नोएडा (स्पेशल रिपोर्ट): वेलेंटाइन डे के ठीक बाद देश की राजधानी दिल्ली से सटे हाई-टेक शहर नोएडा में एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। 15 साल पुराना प्यार, एक साथ देखे गए सपने, और फिर एक बंद कार में दो लाशें। नोएडा के सेक्टर-107 में शनिवार (14 फरवरी) को एक एल्ट्रोज कार के अंदर प्रेमी युगल सुमित और रेखा के शव मिलने से सनसनी फैल गई। पुलिस की शुरुआती जांच इसे प्रेम प्रसंग में विफलता के बाद हत्या और आत्महत्या (Murder-Suicide) का मामला मान रही है, लेकिन जैसे-जैसे इस मामले की परतें खुल रही हैं, कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।READ ALSO:-तिरंगे में लिपटकर घर लौटा मेरठ का 'शेर': अखनूर की सरहदों की रक्षा करने वाले राहुल भड़ाना को आखिरी सलाम, 4 साल के बेटे ने जब पिता को देखा तो रो पड़ा पूरा गांव
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इस दिल दहला देने वाली घटना में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मृतक युवती रेखा के पिता देव चंद्र कांत ने अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सुमित के साथ अपनी बेटी के रिश्तों की असलियत बयां की है, जो सुमित के परिवार के दावों से बिल्कुल उलट है। पिता का कहना है कि उनकी बेटी इस रिश्ते से बाहर निकलना चाहती थी, लेकिन सुमित का जुनून उसे मुक्त नहीं होने दे रहा था।
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पिता का दर्द: 'वह सुमित से पीछा छुड़ाना चाहती थी'
\r\n\r\nरेखा के पिता देव चंद्र कांत ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पिछले एक साल से रेखा सुमित से बेहद परेशान थी। उन्होंने कहा, "मेरी बेटी अब सुमित से शादी नहीं करना चाहती थी। करीब एक साल पहले ही उसने यह फैसला ले लिया था और सुमित से अपने रास्ते अलग कर लिए थे। रेखा ने यह बात अपने परिवार को भी साफ-साफ बता दी थी।"
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पिता के अनुसार, सुमित का व्यवहार रेखा को अजीब और डराने वाला लगने लगा था। वह उस पर अधिकार जताने लगा था, जो रेखा को मंजूर नहीं था। पिता ने बताया, "सुमित उसे बार-बार फोन करके मानसिक रूप से परेशान करता था। रेखा ने उसे कई बार समझाया कि यह रिश्ता अब आगे नहीं बढ़ सकता, लेकिन सुमित मानने को तैयार नहीं था। उसकी हरकतों से तंग आकर रेखा ने उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया था ताकि वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ सके।"
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यह बयान पुलिस की जांच के लिए बेहद अहम है क्योंकि सुमित के पास से मिले कथित सुसाइड नोट और मैसेज में उसने रेखा पर धोखे का आरोप लगाया है। लेकिन पिता का बयान बताता है कि यह धोखा नहीं, बल्कि एक लड़की का अपनी मर्जी से रिश्ता खत्म करने का फैसला था, जिसे एक तरफा जुनूनी प्रेमी स्वीकार नहीं कर पाया।
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13 फरवरी की वो काली रात: 'खाना मत बनाना मां...'
