राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रवेश करने वाले लाखों व्यावसायिक वाहनों (Commercial Vehicles) और आम जनता के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। अक्सर दिल्ली के एंट्री पॉइंट्स (Entry Points) पर टोल टैक्स और पर्यावरण प्रतिपूर्ति शुल्क (ECC - Environment Compensation Charge) चुकाने के लिए ट्रकों और कॉमर्शियल गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे भयंकर जाम की स्थिति पैदा होती है।
अब इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा रहा है। दिल्ली नगर निगम (MCD) की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा की अध्यक्षता में हुई हालिया बैठक में राजधानी के 126 प्रवेश बिंदुओं पर 'बिना बैरियर' (Barrier-Free) टोल वसूली योजना को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा, दिल्ली के प्रदूषण और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी कई अहम फैसले लिए गए हैं।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶बिना रुके कटेगा टोल, 126 पॉइंट्स पर लगेगी RFID तकनीक
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, किसी भी व्यावसायिक वाहन को टोल टैक्स या ईसीसी (ECC) देने के लिए बैरियर पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी। यह पूरी तरह से डिजिटल और निर्बाध (Seamless) प्रक्रिया होगी।
कैसे काम करेगी तकनीक: टोल नाकों पर उच्च क्षमता वाले स्मार्ट कैमरे, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) सिस्टम और आधुनिक RFID तकनीक लगाई जाएगी। ये कैमरे चलते हुए वाहनों की नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन करेंगे और वाहन मालिक के खाते से सीधे शुल्क काट लिया जाएगा।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›डिफॉल्टरों को नोटिस: जो वाहन बिना टोल या शुल्क दिए निकलेंगे, सिस्टम उनकी पहचान कर उन्हें तुरंत डिजिटल नोटिस भेज देगा।
इस योजना के लिए टेंडर जारी करने की मंजूरी मिल गई है। उच्चस्तरीय समिति ने इसके लिए सालाना 910 करोड़ रुपये की न्यूनतम (Base) राशि तय करने की सिफारिश की है। यह ठेका (Contract) छह साल की अवधि के लिए दिया जाएगा। शुरुआती 6 महीने में नई तकनीक लगाने और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम होगा, जबकि अगले 54 महीने तक ठेकेदार इसका संचालन करेगा। एमसीडी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के बैरियर-मुक्त व्यवस्था संबंधी निर्देशों का पालन करते हुए यह कदम उठाया गया है।
प्रदूषण पर लगाम: 923.57 करोड़ से 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें
दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण (Delhi Pollution) और सड़क की धूल एक जानलेवा रूप ले लेती है। इसे नियंत्रित करने के लिए एमसीडी ने 70 'मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों' (Mechanical Road Sweeping Machines) को तैनात करने का बड़ा फैसला लिया है। स्थायी समिति ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 923.57 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
ये मशीनें अगले 10 वर्षों तक दिल्ली की सड़कों को धूल मुक्त रखेंगी। इस काम को तीन अलग-अलग कंपनियों को सौंपा गया है:
लॉयन सर्विसेज लिमिटेड: 29 मशीनों का जिम्मा, जिसके लिए 369.53 करोड़ रुपये आवंटित।
जीए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड व वीएन इंजीनियरिंग: 28 मशीनों के लिए 368.83 करोड़ रुपये का अनुबंध।
जेएस एनवायरो सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड: 13 मशीनों के लिए 185.20 करोड़ रुपये का काम।
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पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए छोटी मशीनों को पूरी तरह से बिजली (EV) से संचालित किया जाएगा, जबकि बड़ी मशीनों के लिए बिजली या सीएनजी (CNG) का विकल्प अनिवार्य किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग में 1066 खाली पदों पर होगी बंपर भर्ती
दिल्ली में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों (Vector-borne diseases) की रोकथाम के लिए कर्मचारियों की भारी कमी चल रही थी। इस पर संज्ञान लेते हुए, स्थायी समिति की बैठक में जन-स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े 1066 पदों को तत्काल भरने के निर्देश दिए गए हैं।
भरे जाने वाले प्रमुख पद:
मलेरिया अधिकारी: 14 पद
मलेरिया निरीक्षक: 105 पद
सहायक मलेरिया निरीक्षक: 398 पद
एमटीएस (जन-स्वास्थ्य): 549 पद
सत्या शर्मा ने कड़े निर्देश दिए हैं कि नियमित भर्ती प्रक्रिया में देरी होने पर फिलहाल संविदा (Contractual) या अनुबंध के आधार पर तत्काल कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि वार्डों में फॉगिंग और दवाओं के छिड़काव का काम प्रभावित न हो।
वार्ड की समस्याएं अब जोन स्तर पर ही होंगी हल
बैठक में पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने सफाई, सड़कों की खस्ताहालत और पार्कों के रखरखाव के मुद्दे प्रमुखता से उठाए। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए सत्या शर्मा ने सभी जोन के उपायुक्तों (Deputy Commissioners) को अपने कार्यालयों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करने और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पार्षद को अपने वार्ड की छोटी-छोटी समस्याओं के लिए एमसीडी मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने चाहिए; इन शिकायतों का समाधान जोन स्तर पर ही होना चाहिए। इसके साथ ही, जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए हर वार्ड में कम से कम एक ऐसा पार्क विकसित करने का निर्देश दिया गया है, जहां रेन-वाटर हार्वेस्टिंग (बारिश का पानी सहेजने) की उचित व्यवस्था हो।
एमसीडी के इन चौतरफा फैसलों से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में दिल्ली की यातायात व्यवस्था, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.