बुलंदशहर/नोएडा. प्रेम और आस्था जब एक साथ मिलते हैं, तो धर्म और मजहब की दीवारें अपने आप ढह जाती हैं। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर (Bulandshahr) में महाशिवरात्रि 2026 (Mahashivratri 2026) के पावन अवसर पर एक ऐसी ही अनोखी और दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक मुस्लिम महिला, उजमा खान (Uzma Khan), पूरी तरह से शिव भक्ति के रंग में रंगी नजर आ रही हैं। कंधे पर कांवड़, जुबां पर 'हर-हर महादेव' का उद्घोष और आंखों में अपने प्रेमी के लिए समर्पण—उजमा खान की यह यात्रा गंगा-जमुनी तहजीब और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की एक नई इबारत लिख रही है।READ ALSO:-Ghaziabad Crime: 'रिश्तों का कत्ल'... ढाई साल की फूल सी बच्ची और वो 'दरिंदा' पिता; मां ने वीडियो बनाकर दुनिया को दिखाया उसका असली चेहरा
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उजमा खान ने अपने हिंदू प्रेमी लोकेंद्र सिंह (Lokendra Singh) के साथ विवाह की मन्नत पूरी होने के संकल्प के साथ यह कठिन कांवड़ यात्रा शुरू की है। प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें कड़ी सुरक्षा मुहैया कराई है।
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क्या है पूरा मामला?

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बुलंदशहर के रघुपुरा की रहने वाली उजमा खान पिछले चार साल से अपने प्रेमी लोकेंद्र सिंह के साथ लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में रह रही हैं। लोकेंद्र भी रघुपुरा के ही निवासी हैं। उजमा का कहना है कि उन्होंने भगवान शिव से मन्नत मांगी थी कि अगर उनका रिश्ता शादी के मुकाम तक पहुंचता है और सब कुछ ठीक रहता है, तो वे कांवड़ उठाएंगी। अब जब उनकी यह मुराद पूरी होने की कगार पर है, तो उन्होंने अपने वादे को निभाने का फैसला किया।
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उजमा ने बुलंदशहर के अनूपशहर (Anupshahr), जिसे 'छोटी काशी' (Choti Kashi) भी कहा जाता है, के मस्तराम घाट से पवित्र गंगाजल भरा। इसके बाद उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की और कांवड़ कंधों पर रखकर अपनी पैदल यात्रा शुरू कर दी। उनका लक्ष्य गौतम बुद्ध नगर (Gautam Buddha Nagar) के रबूपुरा स्थित 'भोले भाईपुर मंदिर' (Bhole Bhaipur Mandir) में भगवान शिव का जलाभिषेक करना है।
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"जल्द ही हिंदू बनूंगी और शादी करूंगी"

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मीडिया से बातचीत करते हुए उजमा खान ने बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "मेरी भगवान शिव में गहरी आस्था है। मजहब इंसान को बांटता नहीं, बल्कि जोड़ता है। मैं पिछले चार साल से लोकेंद्र के साथ हूं और उनके परिवार ने मुझे बहुत प्यार दिया है। मैंने मन ही मन भगवान भोलेनाथ को अपना आराध्य मान लिया था।"
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उजमा ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा, "मैं जल्द ही हिंदू धर्म (Sanatan Dharma) अपनाऊंगी और लोकेंद्र के साथ पूरे विधि-विधान से शादी करूंगी। मुझे किसी के विरोध या फतवे का डर नहीं है। मेरे लिए मेरा प्यार और मेरी आस्था सबसे ऊपर है।"
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उजमा दो बेटियों की मां भी बताई जा रही हैं, और वे भी इस यात्रा में उनके समर्थन में हैं। उजमा का यह साहसिक कदम उन कट्टरपंथी सोच रखने वालों के लिए एक जवाब है जो धर्म को नफरत का हथियार बनाते हैं।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम: पुलिस और बजरंग दल साथ

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उजमा खान की कांवड़ यात्रा कोई सामान्य घटना नहीं है। एक मुस्लिम महिला का कांवड़ उठाना और धर्म परिवर्तन की बात करना संवेदनशील मुद्दा हो सकता है। इसे देखते हुए बुलंदशहर और गौतम बुद्ध नगर पुलिस प्रशासन (Police Administration) पूरी तरह अलर्ट है।
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    पुलिस एस्कॉर्ट: उजमा की सुरक्षा के लिए एक विशेष पुलिस टीम तैनात की गई है जो उनकी यात्रा के दौरान साये की तरह साथ चल रही है। महिला पुलिसकर्मी भी उनके साथ हैं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
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    सामाजिक संगठनों का समर्थन: दिलचस्प बात यह है कि उजमा की इस यात्रा को हिंदूवादी संगठनों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। बजरंग दल (Bajrang Dal) और अन्य सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता उनकी सुरक्षा और सेवा में साथ चल रहे हैं। वे सुनिश्चित कर रहे हैं कि उजमा को रास्ते में भोजन, पानी और विश्राम की कोई दिक्कत न हो।
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अनूपशहर से रबूपुरा: आस्था का सफर

