खबरीलाल डेस्क
नैनीताल (Nainital). उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने दुष्कर्म और सहमति से बनाए गए संबंधों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से लंबे समय तक शारीरिक संबंध रहे हैं और बाद में शादी का वादा पूरा नहीं होता, तो इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।READ ALSO:-Uzma Khan Kanwar Yatra: मजहब की दीवारें तोड़ शिव भक्ति में रमीं उजमा खान; 4 साल के लिव-इन पार्टनर लोकेंद्र के लिए उठाई कांवड़, पुलिस के पहरे में गूंजा 'हर-हर महादेव'
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जस्टिस आशीष नैथानी (Justice Ashish Naithani) की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए आरोपी सूरज बोरा के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया। कोर्ट ने माना कि महज शादी का वादा टूटना रेप नहीं है, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि वादा शुरू से ही झूठा था।
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क्या है सूरज बोरा मामला? (The Suraj Bora Case)

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यह पूरा मामला मसूरी (Mussoorie) से जुड़ा है। एक महिला ने सूरज बोरा नामक युवक पर आरोप लगाया था कि उसने 45 दिनों के भीतर शादी करने का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। महिला की शिकायत पर मसूरी पुलिस ने आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत मामला दर्ज किया था।
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पुलिस ने जांच पूरी करते हुए 22 जुलाई 2023 को कोर्ट में चार्जशीट (Charge Sheet) दाखिल कर दी थी। इसके बाद आरोपी सूरज बोरा ने अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि दोनों बालिग हैं और उनके बीच संबंध आपसी सहमति से थे। यह मामला रेप का नहीं, बल्कि एक असफल रिश्ते का है।
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हाईकोर्ट का तर्क: 'कपट' और 'वादा खिलाफी' में अंतर
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जस्टिस आशीष नैथानी की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए 'शादी का झूठा वादा' (False Promise) और 'वादा खिलाफी' (Breach of Promise) के बीच के बारीक अंतर को समझाया। कोर्ट ने कहा:
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    सहमति महत्वपूर्ण है: कोर्ट ने कहा कि किसी वयस्क महिला द्वारा दी गई सहमति मात्र इसलिए अमान्य नहीं हो जाती क्योंकि संबंध बाद में शादी में तब्दील नहीं हो सका।
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    इरादा क्या था? धारा 376 के तहत अपराध तभी बनता है जब यह साबित हो जाए कि आरोपी का इरादा 'शुरुआत से ही' (Ab initio) शादी करने का नहीं था और उसने सिर्फ यौन संबंध बनाने के लिए झूठ बोला था।
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    लंबा रिश्ता: कोर्ट ने पाया कि दोनों पक्ष लंबे समय से रिश्ते में थे और बार-बार सहमति से संबंध बने। यह इस बात का संकेत है कि रिश्ता आपसी प्रेम और सहमति पर आधारित था, न कि किसी धोखे पर।
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"कार्यवाही जारी रखना उत्पीड़न होगा"

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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब यह स्पष्ट है कि संबंध सहमति से थे, तो ऐसे में आरोपी के खिलाफ रेप का मुकदमा चलाना और कानूनी कार्यवाही जारी रखना कानून का दुरुपयोग और आरोपी का उत्पीड़न (Harassment) होगा।
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बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि अगर महिला को पता है कि शादी में बाधाएं आ सकती हैं, फिर भी वह संबंध बनाती है, तो बाद में वह इसे रेप नहीं कह सकती। राज्य सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष ने इसका विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने तथ्यों को देखते हुए सहमति और लंबे रिश्ते को आधार बनाकर एफआईआर और चार्जशीट खारिज कर दी।
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फैसले का मतलब और प्रभाव

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यह फैसला उन मामलों में एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जहां लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) या प्रेम संबंधों के टूटने के बाद पुरुष साथी पर रेप का आरोप लगा दिया जाता है।
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कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला स्पष्ट करता है कि:
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    हर टूटा हुआ वादा रेप नहीं होता।
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    अगर लड़का किसी कारणवश (जैसे परिवार का विरोध, जातिगत समस्या या अन्य परिस्थितियां) शादी नहीं कर पाता, तो उसे बलात्कारी नहीं माना जा सकता।
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    रेप का केस तभी बनेगा जब यह साबित हो कि लड़के ने शुरू से ही लड़की को धोखा देने की योजना बनाई थी।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह निर्णय व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून के सही इस्तेमाल की दिशा में एक बड़ा कदम है। जस्टिस नैथानी का यह फैसला उन हजारों मामलों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा, जहां आपसी सहमति से बने संबंधों के खट्टे होने पर उन्हें आपराधिक रंग दे दिया जाता है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कानून का उद्देश्य पीड़ितों को न्याय दिलाना है, न कि बदला लेने के लिए उसका इस्तेमाल करना।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सूरज बोरा बनाम राज्य मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि आपसी सहमति से बनाए गए संबंधों के बाद अगर शादी का वादा टूटता है, तो उसे आईपीसी की धारा 376 के तहत दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। जस्टिस आशीष नैथानी ने कहा कि रेप साबित करने लिए यह जरूरी है कि शादी का वादा शुरू से ही झूठा हो। कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज केस को रद्द कर दिया है।
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