\r\n\r\nघटना वाली रात का जिक्र करते हुए पिता का गला भर आता है। उन्होंने बताया कि 13 फरवरी (शुक्रवार) को सब कुछ सामान्य था। रेखा रोज की तरह सेक्टर-62 स्थित अपने ऑफिस गई थी।
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- \r\n शाम 7:30 बजे: रेखा की मां ने उसे फोन किया। मां ने पूछा, "बेटी कब तक घर आओगी?" इस पर रेखा ने जवाब दिया, "मां, मैं ऑफिस से निकल चुकी हूं। बस 15-20 मिनट में घर पहुंच रही हूं। मेरे लिए खाना मत बनाना, मैं आकर खाऊंगी।"\r\n \r\n
- \r\n इंतजार और बेचैनी: 20 मिनट बीत गए, फिर एक घंटा, लेकिन रेखा घर नहीं पहुंची। यह रेखा के स्वभाव के विपरीत था क्योंकि वह हमेशा समय की पाबंद थी।\r\n \r\n
- \r\n फोन बंद: जब परिजनों ने दोबारा उसे फोन किया, तो घंटी बजती रही लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। कुछ देर बाद फोन भी स्विच ऑफ हो गया। घबराहट में परिवार ने सुमित को भी फोन किया, लेकिन उसका नंबर भी बंद मिला।\r\n \r\n
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अनहोनी की आशंका के चलते पिता और परिवार के अन्य लोग रात में ही सेक्टर-58 थाने पहुंचे और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने सर्विलांस की मदद ली, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अगले दिन, 14 फरवरी की दोपहर को खबर मिली कि एक सफेद रंग की एल्ट्रोज कार में दो लाशें पड़ी हैं। यह वही कार थी जिसमें रेखा और सुमित के सपने और जिंदगी दोनों खत्म हो गए।
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अफेयर की शुरुआत: स्कूल की दोस्ती से खूनी अंत तक
\r\n\r\nइस त्रासदी को समझने के लिए हमें 15 साल पीछे जाना होगा। सुमित और रेखा की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी शुरू हुई थी, लेकिन इसका अंत इतना भयानक होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था।
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त्रिलोकपुरी का वो स्कूल: दोनों की पहली मुलाकात दिल्ली के त्रिलोकपुरी स्थित पब्लिक स्कूल में हुई थी। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने साथ में की। एक ही क्लास, एक ही कैंपस और साथ-साथ पढ़ाई—यहीं से उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। उस समय दोनों किशोर थे और दुनिया की जटिलताओं से अनजान थे।
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परिवारों की रजामंदी: हैरानी की बात यह है कि शुरुआत में दोनों के परिवारों को इस रिश्ते से कोई खास एतराज नहीं था। दोनों परिवार 'ओपन माइंडेड' माने जाते थे। पढ़ाई और एकेडमिक प्रोजेक्ट्स के बहाने दोनों का एक-दूसरे के घर आना-जाना शुरू हुआ। धीरे-धीरे वे एक-दूसरे के पारिवारिक समारोहों का हिस्सा बन गए।
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- \r\n क्रिकेट का शौक: सुमित दाएं हाथ का बेहतरीन बल्लेबाज था। वह यूपी के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में क्रिकेट टूर्नामेंट खेलने जाता था। रेखा को भी क्रिकेट पसंद था। इस कॉमन इंटरेस्ट ने उन्हें और करीब ला दिया था। घंटों फोन पर बातें करना और मैच डिस्कस करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।\r\n \r\n
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करियर और सपनों का घर
\r\n\r\n12वीं के बाद दोनों ने अपने-अपने करियर पर फोकस किया।
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- \r\n रेखा: उसने बीकॉम किया और नोएडा के सेक्टर-62 में एक अच्छी कंपनी में जॉब करने लगी। वह अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी।\r\n \r\n
- \r\n सुमित: उसने अपने पिता राजीव (जो दिल्ली नगर निगम में हेल्थ इंस्पेक्टर हैं) की मदद से एक वाटर प्लांट का बिजनेस शुरू किया। वह अलग-अलग सोसायटियों में पानी की सप्लाई करता था और क्रिकेट खेलना भी जारी रखा। उसने इस बिजनेस से अच्छा पैसा कमाया।\r\n \r\n
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1 करोड़ का फ्लैट: सुमित इस रिश्ते को लेकर कितना गंभीर था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने नोएडा में करीब 1 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदा था। सुमित के भाई सचिन के मुताबिक, वह यह फ्लैट रेखा को शादी के बाद गिफ्ट करना चाहता था। वह अक्सर रेखा को ब्रांडेड गिफ्ट्स देता था और उसे ऑफिस छोड़ने और लेने भी जाया करता था। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
