खबरीलाल डेस्क
देश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी राजनीतिक लड़ाइयों और विशेष रूप से 2027 के महासमर (उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव) के लिए अपनी चौसर बिछा दी है। भाजपा के युवा और ऊर्जावान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (जिन्होंने मात्र 45 वर्ष की उम्र में कमान संभाली है) ने सोमवार दोपहर को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का बहुप्रतीक्षित ऐलान कर दिया।READ ALSO:-बीजेपी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा: तीरथ सिंह रावत बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक की कमान
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इस नई 'नितिन नवीन टीम' को अगर ध्यान से देखा जाए, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि पार्टी का पूरा फोकस देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश और देवभूमि उत्तराखंड पर केंद्रित है। इस नई कार्यकारिणी में अनुभव, युवा जोश, क्षेत्रीय संतुलन और 'सोशल इंजीनियरिंग' का बेजोड़ मिश्रण देखने को मिल रहा है। आइए, इस पूरी रणनीतिक टीम के एक-एक पहलू का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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यूपी का दबदबा: 8 दिग्गजों के कंधों पर 2027 की जिम्मेदारी

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उत्तर प्रदेश, जहां से होकर दिल्ली की सत्ता का रास्ता गुजरता है, वहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। 403 विधानसभा और 80 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य को साधने के लिए बीजेपी ने अपनी राष्ट्रीय टीम में यूपी से सबसे ज्यादा 8 नेताओं को तरजीह दी है।
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पार्टी ने क्षेत्रीय क्षत्रपों और जमीनी नेताओं को दिल्ली के केंद्रीय संगठन में लाकर यह संदेश दिया है कि यूपी के हर जातिगत और सामाजिक समीकरण पर पार्टी की पैनी नजर है।
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यूपी के वे 8 चेहरे जिन्हें मिली है 'राष्ट्रीय' कमान:

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    स्मृति ईरानी (राष्ट्रीय महासचिव): कांग्रेस के गढ़ अमेठी में राहुल गांधी को पटखनी देने वाली फायरब्रांड नेता स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर केंद्रीय संगठन ने उन पर अपना अटूट भरोसा फिर से जताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी नेताओं में शुमार स्मृति का मध्य यूपी और महिला वोटरों में तगड़ा प्रभाव है।
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    रेखा वर्मा (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष): लखीमपुर खीरी से ताल्लुक रखने वाली रेखा वर्मा को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। यह संगठन के भीतर उनकी जबरदस्त स्वीकार्यता और विवादों से दूर रहने की उनकी कार्यशैली का इनाम है।
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    डॉ. तारिक मंसूर (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष): अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के पूर्व कुलपति डॉ. मंसूर को दोबारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। यह भाजपा के 'पसमांदा मुस्लिम आउटरीच' अभियान का सबसे बड़ा चेहरा हैं।
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    हरीश द्विवेदी (राष्ट्रीय महासचिव): बस्ती के पूर्व सांसद और पूर्वांचल के कद्दावर ब्राह्मण चेहरे हरीश द्विवेदी को संगठन का लंबा अनुभव है। वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बेहद करीबी और भरोसेमंद माने जाते हैं।
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    डॉ. भोला सिंह (राष्ट्रीय सचिव): बुलंदशहर से लगातार तीन बार के सांसद भोला सिंह दलित (SC) समुदाय का बड़ा चेहरा हैं। पश्चिमी यूपी में दलित वोटबैंक को साधने और एससी मोर्चे में उनके शानदार काम को देखते हुए उन्हें यह पद दिया गया है।
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    संगीता यादव (राष्ट्रीय सचिव): गोरखपुर की पूर्व सांसद और महिला ओबीसी (यादव) चेहरा। इनके जरिए पार्टी ने 'माई (M-Y)' समीकरण में सेंधमारी करने और महिला सशक्तीकरण का संदेश दिया है।
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    अमरपाल मौर्य (ओबीसी मोर्चा): प्रतापगढ़ के निवासी और यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बेहद खास। इन्हें पार्टी ने ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को लामबंद करने का अहम टास्क सौंपा है।
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    कुंवर बासित अली (अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष): मेरठ के रहने वाले बासित अली का जबरदस्त प्रमोशन हुआ है। यूपी अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष पद से उठाकर सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी! RSS के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े बासित अली अमित शाह के 'गुड बुक्स' में आते हैं।
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पसमांदा मुसलमान और जातिगत समीकरणों का चक्रव्यूह

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इस टीम की सबसे खास बात यह है कि बीजेपी ने अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक दोनों मोर्चों पर गजब की 'सोशल इंजीनियरिंग' की है। सामान्य वर्ग से एक ब्राह्मण (हरीश द्विवेदी) और पारसी (स्मृति ईरानी), अनुसूचित जाति से एक (भोला सिंह) और ओबीसी वर्ग से तीन नेताओं (संगीता यादव, रेखा वर्मा-कुर्मी, अमरपाल मौर्य) को जगह देकर पिछड़े वर्ग को मजबूत संदेश दिया है। वहीं, यूपी से अल्पसंख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष (बासित अली) और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (तारिक मंसूर) बनाकर पसमांदा (पिछड़े) मुसलमानों को पार्टी से जोड़ने की आक्रामक रणनीति साफ कर दी है।
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देवभूमि उत्तराखंड की लगाई 'लॉटरी': 4 नेताओं को बड़ी जगह

