अगर आप नए साल (2026) का जश्न मनाने के लिए उत्तराखंड की हसीन वादियों—मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश या औली—जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। देवभूमि उत्तराखंड ने पर्यावरण संरक्षण और राज्य के राजस्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। 1 जनवरी 2026 से राज्य की सीमा में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के सभी कमर्शियल और निजी वाहनों (चार पहिया और उससे ऊपर) को अब 'ग्रीन सेस' (Green Cess) चुकाना होगा।READ ALSO:-दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर फिर लगा 'ब्रेक': 5वें फेज के लिए अब अप्रैल 2026 तक का इंतजार, गंगा एक्सप्रेसवे का सफर अभी दूर
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लंबे समय से फाइलों में अटकी इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब सख्त रुख अपना लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि पर्यावरण और आर्थिकी से जुड़े इस मामले में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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CM धामी की नाराजगी: "100 करोड़ का नुकसान कौन भरेगा?"
\r\n\r\nसचिवालय में आयोजित 2025-26 की राजस्व समीक्षा बैठक (Revenue Review Meeting) के दौरान मुख्यमंत्री का पारा तब चढ़ गया जब ग्रीन सेस की फाइल सामने आई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि जिस योजना की घोषणा फरवरी 2024 में ही हो चुकी थी, उसे धरातल पर उतारने में दो साल क्यों लग गए?
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बैठक के प्रमुख बिंदु:
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- \r\n देरी पर फटकार: सीएम ने कहा कि घोषणा और दरों में संशोधन के बावजूद योजना का लागू न होना प्रशासनिक लापरवाही है।\r\n \r\n
- \r\n राजस्व की हानि: इस लेटलतीफी के कारण राज्य सरकार को करीब 100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।\r\n \r\n
- \r\n सख्त निर्देश: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि 1 जनवरी से इस योजना को हर हाल में लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि "राज्य के विकास के लिए अपने संसाधनों से आय बढ़ाना सरकार की टॉप प्रायोरिटी है।"\r\n \r\n
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क्या है ग्रीन सेस और यह क्यों वसूला जा रहा है?
\r\n\r\nउत्तराखंड एक हिमालयी राज्य है, जहाँ का पर्यावरण बेहद संवेदनशील है। हर साल लाखों पर्यटक अपनी गाड़ियां लेकर यहाँ आते हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। इस 'ग्रीन सेस' का मुख्य उद्देश्य इसी प्रदूषण की भरपाई करना है।
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- \r\n पर्यावरण संरक्षण: इस फंड का इस्तेमाल राज्य की इकोलॉजी को बचाने, हरियाली बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के उपायों में किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n राजस्व का स्रोत: सरकार को उम्मीद है कि इस सेस से हर साल करीब 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी, जिसका उपयोग विकास कार्यों में होगा।\r\n \r\n
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ग्रीन सेस की रेट लिस्ट: आपकी जेब पर कितना भार?
\r\n\r\nपरिवहन विभाग ने गाड़ियों की कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग दरें निर्धारित की हैं। यह एंट्री फीस 80 रुपये से शुरू होकर 700 रुपये तक जाएगी।
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| \r\n वाहन की श्रेणी (Vehicle Category) \r\n | \r\n \r\n ग्रीन सेस (रुपये में) \r\n | \r\n
| \r\n निजी कारें / मोटर कैब / मैक्सी कैब \r\n | \r\n \r\n ₹80 \r\n | \r\n
| \r\n डिलीवरी वैन (3 टन तक) \r\n | \r\n \r\n ₹80 \r\n | \r\n
| \r\n हल्के माल वाहन (3 से 7.5 टन) \r\n | \r\n \r\n ₹120 \r\n | \r\n
| \r\n बड़ी बसें (12 सीट से ज्यादा) \r\n | \r\n \r\n ₹140 \r\n | \r\n
| \r\n भारी निर्माण वाहन (JCB/क्रेन) \r\n | \r\n \r\n ₹250 \r\n | \r\n
| \r\n मध्यम माल वाहन (7.5 से 18.5 टन) \r\n | \r\n \r\n ₹250 \r\n | \r\n
| \r\n भारी वाहन (एक्सेल के हिसाब से) \r\n | \r\n \r\n ₹450 से ₹700 \r\n | \r\n
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\r\n\r\n\r\nध्यान दें: एक बार ग्रीन सेस चुकाने के बाद वह रसीद पूरे दिन (24 घंटे) के लिए मान्य रहेगी। यानी एक दिन में आप कितनी भी बार बॉर्डर क्रॉस करें, टैक्स एक ही बार लगेगा।\r\n