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पहला यू-टर्न: 2019 का एक्सीडेंट और जाति की दीवार
\r\n\r\nइस लव स्टोरी में पहला बड़ा मोड़ साल 2019 में आया। नोएडा के सेक्टर-107 (जहां 2026 में उनकी लाशें मिलीं) के पास ही सुमित का एक भीषण रोड एक्सीडेंट हुआ था।
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- \r\n करियर खत्म: इस हादसे में सुमित बुरी तरह घायल हुआ और डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि अब वह प्रोफेशनल स्पोर्ट्स नहीं खेल पाएगा। उसका क्रिकेट करियर खत्म हो गया।\r\n \r\n
- \r\n रेखा का साथ: इस मुश्किल दौर में रेखा ने उसका साथ नहीं छोड़ा। अस्पताल से लेकर घर तक, 6-7 महीने की रिकवरी के दौरान रेखा ढाल बनकर उसके साथ खड़ी रही।\r\n \r\n
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जाति का जिन्न: यही वह दौर था जब दोनों परिवारों को उनके रिश्ते की गंभीरता का अहसास हुआ। लेकिन यहां सामाजिक ताना-बाना आड़े आ गया।
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- \r\n सुमित: वाल्मीकि समाज से था।\r\n \r\n
- \r\n रेखा: कायस्थ परिवार से थी। अगड़ी और पिछड़ी जाति की यह खाई उनके प्यार के बीच दीवार बनकर खड़ी हो गई। सुमित के भाई सचिन का आरोप है कि सुमित का परिवार शादी के लिए तैयार था, लेकिन रेखा के घरवाले अपनी बेटी की शादी 'नीची जाति' में करने के सख्त खिलाफ थे। यहीं से दोनों परिवारों के बीच मनमुटाव शुरू हुआ।\r\n \r\n
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2025 का घटनाक्रम: धमकियां और ब्रेकअप
\r\n\r\nसाल 2025 की शुरुआत में हालात बदतर हो गए। रेखा के परिवार ने अब कड़ा रुख अपना लिया था।
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- \r\n चचेरे भाई की धमकी: परिवार के मुताबिक, 2025 में सुमित को रेखा के चचेरे भाई ने घर के पास रोककर धमकाया था। उसने साफ कहा था, "मेरी बहन से दूर रहो, वरना पुलिस में छेड़खानी का केस दर्ज करा दूंगा।"\r\n \r\n
- \r\n माफीनामा: उस वक्त सुमित डर गया था। मीडिया को मिली कुछ चैट्स में वह माफी मांगते हुए दिख रहा है। उसने लिखा था, "मुझसे गलती हो गई, अब मैं नहीं मिलूंगा। प्लीज आप शिकायत मत करिएगा।" सुमित ने एक लिखित माफीनामा भी दिया था जिसमें उसने कहा था कि अगर वह दोबारा रेखा को परेशान करे, तो उस पर कार्रवाई की जाए।\r\n \r\n
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ब्लॉक लिस्ट में सुमित: इस घटना के बाद रेखा ने भी सुमित से दूरी बना ली। उसने सुमित का फोन उठाना बंद कर दिया और अंततः उसका नंबर ब्लॉक कर दिया। लेकिन सुमित का 'ऑब्सेशन' कम नहीं हुआ। मई 2025 में उसने फिर से संपर्क करने की कोशिश की। उसने रेखा के भाई और जीजा को भी फोन किया, लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। इधर, रेखा के घरवाले उसके लिए दूसरा रिश्ता देख रहे थे और जल्द ही उसकी सगाई होने वाली थी। यह बात सुमित को नागवार गुजरी।
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14 फरवरी 2026: वैलेंटाइन डे पर खूनी खेल
\r\n\r\n13 फरवरी 2026 की दोपहर 3 बजे सुमित अपनी कार लेकर घर से निकला। उसके दिमाग में एक खौफनाक योजना चल रही थी।
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- \r\n 3:39 PM: उसने रेखा को एक मैसेज किया—"मैं मरने जा रहा हूं।" यह एक इमोशनल ट्रैप (Emotional Trap) था।\r\n \r\n
- \r\n आखिरी मुलाकात: संभवतः इस मैसेज को देखकर रेखा घबरा गई होगी। सुमित उसके ऑफिस पहुंचा। रेखा, शायद उसे समझाने या आखिरी बार बात करने के लिए, ऑफिस से निकली और उसकी कार में बैठ गई। यह उसकी जिंदगी की आखिरी गलती साबित हुई।\r\n \r\n
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पुलिस जांच और क्राइम सीन: 14 फरवरी की दोपहर 1:30 बजे पुलिस को लावारिस हालत में खड़ी कार की सूचना मिली।
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- \r\n लॉक कार: कार अंदर से लॉक थी। पुलिस ने शीशा तोड़ा।\r\n \r\n
- \r\n लाशें: अंदर सुमित और रेखा खून से लथपथ पड़े थे। दोनों के सिर में गोली लगी थी।\r\n \r\n
- \r\n हथियार: सुमित के हाथ में पिस्टल थी। पास में दो कारतूस के खोखे पड़े थे।\r\n \r\n
- \r\n सिद्धांत: परिस्थितियां बता रही थीं कि सुमित ने पहले रेखा को गोली मारी और फिर खुद को खत्म कर लिया।\r\n \r\n
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क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी?