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उजमा की यह यात्रा अनूपशहर से शुरू होकर चोला थाना क्षेत्र के ग्राम नैथला हसनपुर होते हुए रबूपुरा पहुंचेगी। यह दूरी लगभग 60-70 किलोमीटर की है। रास्ते में जगह-जगह उजमा का स्वागत हो रहा है।
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जगह-जगह पुष्प वर्षा: जैसे ही उजमा खान कांवड़ लेकर गांवों से गुजर रही हैं, लोग आश्चर्य और सम्मान के साथ उन्हें देख रहे हैं। कई स्थानों पर स्थानीय ग्रामीणों ने उन पर फूलों की बारिश (Flower Showering) की और 'बम-बम भोले' के जयकारे लगाए। यह नजारा साबित करता है कि आम जनमानस में प्रेम और सौहार्द की जड़ें कितनी गहरी हैं।
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एक प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीण, रामपाल सिंह ने कहा, "हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा। यह बेटी समाज को नई दिशा दे रही है। ईश्वर एक है, बस नाम अलग हैं। उजमा की भक्ति देखकर हम सब नतमस्तक हैं।"
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लोकेंद्र सिंह: प्यार की ढाल
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इस पूरी यात्रा में उजमा के प्रेमी लोकेंद्र सिंह उनके सबसे बड़े संबल बने हुए हैं। लोकेंद्र भी शिव भक्त हैं और वे उजमा के इस फैसले से बेहद खुश हैं। लोकेंद्र ने कहा, "उजमा ने यह फैसला अपनी मर्जी से लिया है। मैंने कभी उन पर दबाव नहीं डाला। यह उनकी और महादेव के बीच का मामला है। मैं बस इतना चाहता हूं कि हम दोनों शांति से अपना जीवन बिता सकें।"
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लोकेंद्र और उजमा की प्रेम कहानी (Love Story) इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। चार साल पहले शुरू हुआ यह रिश्ता अब एक पवित्र बंधन में बंधने जा रहा है। लोकेंद्र के परिवार ने भी उजमा को स्वीकार कर लिया है, जो इस रिश्ते की सबसे बड़ी जीत है।
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कांवड़ यात्रा का महत्व और उजमा की भागीदारी

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कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) भगवान शिव के भक्तों (कांवड़ियों) की एक वार्षिक तीर्थयात्रा है। श्रावण मास और फाल्गुन मास (महाशिवरात्रि) में लाखों श्रद्धालु गंगा नदी (हरिद्वार, गोमुख या स्थानीय गंगा घाट) से जल लाते हैं और अपने स्थानीय शिवालयों में अर्पित करते हैं।
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आमतौर पर यह यात्रा हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा की जाती है, लेकिन इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जब मुस्लिम कवियों और भक्तों ने भगवान शिव या कृष्ण की आराधना की है (जैसे रसखान)। उजमा खान का यह कदम उसी साझा संस्कृति (Syncretic Culture) का आधुनिक उदाहरण है।
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उजमा ने कहा, "कांवड़ उठाना आसान नहीं है। नंगे पैर चलना पड़ता है, नियमों का पालन करना पड़ता है। लेकिन जब मन में श्रद्धा हो, तो थकान महसूस नहीं होती। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे महादेव खुद मुझे चला रहे हैं।"
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सामाजिक प्रतिक्रिया और चुनौतियां

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हालांकि उजमा को व्यापक समर्थन मिल रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे 'गंगा-जमुनी तहजीब' की मिसाल बता रहे हैं, तो कुछ कट्टरपंथी इसे इस्लाम के खिलाफ बताकर आलोचना कर रहे हैं।
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लेकिन उजमा का स्पष्ट कहना है कि उन्हें इन आलोचनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता। "धर्म निजी मामला है। मुझे किस भगवान की पूजा करनी है, यह तय करने का हक सिर्फ मुझे है," उजमा ने दृढ़ता से कहा।
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प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भी निगरानी बढ़ा दी है ताकि इस घटना को लेकर कोई भी भड़काऊ पोस्ट या अफवाह न फैला सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी को भी माहौल खराब करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
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महाशिवरात्रि 2026: एक खास संयोग

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इस बार महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) पर ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है। ऐसे में उजमा की यह यात्रा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। रबूपुरा के भोले भाईपुर मंदिर में जलाभिषेक के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। मंदिर के पुजारी ने भी उजमा के आगमन का स्वागत किया है। पुजारी ने कहा, "भगवान शिव के दरबार में कोई हिंदू या मुसलमान नहीं होता, वहां सब भक्त होते हैं। अगर उजमा सच्चे मन से आई हैं, तो महादेव उनकी पुकार जरूर सुनेंगे।"
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बदलता भारत, बदलती सोच

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उजमा खान की कहानी सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि बदलते भारत की एक तस्वीर है। यह कहानी है उस भारत की जहां महिलाएं अपने फैसले खुद लेने के लिए स्वतंत्र हैं, जहां प्रेम धर्म से बड़ा है, और जहां आस्था की कोई सीमा नहीं होती।
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बुलंदशहर की सड़कों पर भगवा रंग में रगीं, कांवड़ उठाई उजमा खान जब 'हर-हर महादेव' का उद्घोष करती हैं, तो वे उन लाखों लोगों को एक संदेश देती हैं कि ईश्वर प्रेम में बसता है, नफरत में नहीं। पुलिस की सुरक्षा और समाज का समर्थन यह बताता है कि हम एक सहिष्णु समाज की ओर बढ़ रहे हैं। अब देखना होगा कि रबूपुरा में जलाभिषेक के बाद उजमा और लोकेंद्र की नई जिंदगी किस तरह शुरू होती है।
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बुलंदशहर की उजमा खान ने अपने हिंदू प्रेमी लोकेंद्र के साथ शादी की मन्नत पूरी होने पर कांवड़ यात्रा शुरू की है। अनूपशहर से गंगाजल लेकर वे रबूपुरा के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेंगी। उजमा ने जल्द ही हिंदू धर्म अपनाने और शादी करने की घोषणा की है। पुलिस और बजरंग दल उनकी सुरक्षा में तैनात हैं। यह घटना इलाके में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बनी हुई है।
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