कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान चोरबागान सार्वजनिन दुर्गोत्सव पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। हादसा शनिवार शाम करीब 7:40 बजे उत्तर कोलकाता के गिरिश पार्क थाना क्षेत्र में हुआ। उस समय पंडाल में दर्शन के लिए भारी भीड़ जुटी थी। बारिश के बीच लोगों की आवाजाही बढ़ने और प्रवेश-निकास को लेकर भ्रम की स्थिति बनने से हालात बिगड़ गए।
पुलिस के मुताबिक, हादसे के बाद घायलों को कोलकाता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ घायलों को बाद में एसएसकेएम अस्पताल भी भेजा गया। अस्पताल में भर्ती लोगों का इलाज किया गया। मृतकों में 13 महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल बताए गए हैं। मृतकों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अंतर था, लेकिन रविवार तड़के सामने आई जानकारी में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 19 लोगों की मौत की पुष्टि की।
बारिश और भीड़ के बीच कैसे बिगड़े हालात?
चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में सप्तमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। शाम के समय बारिश और बिजली चमकने के बीच पंडाल के आसपास भीड़ बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोग पंडाल में जाने और बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान भीड़ का दबाव बढ़ा और लोग एक-दूसरे से टकराकर गिरने लगे।
पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना पंडाल के निकास द्वार के पास हुई। कुछ रिपोर्टों में प्रवेश और निकास व्यवस्था को लेकर भ्रम की बात सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने भीड़ प्रबंधन में कमी का आरोप लगाया है। हालांकि, हादसे के पीछे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›सीटी बजने और घोषणा के बाद बढ़ी भीड़
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अस्पताल में घायलों का हाल जानने के बाद कहा कि आयोजकों की ओर से की गई घोषणा के बाद लोगों में जल्दबाजी बढ़ी और हादसा हुआ। मृतकों के कुछ परिजनों ने निजी सुरक्षा कर्मियों की सीटी बजने के बाद भीड़ में अचानक हलचल बढ़ने की बात कही। पुलिस इन बयानों और घटनास्थल पर मौजूद लोगों के विवरण की जांच कर रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी आरोप लगाया कि भीड़ के अनुपात में पुलिस और स्वयंसेवकों की मौजूदगी पर्याप्त नहीं थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि आयोजकों की व्यवस्था, प्रवेश-निकास मार्गों और आपातकालीन प्रतिक्रिया की जांच की जाएगी। इन आरोपों को अभी जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
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आयोजक और निजी सुरक्षा कर्मी हिरासत में
हादसे के बाद पुलिस ने पूजा समिति से जुड़े लोगों, निजी सुरक्षा कर्मियों और ड्यूटी पर तैनात कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लिया। उनसे भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजामों और घटना के समय की परिस्थितियों को लेकर पूछताछ की जा रही है।
खबरीलाल न्यूज़ का Telegram चैनल जॉइन करें Join ›पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पंडाल में एक समय पर कितने लोगों के प्रवेश की व्यवस्था थी, रास्तों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे और आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकालने की योजना कितनी प्रभावी थी। फिलहाल हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ किसी आरोप को अदालत में सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, पंडाल बंद
घटना के बाद पुलिस कंट्रोल रूम से अतिरिक्त बल बुलाया गया। दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन दल और एंबुलेंस की मदद से घायलों को घटनास्थल से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने पंडाल में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद करा दिया, ताकि राहत कार्य में बाधा न आए और दोबारा भीड़ जमा न हो।
कोलकाता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में घायलों के उपचार की व्यवस्था की गई। अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री ने चिकित्सा व्यवस्था का जायजा लिया। प्रशासन मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति से जुड़े विवरण जुटाने में लगा रहा।
न्यायिक जांच और मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की। घायलों को पांच-पांच लाख रुपये देने और उनके इलाज का खर्च राज्य सरकार द्वारा उठाने की बात भी कही गई। सरकार ने हादसे की जांच के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश के नेतृत्व में उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की।
पुलिस भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश और निकास के रास्तों तथा आयोजकों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि बारिश के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं और घटना को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते थे।

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