\r\n\r\nनोएडा के डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया, "दोनों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है। मौत का कारण 'हेड इंजरी' (सिर में गोली लगना) है। शरीर पर किसी अन्य चोट या हाथापाई के निशान नहीं मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि शायद घटना अचानक घटी या रेखा को संभलने का मौका नहीं मिला।" पुलिस ने आईएसडी कॉल (International Calls) के जरिए धमकी मिलने के सुमित के परिवार के आरोपों की भी जांच की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है—चाहे वह ऑनर किलिंग का आरोप हो या सुसाइड का।
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मनोवैज्ञानिक पहलू: 'रिजेक्शन' को स्वीकार न कर पाना
\r\n\r\nमनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह मामला 'ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर' (Obsessive Love Disorder) का क्लासिक उदाहरण हो सकता है। जब एक व्यक्ति (सुमित) अपने साथी (रेखा) को अपनी 'जागीर' समझने लगता है, तो वह उसके 'ना' को स्वीकार नहीं कर पाता।
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- \r\n कंट्रोल खोना: जब रेखा ने नंबर ब्लॉक किया और शादी से मना किया, तो सुमित को लगा कि उसका कंट्रोल खत्म हो रहा है।\r\n \r\n
- \r\n "अगर तुम मेरी नहीं, तो किसी की नहीं": यह मानसिकता अक्सर ऐसे अपराधों को जन्म देती है। सुमित का यह सोचना कि रेखा ने उसे "धोखा" दिया है, उसकी विकृत मानसिकता को दर्शाता है, जबकि वास्तविकता यह थी कि रेखा एक टॉक्सिक रिश्ते से बाहर निकलना चाहती थी।\r\n \r\n
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समाज के लिए एक सबक
\r\n\r\nयह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
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- \r\n जाति व्यवस्था: क्या 21वीं सदी के हाई-टेक शहरों में भी जाति हमारे रिश्तों और खुशियों से बड़ी है? अगर समय रहते दोनों परिवारों ने जाति से ऊपर उठकर इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया होता, तो शायद आज दो जानें बच जातीं।\r\n \r\n
- \r\n स्टॉकिंग और सुरक्षा: रेखा ने नंबर ब्लॉक किया, परिवार को बताया, लेकिन क्या यह काफी था? अगर सुमित की हरकतों की शिकायत पुलिस में पहले ही कड़ाई से की गई होती, तो शायद उसे रोका जा सकता था। लड़कियों को 'सॉफ्ट रिजेक्शन' की जगह कानूनी मदद लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n माता-पिता की भूमिका: लड़कों को बचपन से ही 'ना' सुनना और 'रिजेक्शन' को हैंडल करना सिखाना बेहद जरूरी है। विफलता जीवन का अंत नहीं है, यह समझ हर युवा में होनी चाहिए।\r\n \r\n
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नोएडा के सेक्टर-107 में खड़ी उस सफेद कार ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए। सुमित का अंतिम संस्कार दिल्ली में हुआ और रेखा का नोएडा के सेक्टर-94 में। दोनों की चिताएं अलग-अलग जलीं, लेकिन उनकी मौत ने एक ही सवाल छोड़ा—आखिर प्यार का अंजाम इतना खौफनाक क्यों?
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रेखा के पिता का बयान साफ करता है कि यह सिर्फ "प्रेम कहानी" नहीं थी, बल्कि एक तरफा जुनून और उत्पीड़न की कहानी थी जो एक मासूम की जान ले गई। पुलिस की जांच जारी है, लेकिन रेखा और सुमित अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। यह हादसा हर उस युवा और अभिभावक के लिए एक चेतावनी है जो रिश्तों में पजेसिवनेस (Possessiveness) को प्यार समझने की भूल करते हैं।
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सारांश: नोएडा में कार के अंदर प्रेमी युगल सुमित और रेखा की लाश मिलने के मामले में रेखा के पिता ने खुलासा किया है कि उनकी बेटी सुमित के व्यवहार से परेशान होकर उसे ब्लॉक कर चुकी थी और शादी से इनकार कर दिया था। 15 साल पुराने इस रिश्ते में जाति और पजेसिवनेस दरार बन गई थी। 13 फरवरी को "मरने जा रहा हूं" का मैसेज भेजकर सुमित ने रेखा को बुलाया और हत्या के बाद खुदकुशी कर ली। पुलिस ने इसे हत्या-आत्महत्या का मामला बताया है।