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फ्रीक्वेंट ट्रैवलर्स के लिए 'बंपर डिस्काउंट'
\r\n\r\nजो लोग व्यापार या नौकरी के सिलसिले में अक्सर उत्तर प्रदेश या हिमाचल से उत्तराखंड आते-जाते हैं, उनके लिए सरकार ने पास सिस्टम की सुविधा दी है:
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- \r\n 3 महीने का पास: यदि आप एकमुश्त 20 गुना ग्रीन सेस जमा करते हैं, तो आपको तीन महीने की छूट मिलेगी।\r\n \r\n
- \r\n 1 साल का पास: यदि आप एक बार में 60 गुना ग्रीन सेस जमा करते हैं, तो पूरे साल भर के लिए एंट्री फ्री हो जाएगी।\r\n \r\n
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कैश नहीं, 'फास्टैग' से कटेगा पैसा: डिजिटल हुई सीमाएं
\r\n\r\nपर्यटकों को बॉर्डर पर लंबी लाइनों में न लगना पड़े, इसके लिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को हाई-टेक कर दिया है। अब पर्ची कटाने के लिए गाड़ी रोकने की जरूरत नहीं होगी।
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- \r\n फास्टैग अनिवार्य: ग्रीन सेस की वसूली FASTag के जरिए की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n NPR कैमरे: मेजर बॉर्डर्स पर नंबर प्लेट रिकग्निशन (NPR) कैमरे लगाए गए हैं। जैसे ही गाड़ी कैमरे की जद में आएगी, सिस्टम ऑटोमैटिकली फास्टैग वॉलेट से पैसा काट लेगा।\r\n \r\n
- \r\n तैयारियां: उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से लगी सीमाओं पर 10 बॉर्डर चेक पोस्ट पूरी तरह तैयार कर लिए गए हैं। इसके अलावा 6 अन्य चेक पोस्टों पर काम युद्धस्तर पर जारी है।\r\n \r\n
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किन्हें मिलेगी छूट? (Exemption List)
\r\n\r\nमुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन सेस का उद्देश्य आम आदमी या आवश्यक सेवाओं को बाधित करना नहीं है। इसलिए एक बड़ी सूची तैयार की गई है जिन्हें इस टैक्स से मुक्त रखा गया है:
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- \r\n इको-फ्रेंडली वाहन: इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सीएनजी (CNG), सोलर और हाइब्रिड गाड़ियों पर कोई टैक्स नहीं।\r\n \r\n
- \r\n दोपहिया वाहन: बाइक और स्कूटर सवारों को ग्रीन सेस नहीं देना होगा।\r\n \r\n
- \r\n सरकारी वाहन: केंद्र सरकार, उत्तराखंड राज्य सरकार और अन्य प्रदेशों के सरकारी वाहनों को छूट।\r\n \r\n
- \r\n कृषि वाहन: ट्रैक्टर, ट्रॉली, कंबाइन हार्वेस्टर।\r\n \r\n
- \r\n आपातकालीन सेवाएं: एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, शव वाहन।\r\n \r\n
- \r\n सेना: आर्मी और डिफेंस की गाड़ियों को भी छूट रहेगी।\r\n \r\n
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उत्तराखंड का आर्थिक रोडमैप: ₹24,000 करोड़ का लक्ष्य
\r\n\r\nराजस्व समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए कई अहम आंकड़े और लक्ष्य साझा किए:
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- \r\n पूंजीगत निवेश (Capital Investment): राज्य में पूंजीगत खर्च में 34% की बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर सड़कों, पुलों और बुनियादी ढांचे के तेजी से निर्माण पर दिखेगा।\r\n \r\n
- \r\n राजस्व लक्ष्य: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने 24,015 करोड़ रुपये का कर (Tax) लक्ष्य तय किया है।\r\n \r\n
- \r\n खनन से आय: खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों से राज्य को 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है।\r\n \r\n
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मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे कर चोरी रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाएं और रजिस्ट्रेशन व निबंधन प्रक्रियाओं (Registration procedures) को पूरी तरह डिजिटल करें।
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सतत पर्यटन की ओर एक कदम
\r\n\r\nउत्तराखंड सरकार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और राजस्व संतुलन के बीच एक कड़ी है। हालांकि, पर्यटकों को अपनी यात्रा के बजट में अब 80 से 700 रुपये अतिरिक्त जोड़ने होंगे, लेकिन फास्टैग की सुविधा से यात्रा सुगम बनी रहेगी। 1 जनवरी से लागू होने वाले इस नियम के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।