दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) की लाइफलाइन कहे जाने वाले दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) का काम एक बार फिर लेटलतीफी का शिकार हो गया है। इस एक्सप्रेसवे का पांचवां और सबसे महत्वपूर्ण फेज, जो इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी 'गंगा एक्सप्रेसवे' से जोड़ने वाला है, अब अपने तय समय से 6 महीने और पीछे चला गया है।READ ALSO:-मेरठ नगर निगम में 'टैक्स' पर संग्राम: बिना सीवर और पानी के वसूला जा रहा जलकर, भ्रष्टाचार और जीआईएस सर्वे के फेर में फंसी जनता
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ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जो काम दिसंबर 2023 में ही पूरा हो जाना चाहिए था, वह अब अप्रैल 2026 तक खिंच गया है। यह खबर उन लाखों यात्रियों के लिए झटका है जो दिल्ली से सीधे प्रयागराज और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए फर्राटेदार सफर का सपना देख रहे थे।
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चौथी बार आगे बढ़ी डेडलाइन: आखिर क्यों हो रही है देरी?
\r\n\r\nदिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का पांचवां चरण (Phase-5) शुरू से ही चुनौतियों से घिरा रहा है। यह प्रोजेक्ट केवल सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी को पूर्वी यूपी से जोड़ने वाली एक रणनीतिक कड़ी है। लेकिन, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के विवादों ने इसकी रफ्तार पर बार-बार ब्रेक लगाए हैं।
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- \r\n इतिहास: इस फेज को पूरा करने का मूल लक्ष्य दिसंबर 2023 रखा गया था।\r\n \r\n
- \r\n दूसरी डेडलाइन: जब काम पूरा नहीं हुआ, तो इसे बढ़ाकर 2024 किया गया।\r\n \r\n
- \r\n वर्तमान स्थिति: अब अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि काम खत्म होने में कम से कम 6 महीने और लगेंगे, यानी अप्रैल 2026 तक ही वाहन इस पर दौड़ सकेंगे।\r\n \r\n
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मुख्य वजह: देरी का सबसे बड़ा कारण किसानों का विरोध और मुआवजे का वितरण है। गाजियाबाद और मेरठ के सीमावर्ती गांवों में जमीन अधिग्रहण को लेकर लंबे समय तक गतिरोध बना रहा। कई जगहों पर किसानों ने उचित मुआवजे की मांग को लेकर निर्माण कार्य रोक दिया, जिससे प्रोजेक्ट कई महीनों तक ठप पड़ा रहा।
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कनेक्टिविटी का 'गेम चेंजर': फेज 5 का महत्व
\r\n\r\nयह 14.6 किलोमीटर लंबा टुकड़ा महज एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के दो सबसे बड़े एक्सप्रेसवे का 'संगम' है।
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- \r\n लिंक: फेज-5 दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को सीधे मेरठ के पास से गुजरने वाले गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) से जोड़ेगा।\r\n \r\n
- \r\n फायदा: एक बार यह लिंक शुरू होने के बाद, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद के लोग बिना किसी ट्रैफिक जाम में फंसे सीधे गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकेंगे।\r\n \r\n
- \r\n प्रयागराज का सफर: इस कनेक्टिविटी के बाद दिल्ली से प्रयागराज का सफर महज 6 से 7 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है, जो कुंभ 2025 और धार्मिक पर्यटन के लिहाज से गेम-चेंजर साबित होगा।\r\n \r\n
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लेकिन, मौजूदा देरी का मतलब है कि दिल्ली-एनसीआर के लोगों को इस सुगम यात्रा के लिए 2026 की गर्मियों तक इंतजार करना होगा।
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ग्राउंड रिपोर्ट: कितना काम हुआ, कितना बाकी?
\r\n\r\nNHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) और निर्माण एजेंसी के दावों के मुताबिक, भौतिक निर्माण कार्य अंतिम चरणों में है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों में पेंच फंसा हुआ है।
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- \r\n कुल लंबाई: 14.6 किलोमीटर।\r\n \r\n
- \r\n क्षेत्र: इसमें मेरठ का हिस्सा 9.13 किलोमीटर और गाजियाबाद का 5.47 किलोमीटर है।\r\n \r\n
- \r\n प्रगति (Progress): करीब 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।\r\n \r\n
- \r\n तैयार ढांचा: अब तक 10 बड़े अंडरपास, 12 छोटे अंडरपास, और 35 पुलिया बनकर तैयार हैं। करीब 10 किलोमीटर सड़क पर डामरीकरण और फिनिशिंग का काम हो चुका है।\r\n \r\n
- \r\n बाधा: शेष 4.6 किलोमीटर के हिस्से में जमीन की पैमाइश और मिट्टी भराई का काम अभी भी चल रहा है। यही वह हिस्सा है जो प्रोजेक्ट की फाइनल डेडलाइन को पीछे धकेल रहा है।\r\n \r\n
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प्रभावित गांव: कहां फंसा है मामला?