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पहाड़ी राज्य उत्तराखंड से इस बार चार प्रमुख चेहरों को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया गया है। यह राज्य बीजेपी के लिए वैचारिक और चुनावी दोनों रूप से बेहद अहम है:
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    तीरथ सिंह रावत (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष): उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और गढ़वाल के कद्दावर नेता तीरथ सिंह रावत को 'प्रमोशन' देकर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। उनके जमीनी अनुभव का लाभ राष्ट्रीय स्तर पर लिया जाएगा।
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    अनिल बलूनी (राष्ट्रीय मीडिया संयोजक): उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद रहे और वर्तमान गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की संगठन में धाक बरकरार है। टीवी डिबेट्स, प्रेस वार्ता और मीडिया मैनेजमेंट के मास्टरमाइंड बलूनी को फिर से मीडिया की कमान सौंपी गई है।
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    आलोक भट्ट (सोशल मीडिया सह-संयोजक): पार्टी के डिजिटल और सोशल मीडिया वॉर-रूम को मजबूत करने के लिए आलोक भट्ट को यह अहम जिम्मेदारी दी गई है।
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    महेंद्र पांडे (राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री): संगठन के प्रति अपने मौन और निरंतर समर्पण के लिए महेंद्र पांडे को राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री (सेंट्रल ऑफिस सेक्रेटरी) जैसी बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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'नारी शक्ति' का बढ़ा सम्मान: सबसे ज्यादा महिलाएं यूपी से

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बीजेपी की इस नई कार्यकारिणी में महिलाओं का प्रतिनिधित्व स्पष्ट रूप से बढ़ा है। राष्ट्रीय टीम में कुल 12 महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें से सबसे अधिक 3 महिलाएं केवल उत्तर प्रदेश से हैं (स्मृति ईरानी, रेखा वर्मा और संगीता यादव)। इसके अलावा महाराष्ट्र से 2 और अन्य राज्यों से एक-एक महिला नेता को शामिल कर आधी आबादी (महिला वोटरों) को साधने का मास्टरस्ट्रोक चला गया है।
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क्षेत्रीय संतुलन: यूपी का हर कोना किया कवर

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यूपी जैसे बड़े राज्य में गुटबाजी और क्षेत्रीय असंतुलन को रोकने के लिए नितिन नवीन ने गजब का बैलेंस बनाया है:
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    पश्चिमी यूपी: डॉ. तारिक मंसूर, कुंवर बासित अली, भोला सिंह (जाट लैंड और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों के लिए)।
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    पूर्वांचल: हरीश द्विवेदी, संगीता यादव, अमरपाल मौर्य (ब्राह्मण, यादव और मौर्य वोटबैंक के लिए)।
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    रूहेलखंड: रेखा वर्मा (कुर्मी और तराई बेल्ट के लिए)।
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    मध्य यूपी (अवध): स्मृति ईरानी (राजधानी लखनऊ और आस-पास के प्रभाव के लिए)।
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किनके कटे पत्ते? (संगठन से बाहर हुए 4 दिग्गज)

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राजनीति में जब नए आते हैं, तो पुरानों को जगह खाली करनी पड़ती है। यूपी के चार बड़े नामों को इस बार नई टीम में जगह नहीं मिल पाई है।
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    लक्ष्मीकांत बाजपेयी: यूपी में 2014 की प्रचंड लहर के शिल्पी रहे बाजपेयी जी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया है।
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    अरुण सिंह: लंबे समय तक राष्ट्रीय महासचिव रहे अरुण सिंह की विदाई चौंकाने वाली है।
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    राधा मोहन दास अग्रवाल: गोरखपुर के कद्दावर नेता और राष्ट्रीय महासचिव को भी इस बार टीम में नहीं रखा गया है।
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    राजेश अग्रवाल: राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे राजेश अग्रवाल भी नई सूची से बाहर हैं।
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'कठोर फैसलों और नई ऊर्जा' की टीम

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मात्र 209 दिन पहले निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए 45 वर्षीय नितिन नवीन ने यह साबित कर दिया है कि उनकी कार्यशैली 'परफॉर्मेंस' पर आधारित है। 65 प्रमुख जिम्मेदारियों वाली इस भारी-भरकम टीम में दिल्ली (10) के बाद सबसे ज्यादा हिस्सेदारी यूपी (8) की है।
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कुल मिलाकर, बीजेपी की यह नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी महज कुछ नेताओं की नियुक्तियों की सूची नहीं है, बल्कि यह 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए तैयार किया गया एक मारक 'डिजिटल, सोशल और इलेक्टोरल वॉर-प्लान' है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली से मिली यह ताकत, यूपी और उत्तराखंड की जमीन पर विपक्ष के 'I.N.D.I.A' गठबंधन के सामने कितनी कारगर साबित होती है।