उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में नागरिक सुविधाओं की कमी पर लोगों का सब्र अब टूट गया है। यहां सोमवार सुबह से ही मीरापुर जलभराव प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। दशकों से जलभराव और बदहाल सड़क की समस्या से परेशान कॉलोनीवासी गंदे पानी के बीच खड़े होकर अपना विरोध जताने लगे। यह प्रदर्शन स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।READ ALSO:-यूपी मौसम अपडेट: पूर्वांचल में झमाझम तो पश्चिमी यूपी में थमा मानसून, गोरखपुर में सड़कों पर सैलाब, 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
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20 वर्षों से बदहाल है जाट कॉलोनी की सड़क

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स्थानीय लोगों के अनुसार, मीरापुर कस्बे की जाट कॉलोनी में पिछले 20 वर्षों से सड़क का निर्माण ही नहीं हुआ है। विकास के तमाम दावों के बीच यह कॉलोनी आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
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सड़क निर्माण न होने के कारण हल्की सी बारिश में भी पूरी कॉलोनी तालाब में तब्दील हो जाती है। जलनिकासी की कोई उचित और स्थायी व्यवस्था न होने से बारिश का गंदा पानी कई-कई दिनों तक सड़क पर ही जमा रहता है।
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जलभराव से स्कूली बच्चों और महिलाओं को भारी परेशानी

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सड़कों पर घुटनों तक गंदा पानी भरा होने के कारण स्थानीय लोगों का दैनिक जीवन नर्क बन गया है। बच्चों, महिलाओं और घर के बुजुर्गों का अपने ही घर से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो चुका है।
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सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को उठानी पड़ रही है। उन्हें रोजाना इसी गंदे और बदबूदार पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इसके कारण उनकी पढ़ाई और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर बहुत गहरा असर पड़ रहा है।
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संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा, अनदेखी का आरोप

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लंबे समय तक इस तरह जलभराव रहने के कारण पूरे इलाके में मच्छरों का भयंकर प्रकोप बढ़ गया है। दूषित पानी जमा होने से डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है।
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लोगों ने स्थानीय नगर पंचायत पर इस गंभीर समस्या की लगातार अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार लिखित शिकायत करने के बावजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
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नगर पंचायत की भूमिका पर उठते सवाल

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स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर पंचायत चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद जाट कॉलोनी की सुध लेने वाला कोई नहीं बचता। टैक्स देने के बावजूद बुनियादी सुविधाएं न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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नागरिकों का यह भी आरोप है कि सफाई कर्मचारियों की लापरवाही से नालियां हमेशा चोक रहती हैं। इसी मुख्य कारण से घरों और बारिश का पानी सड़कों पर फैलता है। लोगों की सख्त मांग है कि पूरे ड्रेनेज सिस्टम की मुकम्मल सफाई की जाए।
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मीरापुर जलभराव प्रदर्शन: डीएम से की गई कार्रवाई की मांग

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सोमवार सुबह हुए इस मीरापुर जलभराव प्रदर्शन के दौरान कॉलोनीवासियों ने मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी (डीएम) से सीधे न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने डीएम से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की विशेष अपील की है।
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प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि सड़क से पानी निकालने के लिए जल्द से जल्द एक स्थायी पंपिंग व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही पूरी सड़क का नवनिर्माण कराया जाए और इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई हो।
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एक सप्ताह का अल्टीमेटम, वरना होगा पलायन

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इस उग्र मीरापुर जलभराव प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में मात्र एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। उनका साफ कहना है कि यदि सात दिन के भीतर इस जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे एक बड़े स्तर का जन आंदोलन शुरू करेंगे।
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इतना ही नहीं, निराश और हताश कॉलोनीवासियों ने यहां तक चेतावनी दी है कि अगर उनकी नहीं सुनी गई, तो मजबूरी में वे अपने घर छोड़कर सामूहिक रूप से पलायन करने को भी विवश हो सकते हैं।
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कुल मिलाकर, मुजफ्फरनगर का यह मीरापुर जलभराव प्रदर्शन स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत की नाकामी को उजागर करता है। अब यह देखना बहुत महत्वपूर्ण होगा कि जिलाधिकारी इस अल्टीमेटम को कितनी गंभीरता से लेते हैं। समय रहते उचित कदम न उठाने पर यह बुनियादी नागरिक समस्या एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।
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