\r\n\r\nयह एक्सप्रेसवे मेरठ और गाजियाबाद के कई गांवों के बीच से होकर गुजर रहा है। जिन गांवों में निर्माण कार्य चल रहा है या जमीन अधिग्रहण के मुद्दों ने देरी कराई, उनमें प्रमुख हैं:
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- \r\n शाकरपुर (Shakarpur)\r\n \r\n
- \r\n नरहैड़ा (Narhaira)\r\n \r\n
- \r\n ढकौली (Dhakauli)\r\n \r\n
- \r\n सलेमपुर (Salempur)\r\n \r\n
- \r\n चंदसारा (Chandsara)\r\n \r\n
- \r\n खानपुर (Khanpur)\r\n \r\n
- \r\n नगलापातू (Naglapatu)\r\n \r\n
- \r\n चूड़ियाला (Chudiyala)\r\n \r\n
- \r\n तल्हैटा (Talheta)\r\n \r\n
- \r\n जैनुद्दीनपुर (Jainuddinpur)\r\n \r\n
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इन गांवों के किसानों के साथ प्रशासन की कई दौर की वार्ता हो चुकी है। NHAI का कहना है कि अब ज्यादातर विवाद सुलझा लिए गए हैं, लेकिन जो समय बीत गया, उसकी भरपाई करना मुश्किल हो रहा है।
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NHAI का पक्ष: "अब बाधाएं दूर, अप्रैल तक काम पूरा"
\r\n\r\nलगातार हो रही आलोचनाओं के बीच, NHAI के अधिकारी अब आश्वस्त नजर आ रहे हैं। NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि तमाम प्रशासनिक और जमीनी अड़चनों को लगभग दूर कर लिया गया है।
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\r\n\r\n\r\n"ज्यादातर समस्याएं सुलझा ली गई हैं। कुछ किसानों की जमीन की पैमाइश बाकी थी, जिसे जिला प्रशासन की मदद से जल्द पूरा किया जा रहा है। हमने निर्माण एजेंसी को मैनपावर और मशीनरी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। हमारा पूरा प्रयास है कि अप्रैल 2026 तक हर हाल में इस फेज को जनता के लिए खोल दिया जाए।" - अरविंद कुमार, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, NHAI\r\n
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यात्रियों पर असर: अभी जारी रहेगी मशक्कत
\r\n\r\nफिलहाल, दिल्ली से मेरठ तक तो एक्सप्रेसवे फराटेदार है, लेकिन वहां से आगे जाने के लिए या गंगा एक्सप्रेसवे पकड़ने के लिए यात्रियों को मेरठ शहर के ट्रैफिक या हापुड़ रोड के वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है। फेज 5 के पूरा न होने तक:
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- \r\n मेरठ शहर के बाहरी इलाकों में जाम की स्थिति बनी रहेगी।\r\n \r\n
- \r\n भारी वाहनों को डायवर्जन के कारण लंबा चक्कर काटना पड़ेगा।\r\n \r\n
- \r\n प्रयागराज और लखनऊ जाने वाले यात्रियों का समय और ईंधन दोनों ज्यादा खर्च होगा।\r\n \r\n
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भविष्य की राह
\r\n\r\nदिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का 5वां फेज इंजीनियरिंग से ज्यादा प्रशासनिक इच्छाशक्ति की परीक्षा बन गया है। अप्रैल 2026 की नई डेडलाइन अब अंतिम मानी जा रही है। यदि इस बार भी काम पूरा नहीं होता, तो यह न केवल लागत बढ़ाएगा बल्कि जनता के भरोसे को भी कमजोर करेगा। हालांकि, जिस तेजी से पिछले कुछ हफ्तों में काम शुरू हुआ है, उसे देखते हुए उम्मीद की जा सकती है कि अगली गर्मियों में दिल्ली वाले अपनी गाड़ी सीधे गंगा एक्सप्रेसवे पर दौड़ा सकेंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.