अंकित सैनी
उत्तर प्रदेश में नशे के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में मुजफ्फरनगर पुलिस ने 'ऑपरेशन सवेरा' के तहत एक बड़ी और अहम सफलता हासिल की है। पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम ने सघन चेकिंग के दौरान एक अंतरराज्यीय गांजा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। टीम ने 50 किलो अवैध गांजे के साथ एक महिला सहित कुल चार तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बरामद किए गए इस गांजे की कीमत बाजार में करीब 10 लाख रुपये आंकी गई है।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर के मीरापुर में नागरिक सुविधाओं का अकाल: 20 साल के जलभराव से त्रस्त लोगों का फूटा गुस्सा, गंदे पानी में खड़े होकर किया उग्र प्रदर्शन, दी 'पलायन' की चेतावनी
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बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास हुई चेकिंग

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सोमवार दोपहर को पुलिस कार्यालय में एक विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुलिस टीम द्वारा की गई इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मीडिया के सामने साझा की।
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उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर पुलिस के थाना सिविल लाइन और एसओजी की संयुक्त टीम बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास नियमित वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी चेकिंग के दौरान पुलिस टीम को एक संदिग्ध वाहन दिखाई दिया।
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पुलिस कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध आई-10 (i-10) कार को रुकने का इशारा किया। जब पुलिस ने कार को रोककर उसकी गहनता से तलाशी ली, तो उसमें छिपाकर रखा गया 50 किलो अवैध गांजा बरामद हुआ। इसके बाद मौके से ही चारों आरोपियों को दबोच लिया गया।
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तीन अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं आरोपी

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पकड़े गए तस्करों से जब पुलिस टीम ने सख्ती से पूछताछ की, तो इस पूरे नेटवर्क को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। गिरफ्तार किए गए आरोपी उत्तर प्रदेश के नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ राज्यों के मूल निवासी हैं।
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पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि ये सभी आरोपी इस नेटवर्क में केवल कैरियर (वाहक) के रूप में काम करते थे। इनका मुख्य काम नशीले पदार्थों की इस बड़ी खेप को सुरक्षित तरीके से तय स्थान तक पहुंचाना मात्र था।
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पुलिस के अनुसार, इस 50 किलो गांजे की खेप को गाजियाबाद के दो कथित तस्करों तक सुरक्षित पहुंचाया जाना था। मुजफ्फरनगर पुलिस अब उन मुख्य रिसीवर की पहचान और उनका पूरा विवरण जुटाने में लगी हुई है।
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पुलिस से बचने के लिए महिला को साथ रखते थे तस्कर

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इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क के काम करने का तरीका बेहद शातिर और योजनाबद्ध था। एसएसपी ने बताया कि यह गिरोह रास्तों में पुलिस की पैनी नजरों और सघन चेकिंग से बचने के लिए हमेशा अपने साथ एक महिला को गाड़ी में बिठाकर रखता था।
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अपराधियों का यह स्पष्ट मानना था कि अगर कार में कोई महिला बैठी हो, तो पुलिस वाहन को ज्यादा शक की निगाह से नहीं देखती। ऐसे में परिवार समझकर सघन तलाशी की संभावना काफी कम हो जाती है, जिसका फायदा उठाकर ये आसानी से बॉर्डर पार कर लेते थे।
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इस जोखिम भरे काम के लिए बाकायदा पैसे तय किए गए थे। पूछताछ में सामने आया कि पुरुष कैरियरों को गांजे की प्रति खेप गंतव्य तक पहुंचाने के लिए 10-10 हजार रुपये मिलते थे। वहीं, इस काम में साथ देने वाली महिला आरोपी को हर खेप के बदले 6 हजार रुपये का भुगतान किया जाता था।
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आपराधिक इतिहास वाले हैं पकड़े गए तीन आरोपी

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मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के सदस्य पेशेवर अपराधी हैं। गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों में से तीन का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस के हाथ लगा है।
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जांच में पता चला है कि ये तीनों आरोपी पहले भी एनडीपीएस (NDPS) एक्ट और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में जेल की सजा काट चुके हैं। पुलिस अब इनके विस्तृत आपराधिक इतिहास का गहनता से सत्यापन कर रही है।
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इनके मूल राज्यों और अन्य जिलों के थानों से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि इनके खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों की सही जानकारी जुटाई जा सके और अदालत में इनके खिलाफ एक मजबूत और पुख्ता चार्जशीट पेश की जा सके।
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गाजियाबाद के मास्टरमाइंड की तलाश हुई तेज

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एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई केवल इन कैरियरों की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं रहेगी। अब इस पूरे तस्करी नेटवर्क के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज (Forward and backward links) को पूरी तरह से खंगाला जा रहा है।
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गाजियाबाद के जिन दो कथित मास्टरमाइंड को यह गांजे की खेप सप्लाई होनी थी, उनकी तत्काल गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है। जल्द ही पुलिस इन फरार मास्टरमाइंड के संभावित ठिकानों पर दबिश देने की तैयारी कर रही है।
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'ऑपरेशन सवेरा' के तहत मुजफ्फरनगर पुलिस की यह सफल कार्रवाई नशे के कारोबारियों और तस्करों के लिए एक कड़ा संदेश है। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जनपद में नशे के अवैध व्यापार से जुड़े हर छोटे-बड़े सिंडिकेट को पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जाएगा और समाज को नशामुक्त बनाने का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।