खबरीलाल डेस्क
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में बसने और वहां की नागरिकता पाने का सपना देख रहे रईस निवेशकों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने बुधवार को व्हाइट हाउस में एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' (Trump Gold Card) वीजा कार्यक्रम का आधिकारिक शुभारंभ कर दिया है। इस कार्यक्रम के तहत विदेशी नागरिकों को अमेरिका में स्थायी निवास (Permanent Residency) और नागरिकता हासिल करने का एक 'फास्ट-ट्रैक' रास्ता दिया गया है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी जेब ढीली करनी होगी।READ ALSO:-यूपी में सर्दी का 'Second Attack': पश्चिमी विक्षोभ जाते ही ठिठुरा प्रदेश, 13 जिलों में 'विजिबिलिटी जीरो' का खतरा, देखें अपने शहर का हाल
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या है ट्रम्प गोल्ड कार्ड वीजा?

\r\n\r\n
व्हाइट हाउस में व्यापारिक नेताओं की मौजूदगी में इस कार्यक्रम को लॉन्च करते हुए ट्रम्प ने इसे गेम-चेंजर बताया। इस योजना के मुताबिक, कोई भी विदेशी नागरिक लगभग 10 लाख डॉलर (करीब 8.5 करोड़ रुपये) का निवेश करके अमेरिका का स्थायी निवासी बन सकता है। इसके बाद उन्हें अमेरिकी नागरिकता (US Citizenship) प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
ट्रम्प ने दावा किया कि यह 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' (Trump Gold Card) पारंपरिक 'ग्रीन कार्ड' से कई मायनों में बेहतर है। उन्होंने कहा, "यह योजना ग्रीन कार्ड जैसी है, लेकिन इसके फायदे उससे कहीं अधिक हैं। इससे हम दुनिया भर के उच्च-मूल्य वाले निवेशकों और प्रतिभाशाली उद्यमियों को अमेरिका ला सकेंगे।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कंपनियों के लिए 20 लाख डॉलर का विकल्प

\r\n\r\n
सिर्फ व्यक्तिगत निवेशक ही नहीं, बल्कि बड़ी कंपनियों के लिए भी इस प्रोग्राम में खास प्रावधान किए गए हैं। ट्रम्प ने 'कॉर्पोरेट गोल्ड कार्ड' (Corporate Gold Card) का विकल्प भी पेश किया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    नियम: यदि कोई अमेरिकी कंपनी किसी विदेशी प्रतिभाशाली कर्मचारी को अमेरिका लाना चाहती है या यहां बनाए रखना चाहती है, तो वह 20 लाख डॉलर (लगभग 17 करोड़ रुपये) का निवेश कर उस कर्मचारी को स्पॉन्सर कर सकती है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    फायदा: राष्ट्रपति ने विशेष रूप से एपल (Apple) जैसी दिग्गज टेक कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे वे बेहतरीन टैलेंट को अपने पास रख सकेंगी। उन्होंने कहा, "प्रतिभाशाली लोग देश में आकर काम कर सकेंगे और हमारी इकोनॉमी को मजबूती देंगे।"
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सीधे अमेरिकी खजाने में जाएगा पैसा

\r\n\r\n
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि निवेश की गई राशि सीधे अमेरिकी सरकार के खजाने में जाएगी। ट्रम्प ने बताया कि इस योजना से अमेरिकी राजस्व में अरबों डॉलर आने की उम्मीद है। ट्रम्प गोल्ड कार्ड वीजा (Trump Gold Card Visa) के लिए आधिकारिक वेबसाइट लाइव हो चुकी है और ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अमीरों के लिए 'गोल्डन टिकट' या अवसर?

\r\n\r\n
हालांकि, इस योजना के लॉन्च होते ही बहस भी छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि यह वीजा प्रोग्राम केवल अमीरों के लिए है और सामान्य श्रमिकों या मध्यम वर्ग के प्रवासियों के लिए इसमें कोई जगह नहीं है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    आलोचना: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिकता को "बिकाऊ" बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हो सकता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    समर्थन: वहीं, समर्थकों का कहना है कि यह अमेरिका की 'निवेश-आधारित आव्रजन नीति' (Investment-based Immigration) को नया आयाम देगा और देश की अर्थव्यवस्था को बूस्ट करेगा।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ग्रीन कार्ड बैकलॉग से मिलेगी मुक्ति?

\r\n\r\n
भारत जैसे देशों के हजारों लोग सालों से ग्रीन कार्ड के बैकलॉग में फंसे हैं। ऐसे में जिनके पास पूंजी है, उनके लिए ट्रम्प गोल्ड कार्ड (Trump Gold Card) एक त्वरित समाधान साबित हो सकता है। ट्रम्प ने साफ किया कि उनका उद्देश्य वैश्विक प्रतिभाओं को अमेरिका की ओर आकर्षित करना है, ताकि अमेरिका ग्लोबल रेस में सबसे आगे रहे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
डोनाल्ड ट्रम्प का यह कदम अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में एक बड़ा बदलाव है। 10 लाख डॉलर की कीमत वाला यह कार्ड निश्चित रूप से अमीरों के लिए अमेरिका का दरवाजा खोलता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दुनिया भर के निवेशक और भारतीय उद्योगपति इस नई योजना में कितनी रुचि दिखाते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' वीजा लॉन्च किया है। इसके तहत 10 लाख डॉलर (व्यक्तिगत) या 20 लाख डॉलर (कॉर्पोरेट) निवेश करके अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की जा सकती है। आवेदन शुरू हो चुके हैं। इसका उद्देश्य विदेशी निवेश बढ़ाना और टैलेंट को अमेरिका में रोकना है।