उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने मिलावटखोरों और शराब माफियाओं के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिले की कोतवाली नगर पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर रामपुर तिराहे के पास एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ब्रांडेड और महंगी बोतलों में सस्ती व घटिया शराब भरकर उपभोक्ताओं को बेच रहा था। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान गिरोह के 7 सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस सनसनीखेज खुलासे से जिले के शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

रामपुर तिराहे के पास की गई संयुक्त कार्रवाई

इस पूरे मामले का आधिकारिक खुलासा करते हुए एएसपी (ASP) सिद्धार्थ के. मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस को लगातार इस बात की गुप्त सूचना मिल रही थी कि क्षेत्र में कुछ लोग नकली और अवैध शराब के कारोबार में संलिप्त हैं। इसी सूचना के आधार पर कोतवाली नगर पुलिस और एसओजी की टीम ने संयुक्त रूप से जाल बिछाया और रामपुर तिराहे के निकट वाहन चेकिंग व छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस ने इस शातिर सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को धर दबोचा।

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क्या था इस नकली शराब गिरोह का मोड्स ऑपरेंडी?

पुलिस पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। यह गिरोह बहुत ही शातिर तरीके से लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा था। एएसपी सिद्धार्थ के. मिश्रा ने बताया कि आरोपी स्थानीय कबाड़ियों के संपर्क में रहते थे और उनसे जेमिसन (Jamison), ब्लैक लेबल (Black Label) और रेड लेबल (Red Label) जैसे महंगे एवं लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की खाली बोतलें भारी दामों में खरीदते थे।

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खाली बोतलें हाथ लगने के बाद ये लोग उनमें बेहद सस्ती और निम्न स्तर की शराब भरते थे। इसके बाद अत्याधुनिक तकनीकों, नकली रैपर, होलोग्राम और नए ढक्कनों की मदद से बोतलों की ऐसी पैकिंग करते थे कि आम ग्राहक या उपभोक्ता के लिए यह पहचान पाना असंभव हो जाता था कि बोतल असली है या नकली। इन तैयार की गई नकली बोतलों को असली विदेशी शराब बताकर बाजारों में ऊंचे दामों पर बेचा जाता था, जिससे वे भारी मुनाफा कमा रहे थे।

भारी मात्रा में अवैध शराब और वाहन बरामद

पुलिस टीम ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के ठिकाने से भारी मात्रा में अवैध सामग्री और वाहन जब्त किए हैं। बरामदगी की सूची काफी लंबी है, जिससे यह साफ होता है कि यह गिरोह बहुत बड़े पैमाने पर इस अवैध धंधे को संचालित कर रहा था:

  • अवैध और नकली शराब से भरी हुई कुल 210 बोतलें।

  • विभिन्न महंगे ब्रांड्स की 99 खाली बोतलें।

  • बोतलों पर लगाने के लिए 398 नए ढक्कन व सील।

  • 4 नकली रैपर और स्टीकर।

  • शराब पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरण।

  • आपसी संपर्क के लिए 5 एंड्रॉइड मोबाइल फोन।

  • अवैध शराब की ढुलाई और परिवहन में इस्तेमाल की जाने वाली 3 कारें— वैगनआर (WagonR), स्विफ्ट डिजायर (Swift Dzire) और टाटा नेक्सॉन (Tata Nexon)।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान

पुलिस द्वारा पकड़े गए सातों आरोपियों की पहचान कर ली गई है। इनके नाम अमित, राकेश, मेहताब, धीरज, हरदीप सिंह, रामप्रकाश और कुलदीप बताए गए हैं। शुरुआती पुलिस छानबीन में यह बात सामने आई है कि ये सभी शातिर अपराधी लंबे समय से इस काले कारोबार से जुड़े हुए थे। ये आरोपी केवल मुजफ्फरनगर तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में इस प्रकार की नकली और जहरीली शराब की बड़ी खेप सप्लाई कर चुके हैं। पुलिस अब इनके अन्य आपराधिक इतिहास और सहयोगियों की तलाश में जुट गई है।

जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा और पुलिस की सख्त चेतावनी

नकदी और मुनाफे के चक्कर में इस तरह का अवैध कारोबार करने वाले ये तत्व न सिर्फ आर्थिक अपराध को अंजाम दे रहे थे, बल्कि आम जनता के जीवन के साथ भी खिलवाड़ कर रहे थे। नकली शराब के सेवन से कई बार जानलेवा हादसे हो जाते हैं, जिससे प्रशासन की चिंता हमेशा बनी रहती है। उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट निर्देश है कि अवैध शराब और मिलावटखोरी में लिप्त किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

फिलहाल, पुलिस ने सभी सात आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम और धोखाधड़ी सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस सिंडिकेट को कच्ची शराब या स्पिरिट कहां से सप्लाई होती थी और इस नेटवर्क में और कौन-कौन बड़े चेहरे शामिल हैं। इस बड़ी कार्रवाई से शराब माफियाओं के हौसले पस्त हुए हैं।

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