उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के भयावह आंकड़ों को कम करने और लोगों की जिंदगी बचाने के उद्देश्य से सरकार ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में प्रदेश भर में 'राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह' (National Road Safety Month) का आगाज हो चुका है, जो 1 जनवरी से 31 जनवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में मेरठ जनपद में भी प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है।READ ALSO:-मेरठ में दर्द की इंतहा: जब जीने की चाहत पर भारी पड़ी बीमारी की टीस, 30 साल के युवक ने अपनी ही गर्दन चीरकर चुनी खौफनाक मौत
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अभियान के दूसरे दिन, यानी 2 जनवरी को मेरठ में एक विशेष अभियान 'नो हेलमेट, नो फ्यूल' (No Helmet, No Fuel) चलाया गया। इसका सीधा संदेश था- अगर आप अपनी सुरक्षा (हेलमेट) के प्रति गंभीर नहीं हैं, तो आपको वाहन चलाने के लिए ईंधन भी नहीं मिलेगा।
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पेट्रोल पंपों पर सघन चेकिंग, मचा हड़कंप

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शुक्रवार को मेरठ के अलग-अलग इलाकों में स्थित पेट्रोल पंपों का नजारा बदला हुआ था। सामान्य दिनों की तरह भीड़ तो थी, लेकिन ईंधन भरवाने की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं थी। प्रशासन और परिवहन विभाग की टीमें अचानक पेट्रोल पंपों पर आ धमकीं।
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इस अभियान के तहत शहर के प्रमुख पेट्रोल पंपों पर सघन चेकिंग (Intensive Checking) अभियान चलाया गया। अधिकारियों ने पेट्रोल पंप पर आते ही सबसे पहले सीसीटीवी कैमरों और नोजल मैन (तेल भरने वाले कर्मचारी) की कार्यप्रणाली को जाँचा।
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संचालकों को दो टूक: नियम तोड़ा तो नपेंगे

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चेकिंग के दौरान पेट्रोल पंप संचालकों और प्रबंधकों को सख्त लहजे में निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यह केवल एक सलाह नहीं, बल्कि आदेश है।
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    निर्देश: कोई भी दोपहिया वाहन चालक (Biker) अगर बिना हेलमेट पहने पेट्रोल पंप पर आता है, तो उसे किसी भी सूरत में पेट्रोल न दिया जाए।
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    जिम्मेदारी: अगर किसी पंप पर बिना हेलमेट वाले व्यक्ति को तेल देते हुए पाया गया, तो संबंधित पेट्रोल पंप के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।
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प्रीति पांडे ने संभाली कमान, चालकों को दी चेतावनी

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इस पूरे अभियान में मेरठ की यात्रीकर अधिकारी (Passenger Tax Officer - PTO) प्रीति पांडे ने सक्रिय भूमिका निभाई। वह खुद अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहीं और स्थिति का जायजा लिया।
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प्रीति पांडे ने पंप पर आने वाले उन वाहन चालकों को रोका जो बिना हेलमेट के थे। उन्होंने चालकों को फटकार लगाने के साथ-साथ उन्हें हेलमेट की अहमियत भी समझाई। उन्होंने कहा, "सरकार या प्रशासन चालान काटकर राजस्व नहीं बढ़ाना चाहता, बल्कि हम चाहते हैं कि आप सुरक्षित घर पहुंचें। एक छोटा सा हेलमेट किसी अनहोनी के वक्त आपके परिवार की खुशियां बचा सकता है।"
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उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए ईमानदारी से यातायात नियमों का पालन करें।
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'नो हेलमेट नो फ्यूल' की जरूरत क्यों?

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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में दोपहिया वाहन चालकों की संख्या सबसे अधिक है। इनमें भी अधिकांश मौतें सिर में चोट (Head Injury) लगने के कारण होती हैं, जिसे सिर्फ एक अच्छी गुणवत्ता वाला हेलमेट पहनकर टाला जा सकता है।
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मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, मेरठ प्रशासन का यह कदम उन लोगों की मानसिकता बदलने की कोशिश है जो हेलमेट को बोझ समझते हैं।
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अभियान का असर और आगे की राह

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इस सख्त अभियान का असर तुरंत देखने को मिला। कई पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट पहुंचे युवकों को खाली हाथ (या यूं कहें कि खाली टंकी) लौटना पड़ा। कुछ जगहों पर चालकों ने बहस भी की, लेकिन नोजल मैन ने अधिकारियों के डर से तेल देने से साफ मना कर दिया।
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प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह सख्ती सिर्फ एक दिन के लिए नहीं है। 31 जनवरी तक चलने वाले इस सड़क सुरक्षा माह के दौरान ऐसे कई और अभियान चलाए जाएंगे, जिनमें सीट बेल्ट, ओवर-स्पीडिंग और गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर भी नकेल कसी जाएगी।
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खबरीलाल की अपील: हम अपने पाठकों से अनुरोध करते हैं कि 'नो हेलमेट, नो फ्यूल' अभियान का समर्थन करें। पेट्रोल पंप पर बहस करने से बेहतर है कि घर से निकलते वक्त हेलमेट जरूर पहनें। याद रखें, पेट्रोल तो दोबारा मिल जाएगा, लेकिन जिंदगी दोबारा नहीं मिलती।
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