और पुराना बस अड्डा की तरफ जाने वाले वाहनों की रफ्तार सुगम हो जाएगी।
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एनएच-9 (NH-9) और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जाने वालों को होगा सबसे बड़ा फायदा

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वर्तमान में गाजियाबाद के सड़क नेटवर्क की स्थिति देखें, तो एएलटी सेंटर से हापुड़ चुंगी होते हुए डायमंड फ्लाईओवर के रास्ते बहुत बड़ी संख्या में हल्के और भारी वाहन एनएच-9 (NH-9) और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (Delhi-Meerut Expressway) की ओर आते-जाते हैं। चूंकि यह मार्ग एक्सप्रेसवे को शहर के आंतरिक हिस्सों से जोड़ता है, इसलिए सुबह और शाम के समय यहाँ वाहनों का रेला लग जाता है।
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नया फ्लाईओवर बनने के बाद इस पूरे कॉरिडोर की तस्वीर बदल जाएगी:

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एक्सप्रेसवे और एनएच-9 की तरफ जाने वाले 'थ्रू-ट्रैफिक' (सीधे जाने वाले वाहनों) को नीचे के स्थानीय चौराहों और सिग्नलों पर रुकना नहीं पड़ेगा।
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हापुड़ चुंगी पर ट्रैफिक का दबाव 70 प्रतिशत तक कम होने का अनुमान है, जिससे स्थानीय निवासियों को भी बाजार आने-जाने में कोई असुविधा नहीं होगी।
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रोजाना इस रूट से दिल्ली, नोएडा, मेरठ या हापुड़ की तरफ अप-डाउन करने वाले हजारों नौकरीपेशा लोगों का सफर पहले से कहीं अधिक आरामदायक और समय बचाने वाला साबित होगा।
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भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला

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यातायात विशेषज्ञों और नगर नियोजन इंजीनियरों का मानना है कि यह नया फ्लाईओवर गाजियाबाद की आंतरिक सड़क व्यवस्था को एक नई और आधुनिक रफ्तार देने के लिए मील का पत्थर साबित होने वाला है।
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परियोजना में क्यों किया गया बदलाव?

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शुरुआती दौर में योजनाकारों द्वारा कलेक्ट्रेट से लेकर सीबीआई (CBI) अकादमी तक फ्लाईओवर बनाने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार किया गया था। लेकिन, जब मौजूदा ट्रैफिक वॉल्यूम और जमीनी स्तर पर वाहनों के दबाव का विस्तृत सर्वे (Traffic Survey) किया गया, तो पाया गया कि एएलटी से शास्त्रीनगर मार्ग पर जाम की समस्या कहीं अधिक गंभीर है। इसी व्यावहारिक डेटा को प्राथमिकता देते हुए जीडीए (GDA) के शीर्ष अधिकारियों ने एएलटी-शास्त्रीनगर रूट के प्रस्ताव को फाइनल किया।
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जीडीए अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस परियोजना का तात्कालिक लक्ष्य सिर्फ मौजूदा जाम को कम करना ही नहीं है, बल्कि अगले 20 से 25 वर्षों में गाजियाबाद की आबादी और वाहनों की संख्या में होने वाली संभावित वृद्धि (Future Traffic Needs) को भी अग्रिम रूप से संभालना है।
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विकास की राह पर गाजियाबाद

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कुल मिलाकर, जून के अंत में टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही गाजियाबाद के बुनियादी ढांचे में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। 125 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 1.2 किमी लंबा फ्लाईओवर न केवल हापुड़ चुंगी के 'जाम के कलंक' को मिटाएगा, बल्कि शहर के आर्थिक विकास और रियल एस्टेट को भी बढ़ावा देगा। गाजियाबाद के वासियों के लिए अब वह दिन दूर नहीं जब उनका सफर बिना किसी मानसिक तनाव और थकावट के मिनटों में पूरा हो सकेगा!